सूरह अस-सफ़ शब्द-दर-शब्द हिंदी | रंगकोडित व्याकरण कार्ड, अनुवाद और तजवीद

हिंदी में सूरह अस-सफ़ (पंक्तियाँ) का शब्द-दर-शब्द अध्ययन करें। यह अध्याय इस बात पर ज़ोर देता है कि मुसलमानों की कथनी और करनी एक समान होनी चाहिए, क्योंकि जो कहा जाए उसे न करना अल्लाह की नज़र में बहुत नापसंद है। इसमें अल्लाह की राह में एक मजबूत दीवार की तरह कतारबद्ध होकर संघर्ष करने वालों की प्रशंसा की गई है, और हज़रत ईसा (अ.स) द्वारा पैगंबर मुहम्मद (स.अ.व) के आगमन की भविष्यवाणी का भी उल्लेख है। यह इंटरैक्टिव अध्ययन गाइड रंग-कोडित व्याकरण कार्ड प्रदान करती है, जिससे पाठकों को संज्ञाओं, क्रियाओं और अव्ययों को स्पष्ट रूप से पहचानने में मदद मिलती है।

In the name of God
संज्ञा (Sangya)
क्रिया (Kriya)
अव्यय (Avyay)
سَبَّحَ لِلَّهِ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ ۖ وَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ
sabbaḥa lillahi mā fī l-samāwāti wamā fī l-arḍi wahuwa l-ʿazīzu l-ḥakīmu
आकाशों और धरती में जो कुछ भी है, सब अल्लाह की तसबीह (महिमामय गुणगान) कर रहे हैं। और वही प्रभुत्वशाली, अत्यन्त तत्वदर्शी है।
61:1
क्रिया
سَبَّحَ
गुणगान किया
sabbaḥa
संज्ञा
لِلَّهِ
अल्लाह का
lillahi
सर्वनाम
مَا
जो कुछ
अव्यय
فِى
आकाशों में है
संज्ञा
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आकाशों
l-samāwāti
सर्वनाम
وَمَا
और जो कुछ
wamā
अव्यय
فِى
धरती में है
संज्ञा
ٱلْأَرْضِ ۖ
धरती
l-arḍi
सर्वनाम
وَهُوَ
और वही
wahuwa
संज्ञा
ٱلْعَزِيزُ
सब पर प्रबल
l-ʿazīzu
संज्ञा
ٱلْحَكِيمُ
तत्वदर्शी है
l-ḥakīmu
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لِمَ تَقُولُونَ مَا لَا تَفْعَلُونَ
yāayyuhā alladhīna āmanū lima taqūlūna mā lā tafʿalūna
ऐ ईमान लानेवालो! तुम वह बात क्यों कहते हो जो तुम करते नहीं?
61:2
अव्यय
يَـٰٓأَيُّهَا
yāayyuhā
सर्वनाम
ٱلَّذِينَ
वो लोग जो
alladhīna
क्रिया
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
āmanū
अव्यय
لِمَ
क्यों
lima
क्रिया
تَقُولُونَ
तुम कहते हो
taqūlūna
सर्वनाम
مَا
जो
अव्यय
لَا
नहीं
क्रिया
تَفْعَلُونَ
तुम करते
tafʿalūna
كَبُرَ مَقْتًا عِندَ ٱللَّهِ أَن تَقُولُوا۟ مَا لَا تَفْعَلُونَ
kabura maqtan ʿinda l-lahi an taqūlū mā lā tafʿalūna
अल्लाह के निकट यह बात अत्यन्त अप्रिय है कि तुम वह बात कहो जो तुम स्वयं न करो।
61:3
क्रिया
كَبُرَ
बहुत बड़ी है
kabura
संज्ञा
مَقْتًا
नफ़रत/अप्रिय
maqtan
संज्ञा
عِندَ
पास/निकट
ʿinda
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह के
l-lahi
अव्यय
أَن
यह कि
an
क्रिया
تَقُولُوا۟
तुम कहो
taqūlū
सर्वनाम
مَا
जो
अव्यय
لَا
नहीं
क्रिया
تَفْعَلُونَ
तुम करते
tafʿalūna
إِنَّ ٱللَّهَ يُحِبُّ ٱلَّذِينَ يُقَـٰتِلُونَ فِى سَبِيلِهِۦ صَفًّۭا كَأَنَّهُم بُنْيَـٰنٌۭ مَّرْصُوصٌۭ
inna l-laha yuḥibbu alladhīna yuqātilūna fī sabīlihi ṣaffan ka-annahum bun'yānun marṣūṣun
निश्चय ही अल्लाह उन लोगों से प्रेम करता है जो उसके मार्ग में एक ऐसी पंक्तिबद्ध होकर लड़ते हैं, मानो वे कोई सीसा पिलाई हुई दीवार हों।
61:4
अव्यय
إِنَّ
निश्चय ही
inna
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह
l-laha
क्रिया
يُحِبُّ
प्रेम करता है
yuḥibbu
सर्वनाम
ٱلَّذِينَ
उन लोगों से जो
alladhīna
क्रिया
يُقَـٰتِلُونَ
लड़ते हैं
yuqātilūna
अव्यय
فِى
में
संज्ञा
سَبِيلِهِۦ
उसके मार्ग
sabīlihi
संज्ञा
صَفًّۭا
पंक्तिबद्ध
ṣaffan
अव्यय
كَأَنَّهُم
मानो वे
ka-annahum
संज्ञा
بُنْيَـٰنٌۭ
दीवार/इमारत
bun'yānun
संज्ञा
مَّرْصُوصٌۭ
सीसा पिलाई
marṣūṣun
وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِۦ يَـٰقَوْمِ لِمَ تُؤْذُونَنِى وَقَد تَّعْلَمُونَ أَنِّى رَسُولُ ٱللَّهِ إِلَيْكُمْ ۖ فَلَمَّا زَاغُوٓا۟ أَزَاغَ ٱللَّهُ قُلُوبَهُمْ ۚ وَٱللَّهُ لَا يَهْدِى ٱلْقَوْمَ ٱلْفَـٰسِقِينَ
wa-idh qāla mūsā liqawmihi yāqawmi lima tu'dhūnanī waqad taʿlamūna annī rasūlu l-lahi ilaykum falammā zāghū azāgha l-lahu qulūbahum wal-lahu lā yahdī l-qawma l-fāsiqīna
और याद करो जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा, 'ऐ मेरी क़ौम के लोगो! तुम मुझे क्यों सताते हो जबकि तुम जानते हो कि मैं तुम्हारी ओर अल्लाह का भेजा हुआ रसूल हूँ?' फिर जब उन्होंने टेढ़ इख़्तियार की तो अल्लाह ने उनके दिलों को टेढ़ा कर दिया। और अल्लाह नाफ़रमान लोगों को मार्ग नहीं दिखाता।
61:5
अव्यय
وَإِذْ
और जब
wa-idh
क्रिया
قَالَ
कहा
qāla
संज्ञा
مُوسَىٰ
मूसा ने
mūsā
संज्ञा
لِقَوْمِهِۦ
अपनी क़ौम से
liqawmihi
संज्ञा
يَـٰقَوْمِ
ऐ मेरी क़ौम
yāqawmi
अव्यय
لِمَ
क्यों
lima
क्रिया
تُؤْذُونَنِى
सताते हो मुझे
tu'dhūnanī
अव्यय
وَقَد
जबकि वास्तव में
waqad
क्रिया
تَّعْلَمُونَ
तुम जानते हो
taʿlamūna
अव्यय
أَنِّى
कि मैं
annī
संज्ञा
رَسُولُ
रसूल हूँ
rasūlu
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह का
l-lahi
अव्यय
إِلَيْكُمْ ۖ
तुम्हारी ओर
ilaykum
अव्यय
فَلَمَّا
फिर जब
falammā
क्रिया
زَاغُوٓا۟
वे टेढ़े हो गए
zāghū
क्रिया
أَزَاغَ
टेढ़ा कर दिया
azāgha
संज्ञा
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
l-lahu
संज्ञा
قُلُوبَهُمْ ۚ
उनके दिलों को
qulūbahum
संज्ञा
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
अव्यय
لَا
नहीं
क्रिया
يَهْدِى
मार्ग दिखाता
yahdī
संज्ञा
ٱلْقَوْمَ
लोगों को
l-qawma
संज्ञा
ٱلْفَـٰسِقِينَ
नाफ़रमान
l-fāsiqīna
وَإِذْ قَالَ عِيسَى ٱبْنُ مَرْيَمَ يَـٰبَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ إِنِّى رَسُولُ ٱللَّهِ إِلَيْكُم مُّصَدِّقًۭا لِّمَا بَيْنَ يَدَىَّ مِنَ ٱلتَّوْرَىٰةِ وَمُبَشِّرًۢا بِرَسُولٍۢ يَأْتِى مِنۢ بَعْدِى ٱسْمُهُۥٓ أَحْمَدُ ۖ فَلَمَّا جَآءَهُم بِٱلْبَيِّنَـٰتِ قَالُوا۟ هَـٰذَا سِحْرٌۭ مُّبِينٌۭ
wa-idh qāla ʿīsā ub'nu maryama yābanī is'rāīla innī rasūlu l-lahi ilaykum muṣaddiqan limā bayna yadayya mina l-tawrāti wamubashiran birasūlin yatī min baʿdī us'muhu aḥmadu falammā jāahum bil-bayināti qālū hādhā siḥ'run mubīnun
और याद करो जब मरयम के बेटे ईसा ने कहा, 'ऐ इसराईल की सन्तान! मैं तुम्हारी ओर अल्लाह का रसूल हूँ, अपने से पहले की (किताब) तौरात की पुष्टि करनेवाला हूँ और एक रसूल की शुभ सूचना देनेवाला हूँ जो मेरे बाद आएगा, उसका नाम अहमद होगा।' फिर जब वह उनके पास स्पष्ट प्रमाणों के साथ आया तो उन्होंने कहा, 'यह तो खुला जादू है।'
61:6
अव्यय
وَإِذْ
और जब
wa-idh
क्रिया
قَالَ
कहा
qāla
संज्ञा
عِيسَى
ईसा
ʿīsā
संज्ञा
ٱبْنُ
बेटे
ub'nu
संज्ञा
مَرْيَمَ
मरयम के
maryama
संज्ञा
يَـٰبَنِىٓ
ऐ सन्तान
yābanī
संज्ञा
إِسْرَٰٓءِيلَ
इसराईल की
is'rāīla
अव्यय
إِنِّى
मैं (हूँ)
innī
संज्ञा
رَسُولُ
रसूल
rasūlu
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह का
l-lahi
अव्यय
إِلَيْكُم
तुम्हारी ओर
ilaykum
संज्ञा
مُّصَدِّقًۭا
पुष्टि करनेवाला
muṣaddiqan
अव्यय
لِّمَا
उसकी जो
limā
संज्ञा
بَيْنَ
पहले है
bayna
संज्ञा
يَدَىَّ
मेरे सामने
yadayya
अव्यय
مِنَ
में से
mina
संज्ञा
ٱلتَّوْرَىٰةِ
तौरात की
l-tawrāti
संज्ञा
وَمُبَشِّرًۢا
शुभ सूचना देनेवाला
wamubashiran
संज्ञा
بِرَسُولٍۢ
एक रसूल की
birasūlin
क्रिया
يَأْتِى
जो आएगा
yatī
अव्यय
مِنۢ
से
min
संज्ञा
بَعْدِى
मेरे बाद
baʿdī
संज्ञा
ٱسْمُهُۥٓ
उसका नाम
us'muhu
संज्ञा
أَحْمَدُ ۖ
अहमद (होगा)
aḥmadu
अव्यय
فَلَمَّا
फिर जब
falammā
क्रिया
جَآءَهُم
वह उनके पास आया
jāahum
संज्ञा
بِٱلْبَيِّنَـٰتِ
स्पष्ट प्रमाणों के साथ
bil-bayināti
क्रिया
قَالُوا۟
उन्होंने कहा
qālū
सर्वनाम
هَـٰذَا
यह (तो)
hādhā
संज्ञा
سِحْرٌۭ
जादू है
siḥ'run
संज्ञा
مُّبِينٌۭ
खुला/स्पष्ट
mubīnun
وَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ ٱفْتَرَىٰ عَلَى ٱللَّهِ ٱلْكَذِبَ وَهُوَ يُدْعَىٰٓ إِلَى ٱلْإِسْلَـٰمِ ۚ وَٱللَّهُ لَا يَهْدِى ٱلْقَوْمَ ٱلظَّـٰلِمِينَ
waman aẓlamu mimmani if'tarā ʿalā l-lahi l-kadhiba wahuwa yud'ʿā ilā l-is'lāmi wal-lahu lā yahdī l-qawma l-ẓālimīna
और उस व्यक्ति से बढ़कर अन्यायी कौन होगा जो अल्लाह पर झूठ घड़े, जबकि उसे इस्लाम की ओर बुलाया जा रहा हो? और अल्लाह अन्यायी लोगों को मार्ग नहीं दिखाता।
61:7
सर्वनाम
وَمَنْ
और कौन
waman
संज्ञा
أَظْلَمُ
अधिक अन्यायी
aẓlamu
सर्वनाम
مِمَّنِ
उससे जो
mimmani
क्रिया
ٱفْتَرَىٰ
झूठ घड़े
if'tarā
अव्यय
عَلَى
ऊपर/पर
ʿalā
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह
l-lahi
संज्ञा
ٱلْكَذِبَ
झूठ
l-kadhiba
सर्वनाम
وَهُوَ
जबकि उसे
wahuwa
क्रिया
يُدْعَىٰٓ
बुलाया जा रहा हो
yud'ʿā
अव्यय
إِلَى
ओर/तरफ
ilā
संज्ञा
ٱلْإِسْلَـٰمِ ۚ
इस्लाम की
l-is'lāmi
संज्ञा
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
अव्यय
لَا
नहीं
क्रिया
يَهْدِى
मार्ग दिखाता
yahdī
संज्ञा
ٱلْقَوْمَ
लोगों को
l-qawma
संज्ञा
ٱلظَّـٰلِمِينَ
अन्यायी/ज़ालिम
l-ẓālimīna
يُرِيدُونَ لِيُطْفِـُٔوا۟ نُورَ ٱللَّهِ بِأَفْوَٰهِهِمْ وَٱللَّهُ مُتِمُّ نُورِهِۦ وَلَوْ كَرِهَ ٱلْكَـٰفِرُونَ
yurīdūna liyuṭ'fiū nūra l-lahi bi-afwāhihim wal-lahu mutimmu nūrihi walaw kariha l-kāfirūna
वे चाहते हैं कि अल्लाह के प्रकाश को अपने मुँह (की फूँकों) से बुझा दें, जबकि अल्लाह अपने प्रकाश को पूरा करके रहेगा, चाहे काफ़िरों को बुरा ही क्यों न लगे।
61:8
क्रिया
يُرِيدُونَ
वे चाहते हैं
yurīdūna
क्रिया
لِيُطْفِـُٔوا۟
कि वे बुझा दें
liyuṭ'fiū
संज्ञा
نُورَ
प्रकाश (को)
nūra
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह के
l-lahi
संज्ञा
بِأَفْوَٰهِهِمْ
अपने मुँह से
bi-afwāhihim
संज्ञा
وَٱللَّهُ
जबकि अल्लाह
wal-lahu
संज्ञा
مُتِمُّ
पूरा करनेवाला है
mutimmu
संज्ञा
نُورِهِۦ
अपने प्रकाश को
nūrihi
अव्यय
وَلَوْ
चाहे/भले ही
walaw
क्रिया
كَرِهَ
बुरा लगे
kariha
संज्ञा
ٱلْكَـٰفِرُونَ
काफ़िरों को
l-kāfirūna
هُوَ ٱلَّذِىٓ أَرْسَلَ رَسُولَهُۥ بِٱلْهُدَىٰ وَدِينِ ٱلْحَقِّ لِيُظْهِرَهُۥ عَلَى ٱلدِّينِ كُلِّهِۦ وَلَوْ كَرِهَ ٱلْمُشْرِكُونَ
huwa alladhī arsala rasūlahu bil-hudā wadīni l-ḥaqi liyuẓ'hirahu ʿalā l-dīni kullihi walaw kariha l-mush'rikūna
वही है जिसने अपने रसूल को मार्गदर्शन और सत्य धर्म के साथ भेजा ताकि उसे हर दीन (धर्म) पर प्रभावी कर दे, चाहे मुशरिकों को बुरा ही क्यों न लगे।
61:9
सर्वनाम
هُوَ
वही है
huwa
सर्वनाम
ٱلَّذِىٓ
जिसने
alladhī
क्रिया
أَرْسَلَ
भेजा
arsala
संज्ञा
رَسُولَهُۥ
अपने रसूल को
rasūlahu
संज्ञा
بِٱلْهُدَىٰ
हिदायत/मार्गदर्शन के साथ
bil-hudā
संज्ञा
وَدِينِ
और धर्म (के साथ)
wadīni
संज्ञा
ٱلْحَقِّ
सत्य
l-ḥaqi
क्रिया
لِيُظْهِرَهُۥ
ताकि उसे प्रभावी कर दे
liyuẓ'hirahu
अव्यय
عَلَى
पर
ʿalā
संज्ञा
ٱلدِّينِ
धर्म
l-dīni
संज्ञा
كُلِّهِۦ
पूरे के पूरे
kullihi
अव्यय
وَلَوْ
चाहे/भले ही
walaw
क्रिया
كَرِهَ
बुरा लगे
kariha
संज्ञा
ٱلْمُشْرِكُونَ
मुशरिकों को
l-mush'rikūna
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ هَلْ أَدُلُّكُمْ عَلَىٰ تِجَـٰرَةٍۢ تُنجِيكُم مِّنْ عَذَابٍ أَلِيمٍۢ
yāayyuhā alladhīna āmanū hal adullukum ʿalā tijāratin tunjīkum min ʿadhābin alīmin
ऐ ईमान लानेवालो! क्या मैं तुम्हें ऐसा व्यापार बताऊँ जो तुम्हें दुखद यातना से बचा ले?
61:10
अव्यय
يَـٰٓأَيُّهَا
yāayyuhā
सर्वनाम
ٱلَّذِينَ
वो लोग जो
alladhīna
क्रिया
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
āmanū
अव्यय
هَلْ
क्या
hal
क्रिया
أَدُلُّكُمْ
मैं तुम्हें बताऊँ
adullukum
अव्यय
عَلَىٰ
की ओर
ʿalā
संज्ञा
تِجَـٰرَةٍۢ
एक व्यापार
tijāratin
क्रिया
تُنجِيكُم
जो तुम्हें बचा ले
tunjīkum
अव्यय
مِّنْ
से
min
संज्ञा
عَذَابٍ
एक यातना/सज़ा
ʿadhābin
संज्ञा
أَلِيمٍۢ
दुखद/दर्दनाक
alīmin
تُؤْمِنُونَ بِٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ وَتُجَـٰهِدُونَ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ بِأَمْوَٰلِكُمْ وَأَنفُسِكُمْ ۚ ذَٰلِكُمْ خَيْرٌۭ لَّكُمْ إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
tu'minūna bil-lahi warasūlihi watujāhidūna fī sabīli l-lahi bi-amwālikum wa-anfusikum dhālikum khayrun lakum in kuntum taʿlamūna
तुम अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाओ और अल्लाह के मार्ग में अपने माल और अपनी जानों से जिहाद करो। यही तुम्हारे लिए उत्तम है यदि तुम जानो।
61:11
क्रिया
تُؤْمِنُونَ
तुम ईमान लाओ
tu'minūna
संज्ञा
بِٱللَّهِ
अल्लाह पर
bil-lahi
संज्ञा
وَرَسُولِهِۦ
और उसके रसूल पर
warasūlihi
क्रिया
وَتُجَـٰهِدُونَ
और जिहाद करो
watujāhidūna
अव्यय
فِى
में
संज्ञा
سَبِيلِ
मार्ग
sabīli
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह के
l-lahi
संज्ञा
بِأَمْوَٰلِكُمْ
अपने माल के साथ
bi-amwālikum
संज्ञा
وَأَنفُسِكُمْ ۚ
और अपनी जानों के
wa-anfusikum
सर्वनाम
ذَٰلِكُمْ
यही
dhālikum
संज्ञा
خَيْرٌۭ
उत्तम है
khayrun
अव्यय
لَّكُمْ
तुम्हारे लिए
lakum
अव्यय
إِن
यदि
in
क्रिया
كُنتُمْ
तुम
kuntum
क्रिया
تَعْلَمُونَ
जानते हो
taʿlamūna
يَغْفِرْ لَكُمْ ذُنُوبَكُمْ وَيُدْخِلْكُمْ جَنَّـٰتٍۢ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ وَمَسَـٰكِنَ طَيِّبَةًۭ فِى جَنَّـٰتِ عَدْنٍۢ ۚ ذَٰلِكَ ٱلْفَوْزُ ٱلْعَظِيمُ
yaghfir lakum dhunūbakum wayud'khil'kum jannātin tajrī min taḥtihā l-anhāru wamasākina ṭayyibatan fī jannāti ʿadnin dhālika l-fawzu l-ʿaẓīmu
वह तुम्हारे गुनाह माफ़ कर देगा और तुम्हें ऐसे बाग़ों में प्रवेश देगा जिनके नीचे नहरें बह रही होंगी, और शाश्वत रहने के बाग़ों (अदन) में उत्तम घर प्रदान करेगा। यही बड़ी सफलता है।
61:12
क्रिया
يَغْفِرْ
वह माफ़ कर देगा
yaghfir
अव्यय
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
lakum
संज्ञा
ذُنُوبَكُمْ
तुम्हारे गुनाह
dhunūbakum
क्रिया
وَيُدْخِلْكُمْ
और तुम्हें दाखिल करेगा
wayud'khil'kum
संज्ञा
جَنَّـٰتٍۢ
बाग़ों में
jannātin
क्रिया
تَجْرِى
बहती होंगी
tajrī
अव्यय
مِن
से
min
संज्ञा
تَحْتِهَا
उनके नीचे
taḥtihā
संज्ञा
ٱلْأَنْهَـٰرُ
नहरें
l-anhāru
संज्ञा
وَمَسَـٰكِنَ
और घरों में
wamasākina
संज्ञा
طَيِّبَةًۭ
पाकीज़ा/उत्तम
ṭayyibatan
अव्यय
فِى
में
संज्ञा
جَنَّـٰتِ
बाग़ों
jannāti
संज्ञा
عَدْنٍۢ ۚ
अदन (सदा रहने के)
ʿadnin
सर्वनाम
ذَٰلِكَ
यही
dhālika
संज्ञा
ٱلْفَوْزُ
सफलता है
l-fawzu
संज्ञा
ٱلْعَظِيمُ
बहुत बड़ी
l-ʿaẓīmu
وَأُخْرَىٰ تُحِبُّونَهَا ۖ نَصْرٌۭ مِّنَ ٱللَّهِ وَفَتْحٌۭ قَرِيبٌۭ ۗ وَبَشِّرِ ٱلْمُؤْمِنِينَ
wa-ukh'rā tuḥibbūnahā naṣrun mina l-lahi wafatḥun qarībun wabashiri l-mu'minīna
और वह तुम्हें एक और चीज़ भी देगा जिसे तुम चाहते हो—अल्लाह की ओर से सहायता और निकट आनेवाली विजय। और ईमानवालों को शुभ सूचना दे दो।
61:13
संज्ञा
وَأُخْرَىٰ
और दूसरी (चीज़)
wa-ukh'rā
क्रिया
تُحِبُّونَهَا ۖ
जिसे तुम चाहते हो
tuḥibbūnahā
संज्ञा
نَصْرٌۭ
मदद/सहायता
naṣrun
अव्यय
مِّنَ
से
mina
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह की
l-lahi
संज्ञा
وَفَتْحٌۭ
और विजय
wafatḥun
संज्ञा
قَرِيبٌۭ ۗ
निकट/जल्द
qarībun
क्रिया
وَبَشِّرِ
और शुभ सूचना दें
wabashiri
संज्ञा
ٱلْمُؤْمِنِينَ
ईमान वालों को
l-mu'minīna
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ كُونُوٓا۟ أَنصَارَ ٱللَّهِ كَمَا قَالَ عِيسَى ٱبْنُ مَرْيَمَ لِلْحَوَارِيِّـۧنَ مَنْ أَنصَارِىٓ إِلَى ٱللَّهِ ۖ قَالَ ٱلْحَوَارِيُّونَ نَحْنُ أَنصَارُ ٱللَّهِ ۖ فَـَٔامَنَت طَّآئِفَةٌۭ مِّنۢ بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ وَكَفَرَت طَّآئِفَةٌۭ ۖ فَأَيَّدْنَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ عَلَىٰ عَدُوِّهِمْ فَأَصْبَحُوا۟ ظَـٰهِرِينَ
yāayyuhā alladhīna āmanū kūnū anṣāra l-lahi kamā qāla ʿīsā ub'nu maryama lil'ḥawāriyyīna man anṣārī ilā l-lahi qāla l-ḥawāriyūna naḥnu anṣāru l-lahi faāmanat ṭāifatun min banī is'rāīla wakafarat ṭāifatun fa-ayyadnā alladhīna āmanū ʿalā ʿaduwwihim fa-aṣbaḥū ẓāhirīna
ऐ ईमान लानेवालो! अल्लाह के सहायक बनो, जैसा कि मरयम के बेटे ईसा ने हवारियों (शिष्यों) से कहा था, 'कौन है अल्लाह की ओर (बुलाने) में मेरा सहायक?' हवारियों ने कहा, 'हम अल्लाह के सहायक हैं।' फिर बनी इसराईल का एक गिरोह ईमान लाया और एक गिरोह ने इनकार किया। तो हमने उन लोगों की सहायता की जो ईमान लाए थे, उनके शत्रुओं के मुक़ाबले में, तो वे ही विजयी होकर रहे।
61:14
अव्यय
يَـٰٓأَيُّهَا
yāayyuhā
सर्वनाम
ٱلَّذِينَ
वो लोग जो
alladhīna
क्रिया
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
āmanū
क्रिया
كُونُوٓا۟
हो जाओ/बनो
kūnū
संज्ञा
أَنصَارَ
सहायक
anṣāra
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह के
l-lahi
अव्यय
كَمَا
जैसा कि
kamā
क्रिया
قَالَ
कहा
qāla
संज्ञा
عِيسَى
ईसा
ʿīsā
संज्ञा
ٱبْنُ
बेटे
ub'nu
संज्ञा
مَرْيَمَ
मरयम के
maryama
संज्ञा
لِلْحَوَارِيِّـۧنَ
हवारियों से
lil'ḥawāriyyīna
सर्वनाम
مَنْ
कौन
man
संज्ञा
أَنصَارِىٓ
मेरे सहायक
anṣārī
अव्यय
إِلَى
अल्लाह की ओर
ilā
संज्ञा
ٱللَّهِ ۖ
अल्लाह
l-lahi
क्रिया
قَالَ
कहा
qāla
संज्ञा
ٱلْحَوَارِيُّونَ
हवारियों ने
l-ḥawāriyūna
सर्वनाम
نَحْنُ
हम (हैं)
naḥnu
संज्ञा
أَنصَارُ
सहायक
anṣāru
संज्ञा
ٱللَّهِ ۖ
अल्लाह के
l-lahi
क्रिया
فَـَٔامَنَت
फिर ईमान लाया
faāmanat
संज्ञा
طَّآئِفَةٌۭ
एक गिरोह/समूह
ṭāifatun
अव्यय
مِّنۢ
में से
min
संज्ञा
بَنِىٓ
सन्तान
banī
संज्ञा
إِسْرَٰٓءِيلَ
इसराईल की
is'rāīla
क्रिया
وَكَفَرَت
और इनकार किया
wakafarat
संज्ञा
طَّآئِفَةٌۭ ۖ
एक गिरोह ने
ṭāifatun
क्रिया
فَأَيَّدْنَا
तो हमने मदद की
fa-ayyadnā
सर्वनाम
ٱلَّذِينَ
उन लोगों की जो
alladhīna
क्रिया
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए थे
āmanū
अव्यय
عَلَىٰ
के मुक़ाबले में
ʿalā
संज्ञा
عَدُوِّهِمْ
उनके शत्रुओं
ʿaduwwihim
क्रिया
فَأَصْبَحُوا۟
तो वे हो गए
fa-aṣbaḥū
संज्ञा
ظَـٰهِرِينَ
विजयी/प्रबल
ẓāhirīna

समापन प्रार्थना (दुआ)

या अल्लाह, हम तेरा गहरा आभार व्यक्त करते हैं कि तूने हमें सूरह अस-सफ़ शब्द-दर-शब्द का अध्ययन पूरा करने की तौफीक अता की। हम ईमान लाते हैं तुझ पर और तेरे रसूल पर।

ऐ हमारे रब, हमें उन लोगों में से न बना जो कहते कुछ हैं और करते कुछ और हैं। हमारे शब्दों और कर्मों में समानता पैदा कर और हमारे दिलों को मुनाफिकत (कपटाचार) से पाक कर। हमें उस “लाभदायक व्यापार” (तिजारत) में शामिल कर जो हमें दर्दनाक अज़ाब से बचा ले। जैसा कि तूने इस सूरह में फरमाया है, हमें अपने दीन के मददगार (अंसारुल्लाह) बना और हमें दुनिया और आखिरत में कामयाबी अता कर।

इस शब्द-दर-शब्द अध्ययन को हमारे दिलों के लिए शिफा (उपचार) बना और इसे हमारे लिए एक ऐसा प्रकाश बना जो हमारे जीवन के हर कदम का मार्गदर्शन करे। आमीन।

सूरह अस-सफ़ का शब्द-दर-शब्द विश्लेषण कैसे काम करता है

मानक अनुवादों के विपरीत जो आपको एक वाक्य का सामान्य अर्थ देते हैं, यह पृष्ठ एक अद्वितीय “पूर्ण संदर्भ” विधि का उपयोग करता है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए डेटा को दो अलग-अलग परतों में प्रदर्शित करते हैं ताकि आप सूरह अस-सफ़ के प्रवाह को कभी न खोएं:

  • शीर्ष पंक्ति (संदर्भ): सूरह के समग्र संदेश और कथा को समझने के लिए पूर्ण अरबी आयत के साथ पूर्ण हिंदी अनुवाद पढ़ें।
  • निचली पंक्ति (विश्लेषण): अनुक्रम में हर एक शब्द का सटीक अर्थ, वर्तनी और मूल प्रकार देखने के लिए शब्द-दर-शब्द विवरण में उतरें।

सूरह अस-सफ़ के लिए रंगकोडित व्याकरण गाइड को समझना

पढ़ते समय सहज रूप से कुरान की अरबी व्याकरण (नह्व और सर्फ) सीखें। यह संसाधन जटिल पाठ्यपुस्तक नियमों को तत्काल दृश्य संकेतों से बदल देता है। सूरह अस-सफ़ का प्रत्येक शब्द एक इंटरैक्टिव “व्याकरण कार्ड” के रूप में प्रस्तुत किया गया है जिसमें तत्काल रंग-कोडिंग की सुविधा है:

  • संज्ञा (इस्म): नीले रंग में चिह्नित (नाम, स्थान, वस्तुएं)।
  • क्रिया (फेल): लाल रंग में चिह्नित (कार्य, काल)।
  • अव्यय/कण (हर्फ): हरे रंग में चिह्नित (पूर्वसर्ग, जोड़ने वाले शब्द)।

यह दृश्य सहायता आपको आयतों के भीतर वाक्य संरचनाओं और शब्दों के भेदों को तुरंत पहचानने में मदद करती है, जिससे तेजी से याद रखने और समझने में सहायता मिलती है।

सूरह अस-सफ़ का लिप्यंतरण और उच्चारण

पढ़ना शुरू करने के लिए आपको अरबी लिपि पढ़ने में धाराप्रवाह होने की आवश्यकता नहीं है। हर शब्द कार्ड पर शामिल तजवीद-अनुकूल लिप्यंतरण के साथ अपने उच्चारण को सही करें। यह ध्वन्यात्मक गाइड आपको सूरह अस-सफ़ में चुनौतीपूर्ण शब्दों का सही उच्चारण करने में मदद करती है, ध्वनि को सीधे अर्थ से जोड़ती है।

कुरान के आँकड़े: सूरह अस-सफ़ के माध्यम से शब्दावली बनाना

कई छात्र कुरान की विशालता से अभिभूत महसूस करते हैं, लेकिन संख्याएं साबित करती हैं कि यह प्राप्त करने योग्य है। कुरान लगभग 77,797 कुल शब्दों से बना है, फिर भी शब्दावली अत्यधिक दोहराव वाली है।

  • कुल अद्वितीय शब्द: लगभग 14,870।
  • वास्तविक शब्द आधार: केवल ~2,000 शब्द।

सूरह अस-सफ़ को शब्द-दर-शब्द पढ़कर, आप इस अध्याय में पाए जाने वाले आवश्यक शब्दों को सीख रहे हैं। चूंकि ये शब्द पूरे कुरान में बार-बार दोहराए जाते हैं, इसलिए इन आयतों में शब्दावली में महारत हासिल करना सीधे पूरी पवित्र पुस्तक को समझने में योगदान देता है।

सूरह अस-सफ़ के साथ अपनी सलाह (नमाज़) को बढ़ाएं

पांच दैनिक नमाज़ों के दौरान, एक मुस्लिम औसतन 200-250 अरबी शब्दों का पाठ करता है और दोहराता है। यदि इन शब्दों को समझा नहीं जाता है, तो मन अक्सर भटक जाता है। सूरह अस-सफ़ को शब्द-दर-शब्द पढ़ना आपको वास्तविक समय में इस शब्दावली को पहचानने में मदद करता है। जब आप प्रार्थना के लिए खड़े होते हैं और इस सूरह की आयतों का पाठ करते हैं, तो आप आखिरकार समझ पाएंगे कि आप अपने निर्माता से क्या कह रहे हैं, जिससे यह प्राप्त होगा:

  1. खुशू (एकाग्रता): सलाह के दौरान एक केंद्रित मन।
  2. गुणवत्ता: इबादत की उच्च आध्यात्मिक गुणवत्ता।
  3. जुड़ाव: पाठ (तिलावत) ۔
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