सूरह अल-मुद्दस्सिर शब्द-दर-शब्द हिंदी | रंगकोडित व्याकरण कार्ड, अनुवाद और तजवीद

हिंदी में सूरह अल-मुद्दस्सिर (कपड़ा ओढ़ने वाले) का शब्द-दर-शब्द अध्ययन करें। यह मक्की सूरह इस्लाम के शुरुआती दिनों में नाज़िल हुई थी। इसमें अल्लाह पैगंबर मुहम्मद (स.अ.व) को हुक्म देता है कि “उठें और लोगों को आगाह करें”, अपने रब की बड़ाई बयान करें, और अपने कपड़ों (और चरित्र) को पवित्र रखें। यह सूरह कुरान को जादू और इंसान का कलाम कहने वालों (विशेष रूप से वलीद बिन मुगीरा) को ‘सकर’ (जहन्नुम की एक भयंकर आग) की सख्त चेतावनी देती है, जिस पर 19 फरिश्ते नियुक्त हैं। यह इंटरैक्टिव अध्ययन गाइड रंग-कोडित व्याकरण कार्ड प्रदान करती है, जिससे आपको इस प्रभावशाली सूरह को समझने में मदद मिलेगी।

In the name of God
संज्ञा (Sangya)
क्रिया (Kriya)
अव्यय (Avyay)
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلْمُدَّثِّرُ
Yā ayyuhā l-mudaththir
ऐ चादर ओढ़ने वाले (नबी)!
74:1
अव्यय
يَـٰٓأَيُّهَا
ऐ आप जो
yāayyuhā
संज्ञा
ٱلْمُدَّثِّرُ
चादर ओढ़े हुए हैं
l-mudathiru
قُمْ فَأَنذِرْ
Qum fa-andhir
उठिए और (लोगों को) सचेत कीजिए,
74:2
क्रिया
قُمْ
उठिए
qum
क्रिया
فَأَنذِرْ
और सचेत कीजिए
fa-andhir
وَرَبَّكَ فَكَبِّرْ
Wa rabbaka fakabbir
और अपने रब की बड़ाई बयान कीजिए,
74:3
संज्ञा
وَرَبَّكَ
और अपने रब की
warabbaka
क्रिया
فَكَبِّرْ
बड़ाई बयान कीजिए
fakabbir
وَثِيَابَكَ فَطَهِّرْ
Wa thiyābaka faṭahhir
और अपने कपड़ों को पाक (साफ़) रखिए,
74:4
संज्ञा
وَثِيَابَكَ
और अपने वस्त्रों को
wathiyābaka
क्रिया
فَطَهِّرْ
पाक रखिए
faṭahhir
وَٱلرُّجْزَ فَٱهْجُرْ
War-rujza fahjur
और गंदगी से दूर रहिए,
74:5
संज्ञा
وَٱلرُّجْزَ
और गंदगी (बुराई) से
wal-ruj'za
क्रिया
فَٱهْجُرْ
अलग रहिए
fa-uh'jur
وَلَا تَمْنُن تَسْتَكْثِرُ
Wa lā tamnun tastakthir
और अधिक पाने की लालसा में एहसान न कीजिए,
74:6
अव्यय
وَلَا
और न
walā
क्रिया
تَمْنُن
उपकार कीजिए
tamnun
क्रिया
تَسْتَكْثِرُ
अधिक पाने के लिए
tastakthiru
وَلِرَبِّكَ فَٱصْبِرْ
Wa lirabbika faṣbir
और अपने रब के लिए सब्र (धैर्य) कीजिए।
74:7
संज्ञा
وَلِرَبِّكَ
और अपने रब के लिए
walirabbika
क्रिया
فَٱصْبِرْ
धैर्य कीजिए
fa-iṣ'bir
فَإِذَا نُقِرَ فِى ٱلنَّاقُورِ
Fa-idhā nuqira fī n-nāqūr
फिर जब सूर (नरसिंघा) फूँका जाएगा,
74:8
अव्यय
فَإِذَا
फिर जब
fa-idhā
क्रिया
نُقِرَ
फूँका जाएगा
nuqira
अव्यय
فِى
में
संज्ञा
ٱلنَّاقُورِ
सूर (नरसिंघा)
l-nāqūri
فَذَٰلِكَ يَوْمَئِذٍۢ يَوْمٌ عَسِيرٌ
Fadhālika yawma-idhin yawmun ʿasīr
तो वह दिन एक कठिन दिन होगा,
74:9
सर्वनाम
فَذَٰلِكَ
तो वह
fadhālika
संज्ञा
يَوْمَئِذٍۢ
उस दिन
yawma-idhin
संज्ञा
يَوْمٌ
एक दिन
yawmun
संज्ञा
عَسِيرٌ
कठिन
ʿasīrun
عَلَى ٱلْكَـٰفِرِينَ غَيْرُ يَسِيرٍۢ
ʿAlā l-kāfirīna ghayru yasīr
इनकार करने वालों के लिए आसान न होगा।
74:10
अव्यय
عَلَى
पर / के लिए
ʿalā
संज्ञा
ٱلْكَـٰفِرِينَ
इनकार करने वाले
l-kāfirīna
संज्ञा
غَيْرُ
नहीं
ghayru
संज्ञा
يَسِيرٍۢ
आसान
yasīrin
ذَرْنِى وَمَنْ خَلَقْتُ وَحِيدًۭا
Dharnī wa man khalaqtu waḥīdā
छोड़ दीजिए मुझे और उस व्यक्ति को जिसे मैंने अकेला पैदा किया है,
74:11
क्रिया
ذَرْنِى
मुझे छोड़ दीजिए
dharnī
सर्वनाम
وَمَنْ
और उसे जिसे
waman
क्रिया
خَلَقْتُ
मैंने पैदा किया
khalaqtu
संज्ञा
وَحِيدًۭا
अकेला
waḥīdan
وَجَعَلْتُ لَهُۥ مَالًۭا مَّمْدُودًۭا
Wa jaʿaltu lahū mālan mamdūdā
और उसे बहुत सा धन दिया,
74:12
क्रिया
وَجَعَلْتُ
और मैंने दिया
wajaʿaltu
अव्यय
لَهُۥ
उसे
lahu
संज्ञा
مَالًۭا
धन / माल
mālan
संज्ञा
مَّمْدُودًۭا
फैला हुआ (बहुत सा)
mamdūdan
وَبَنِينَ شُهُودًۭا
Wa banīna shuhūdā
और उसके पास रहने वाले बेटे दिए,
74:13
संज्ञा
وَبَنِينَ
और बेटे
wabanīna
संज्ञा
شُهُودًۭا
हाज़िर रहने वाले
shuhūdan
وَمَهَّدتُّ لَهُۥ تَمْهِيدًۭا
Wa mahhadttu lahū tamhīdā
और उसके लिए (जीवन की) राह आसान कर दी।
74:14
क्रिया
وَمَهَّدتُّ
और मैंने सुगम बनाया
wamahhadttu
अव्यय
لَهُۥ
उसके लिए
lahu
संज्ञा
تَمْهِيدًۭا
पूरी तरह सुगम
tamhīdan
ثُمَّ يَطْمَعُ أَنْ أَزِيدَ
Thumma yaṭmaʿu an azīd
फिर भी वह लोभ करता है कि मैं और अधिक दूँ।
74:15
अव्यय
ثُمَّ
फिर
thumma
क्रिया
يَطْمَعُ
वह लोभ करता है
yaṭmaʿu
अव्यय
أَنْ
कि
an
क्रिया
أَزِيدَ
मैं और बढ़ा दूँ
azīda
كَلَّآ ۖ إِنَّهُۥ كَانَ لِـَٔايَـٰتِنَا عَنِيدًۭا
Kallā innahu kāna li-āyātinā ʿanīdā
कदापि नहीं! वह हमारी आयतों का कट्टर शत्रु रहा है।
74:16
अव्यय
كَلَّآ ۖ
कभी नहीं
kallā
अव्यय
إِنَّهُۥ
बेशक वह
innahu
क्रिया
كَانَ
रहा है
kāna
संज्ञा
لِـَٔايَـٰتِنَا
हमारी आयतों का
liāyātinā
संज्ञा
عَنِيدًۭا
शत्रु / हठी
ʿanīdan
سَأُرْهِقُهُۥ صَعُودًا
Sa-ur'hiquhu ṣaʿūdā
शीघ्र ही मैं उसे एक कठिन चढ़ाई (यातना) पर चढ़ाऊँगा।
74:17
क्रिया
سَأُرْهِقُهُۥ
जल्द मैं उसे थका दूँगा
sa-ur'hiquhu
संज्ञा
صَعُودًا
कठिन चढ़ाई पर
ṣaʿūdan
إِنَّهُۥ فَكَّرَ وَقَدَّرَ
Innahu fakkara wa qaddar
उसने सोचा और एक योजना बनाई,
74:18
अव्यय
إِنَّهُۥ
निश्चय ही उसने
innahu
क्रिया
فَكَّرَ
सोचा
fakkara
क्रिया
وَقَدَّرَ
और योजना बनाई
waqaddara
فَقُتِلَ كَيْفَ قَدَّرَ
Faqutila kayfa qaddar
तो वह नष्ट हो, कैसी योजना बनाई उसने!
74:19
क्रिया
فَقُتِلَ
तो वह मारा जाए
faqutila
अव्यय
كَيْفَ
कैसी
kayfa
क्रिया
قَدَّرَ
उसने योजना बनाई
qaddara
ثُمَّ قُتِلَ كَيْفَ قَدَّرَ
Thumma qutila kayfa qaddar
फिर वह नष्ट हो, कैसी योजना बनाई उसने!
74:20
अव्यय
ثُمَّ
फिर
thumma
क्रिया
قُتِلَ
वह मारा जाए
qutila
अव्यय
كَيْفَ
कैसी
kayfa
क्रिया
قَدَّرَ
योजना बनाई
qaddara
ثُمَّ نَظَرَ
Thumma naẓar
फिर उसने नज़र डाली,
74:21
अव्यय
ثُمَّ
फिर
thumma
क्रिया
نَظَرَ
नज़र डाली
naẓara
ثُمَّ عَبَسَ وَبَسَرَ
Thumma ʿabasa wa basar
फिर माथा सिकोड़ा और मुँह बनाया,
74:22
अव्यय
ثُمَّ
फिर
thumma
क्रिया
عَبَسَ
माथा सिकोड़ा
ʿabasa
क्रिया
وَبَسَرَ
और मुँह बनाया
wabasara
ثُمَّ أَدْبَرَ وَٱسْتَكْبَرَ
Thumma adbara was'takbar
फिर पीठ फेरी और घमंड किया,
74:23
अव्यय
ثُمَّ
फिर
thumma
क्रिया
أَدْبَرَ
पीठ फेरी
adbara
क्रिया
وَٱسْتَكْبَرَ
और अहंकार किया
wa-is'takbara
فَقَالَ إِنْ هَـٰذَآ إِلَّا سِحْرٌۭ يُؤْثَرُ
Faqāla in hādhā illā siḥrun yu'thar
और बोला, "यह कुछ नहीं है सिवाय एक पुराने जादू के,
74:24
क्रिया
فَقَالَ
फिर उसने कहा
faqāla
अव्यय
إِنْ
नहीं है
in
सर्वनाम
هَـٰذَآ
यह
hādhā
अव्यय
إِلَّا
सिवाय
illā
संज्ञा
سِحْرٌۭ
जादू के
siḥ'run
क्रिया
يُؤْثَرُ
चला आ रहा
yu'tharu
إِنْ هَـٰذَآ إِلَّا قَوْلُ ٱلْبَشَرِ
In hādhā illā qawlu l-bashar
यह तो बस एक मनुष्य की वाणी है।"
74:25
अव्यय
إِنْ
नहीं है
in
सर्वनाम
هَـٰذَآ
यह
hādhā
अव्यय
إِلَّا
सिवाय इसके कि
illā
संज्ञा
قَوْلُ
बात (कथन)
qawlu
संज्ञा
ٱلْبَشَرِ
मनुष्य की
l-bashari
سَأُصْلِيهِ سَقَرَ
Sa-uṣ'līhi saqar
शीघ्र ही मैं उसे सकर (नरक) में झोंक दूँगा।
74:26
क्रिया
سَأُصْلِيهِ
जल्द मैं उसे डालूँगा
sa-uṣ'līhi
संज्ञा
سَقَرَ
सकर (नरक) में
saqara
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا سَقَرُ
Wa mā adrāka mā saqar
और आप क्या जानें कि 'सकर' क्या है?
74:27
अव्यय
وَمَآ
और क्या
wamā
क्रिया
أَدْرَىٰكَ
आप को बताया
adrāka
अव्यय
مَا
क्या
संज्ञा
سَقَرُ
सकर है
saqaru
لَا تُبْقِى وَلَا تَذَرُ
Lā tub'qī wa lā tadhar
न वह बाकी छोड़ेगी और न छोड़ देगी,
74:28
अव्यय
لَا
नहीं
क्रिया
تُبْقِى
वह बाकी छोड़ेगी
tub'qī
अव्यय
وَلَا
और न
walā
क्रिया
تَذَرُ
वह छोड़ेगी
tadharu
لَوَّاحَةٌۭ لِّلْبَشَرِ
Lawwāḥatun lilbashar
वह खाल को झुलसा देने वाली है।
74:29
संज्ञा
لَوَّاحَةٌۭ
झुलसा देने वाली
lawwāḥatun
संज्ञा
لِّلْبَشَرِ
मनुष्य की खाल को
lil'bashari
عَلَيْهَا تِسْعَةَ عَشَرَ
ʿAlayhā tisʿata ʿashar
उस पर उन्नीस (फ़रिश्ते) नियुक्त हैं।
74:30
अव्यय
عَلَيْهَا
उस पर
ʿalayhā
संज्ञा
تِسْعَةَ
नौ
tis'ʿata
संज्ञा
عَشَرَ
दह (उन्नीस)
ʿashara
وَمَا جَعَلْنَآ أَصْحَـٰبَ ٱلنَّارِ إِلَّا مَلَـٰٓئِكَةًۭ ۙ وَمَا جَعَلْنَا عِدَّتَهُمْ إِلَّا فِتْنَةًۭ لِّلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لِيَسْتَيْقِنَ ٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْكِتَـٰبَ وَيَزْدَادَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ إِيمَـٰنًۭا ۙ وَلَا يَرْتَابَ ٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْكِتَـٰبَ وَٱلْمُؤْمِنُونَ ۙ وَلِيَقُولَ ٱلَّذِينَ فِى قُلُوبِهِم مَّرَضٌۭ وَٱلْكَـٰفِرُونَ مَاذَآ أَرَادَ ٱللَّهُ بِهَـٰذَا مَثَلًۭا ۚ كَذَٰلِكَ يُضِلُّ ٱللَّهُ مَن يَشَآءُ وَيَهْدِى مَن يَشَآءُ ۚ وَمَا يَعْلَمُ جُنُودَ رَبِّكَ إِلَّا هُوَ ۚ وَمَا هِىَ إِلَّا ذِكْرَىٰ لِلْبَشَرِ
Wa mā jaʿalnā aṣḥāba n-nāri illā malāikatan wa mā jaʿalnā ʿiddatahum illā fitnatan lilladhīna kafarū liyastayqina alladhīna ūtū l-kitāba wa yazdāda alladhīna āmanū īmānan wa lā yartāba alladhīna ūtū l-kitāba wal-mu'minūna wa liyaqūla alladhīna fī qulūbihim maraḍun wal-kāfirūna mādhā arāda Allāhu bihādhā mathalan kadhālika yuḍillu Allāhu man yashāu wa yahdī man yashāu wa mā yaʿlamu junūda rabbika illā huwa wa mā hiya illā dhikrā lilbashar
और हमने आग के रखवाले केवल फ़रिश्ते ही बनाए हैं। और उनकी संख्या को हमने इनकार करने वालों के लिए केवल एक आज़माइश बनाया है, ताकि किताब वाले यकीन कर लें और ईमान वालों का ईमान और बढ़ जाए, और किताब वाले और ईमान वाले संदेह न करें, और ताकि वे लोग जिनके दिलों में रोग है और इनकार करने वाले कहें कि इस उदाहरण से अल्लाह का क्या मतलब है? इसी तरह अल्लाह जिसे चाहता है भटकने देता है और जिसे चाहता है सीधा मार्ग दिखाता है। और आपके रब की सेनाओं को उसके सिवा कोई नहीं जानता। और यह तो बस मनुष्यों के लिए एक नसीहत (याद दिलाने वाली चीज़) है।
74:31
अव्यय
وَمَا
और नहीं
wamā
क्रिया
جَعَلْنَآ
हमने बनाए
jaʿalnā
संज्ञा
أَصْحَـٰبَ
रखवाले
aṣḥāba
संज्ञा
ٱلنَّارِ
आग के
l-nāri
अव्यय
إِلَّا
सिवाय
illā
संज्ञा
مَلَـٰٓئِكَةًۭ ۙ
फ़रिश्तों के
malāikatan
अव्यय
وَمَا
और नहीं
wamā
क्रिया
جَعَلْنَا
हमने रखी
jaʿalnā
संज्ञा
عِدَّتَهُمْ
उनकी संख्या
ʿiddatahum
अव्यय
إِلَّا
मगर
illā
संज्ञा
فِتْنَةًۭ
एक परीक्षण
fit'natan
संज्ञा
لِّلَّذِينَ
उन लोगों के लिए
lilladhīna
क्रिया
كَفَرُوا۟
जिन्होंने कुफ्र किया
kafarū
क्रिया
لِيَسْتَيْقِنَ
ताकि यकीन कर लें
liyastayqina
संज्ञा
ٱلَّذِينَ
वे लोग जो
alladhīna
क्रिया
أُوتُوا۟
दिए गए
ūtū
संज्ञा
ٱلْكِتَـٰبَ
किताब
l-kitāba
क्रिया
وَيَزْدَادَ
और बढ़ जाए
wayazdāda
संज्ञा
ٱلَّذِينَ
वे लोग जो
alladhīna
क्रिया
ءَامَنُوٓا۟
ईमान लाए
āmanū
संज्ञा
إِيمَـٰنًۭا ۙ
ईमान में
īmānan
अव्यय
وَلَا
और न
walā
क्रिया
يَرْتَابَ
संदेह करें
yartāba
संज्ञा
ٱلَّذِينَ
वे लोग जो
alladhīna
क्रिया
أُوتُوا۟
दिए गए
ūtū
संज्ञा
ٱلْكِتَـٰبَ
किताब
l-kitāba
संज्ञा
وَٱلْمُؤْمِنُونَ ۙ
और मोमिन (ईमान वाले)
wal-mu'minūna
क्रिया
وَلِيَقُولَ
और ताकि कहें
waliyaqūla
संज्ञा
ٱلَّذِينَ
वे लोग जो
alladhīna
अव्यय
فِى
में
संज्ञा
قُلُوبِهِم
उनके दिलों
qulūbihim
संज्ञा
مَّرَضٌۭ
रोग है
maraḍun
संज्ञा
وَٱلْكَـٰفِرُونَ
और इनकार करने वाले
wal-kāfirūna
संज्ञा
مَاذَآ
क्या
mādhā
क्रिया
أَرَادَ
चाहा
arāda
संज्ञा
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
l-lahu
सर्वनाम
بِهَـٰذَا
इसके द्वारा
bihādhā
संज्ञा
مَثَلًۭا ۚ
मिसाल के तौर पर
mathalan
अव्यय
كَذَٰلِكَ
इसी तरह
kadhālika
क्रिया
يُضِلُّ
वह भटकाता है
yuḍillu
संज्ञा
ٱللَّهُ
अल्लाह
l-lahu
सर्वनाम
مَن
जिसे
man
क्रिया
يَشَآءُ
वह चाहता है
yashāu
क्रिया
وَيَهْدِى
और मार्ग दिखाता है
wayahdī
सर्वनाम
مَن
जिसे
man
क्रिया
يَشَآءُ ۚ
वह चाहता है
yashāu
अव्यय
وَمَا
और नहीं
wamā
क्रिया
يَعْلَمُ
जानता
yaʿlamu
संज्ञा
جُنُودَ
सेनाओं को
junūda
संज्ञा
رَبِّكَ
आपके रब की
rabbika
अव्यय
إِلَّا
सिवाय
illā
सर्वनाम
هُوَ ۚ
वही
huwa
अव्यय
وَمَا
और नहीं
wamā
सर्वनाम
هِىَ
यह
hiya
अव्यय
إِلَّا
मगर
illā
संज्ञा
ذِكْرَىٰ
नसीहत / याद
dhik'rā
संज्ञा
لِلْبَشَرِ
मनुष्यों के लिए
lil'bashari
كَلَّا وَٱلْقَمَرِ
Kallā wal-qamar
हरगिज़ नहीं! शपथ है चंद्रमा की,
74:32
अव्यय
كَلَّا
हरगिज़ नहीं
kallā
संज्ञा
وَٱلْقَمَرِ
और चाँद की शपथ
wal-qamari
وَٱلَّيْلِ إِذْ أَدْبَرَ
Wal-layli idh adbar
और रात की जब वह पीठ फेर ले,
74:33
संज्ञा
وَٱلَّيْلِ
और रात की
wa-al-layli
अव्यय
إِذْ
जब
idh
क्रिया
أَدْبَرَ
वह बीत जाए
adbara
وَٱلصُّبْحِ إِذَآ أَسْفَرَ
Waṣ-ṣubḥi idhā asfar
और सुबह की जब वह रोशन हो जाए,
74:34
संज्ञा
وَٱلصُّبْحِ
और सुबह की
wal-ṣub'ḥi
अव्यय
إِذَآ
जब
idhā
क्रिया
أَسْفَرَ
वह रोशन हो
asfara
إِنَّهَا لَإِحْدَى ٱلْكُبَرِ
Innahā la-iḥdā l-kubar
बेशक वह (आग) बहुत बड़ी चीज़ों में से एक है,
74:35
अव्यय
إِنَّهَا
बेशक वह
innahā
संज्ञा
لَإِحْدَى
यक़ीनन एक है
la-iḥ'dā
संज्ञा
ٱلْكُبَرِ
बड़ी बलाओं में से
l-kubari
نَذِيرًۭا لِّلْبَشَرِ
Nadhīran lilbashar
मनुष्य के लिए सचेत करने वाली।
74:36
संज्ञा
نَذِيرًۭا
सचेत करने वाली
nadhīran
संज्ञा
لِّلْبَشَرِ
मनुष्यों के लिए
lil'bashari
لِمَن شَآءَ مِنكُمْ أَن يَتَقَدَّمَ أَوْ يَتَأَخَّرَ
Liman shāʾa minkum an yataqaddama aw yataʾakhkhar
तुममें से उस व्यक्ति के लिए जो आगे बढ़ना चाहे या पीछे रहना चाहे।
74:37
सर्वनाम
لِمَن
उसके लिए जो
liman
क्रिया
شَآءَ
चाहता है
shāa
अव्यय
مِنكُمْ
तुम में से
minkum
अव्यय
أَن
कि
an
क्रिया
يَتَقَدَّمَ
आगे बढ़े
yataqaddama
अव्यय
أَوْ
या
aw
क्रिया
يَتَأَخَّرَ
पीछे रह जाए
yata-akhara
كُلُّ نَفْسٍۭ بِمَا كَسَبَتْ رَهِينَةٌ
Kullu nafsin bimā kasabat rahīnah
प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्मों के बदले गिरवी (बंधक) है,
74:38
संज्ञा
كُلُّ
प्रत्येक / हर
kullu
संज्ञा
نَفْسٍۭ
प्राण / जीव
nafsin
अव्यय
بِمَا
उसके बदले जो
bimā
क्रिया
كَسَبَتْ
उसने कमाया
kasabat
संज्ञा
رَهِينَةٌ
बंधक / गिरवी है
rahīnatun
إِلَّآ أَصْحَـٰبَ ٱلْيَمِينِ
Illā aṣḥāba l-yamīn
सिवाय दाहिने हाथ वालों के,
74:39
अव्यय
إِلَّآ
मगर
illā
संज्ञा
أَصْحَـٰبَ
साथी (लोग)
aṣḥāba
संज्ञा
ٱلْيَمِينِ
दाहिने हाथ वाले
l-yamīni
فِى جَنَّـٰتٍۢ يَتَسَآءَلُونَ
Fī jannātin yatasāʾalūn
वे जन्नत के बाग़ों में (बैठे) पूछताछ कर रहे होंगे,
74:40
अव्यय
فِى
में
संज्ञा
جَنَّـٰتٍۢ
बाग़ों (स्वर्ग)
jannātin
क्रिया
يَتَسَآءَلُونَ
वे आपस में पूछेंगे
yatasāalūna
عَنِ ٱلْمُجْرِمِينَ
ʿAni l-mujrimīn
अपराधियों के बारे में,
74:41
अव्यय
عَنِ
बारे में
ʿani
संज्ञा
ٱلْمُجْرِمِينَ
अपराधियों के
l-muj'rimīna
مَا سَلَكَكُمْ فِى سَقَرَ
Mā salakakum fī saqar
"तुम्हें किस चीज़ ने सकर (नरक) में पहुँचा दिया?"
74:42
अव्यय
مَا
किस चीज़ ने
क्रिया
سَلَكَكُمْ
तुम्हें डाला
salakakum
अव्यय
فِى
में
संज्ञा
سَقَرَ
सकर (नरक)
saqara
قَالُوا۟ لَمْ نَكُ مِنَ ٱلْمُصَلِّينَ
Qālū lam naku mina l-muṣallīn
वे कहेंगे, "हम नमाज़ पढ़ने वालों में से न थे,
74:43
क्रिया
قَالُوا۟
वे कहेंगे
qālū
अव्यय
لَمْ
नहीं
lam
क्रिया
نَكُ
हम थे
naku
अव्यय
مِنَ
में से
mina
संज्ञा
ٱلْمُصَلِّينَ
नमाज़ पढ़ने वाले
l-muṣalīna
وَلَمْ نَكُ نُطْعِمُ ٱلْمِسْكِينَ
Wa lam naku nuṭʿimu l-miskīn
और हम मिसकीनों (दरिद्रों) को खाना नहीं खिलाते थे,
74:44
अव्यय
وَلَمْ
और नहीं
walam
क्रिया
نَكُ
हम थे
naku
क्रिया
نُطْعِمُ
खिलाते
nuṭ'ʿimu
संज्ञा
ٱلْمِسْكِينَ
मिसकीन (निर्धन) को
l-mis'kīna
وَكُنَّا نَخُوضُ مَعَ ٱلْخَآئِضِينَ
Wa kunnā nakhūḍu maʿa l-khāʾiḍīn
और हम व्यर्थ की बहस करने वालों के साथ बहस में पड़े रहते थे,
74:45
क्रिया
وَكُنَّا
और हम थे
wakunnā
क्रिया
نَخُوضُ
बेकार बातें करते
nakhūḍu
अव्यय
مَعَ
के साथ
maʿa
संज्ञा
ٱلْخَآئِضِينَ
व्यर्थ बातें करने वाले
l-khāiḍīna
وَكُنَّا نُكَذِّبُ بِيَوْمِ ٱلدِّينِ
Wa kunnā nukadhdhibu biyawmi d-dīn
और हम बदले के दिन (क़यामत) को झुठलाते थे,
74:46
क्रिया
وَكُنَّا
और हम थे
wakunnā
क्रिया
نُكَذِّبُ
झुठलाते थे
nukadhibu
संज्ञा
بِيَوْمِ
दिन को
biyawmi
संज्ञा
ٱلدِّينِ
प्रतिफल / न्याय के
l-dīni
حَتَّىٰٓ أَتَىٰنَا ٱلْيَقِينُ
Ḥattā atānā l-yaqīn
यहाँ तक कि हमें मौत (यकीन) आ गई।"
74:47
अव्यय
حَتَّىٰٓ
यहाँ तक कि
ḥattā
क्रिया
أَتَىٰنَا
आ पहुँची हम पर
atānā
संज्ञा
ٱلْيَقِينُ
निश्चित मौत
l-yaqīnu
فَمَا تَنفَعُهُمْ شَفَـٰعَةُ ٱلشَّـٰفِعِينَ
Famā tanfaʿuhum shafāʿatu sh-shāfiʿīn
तो सिफारिश करने वालों की सिफारिश उनके काम न आएगी।
74:48
अव्यय
فَمَا
तो नहीं
famā
क्रिया
تَنفَعُهُمْ
लाभ देगी उन्हें
tanfaʿuhum
संज्ञा
شَفَـٰعَةُ
सिफारिश
shafāʿatu
संज्ञा
ٱلشَّـٰفِعِينَ
सिफारिश करने वालों की
l-shāfiʿīna
فَمَا لَهُمْ عَنِ ٱلتَّذْكِرَةِ مُعْرِضِينَ
Famā lahum ʿani t-tadhkirati muʿ'riḍīn
उन्हें क्या हो गया है कि वे इस उपदेश से मुँह मोड़ रहे हैं?
74:49
अव्यय
فَمَا
तो क्या (है)
famā
अव्यय
لَهُمْ
उन्हें
lahum
अव्यय
عَنِ
से
ʿani
संज्ञा
ٱلتَّذْكِرَةِ
नसीहत (उपदेश)
l-tadhkirati
संज्ञा
مُعْرِضِينَ
वे विमुख हो रहे हैं
muʿ'riḍīna
كَأَنَّهُمْ حُمُرٌۭ مُّسْتَنفِرَةٌۭ
Ka-annahum ḥumurun mustanfirah
मानो वे बिदके हुए गदहे हों,
74:50
अव्यय
كَأَنَّهُمْ
जैसे कि वे
ka-annahum
संज्ञा
حُمُرٌۭ
गदहे
ḥumurun
संज्ञा
مُّسْتَنفِرَةٌۭ
बिदके हुए
mus'tanfiratun
فَرَّتْ مِن قَسْوَرَةٍۭ
Farrat min qaswarah
जो शेर से डरकर भागे हों।
74:51
क्रिया
فَرَّتْ
जो भाग निकले
farrat
अव्यय
مِن
से
min
संज्ञा
قَسْوَرَةٍۭ
एक शेर / शिकारी
qaswaratin
بَلْ يُرِيدُ كُلُّ ٱمْرِئٍۢ مِّنْهُمْ أَن يُؤْتَىٰ صُحُفًۭا مُّنَشَّرَةًۭ
Bal yurīdu kullu imri-in min'hum an yu'tā ṣuḥufan munashsharah
बल्कि उनमें से हर व्यक्ति यह चाहता है कि उसे खुले हुए पन्ने (आकाशीय ग्रंथ) दिए जाएँ।
74:52
अव्यय
بَلْ
बल्कि
bal
क्रिया
يُرِيدُ
वह चाहता है
yurīdu
संज्ञा
كُلُّ
हर
kullu
संज्ञा
ٱمْرِئٍۢ
व्यक्ति
im'ri-in
अव्यय
مِّنْهُمْ
उनमें से
min'hum
अव्यय
أَن
कि
an
क्रिया
يُؤْتَىٰ
उसे दिया जाए
yu'tā
संज्ञा
صُحُفًۭا
पन्ने (ग्रंथ)
ṣuḥufan
संज्ञा
مُّنَشَّرَةًۭ
खुले हुए
munasharatan
كَلَّا ۖ بَل لَّا يَخَافُونَ ٱلْـَٔاخِرَةَ
Kallā bal lā yakhāfūna l-ākhirah
कदापि नहीं! बल्कि वे आख़िरत (परलोक) से नहीं डरते।
74:53
अव्यय
كَلَّا ۖ
कभी नहीं
kallā
अव्यय
بَل
बल्कि
bal
अव्यय
لَّا
नहीं
क्रिया
يَخَافُونَ
वे डरते
yakhāfūna
संज्ञा
ٱلْـَٔاخِرَةَ
परलोक से
l-ākhirata
كَلَّآ إِنَّهُۥ تَذْكِرَةٌۭ
Kallā innahu tadhkirah
कदापि नहीं! निश्चय ही यह (क़ुरआन) एक नसीहत है।
74:54
अव्यय
كَلَّآ
कभी नहीं
kallā
अव्यय
إِنَّهُۥ
बेशक यह
innahu
संज्ञा
تَذْكِرَةٌۭ
एक नसीहत (उपदेश) है
tadhkiratun
فَمَن شَآءَ ذَكَرَهُۥ
Faman shāʾa dhakarah
तो जो चाहे, इसे याद रखे।
74:55
अव्यय
فَمَن
तो जो कोई
faman
क्रिया
شَآءَ
चाहे
shāa
क्रिया
ذَكَرَهُۥ
इसे याद रखे
dhakarahu
وَمَا يَذْكُرُونَ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُ ۚ هُوَ أَهْلُ ٱلتَّقْوَىٰ وَأَهْلُ ٱلْمَغْفِرَةِ
Wa mā yadhkurūna illā an yashāʾa Allāhu huwa ahlu t-taqwā wa ahlu l-maghfirah
और वे याद नहीं रखेंगे, सिवाय इसके कि अल्लाह चाहे। वही इस योग्य है कि उससे डरा जाए और वही क्षमा का स्वामी है।
74:56
अव्यय
وَمَا
और नहीं
wamā
क्रिया
يَذْكُرُونَ
वे याद रखेंगे
yadhkurūna
अव्यय
إِلَّآ
सिवाय
illā
अव्यय
أَن
कि
an
क्रिया
يَشَآءَ
चाहे
yashāa
संज्ञा
ٱللَّهُ ۚ
अल्लाह
l-lahu
सर्वनाम
هُوَ
वही
huwa
संज्ञा
أَهْلُ
योग्य / स्वामी है
ahlu
संज्ञा
ٱلتَّقْوَىٰ
डरने के
l-taqwā
संज्ञा
وَأَهْلُ
और स्वामी है
wa-ahlu
संज्ञा
ٱلْمَغْفِرَةِ
माफ़ करने का
l-maghfirati

समापन प्रार्थना (दुआ)

या अल्लाह, हम तेरा गहरा आभार व्यक्त करते हैं कि तूने हमें सूरह अल-मुद्दस्सिर शब्द-दर-शब्द का अध्ययन पूरा करने की तौफीक अता की।

ऐ हमारे रब, हमें तौफीक दे कि हम तेरी बड़ाई बयान करें और तेरे दीन का संदेश दूसरों तक पहुंचाएं। हमारे कपड़ों, हमारे दिलों और हमारे कर्मों को हर प्रकार की गंदगी और पापों से पवित्र रख। हमें उन लोगों में से न बना जो सच्चाई को जानकर भी अहंकार के कारण उसे झुठलाते हैं। ऐ अल्लाह, हमें ‘सकर’ की भयानक आग और उसके अज़ाब से महफूज़ रख, और हमें उन नमाज़ियों में शामिल कर जो गरीबों को खाना खिलाते हैं और कयामत के दिन पर सच्चा ईमान रखते हैं।

इस शब्द-दर-शब्द अध्ययन को हमारे दिलों के लिए शिफा (उपचार) बना और इसे हमारे लिए एक ऐसा प्रकाश बना जो हमारे जीवन के हर कदम का मार्गदर्शन करे। आमीन।

सूरह अल-मुद्दस्सिर का शब्द-दर-शब्द विश्लेषण कैसे काम करता है

मानक अनुवादों के विपरीत जो आपको एक वाक्य का सामान्य अर्थ देते हैं, यह पृष्ठ एक अद्वितीय “पूर्ण संदर्भ” विधि का उपयोग करता है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए डेटा को दो अलग-अलग परतों में प्रदर्शित करते हैं ताकि आप सूरह अल-मुद्दस्सिर के प्रवाह को कभी न खोएं:

  • शीर्ष पंक्ति (संदर्भ): सूरह के समग्र संदेश और कथा को समझने के लिए पूर्ण अरबी आयत के साथ पूर्ण हिंदी अनुवाद पढ़ें।
  • निचली पंक्ति (विश्लेषण): अनुक्रम में हर एक शब्द का सटीक अर्थ, वर्तनी और मूल प्रकार देखने के लिए शब्द-दर-शब्द विवरण में उतरें।

सूरह अल-मुद्दस्सिर के लिए रंगकोडित व्याकरण गाइड को समझना

पढ़ते समय सहज रूप से कुरान की अरबी व्याकरण (नह्व और सर्फ) सीखें। यह संसाधन जटिल पाठ्यपुस्तक नियमों को तत्काल दृश्य संकेतों से बदल देता है। सूरह अल-मुद्दस्सिर का प्रत्येक शब्द एक इंटरैक्टिव “व्याकरण कार्ड” के रूप में प्रस्तुत किया गया है जिसमें तत्काल रंग-कोडिंग की सुविधा है:

  • संज्ञा (इस्म): नीले रंग में चिह्नित (नाम, स्थान, वस्तुएं)।
  • क्रिया (फेल): लाल रंग में चिह्नित (कार्य, काल)।
  • अव्यय/कण (हर्फ): हरे रंग में चिह्नित (पूर्वसर्ग, जोड़ने वाले शब्द)।

यह दृश्य सहायता आपको आयतों के भीतर वाक्य संरचनाओं और शब्दों के भेदों को तुरंत पहचानने में मदद करती है, जिससे तेजी से याद रखने और समझने में सहायता मिलती है।

सूरह अल-मुद्दस्सिर का लिप्यंतरण और उच्चारण

पढ़ना शुरू करने के लिए आपको अरबी लिपि पढ़ने में धाराप्रवाह होने की आवश्यकता नहीं চিহ্ন. हर शब्द कार्ड पर शामिल तजवीद-अनुकूल लिप्यंतरण के साथ अपने उच्चारण को सही करें। यह ध्वन्यात्मक गाइड आपको सूरह अल-मुद्दस्सिर में चुनौतीपूर्ण शब्दों का सही उच्चारण करने में मदद करती है, ध्वनि को सीधे अर्थ से जोड़ती है।

कुरान के आँकड़े: सूरह अल-मुद्दस्सिर के माध्यम से शब्दावली बनाना

कई छात्र कुरान की विशालता से अभिभूत महसूस करते हैं, लेकिन संख्याएं साबित करती हैं कि यह प्राप्त करने योग्य है। कुरान लगभग 77,797 कुल शब्दों से बना है, फिर भी शब्दावली अत्यधिक दोहराव वाली है।

  • कुल अद्वितीय शब्द: लगभग 14,870।
  • वास्तविक शब्द आधार: केवल ~2,000 शब्द।

सूरह अल-मुद्दस्सिर को शब्द-दर-शब्द पढ़कर, आप इस अध्याय में पाए जाने वाले आवश्यक शब्दों को सीख रहे हैं। चूंकि ये शब्द पूरे कुरान में बार-बार दोहराए जाते हैं, इसलिए इन आयतों में शब्दावली में महारत हासिल करना सीधे पूरी पवित्र पुस्तक को समझने में योगदान देता है।

सूरह अल-मुद्दस्सिर के साथ अपनी सलाह (नमाज़) को बढ़ाएं

पांच दैनिक नमाज़ों के दौरान, एक मुस्लिम औसतन 200-250 अरबी शब्दों का पाठ करता है और दोहराता है। यदि इन शब्दों को समझा नहीं जाता है, तो मन अक्सर भटक जाता है। सूरह अल-मुद्दस्सिर को शब्द-दर-शब्द पढ़ना आपको वास्तविक समय में इस शब्दावली को पहचानने में मदद करता है। जब आप प्रार्थना के लिए खड़े होते हैं और इस सूरह की आयतों का पाठ करते हैं, तो आप आखिरकार समझ पाएंगे कि आप अपने निर्माता से क्या कह रहे हैं, जिससे यह प्राप्त होगा:

  1. खुशू (एकाग्रता): सलाह ۔
  2. गुणवत्ता: इबादत की उच्च आध्यात्मिक गुणवत्ता।
  3. जुड़ाव: पाठ (तिलावत) ۔

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