सूरह अल-मुनाफ़िकून शब्द-दर-शब्द हिंदी | रंगकोडित व्याकरण कार्ड, अनुवाद और तजवीद

हिंदी में सूरह अल-मुनाफ़िकून (कपटाचारी) का शब्द-दर-शब्द अध्ययन करें। यह अध्याय मुनाफिकों के व्यवहार, उनके झूठे वादों, और उनके दिखावे को उजागर करता है। यह मुसलमानों को चेतावनी देता है कि वे अपनी संपत्ति और संतानों के मोह में अल्लाह के ज़िक्र से गाफिल न हों, और मौत के आने से पहले अल्लाह की राह में खर्च करने की ताकीद करता है। यह इंटरैक्टिव अध्ययन गाइड रंग-कोडित व्याकरण कार्ड प्रदान करती है, जिससे पाठकों को संज्ञाओं, क्रियाओं और अव्ययों को स्पष्ट रूप से पहचानने में मदद मिलती है। सटीक तजवीद-अनुकूल लिप्यंतरण के साथ, यह संसाधन सुनिश्चित करता है कि आप ईश्वरीय चेतावनियों को सही उच्चारण और गहरी समझ के साथ पढ़ सकें।

In the name of God
संज्ञा (Sangya)
क्रिया (Kriya)
अव्यय (Avyay)
إِذَا جَآءَكَ ٱلْمُنَـٰفِقُونَ قَالُوا۟ نَشْهَدُ إِنَّكَ لَرَسُولُ ٱللَّهِ ۗ وَٱللَّهُ يَعْلَمُ إِنَّكَ لَرَسُولُهُۥ وَٱللَّهُ يَشْهَدُ إِنَّ ٱلْمُنَـٰفِقِينَ لَكَـٰذِبُونَ
idhā jāaka l-munāfiqūna qālū nashhadu innaka larasūlu l-lahi wal-lahu yaʿlamu innaka larasūluhu wal-lahu yashhadu inna l-munāfiqīna lakādhibūna
जब ये मुनाफ़िक़ (कपटी) आपके पास आते हैं, तो कहते हैं, "हम गवाही देते हैं कि आप निश्चय ही अल्लाह के रसूल हैं।" और अल्लाह जानता है कि आप निश्चय ही उसके रसूल हैं, और अल्लाह गवाही देता है कि मुनाफ़िक़ निश्चित रूप से झूठे हैं।
63:1
अव्यय
إِذَا
जब
idhā
क्रिया
جَآءَكَ
आते हैं आपके पास
jāaka
संज्ञा
ٱلْمُنَـٰفِقُونَ
कपटी (लोग)
l-munāfiqūna
क्रिया
قَالُوا۟
वे कहते हैं
qālū
क्रिया
نَشْهَدُ
हम गवाही देते हैं
nashhadu
अव्यय
إِنَّكَ
कि आप
innaka
संज्ञा
لَرَسُولُ
यकीनन रसूल हैं
larasūlu
संज्ञा
ٱللَّهِ ۗ
अल्लाह के
l-lahi
संज्ञा
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
क्रिया
يَعْلَمُ
जानता है
yaʿlamu
अव्यय
إِنَّكَ
कि आप
innaka
संज्ञा
لَرَسُولُهُۥ
यकीनन उसके रसूल हैं
larasūluhu
संज्ञा
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
क्रिया
يَشْهَدُ
गवाही देता है
yashhadu
अव्यय
إِنَّ
कि
inna
संज्ञा
ٱلْمُنَـٰفِقِينَ
मुनाफ़िक़ (कपटी)
l-munāfiqīna
संज्ञा
لَكَـٰذِبُونَ
निश्चित ही झूठे हैं
lakādhibūna
ٱتَّخَذُوٓا۟ أَيْمَـٰنَهُمْ جُنَّةًۭ فَصَدُّوا۟ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ ۚ إِنَّهُمْ سَآءَ مَا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ
ittakhadhū aymānahum junnatan faṣaddū ʿan sabīli l-lahi innahum sāa mā kānū yaʿmalūna
उन्होंने अपनी कसमों को एक ढाल बना लिया है, फिर वे अल्लाह के मार्ग से (लोगों को) रोकते हैं। वास्तव में वे जो कुछ कर रहे हैं, बहुत बुरा है।
63:2
क्रिया
ٱتَّخَذُوٓا۟
उन्होंने बना लिया
ittakhadhū
संज्ञा
أَيْمَـٰنَهُمْ
अपनी कसमों को
aymānahum
संज्ञा
جُنَّةًۭ
एक ढाल
junnatan
क्रिया
فَصَدُّوا۟
फिर उन्होंने रोका
faṣaddū
अव्यय
عَن
से
ʿan
संज्ञा
سَبِيلِ
रास्ता
sabīli
संज्ञा
ٱللَّهِ ۚ
अल्लाह का
l-lahi
अव्यय
إِنَّهُمْ
बेशक वे
innahum
क्रिया
سَآءَ
बहुत बुरा है
sāa
सर्वनाम
مَا
जो कुछ
क्रिया
كَانُوا۟
वे थे
kānū
क्रिया
يَعْمَلُونَ
करते
yaʿmalūna
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ ءَامَنُوا۟ ثُمَّ كَفَرُوا۟ فَطُبِعَ عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ فَهُمْ لَا يَفْقَهُونَ
dhālika bi-annahum āmanū thumma kafarū faṭubiʿa ʿalā qulūbihim fahum lā yafqahūna
यह इसलिए कि वे ईमान लाए, फिर उन्होंने कुफ़्र (अविश्वास) किया, तो उनके दिलों पर मुहर लगा दी गई, इसलिए अब वे समझते नहीं।
63:3
सर्वनाम
ذَٰلِكَ
यह
dhālika
अव्यय
بِأَنَّهُمْ
इसलिए कि वे
bi-annahum
क्रिया
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
āmanū
अव्यय
ثُمَّ
फिर
thumma
क्रिया
كَفَرُوا۟
उन्होंने कुफ़्र किया
kafarū
क्रिया
فَطُبِعَ
तो मुहर लगा दी गई
faṭubiʿa
अव्यय
عَلَىٰ
पर
ʿalā
संज्ञा
قُلُوبِهِمْ
उनके दिलों
qulūbihim
सर्वनाम
فَهُمْ
तो वे
fahum
अव्यय
لَا
नहीं
क्रिया
يَفْقَهُونَ
समझते
yafqahūna
۞ وَإِذَا رَأَيْتَهُمْ تُعْجِبُكَ أَجْسَامُهُمْ ۖ وَإِن يَقُولُوا۟ تَسْمَعْ لِقَوْلِهِمْ ۖ كَأَنَّهُمْ خُشُبٌۭ مُّسَنَّدَةٌۭ ۖ يَحْسَبُونَ كُلَّ صَيْحَةٍ عَلَيْهِمْ ۚ هُمُ ٱلْعَدُوُّ فَٱحْذَرْهُمْ ۚ قَـٰتَلَهُمُ ٱللَّهُ ۖ أَنَّىٰ يُؤْفَكُونَ
wa-idhā ra-aytahum tuʿ'jibuka ajsāmuhum wa-in yaqūlū tasmaʿ liqawlihim ka-annahum khushubun musannadatun yaḥsabūna kulla ṣayḥatin ʿalayhim humu l-ʿaduwu fa-iḥ'dharhum qātalahumu l-lahu annā yu'fakūna
और जब आप उन्हें देखते हैं, तो उनके शरीर (ठाट-बाट) आपको भाते हैं, और यदि वे बोलते हैं, तो आप उनकी बात सुनने लगते हैं। वे ऐसे हैं जैसे कि दीवार के सहारे टिकाई हुई लकड़ियाँ हों। वे हर शोर को अपने ही विरुद्ध समझते हैं। वे ही शत्रु हैं, अतः उनसे सावधान रहें। अल्लाह उन्हें नष्ट करे, वे कहाँ भटके जा रहे हैं?
63:4
अव्यय
۞ وَإِذَا
और जब
wa-idhā
क्रिया
رَأَيْتَهُمْ
आप उन्हें देखते हैं
ra-aytahum
क्रिया
تُعْجِبُكَ
आपको भाते हैं
tuʿ'jibuka
संज्ञा
أَجْسَامُهُمْ ۖ
उनके शरीर
ajsāmuhum
अव्यय
وَإِن
और अगर
wa-in
क्रिया
يَقُولُوا۟
वे बोलते हैं
yaqūlū
क्रिया
تَسْمَعْ
आप सुनते हैं
tasmaʿ
संज्ञा
لِقَوْلِهِمْ ۖ
उनकी बात
liqawlihim
अव्यय
كَأَنَّهُمْ
जैसे कि वे
ka-annahum
संज्ञा
خُشُبٌۭ
लकड़ियाँ (हों)
khushubun
संज्ञा
مُّسَنَّدَةٌۭ ۖ
सहार लगाई हुई
musannadatun
क्रिया
يَحْسَبُونَ
वे समझते हैं
yaḥsabūna
संज्ञा
كُلَّ
हर
kulla
संज्ञा
صَيْحَةٍ
चीख/शोर
ṣayḥatin
अव्यय
عَلَيْهِمْ ۚ
अपने ही विरुद्ध
ʿalayhim
सर्वनाम
هُمُ
वे ही
humu
संज्ञा
ٱلْعَدُوُّ
दुश्मन हैं
l-ʿaduwu
क्रिया
فَٱحْذَرْهُمْ ۚ
सो उनसे बचो
fa-iḥ'dharhum
क्रिया
قَـٰتَلَهُمُ
अल्लाह मारे उन्हें
qātalahumu
संज्ञा
ٱللَّهُ ۖ
अल्लाह
l-lahu
अव्यय
أَنَّىٰ
कहाँ
annā
क्रिया
يُؤْفَكُونَ
वे फिराए जाते हैं
yu'fakūna
وَإِذَا قِيلَ لَهُمْ تَعَالَوْا۟ يَسْتَغْفِرْ لَكُمْ رَسُولُ ٱللَّهِ لَوَّوْا۟ رُءُوسَهُمْ وَرَأَيْتَهُمْ يَصُدُّونَ وَهُم مُّسْتَكْبِرُونَ
wa-idhā qīla lahum taʿālaw yastaghfir lakum rasūlu l-lahi lawwaw ruūsahum wara-aytahum yaṣuddūna wahum mus'takbirūna
और जब उनसे कहा जाता है, "आओ, अल्लाह का रसूल तुम्हारे लिए क्षमा की प्रार्थना करे," तो वे अपने सिर झटक देते हैं और आप उन्हें देखते हैं कि वे अहंकार के साथ मुँह मोड़ लेते हैं।
63:5
अव्यय
وَإِذَا
और जब
wa-idhā
क्रिया
قِيلَ
कहा जाता है
qīla
अव्यय
لَهُمْ
उनसे
lahum
क्रिया
تَعَالَوْا۟
आओ
taʿālaw
क्रिया
يَسْتَغْفِرْ
वह मग़फ़िरत माँगे
yastaghfir
अव्यय
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
lakum
संज्ञा
رَسُولُ
रसूल
rasūlu
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह के
l-lahi
क्रिया
لَوَّوْا۟
वे झटक देते हैं
lawwaw
संज्ञा
رُءُوسَهُمْ
अपने सिर
ruūsahum
क्रिया
وَرَأَيْتَهُمْ
और आप उन्हें देखते हैं
wara-aytahum
क्रिया
يَصُدُّونَ
रुकते/मोड़ते हुए
yaṣuddūna
सर्वनाम
وَهُم
और वे
wahum
संज्ञा
مُّسْتَكْبِرُونَ
अहंकार करने वाले हैं
mus'takbirūna
سَوَآءٌ عَلَيْهِمْ أَسْتَغْفَرْتَ لَهُمْ أَمْ لَمْ تَسْتَغْفِرْ لَهُمْ لَن يَغْفِرَ ٱللَّهُ لَهُمْ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يَهْدِى ٱلْقَوْمَ ٱلْفَـٰسِقِينَ
sawāon ʿalayhim astaghfarta lahum am lam tastaghfir lahum lan yaghfira l-lahu lahum inna l-laha lā yahdī l-qawma l-fāsiqīna
उनके लिए बराबर है, चाहे आप उनके लिए क्षमा की प्रार्थना करें या न करें, अल्लाह उन्हें कभी क्षमा नहीं करेगा। वास्तव में, अल्लाह अवज्ञाकारी लोगों को मार्ग नहीं दिखाता।
63:6
संज्ञा
سَوَآءٌ
बराबर है
sawāon
अव्यय
عَلَيْهِمْ
उनके लिए
ʿalayhim
क्रिया
أَسْتَغْفَرْتَ
चाहे आप मग़फ़िरत माँगें
astaghfarta
अव्यय
لَهُمْ
उनके लिए
lahum
अव्यय
أَمْ
या
am
अव्यय
لَمْ
नहीं
lam
क्रिया
تَسْتَغْفِرْ
मग़फ़िरत माँगें
tastaghfir
अव्यय
لَهُمْ
उनके लिए
lahum
अव्यय
لَن
हरगिज़ नहीं
lan
क्रिया
يَغْفِرَ
माफ़ करेगा
yaghfira
संज्ञा
ٱللَّهُ
अल्लाह
l-lahu
अव्यय
لَهُمْ ۚ
उनको
lahum
अव्यय
إِنَّ
बेशक
inna
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह
l-laha
अव्यय
لَا
नहीं
क्रिया
يَهْدِى
हिदायत देता
yahdī
संज्ञा
ٱلْقَوْمَ
क़ौम को
l-qawma
संज्ञा
ٱلْفَـٰسِقِينَ
नाफ़रमानों की
l-fāsiqīna
هُمُ ٱلَّذِينَ يَقُولُونَ لَا تُنفِقُوا۟ عَلَىٰ مَنْ عِندَ رَسُولِ ٱللَّهِ حَتَّىٰ يَنفَضُّوا۟ ۗ وَلِلَّهِ خَزَآئِنُ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَلَـٰكِنَّ ٱلْمُنَـٰفِقِينَ لَا يَفْقَهُونَ
humu alladhīna yaqūlūna lā tunfiqū ʿalā man ʿinda rasūli l-lahi ḥattā yanfaḍḍū walillahi khazāinu l-samāwāti wal-arḍi walākinna l-munāfiqīna lā yafqahūna
ये वही लोग हैं जो कहते हैं, "उन लोगों पर खर्च मत करो जो अल्लाह के रसूल के साथ हैं, जब तक कि वे यहाँ से हट न जाएँ।" जबकि आसमानों और धरती के सारे खज़ाने अल्लाह ही के हैं, लेकिन मुनाफ़िक़ समझते नहीं।
63:7
सर्वनाम
هُمُ
वे
humu
सर्वनाम
ٱلَّذِينَ
जो कि
alladhīna
क्रिया
يَقُولُونَ
कहते हैं
yaqūlūna
अव्यय
لَا
क्रिया
تُنفِقُوا۟
खर्च करो
tunfiqū
अव्यय
عَلَىٰ
पर
ʿalā
सर्वनाम
مَنْ
उस पर जो
man
संज्ञा
عِندَ
पास है
ʿinda
संज्ञा
رَسُولِ
रसूल के
rasūli
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह के
l-lahi
अव्यय
حَتَّىٰ
यहाँ तक कि
ḥattā
क्रिया
يَنفَضُّوا۟ ۗ
वे बिखर जाएँ
yanfaḍḍū
संज्ञा
وَلِلَّهِ
और अल्लाह ही के लिए हैं
walillahi
संज्ञा
خَزَآئِنُ
खज़ाने
khazāinu
संज्ञा
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों के
l-samāwāti
संज्ञा
وَٱلْأَرْضِ
और ज़मीन के
wal-arḍi
अव्यय
وَلَـٰكِنَّ
लेकिन
walākinna
संज्ञा
ٱلْمُنَـٰفِقِينَ
मुनाफ़िक़ (कपटी)
l-munāfiqīna
अव्यय
لَا
नहीं
क्रिया
يَفْقَهُونَ
समझते
yafqahūna
يَقُولُونَ لَئِن رَّجَعْنَآ إِلَى ٱلْمَدِينَةِ لَيُخْرِجَنَّ ٱلْأَعَزُّ مِنْهَا ٱلْأَذَلَّ ۚ وَلِلَّهِ ٱلْعِزَّةُ وَلِرَسُولِهِۦ وَلِلْمُؤْمِنِينَ وَلَـٰكِنَّ ٱلْمُنَـٰفِقِينَ لَا يَعْلَمُونَ
yaqūlūna la-in rajaʿnā ilā l-madīnati layukh'rijanna l-aʿazu min'hā l-adhala walillahi l-ʿizatu walirasūlihi walil'mu'minīna walākinna l-munāfiqīna lā yaʿlamūna
वे कहते हैं, "यदि हम मदीना लौटेंगे, तो जो अधिक सम्मानित है वह वहां से सबसे अपमानित को निकाल बाहर करेगा।" जबकि सम्मान तो केवल अल्लाह, उसके रसूल और ईमान वालों के लिए है, लेकिन मुनाफ़िक़ जानते नहीं।
63:8
क्रिया
يَقُولُونَ
वे कहते हैं
yaqūlūna
अव्यय
لَئِن
अगर वाकई
la-in
क्रिया
رَّجَعْنَآ
हम लौटे
rajaʿnā
अव्यय
إِلَى
तरफ
ilā
संज्ञा
ٱلْمَدِينَةِ
मदीना के
l-madīnati
क्रिया
لَيُخْرِجَنَّ
तो ज़रूर निकालेगा
layukh'rijanna
संज्ञा
ٱلْأَعَزُّ
ज़्यादा इज़्ज़त वाला
l-aʿazu
अव्यय
مِنْهَا
उसमें से
min'hā
संज्ञा
ٱلْأَذَلَّ ۚ
ज़्यादा ज़लील को
l-adhala
संज्ञा
وَلِلَّهِ
और अल्लाह ही के लिए है
walillahi
संज्ञा
ٱلْعِزَّةُ
इज़्ज़त/सम्मान
l-ʿizatu
संज्ञा
وَلِرَسُولِهِۦ
और उसके रसूल के लिए
walirasūlihi
संज्ञा
وَلِلْمُؤْمِنِينَ
और मोमिनों के लिए
walil'mu'minīna
अव्यय
وَلَـٰكِنَّ
लेकिन
walākinna
संज्ञा
ٱلْمُنَـٰفِقِينَ
मुनाफ़िक़ (कपटी)
l-munāfiqīna
अव्यय
لَا
नहीं
क्रिया
يَعْلَمُونَ
जानते
yaʿlamūna
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لَا تُلْهِكُمْ أَمْوَٰلُكُمْ وَلَآ أَوْلَـٰدُكُمْ عَن ذِكْرِ ٱللَّهِ ۚ وَمَن يَفْعَلْ ذَٰلِكَ فَأُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْخَـٰسِرُونَ
yāayyuhā alladhīna āmanū lā tul'hikum amwālukum walā awlādukum ʿan dhik'ri l-lahi waman yafʿal dhālika fa-ulāika humu l-khāsirūna
ऐ ईमान वालों! तुम्हारे धन और तुम्हारी संतान तुम्हें अल्लाह की याद से गाफ़िल (असावधान) न कर दें। और जो कोई ऐसा करेगा, तो वही लोग घाटे में रहने वाले हैं।
63:9
अव्यय
يَـٰٓأَيُّهَا
yāayyuhā
सर्वनाम
ٱلَّذِينَ
वो लोगों जो
alladhīna
क्रिया
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
āmanū
अव्यय
لَا
क्रिया
تُلْهِكُمْ
गाफ़िल करे तुम्हें
tul'hikum
संज्ञा
أَمْوَٰلُكُمْ
तुम्हारे माल
amwālukum
अव्यय
وَلَآ
और न ही
walā
संज्ञा
أَوْلَـٰدُكُمْ
तुम्हारी औलाद
awlādukum
अव्यय
عَن
से
ʿan
संज्ञा
ذِكْرِ
याद
dhik'ri
संज्ञा
ٱللَّهِ ۚ
अल्लाह की
l-lahi
सर्वनाम
وَمَن
और जो कोई
waman
क्रिया
يَفْعَلْ
करेगा
yafʿal
सर्वनाम
ذَٰلِكَ
यह
dhālika
सर्वनाम
فَأُو۟لَـٰٓئِكَ
तो वही लोग
fa-ulāika
सर्वनाम
هُمُ
वो खुद
humu
संज्ञा
ٱلْخَـٰسِرُونَ
घाटा उठाने वाले हैं
l-khāsirūna
وَأَنفِقُوا۟ مِن مَّا رَزَقْنَـٰكُم مِّن قَبْلِ أَن يَأْتِىَ أَحَدَكُمُ ٱلْمَوْتُ فَيَقُولَ رَبِّ لَوْلَآ أَخَّرْتَنِىٓ إِلَىٰٓ أَجَلٍۢ قَرِيبٍۢ فَأَصَّدَّقَ وَأَكُن مِّنَ ٱلصَّـٰلِحِينَ
wa-anfiqū min mā razaqnākum min qabli an yatiya aḥadakumu l-mawtu fayaqūla rabbi lawlā akhartanī ilā ajalin qarībin fa-aṣṣaddaqa wa-akun mina l-ṣāliḥīna
और जो कुछ हमने तुम्हें प्रदान किया है, उसमें से (अल्लाह की राह में) खर्च करो, इससे पहले कि तुममें से किसी की मृत्यु आ जाए और वह कहने लगे, "मेरे रब, क्यों न तूने मुझे थोड़े समय के लिए मोहलत दे दी ताकि मैं दान (सदक़ा) करता और नेक लोगों में शामिल हो जाता?"
63:10
क्रिया
وَأَنفِقُوا۟
और खर्च करो
wa-anfiqū
अव्यय
مِن
से
min
सर्वनाम
مَّا
जो कुछ
क्रिया
رَزَقْنَـٰكُم
हमने दिया तुम्हें
razaqnākum
अव्यय
مِّن
से
min
संज्ञा
قَبْلِ
पहले
qabli
अव्यय
أَن
कि
an
क्रिया
يَأْتِىَ
आ जाए
yatiya
संज्ञा
أَحَدَكُمُ
तुम में से किसी को
aḥadakumu
संज्ञा
ٱلْمَوْتُ
मौत
l-mawtu
क्रिया
فَيَقُولَ
फिर वह कहे
fayaqūla
संज्ञा
رَبِّ
मेरे रब!
अव्यय
لَوْلَآ
क्यों न तूने
lawlā
क्रिया
أَخَّرْتَنِىٓ
देर की मुझे
akhartanī
अव्यय
إِلَىٰٓ
तक
ilā
संज्ञा
أَجَلٍۢ
एक वक़्त
ajalin
संज्ञा
قَرِيبٍۢ
नज़दीकी/थोड़े
qarībin
क्रिया
فَأَصَّدَّقَ
तो मैं सदक़ा करता
fa-aṣṣaddaqa
क्रिया
وَأَكُن
और मैं हो जाता
wa-akun
अव्यय
مِّنَ
में से
mina
संज्ञा
ٱلصَّـٰلِحِينَ
नेक लोगों (के)
l-ṣāliḥīna
وَلَن يُؤَخِّرَ ٱللَّهُ نَفْسًا إِذَا جَآءَ أَجَلُهَا ۚ وَٱللَّهُ خَبِيرٌۢ بِمَا تَعْمَلُونَ
walan yu-akhira l-lahu nafsan idhā jāa ajaluhā wal-lahu khabīrun bimā taʿmalūna
लेकिन अल्लाह किसी व्यक्ति को कदापि मोहलत नहीं देता जब उसका निर्धारित समय आ जाए। और तुम जो कुछ करते हो, अल्लाह उससे पूरी तरह अवगत है।
63:11
अव्यय
وَلَن
और हरगिज़ नहीं
walan
क्रिया
يُؤَخِّرَ
वह मोहलत देगा
yu-akhira
संज्ञा
ٱللَّهُ
अल्लाह
l-lahu
संज्ञा
نَفْسًا
किसी जान को
nafsan
अव्यय
إِذَا
जब
idhā
क्रिया
جَآءَ
आ जाए
jāa
संज्ञा
أَجَلُهَا ۚ
उसका वक़्त
ajaluhā
संज्ञा
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
संज्ञा
خَبِيرٌۢ
पूरी खबर रखने वाला है
khabīrun
अव्यय
بِمَا
उसकी जो
bimā
क्रिया
تَعْمَلُونَ
तुम करते हो
taʿmalūna

समापन प्रार्थना (दुआ)

या अल्लाह, हम तेरा गहरा आभार व्यक्त करते हैं कि तूने हमें सूरह अल-मुनाफ़िकून शब्द-दर-शब्द का अध्ययन पूरा करने की तौफीक अता की।

ऐ हमारे रब, हमारे दिलों को निफ़ाक़ (कपटाचार) से, हमारी ज़बानों को झूठ से, और हमारे कामों को दिखावे से पाक कर दे। हमें अपनी संपत्ति और संतानों की वजह से अपने ज़िक्र से गाफिल न होने दे। मौत का वक्त आने से पहले हमें अपनी राह में खर्च करने की तौफीक अता कर, ताकि हम उन लोगों में से न हों जो मौत के वक्त मोहलत मांगते हैं। हमें सच्चे मोमिनों (विश्वासियों) में शामिल कर।

इस शब्द-दर-शब्द अध्ययन को हमारे दिलों के लिए शिफा (उपचार) बना और इसे हमारे लिए एक ऐसा प्रकाश बना जो हमारे जीवन के हर कदम का मार्गदर्शन करे। आमीन।

सूरह अल-मुनाफ़िकून का शब्द-दर-शब्द विश्लेषण कैसे काम करता है

मानक अनुवादों के विपरीत जो आपको एक वाक्य का सामान्य अर्थ देते हैं, यह पृष्ठ एक अद्वितीय “पूर्ण संदर्भ” विधि का उपयोग करता है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए डेटा को दो अलग-अलग परतों में प्रदर्शित करते हैं ताकि आप सूरह अल-मुनाफ़िकून के प्रवाह को कभी न खोएं:

  • शीर्ष पंक्ति (संदर्भ): सूरह के समग्र संदेश और कथा को समझने के लिए पूर्ण अरबी आयत के साथ पूर्ण हिंदी अनुवाद पढ़ें।
  • निचली पंक्ति (विश्लेषण): अनुक्रम में हर एक शब्द का सटीक अर्थ, वर्तनी और मूल प्रकार देखने के लिए शब्द-दर-शब्द विवरण में उतरें।

सूरह अल-मुनाफ़िकून के लिए रंगकोडित व्याकरण गाइड को समझना

पढ़ते समय सहज रूप से कुरान की अरबी व्याकरण (नह्व और सर्फ) सीखें। यह संसाधन जटिल पाठ्यपुस्तक नियमों को तत्काल दृश्य संकेतों से बदल देता है। सूरह अल-मुनाफ़िकून का प्रत्येक शब्द एक इंटरैक्टिव “व्याकरण कार्ड” के रूप में प्रस्तुत किया गया है जिसमें तत्काल रंग-कोडिंग की सुविधा है:

  • संज्ञा (इस्म): नीले रंग में चिह्नित (नाम, स्थान, वस्तुएं)।
  • क्रिया (फेल): लाल रंग में चिह्नित (कार्य, काल)।
  • अव्यय/कण (हर्फ): हरे रंग में चिह्नित (पूर्वसर्ग, जोड़ने वाले शब्द)।

यह दृश्य सहायता आपको आयतों के भीतर वाक्य संरचनाओं और शब्दों के भेदों को तुरंत पहचानने में मदद करती है, जिससे तेजी से याद रखने और समझने में सहायता मिलती है।

सूरह अल-मुनाफ़िकून का लिप्यंतरण और उच्चारण

पढ़ना शुरू करने के लिए आपको अरबी लिपि पढ़ने में धाराप्रवाह होने की आवश्यकता नहीं है। हर शब्द कार्ड पर शामिल तजवीद-अनुकूल लिप्यंतरण के साथ अपने उच्चारण को सही करें। यह ध्वन्यात्मक गाइड आपको सूरह अल-मुनाफ़िकून में चुनौतीपूर्ण शब्दों का सही उच्चारण करने में मदद करती है, ध्वनि को सीधे अर्थ से जोड़ती है।

कुरान के आँकड़े: सूरह अल-मुनाफ़िकून के माध्यम से शब्दावली बनाना

कई छात्र कुरान की विशालता से अभिभूत महसूस करते हैं, लेकिन संख्याएं साबित करती हैं कि यह प्राप्त करने योग्य है। कुरान लगभग 77,797 कुल शब्दों से बना है, फिर भी शब्दावली अत्यधिक दोहराव वाली है।

  • कुल अद्वितीय शब्द: लगभग 14,870।
  • वास्तविक शब्द आधार: केवल ~2,000 शब्द।

सूरह अल-मुनाफ़िकून को शब्द-दर-शब्द पढ़कर, आप इस अध्याय में पाए जाने वाले आवश्यक शब्दों को सीख रहे हैं। चूंकि ये शब्द पूरे कुरान में बार-बार दोहराए जाते हैं, इसलिए इन आयतों में शब्दावली में महारत हासिल करना सीधे पूरी पवित्र पुस्तक को समझने में योगदान देता है।

सूरह अल-मुनाफ़िकून के साथ अपनी सलाह (नमाज़) को बढ़ाएं

पांच दैनिक नमाज़ों के दौरान, एक मुस्लिम औसतन 200-250 अरबी शब्दों का पाठ करता है और दोहराता है। यदि इन शब्दों को समझा नहीं जाता है, तो मन अक्सर भटक जाता है। सूरह अल-मुनाफ़िकून को शब्द-दर-शब्द पढ़ना आपको वास्तविक समय में इस शब्दावली को पहचानने में मदद करता है। जब आप प्रार्थना के लिए खड़े होते हैं और इस सूरह की आयतों का पाठ करते हैं, तो आप आखिरकार समझ पाएंगे कि आप अपने निर्माता से क्या कह रहे हैं, जिससे यह प्राप्त होगा:

  1. खुशू (एकाग्रता): सलाह के दौरान एक केंद्रित मन।
  2. गुणवत्ता: इबादत की उच्च आध्यात्मिक गुणवत्ता।
  3. जुड़ाव: पाठ (तिलावत) کے ساتھ ایک فوری، جذباتی تعلق۔
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