
संज्ञा (इस्म)
क्रिया (फ़िअल)
अव्यय (हर्फ़)
2:201
وَمِنْهُم مَّن يَقُولُ رَبَّنَآ ءَاتِنَا فِى ٱلدُّنْيَا حَسَنَةًۭ وَفِى ٱلْـَٔاخِرَةِ حَسَنَةًۭ وَقِنَا عَذَابَ ٱلنَّارِ
Wa minhum man yaqūlu rabbanā ātinā fī l-dun'yā ḥasanatan wa fī l-ākhirati ḥasanatan wa qinā ʿadhāba l-nār
और उनमें से कोई ऐसा भी है, जो कहता है, “हमारे रब! हमें दुनिया में भी भलाई दे और आख़िरत में भी भलाई दे और हमें आग की यातना से बचा।”
अव्यय
وَمِنْهُم
और उनमें से
wamin'hum
अव्यय
مَّن
जो
man
क्रिया
يَقُولُ
कहते हैं
yaqūlu
संज्ञा
رَبَّنَآ
ऐ हमारे रब
rabbanā
क्रिया
ءَاتِنَا
हमें दे
ātinā
अव्यय
فِى
में
fī
संज्ञा
ٱلدُّنْيَا
दुनिया
l-dun'yā
संज्ञा
حَسَنَةًۭ
भलाई
ḥasanatan
अव्यय
وَفِى
और में
wafī
संज्ञा
ٱلْـَٔاخِرَةِ
आख़िरत
l-ākhirati
संज्ञा
حَسَنَةًۭ
भलाई
ḥasanatan
क्रिया
وَقِنَا
और हमें बचा
waqinā
संज्ञा
عَذَابَ
अज़ाब से
ʿadhāba
संज्ञा
ٱلنَّارِ
आग के
l-nāri
2:202
أُو۟لَـٰٓئِكَ لَهُمْ نَصِيبٌۭ مِّمَّا كَسَبُوا۟ ۚ وَٱللَّهُ سَرِيعُ ٱلْحِسَابِ
Ulāika lahum naṣībun mimmā kasabū wal-lahu sarīʿu l-ḥisāb
ये वही लोग है जिनके लिए उनकी कमाई में से हिस्सा है। और अल्लाह जल्द हिसाब लेनेवाला है।
सर्वनाम
أُو۟لَـٰٓئِكَ
ये लोग
ulāika
अव्यय
لَهُمْ
उनके लिए
lahum
संज्ञा
نَصِيبٌۭ
हिस्सा है
naṣībun
अव्यय
مِّمَّا
उससे जो
mimmā
क्रिया
كَسَبُوا۟ ۚ
उन्होंने कमाया
kasabū
संज्ञा
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
संज्ञा
سَرِيعُ
जल्द है
sarīʿu
संज्ञा
ٱلْحِسَابِ
हिसाब में
l-ḥisābi
2:203
۞ وَٱذْكُرُوا۟ ٱللَّهَ فِىٓ أَيَّامٍۢ مَّعْدُودَٰتٍۢ ۚ فَمَن تَعَجَّلَ فِى يَوْمَيْنِ فَلَآ إِثْمَ عَلَيْهِ وَمَن تَأَخَّرَ فَلَآ إِثْمَ عَلَيْهِ ۚ لِمَنِ ٱتَّقَىٰ ۗ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَٱعْلَمُوٓا۟ أَنَّكُمْ إِلَيْهِ تُحْشَرُونَ
Wadhkurū Allāha fī ayyāmin maʿdūdātin faman taʿajjala fī yawmayni falā ith'ma ʿalayhi wa man ta-akhara falā ith'ma ʿalayhi limani ittaqā wattaqū Allāha waʿlamū annakum ilayhi tuḥ'sharūn
और अल्लाह को गिनी-चुनी अवधियों में याद करो। फिर जिसने दो ही दिन में जल्दी की, तो उसपर कोई गुनाह नहीं। और जो पीछे रह गया, उसपर भी कोई गुनाह नहीं; उसके लिए जो डरे। और अल्लाह का डर रखो और जान लो कि तुम उसी की ओर इकट्ठे किए जाओगे।
क्रिया
۞ وَٱذْكُرُوا۟
और याद करो
wa-udh'kurū
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह को
l-laha
अव्यय
فِىٓ
में
fī
संज्ञा
أَيَّامٍۢ
दिनों
ayyāmin
संज्ञा
مَّعْدُودَٰتٍۢ ۚ
गिने-चुने
maʿdūdātin
अव्यय
فَمَن
फिर जो कोई
faman
क्रिया
تَعَجَّلَ
जल्दी करे
taʿajjala
अव्यय
فِى
में
fī
संज्ञा
يَوْمَيْنِ
दो दिन
yawmayni
अव्यय
فَلَآ
तो कोई नहीं
falā
संज्ञा
إِثْمَ
गुनाह
ith'ma
अव्यय
عَلَيْهِ
उस पर
ʿalayhi
अव्यय
وَمَن
और जो कोई
waman
क्रिया
تَأَخَّرَ
देर करे
ta-akhara
अव्यय
فَلَآ
तो कोई नहीं
falā
संज्ञा
إِثْمَ
गुनाह
ith'ma
अव्यय
عَلَيْهِ ۚ
उस पर
ʿalayhi
अव्यय
لِمَنِ
उसके लिए जो
limani
क्रिया
ٱتَّقَىٰ ۗ
डरता है
ittaqā
क्रिया
وَٱتَّقُوا۟
और डरो
wa-ittaqū
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह से
l-laha
क्रिया
وَٱعْلَمُوٓا۟
और जान लो
wa-iʿ'lamū
अव्यय
أَنَّكُمْ
कि तुम
annakum
अव्यय
إِلَيْهِ
उसी की ओर
ilayhi
क्रिया
تُحْشَرُونَ
इकट्ठे किए जाओगे
tuḥ'sharūna
2:204
وَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يُعْجِبُكَ قَوْلُهُۥ فِى ٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا وَيُشْهِدُ ٱللَّهَ عَلَىٰ مَا فِى قَلْبِهِۦ وَهُوَ أَلَدُّ ٱلْخِصَامِ
Wa mina l-nāsi man yuʿ'jibuka qawluhū fī l-ḥayati l-dun'yā wa yush-hidu Allāha ʿalā mā fī qalbihī wa huwa aladdu l-khiṣām
और लोगों में कोई ऐसा भी है जिसकी बातें दुनिया की ज़िन्दगी में तुम्हें बहुत भाती हैं, और वह अपने दिल की बात पर अल्लाह को गवाह ठहराता है, हालाँकि वह सबसे बढ़कर झगड़ालू है।
अव्यय
وَمِنَ
और में से
wamina
संज्ञा
ٱلنَّاسِ
लोगों
l-nāsi
अव्यय
مَن
कोई है जो
man
क्रिया
يُعْجِبُكَ
तुम्हें भाती है
yuʿ'jibuka
संज्ञा
قَوْلُهُۥ
उसकी बात
qawluhu
अव्यय
فِى
में
fī
संज्ञा
ٱلْحَيَوٰةِ
ज़िन्दगी
l-ḥayati
संज्ञा
ٱلدُّنْيَا
दुनिया की
l-dun'yā
क्रिया
وَيُشْهِدُ
और गवाह बनाता है
wayush'hidu
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह को
l-laha
अव्यय
عَلَىٰ
पर
ʿalā
अव्यय
مَا
जो कुछ
mā
अव्यय
فِى
में है
fī
संज्ञा
قَلْبِهِۦ
उसके दिल
qalbihi
सर्वनाम
وَهُوَ
और वह
wahuwa
संज्ञा
أَلَدُّ
बड़ा झगड़ालू है
aladdu
संज्ञा
ٱلْخِصَامِ
झगड़ने वालों में
l-khiṣāmi
2:205
وَإِذَا تَوَلَّىٰ سَعَىٰ فِى ٱلْأَرْضِ لِيُفْسِدَ فِيهَا وَيُهْلِكَ ٱلْحَرْثَ وَٱلنَّسْلَ ۗ وَٱللَّهُ لَا يُحِبُّ ٱلْفَسَادَ
Wa idhā tawallā saʿā fī l-arḍi liyuf'sida fīhā wa yuh'lika l-ḥartha wal-nasla wal-lahu lā yuḥibbu l-fasād
और जब वह लौटता है, तो धरती में इसलिए दौड़-धूप करता है कि उसमें बिगाड़ पैदा करे और खेती और नस्ल को तबाह करे, जबकि अल्लाह बिगाड़ को पसन्द नहीं करता।
अव्यय
وَإِذَا
और जब
wa-idhā
क्रिया
تَوَلَّىٰ
वह मुड़ता है
tawallā
क्रिया
سَعَىٰ
वह दौड़ता है
saʿā
अव्यय
فِى
में
fī
संज्ञा
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन
l-arḍi
क्रिया
لِيُفْسِدَ
कि फसाद करे
liyuf'sida
अव्यय
فِيهَا
उसमें
fīhā
क्रिया
وَيُهْلِكَ
और बर्बाद करे
wayuh'lika
संज्ञा
ٱلْحَرْثَ
खेती को
l-ḥartha
संज्ञा
وَٱلنَّسْلَ ۗ
और नस्लों को
wal-nasla
संज्ञा
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
अव्यय
لَا
नहीं
lā
क्रिया
يُحِبُّ
पसन्द करता
yuḥibbu
संज्ञा
ٱلْفَسَادَ
फसाद को
l-fasāda
2:206
وَإِذَا قِيلَ لَهُ ٱتَّقِ ٱللَّهَ أَخَذَتْهُ ٱلْعِزَّةُ بِٱلْإِثْمِ ۚ فَحَسْبُهُۥ جَهَنَّمُ ۚ وَلَبِئْسَ ٱلْمِهَادُ
Wa idhā qīla lahu ittaqi Allāha akhadhathu l-ʿizatu bil-ith'mi faḥasbuhū jahannamu wa labi'sa l-mihād
और जब उससे कहा जाता है, 'अल्लाह से डर', तो अहंकार उसे गुनाह पर जमा देता है। अतः उसके लिए तो जहन्नम ही काफ़ी है, और वह बहुत-ही बुरा ठिकाना है!
अव्यय
وَإِذَا
और जब
wa-idhā
क्रिया
قِيلَ
कहा जाता है
qīla
अव्यय
لَهُ
उससे
lahu
क्रिया
ٱتَّقِ
डर
ittaqi
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह से
l-laha
क्रिया
أَخَذَتْهُ
उसे पकड़ लेती है
akhadhathu
संज्ञा
ٱلْعِزَّةُ
अकड़
l-ʿizatu
संज्ञा
بِٱلْإِثْمِ ۚ
गुनाह पर
bil-ith'mi
संज्ञा
فَحَسْبُهُۥ
तो काफी है उसके लिए
faḥasbuhu
संज्ञा
جَهَنَّمُ ۚ
जहन्नम
jahannamu
संज्ञा
وَلَبِئْسَ
और बेशक बुरा है
walabi'sa
संज्ञा
ٱلْمِهَادُ
ठिकाना
l-mihādu
2:207
وَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يَشْرِى نَفْسَهُ ٱبْتِغَآءَ مَرْضَاتِ ٱللَّهِ ۗ وَٱللَّهُ رَءُوفٌۢ بِٱلْعِبَادِ
Wa mina l-nāsi man yashrī nafsahu ib'tighāa marḍāti Allāhi wal-lahu raūfun bil-ʿibād
और लोगों में कोई ऐसा भी है जो अल्लाह की प्रसन्नता की तलब में अपनी जान बेच डालता है। और अल्लाह अपने बन्दों पर बहुत करुणामय, अत्यन्त दयावान है।
अव्यय
وَمِنَ
और में से
wamina
संज्ञा
ٱلنَّاسِ
लोगों
l-nāsi
अव्यय
مَن
कोई है जो
man
क्रिया
يَشْرِى
बेचता है
yashrī
संज्ञा
نَفْسَهُ
अपनी जान को
nafsahu
संज्ञा
ٱبْتِغَآءَ
चाहते हुए
ib'tighāa
संज्ञा
مَرْضَاتِ
रज़ामंदी
marḍāti
संज्ञा
ٱللَّهِ ۗ
अल्लाह की
l-lahi
संज्ञा
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
संज्ञा
رَءُوفٌۢ
बहुत मेहरबान है
raūfun
संज्ञा
بِٱلْعِبَادِ
बन्दों पर
bil-ʿibādi
2:208
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ٱدْخُلُوا۟ فِى ٱلسِّلْمِ كَآفَّةًۭ وَلَا تَتَّبِعُوا۟ خُطُوَٰتِ ٱلشَّيْطَـٰنِ ۚ إِنَّهُۥ لَكُمْ عَدُوٌّۭ مُّبِينٌۭ
Yā ayyuhā alladhīna āmanū ud'khulū fī l-sil'mi kāffatan wa lā tattabiʿū khuṭuwāti l-shayṭāni innahū lakum ʿaduwwun mubīn
ऐ ईमान लानेवालो! इस्लाम में पूरे-पूरे दाखिल हो जाओ और शैतान के पदचिन्हों पर न चलो। निश्चय ही वह तुम्हारा खुला शत्रु है।
अव्यय
يَـٰٓأَيُّهَا
ऐ
yāayyuhā
सर्वनाम
ٱلَّذِينَ
वो लोग जो
alladhīna
क्रिया
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
āmanū
क्रिया
ٱدْخُلُوا۟
दाखिल हो जाओ
ud'khulū
अव्यय
فِى
में
fī
संज्ञा
ٱلسِّلْمِ
इस्लाम
l-sil'mi
संज्ञा
كَآفَّةًۭ
पूरे के पूरे
kāffatan
अव्यय
وَلَا
और न
walā
क्रिया
تَتَّبِعُوا۟
पैरवी करो
tattabiʿū
संज्ञा
خُطُوَٰتِ
कदमों की
khuṭuwāti
संज्ञा
ٱلشَّيْطَـٰنِ ۚ
शैतान के
l-shayṭāni
अव्यय
إِنَّهُۥ
बेशक वह
innahu
अव्यय
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
lakum
संज्ञा
عَدُوٌّۭ
एक दुश्मन है
ʿaduwwun
संज्ञा
مُّبِينٌۭ
खुला
mubīnun
2:209
فَإِن زَلَلْتُم مِّنۢ بَعْدِ مَا جَآءَتْكُمُ ٱلْبَيِّنَـٰتُ فَٱعْلَمُوٓا۟ أَنَّ ٱللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٌ
Fa-in zalaltum min baʿdi mā jāatkumu l-bayinātu fa-iʿ'lamū anna Allāha ʿazīzun ḥakīm
फिर यदि तुम्हारे पास खुली निशानियाँ आ जाने के पश्चात भी तुम फिसल गए, तो जान लो कि अल्लाह प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है।
अव्यय
فَإِن
फिर अगर
fa-in
क्रिया
زَلَلْتُم
तुम फिसले
zalaltum
अव्यय
مِّنۢ
के
min
संज्ञा
بَعْدِ
बाद
baʿdi
अव्यय
مَا
इसके कि
mā
क्रिया
جَآءَتْكُمُ
तुम्हारे पास आईं
jāatkumu
संज्ञा
ٱلْبَيِّنَـٰتُ
खुली निशानियाँ
l-bayinātu
क्रिया
فَٱعْلَمُوٓا۟
तो जान लो
fa-iʿ'lamū
अव्यय
أَنَّ
कि
anna
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह
l-laha
संज्ञा
عَزِيزٌ
प्रभुत्वशाली है
ʿazīzun
संज्ञा
حَكِيمٌ
तत्वदर्शी है
ḥakīmun
2:210
هَلْ يَنظُرُونَ إِلَّآ أَن يَأْتِيَهُمُ ٱللَّهُ فِى ظُلَلٍۢ مِّنَ ٱلْغَمَامِ وَٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ وَقُضِىَ ٱلْأَمْرُ ۚ وَإِلَى ٱللَّهِ تُرْجَعُ ٱلْأُمُورُ
Hal yanẓurūna illā an yatiyahumu Allāhu fī ẓulalin mina l-ghamāmi wal-malāikatu wa quḍiya l-amru wa ilā Allāhi tur'jaʿu l-umūr
क्या वे इसी की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि अल्लाह और फ़रिश्ते बादलों के छत्रों में उनके सामने आ जाएँ और मामले का फ़ैसला ही कर दिया जाए? सारे मामले अल्लाह ही की ओर पलटते हैं।
अव्यय
هَلْ
क्या
hal
क्रिया
يَنظُرُونَ
वे इंतज़ार कर रहे हैं
yanẓurūna
अव्यय
إِلَّآ
सिवाय
illā
अव्यय
أَن
कि
an
क्रिया
يَأْتِيَهُمُ
उनके पास आए
yatiyahumu
संज्ञा
ٱللَّهُ
अल्लाह
l-lahu
अव्यय
فِى
में
fī
संज्ञा
ظُلَلٍۢ
छत्रों
ẓulalin
अव्यय
مِّنَ
से
mina
संज्ञा
ٱلْغَمَامِ
बादलों के
l-ghamāmi
संज्ञा
وَٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ
और फ़रिश्ते
wal-malāikatu
क्रिया
وَقُضِىَ
और फैसला हो जाए
waquḍiya
संज्ञा
ٱلْأَمْرُ ۚ
मामले का
l-amru
अव्यय
وَإِلَى
और की ओर
wa-ilā
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह ही
l-lahi
क्रिया
تُرْجَعُ
लौटाए जाते हैं
tur'jaʿu
संज्ञा
ٱلْأُمُورُ
सारे मामले
l-umūru
2:211
سَلْ بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ كَمْ ءَاتَيْنَـٰهُم مِّنْ ءَايَةٍۭ بَيِّنَةٍۢ ۗ وَمَن يُبَدِّلْ نِعْمَةَ ٱللَّهِ مِنۢ بَعْدِ مَا جَآءَتْهُ فَإِنَّ ٱللَّهَ شَدِيدُ ٱلْعِقَابِ
Sal banī is'rāīla kam ātaynāhum min āyatin bayyinatin wa man yubaddil niʿ'mata Allāhi min baʿdi mā jāathu fa-inna Allāha shadīdu l-ʿiqāb
इसराईल की सन्तान से पूछो कि हमने उन्हें कितनी खुली निशानियाँ दीं! और जो कोई अल्लाह की नेमत को अपने पास आ जाने के बाद बदल डालेगा, तो निश्चय ही अल्लाह की यातना बहुत कठोर है।
क्रिया
سَلْ
पूछो
sal
संज्ञा
بَنِىٓ
औलाद से
banī
संज्ञा
إِسْرَٰٓءِيلَ
इसराईल की
is'rāīla
अव्यय
كَمْ
कितनी
kam
क्रिया
ءَاتَيْنَـٰهُم
हमने उन्हें दी
ātaynāhum
अव्यय
مِّنْ
से
min
संज्ञा
ءَايَةٍۭ
निशानी
āyatin
संज्ञा
بَيِّنَةٍۢ ۗ
खुली
bayyinatin
अव्यय
وَمَن
और जो कोई
waman
क्रिया
يُبَدِّلْ
बदल दे
yubaddil
संज्ञा
نِعْمَةَ
नेमत को
niʿ'mata
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह की
l-lahi
अव्यय
مِنۢ
के
min
संज्ञा
بَعْدِ
बाद
baʿdi
अव्यय
مَا
इसके कि
mā
क्रिया
جَآءَتْهُ
वह उसके पास आई
jāathu
अव्यय
فَإِنَّ
तो बेशक
fa-inna
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह
l-laha
संज्ञा
شَدِيدُ
सख्त है
shadīdu
संज्ञा
ٱلْعِقَابِ
सज़ा देने में
l-ʿiqābi
2:212
زُيِّنَ لِلَّذِينَ كَفَرُوا۟ ٱلْحَيَوٰةُ ٱلدُّنْيَا وَيَسْخَرُونَ مِنَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ۘ وَٱلَّذِينَ ٱتَّقَوْا۟ فَوْقَهُمْ يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ ۗ وَٱللَّهُ يَرْزُقُ مَن يَشَآءُ بِغَيْرِ حِسَابٍۢ
Zuyyina lilladhīna kafarū l-ḥayatu l-dun'yā wa yaskharūna mina alladhīna āmanū wal-ladhīna ittaqaw fawqahum yawma l-qiyāmati wal-lahu yarzuqu man yashāu bighayri ḥisāb
जिन लोगों ने इनकार किया उनके लिए दुनिया की ज़िन्दगी सुहावनी बना दी गई है। वे ईमान लानेवालों का उपहास करते हैं, जबकि डर रखनेवाले क़ियामत के दिन उनसे उच्च श्रेणी में होंगे। अल्लाह जिसे चाहता है बेहिसाब देता है।
क्रिया
زُيِّنَ
सजा दी गई है
zuyyina
अव्यय
لِلَّذِينَ
उनके लिए जो
lilladhīna
क्रिया
كَفَرُوا۟
कुफ़्र करते हैं
kafarū
संज्ञा
ٱلْحَيَوٰةُ
ज़िन्दगी
l-ḥayatu
संज्ञा
ٱلدُّنْيَا
दुनिया की
l-dun'yā
क्रिया
وَيَسْخَرُونَ
और वे मज़ाक उड़ाते हैं
wayaskharūna
अव्यय
مِنَ
का
mina
सर्वनाम
ٱلَّذِينَ
उन लोगों
alladhīna
क्रिया
ءَامَنُوا۟ ۘ
जो ईमान लाए
āmanū
सर्वनाम
وَٱلَّذِينَ
और जो लोग
wa-alladhīna
क्रिया
ٱتَّقَوْا۟
डरते हैं
ittaqaw
संज्ञा
فَوْقَهُمْ
उनके ऊपर होंगे
fawqahum
संज्ञा
يَوْمَ
दिन
yawma
संज्ञा
ٱلْقِيَـٰمَةِ ۗ
क़यामत के
l-qiyāmati
संज्ञा
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
क्रिया
يَرْزُقُ
रोज़ी देता है
yarzuqu
अव्यय
مَن
जिसे
man
क्रिया
يَشَآءُ
वह चाहता है
yashāu
अव्यय
بِغَيْرِ
बगैर
bighayri
संज्ञा
حِسَابٍۢ
हिसाब के
ḥisābin
2:213
كَانَ ٱلنَّاسُ أُمَّةًۭ وَٰحِدَةًۭ فَبَعَثَ ٱللَّهُ ٱلنَّبِيِّـۧنَ مُبَشِّرِينَ وَمُنذِرِينَ وَأَنزَلَ مَعَهُمُ ٱلْكِتَـٰبَ بِٱلْحَقِّ لِيَحْكُمَ بَيْنَ ٱلنَّاسِ فِيمَا ٱخْتَلَفُوا۟ فِيهِ ۚ وَمَا ٱخْتَلَفَ فِيهِ إِلَّا ٱلَّذِينَ أُوتُوهُ مِنۢ بَعْدِ مَا جَآءَتْهُمُ ٱلْبَيِّنَـٰتُ بَغْيًۢا بَيْنَهُمْ ۖ فَهَدَى ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لِمَا ٱخْتَلَفُوا۟ فِيهِ مِنَ ٱلْحَقِّ بِإِذْنِهِۦ ۗ وَٱللَّهُ يَهْدِى مَن يَشَآءُ إِلَىٰ صِرَٰطٍۢ مُّسْتَقِيمٍ
Kāna l-nāsu ummatan wāḥidatan fabaʿatha Allāhu l-nabiyyīna mubashirīna wa mundhirīna wa anzala maʿahumu l-kitāba bil-ḥaqqi liyaḥkuma bayna l-nāsi fīmā ikh'talafū fīhi wa mā ikh'talafa fīhi illā alladhīna ūtūhu min baʿdi mā jāathumu l-bayinātu baghyan baynahum fahadā Allāhu alladhīna āmanū limā ikh'talafū fīhi mina l-ḥaqqi bi-idh'nihi wal-lahu yahdī man yashāu ilā ṣirāṭin mus'taqīm
सारे मनुष्य एक ही समुदाय थे। फिर अल्लाह ने नबियों को भेजा, शुभ-सूचना देनेवाले और सचेत करनेवाले बनाकर। और उनके साथ हक़ के साथ किताब उतारी, ताकि लोगों के बीच उन बातों का फ़ैसला कर दे जिनमें उन्होंने विभेद किया था। और इसमें विभेद बस उन लोगों ने किया, जिन्हें वह प्रदान की गई थी; इसके बाद कि उनके पास खुली निशानियाँ आ चुकी थीं, आपस में ज़्यादती करने के कारण। फिर अल्लाह ने अपनी अनुमति से ईमान लानेवालों को उस हक़ की राह दिखाई जिसमें लोगों ने विभेद किया था। अल्लाह जिसे चाहता है सीधी राह दिखा देता है।
क्रिया
كَانَ
थे
kāna
संज्ञा
ٱلنَّاسُ
लोग
l-nāsu
संज्ञा
أُمَّةًۭ
एक समुदाय
ummatan
संज्ञा
وَٰحِدَةًۭ
एक ही
wāḥidatan
क्रिया
فَبَعَثَ
फिर भेजा
fabaʿatha
संज्ञा
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
l-lahu
संज्ञा
ٱلنَّبِيِّـۧنَ
नबियों को
l-nabiyīna
संज्ञा
مُبَشِّرِينَ
खुशखबरी देने वाले
mubashirīna
संज्ञा
وَمُنذِرِينَ
और डराने वाले
wamundhirīna
क्रिया
وَأَنزَلَ
और उतारी
wa-anzala
अव्यय
مَعَهُمُ
उनके साथ
maʿahumu
संज्ञा
ٱلْكِتَـٰبَ
किताब
l-kitāba
संज्ञा
بِٱلْحَقِّ
हक़ के साथ
bil-ḥaqi
क्रिया
لِيَحْكُمَ
ताकि वह फैसला करे
liyaḥkuma
संज्ञा
بَيْنَ
बीच में
bayna
संज्ञा
ٱلنَّاسِ
लोगों के
l-nāsi
अव्यय
فِيمَا
उसमें जिसमें
fīmā
क्रिया
ٱخْتَلَفُوا۟
उन्होंने इख्तिलाफ किया
ikh'talafū
अव्यय
فِيهِ ۚ
उसमें
fīhi
अव्यय
وَمَا
और नहीं
wamā
क्रिया
ٱخْتَلَفَ
इख्तिलाफ किया
ikh'talafa
अव्यय
فِيهِ
उसमें
fīhi
अव्यय
إِلَّا
सिवाय
illā
सर्वनाम
ٱلَّذِينَ
उन लोगों के
alladhīna
क्रिया
أُوتُوهُ
जिन्हें वो दी गई
ūtūhu
अव्यय
مِنۢ
के
min
संज्ञा
بَعْدِ
बाद
baʿdi
अव्यय
مَا
इसके कि
mā
क्रिया
جَآءَتْهُمُ
उनके पास आईं
jāathumu
संज्ञा
ٱلْبَيِّنَـٰتُ
खुली निशानियाँ
l-bayinātu
संज्ञा
بَغْيًۢا
ज़िद से
baghyan
संज्ञा
بَيْنَهُمْ ۖ
आपस में
baynahum
क्रिया
فَهَدَى
तो हिदायत दी
fahadā
संज्ञा
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
l-lahu
सर्वनाम
ٱلَّذِينَ
उन लोगों को जो
alladhīna
क्रिया
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
āmanū
अव्यय
لِمَا
उसके लिए जिसमें
limā
क्रिया
ٱخْتَلَفُوا۟
उन्होंने इख्तिलाफ किया
ikh'talafū
अव्यय
فِيهِ
उसमें
fīhi
अव्यय
مِنَ
से
mina
संज्ञा
ٱلْحَقِّ
हक़
l-ḥaqi
अव्यय
بِإِذْنِهِۦ ۗ
अपनी इजाज़त से
bi-idh'nihi
संज्ञा
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
क्रिया
يَهْدِى
हिदायत देता है
yahdī
अव्यय
مَن
जिसे
man
क्रिया
يَشَآءُ
वह चाहता है
yashāu
अव्यय
إِلَىٰ
की ओर
ilā
संज्ञा
صِرَٰطٍۢ
रास्ते
ṣirāṭin
संज्ञा
مُّسْتَقِيمٍ
सीधे
mus'taqīmin
2:214
أَمْ حَسِبْتُمْ أَن تَدْخُلُوا۟ ٱلْجَنَّةَ وَلَمَّا يَأْتِكُم مَّثَلُ ٱلَّذِينَ خَلَوْا۟ مِن قَبْلِكُم ۖ مَّسَّتْهُمُ ٱلْبَأْسَآءُ وَٱلضَّرَّآءُ وَزُلْزِلُوا۟ حَتَّىٰ يَقُولَ ٱلرَّسُولُ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ مَعَهُۥ مَتَىٰ نَصْرُ ٱللَّهِ ۗ أَلَآ إِنَّ نَصْرَ ٱللَّهِ قَرِيبٌۭ
Am ḥasib'tum an tadkhulū l-janata wa lammā yatikum mathalu alladhīna khalaw min qablikum massathumu l-basāu wal-ḍarāu wa zul'zilū ḥattā yaqūla l-rasūlu wal-ladhīna āmanū maʿahū matā naṣru Allāhi alā inna naṣra Allāhi qarīb
या क्या तुम यह समझते हो कि यूँ ही जन्नत में प्रवेश कर जाओगे, हालाँकि अभी तुमपर वह कुछ नहीं बीता जो तुमसे पहले गुज़र चुके लोगों पर बीता था? उन्हें तंगी और मुसीबत ने आ घेरा और वे हिला डाले गए, यहाँ तक कि रसूल और उसके साथ के ईमानवाले बोल उठे, "अल्लाह की मदद कब आएगी?" सुन लो! निश्चय ही अल्लाह की मदद निकट है।
अव्यय
أَمْ
या
am
क्रिया
حَسِبْتُمْ
तुमने समझ लिया
ḥasib'tum
अव्यय
أَن
कि
an
क्रिया
تَدْخُلُوا۟
तुम दाखिल होगे
tadkhulū
संज्ञा
ٱلْجَنَّةَ
जन्नत में
l-janata
अव्यय
وَلَمَّا
हालाँकि नहीं
walammā
क्रिया
يَأْتِكُم
तुम पर आई
yatikum
संज्ञा
مَّثَلُ
हालत
mathalu
सर्वनाम
ٱلَّذِينَ
उन लोगों की
alladhīna
क्रिया
خَلَوْا۟
जो गुज़र चुके
khalaw
अव्यय
مِن
से
min
संज्ञा
قَبْلِكُم ۖ
तुमसे पहले
qablikum
क्रिया
مَّسَّتْهُمُ
उन्हें पहुंची
massathumu
संज्ञा
ٱلْبَأْسَآءُ
तंगी
l-basāu
संज्ञा
وَٱلضَّرَّآءُ
और मुसीबत
wal-ḍarāu
क्रिया
وَزُلْزِلُوا۟
और वे हिला दिए गए
wazul'zilū
अव्यय
حَتَّىٰ
यहाँ तक कि
ḥattā
क्रिया
يَقُولَ
कहने लगे
yaqūla
संज्ञा
ٱلرَّسُولُ
रसूल
l-rasūlu
सर्वनाम
وَٱلَّذِينَ
और वो लोग जो
wa-alladhīna
क्रिया
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
āmanū
सर्वनाम
مَعَهُۥ
उसके साथ
maʿahu
अव्यय
مَتَىٰ
कब आएगी?
matā
संज्ञा
نَصْرُ
मदद
naṣru
संज्ञा
ٱللَّهِ ۗ
अल्लाह की
l-lahi
अव्यय
أَلَآ
सुन लो
alā
अव्यय
إِنَّ
बेशक
inna
संज्ञा
نَصْرَ
मदद
naṣra
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह की
l-lahi
संज्ञा
قَرِيبٌۭ
करीब है
qarībun
2:215
يَسْـَٔلُونَكَ مَاذَا يُنفِقُونَ ۖ قُلْ مَآ أَنفَقْتُم مِّنْ خَيْرٍۢ فَلِلْوَٰلِدَيْنِ وَٱلْأَقْرَبِينَ وَٱلْيَتَـٰمَىٰ وَٱلْمَسَـٰكِينِ وَٱبْنِ ٱلسَّبِيلِ ۗ وَمَا تَفْعَلُوا۟ مِنْ خَيْرٍۢ فَإِنَّ ٱللَّهَ بِهِۦ عَلِيمٌۭ
Yas'alūnaka mādhā yunfiqūna qul mā anfaqtum min khayrin falil'wālidayni wal-aqrabīna wal-yatāmā wal-masākīni wa-ib'ni l-sabīli wa mā tafʿalū min khayrin fa-inna Allāha bihī ʿalīm
वे तुमसे पूछते है कि वे क्या ख़र्च करें? कहो, “जो माल भी तुम ख़र्च करो, वह माँ-बाप, नातेदारों, अनाथों, मुहताजों और मुसाफ़िर के लिए है। और जो भलाई भी तुम करोगे, अल्लाह उसे भली-भाँति जानता है।”
क्रिया
يَسْـَٔلُونَكَ
वे आपसे पूछते हैं
yasalūnaka
अव्यय
مَاذَا
क्या
mādhā
क्रिया
يُنفِقُونَ ۖ
वे खर्च करें
yunfiqūna
क्रिया
قُلْ
कह दो
qul
अव्यय
مَآ
जो कुछ
mā
क्रिया
أَنفَقْتُم
तुम खर्च करो
anfaqtum
अव्यय
مِّنْ
से
min
संज्ञा
خَيْرٍۢ
माल
khayrin
संज्ञा
فَلِلْوَٰلِدَيْنِ
तो माँ-बाप के लिए
falil'wālidayni
संज्ञा
وَٱلْأَقْرَبِينَ
और रिश्तेदारों
wal-aqrabīna
संज्ञा
وَٱلْيَتَـٰمَىٰ
और यतीमों
wal-yatāmā
संज्ञा
وَٱلْمَسَـٰكِينِ
और मिस्कीनों
wal-masākīni
संज्ञा
وَٱبْنِ
और
wa-ib'ni
संज्ञा
ٱلسَّبِيلِ ۗ
मुसाफिर के लिए
l-sabīli
अव्यय
وَمَا
और जो
wamā
क्रिया
تَفْعَلُوا۟
तुम करते हो
tafʿalū
अव्यय
مِنْ
से
min
संज्ञा
خَيْرٍۢ
भलाई
khayrin
अव्यय
فَإِنَّ
तो बेशक
fa-inna
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह
l-laha
अव्यय
بِهِۦ
उसे
bihi
संज्ञा
عَلِيمٌۭ
जानने वाला है
ʿalīmun
2:216
كُتِبَ عَلَيْكُمُ ٱلْقِتَالُ وَهُوَ كُرْهٌۭ لَّكُمْ ۖ وَعَسَىٰٓ أَن تَكْرَهُوا۟ شَيْـًۭٔا وَهُوَ خَيْرٌۭ لَّكُمْ ۖ وَعَسَىٰٓ أَن تُحِبُّوا۟ شَيْـًۭٔا وَهُوَ شَرٌّۭ لَّكُمْ ۗ وَٱللَّهُ يَعْلَمُ وَأَنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ
Kutiba ʿalaykumu l-qitālu wa huwa kur'hun lakum wa ʿasā an takrahū shay-an wa huwa khayrun lakum wa ʿasā an tuḥibbū shay-an wa huwa sharrun lakum wal-lahu yaʿlamu wa antum lā taʿlamūn
तुम पर युद्ध अनिवार्य किया गया, जबकि वह तुम्हें अप्रिय है। हो सकता है कि एक चीज़ तुम्हें अप्रिय हो, जबकि वह तुम्हारे लिए अच्छी हो; और हो सकता है कि एक चीज़ तुम्हें प्रिय हो, जबकि वह तुम्हारे लिए बुरी हो। अल्लाह जानता है, तुम नहीं जानते।
क्रिया
كُتِبَ
फ़र्ज़ किया गया
kutiba
अव्यय
عَلَيْكُمُ
तुम पर
ʿalaykumu
संज्ञा
ٱلْقِتَالُ
लड़ना
l-qitālu
सर्वनाम
وَهُوَ
और वह
wahuwa
संज्ञा
كُرْهٌۭ
नापसंद है
kur'hun
अव्यय
لَّكُمْ ۖ
तुम्हें
lakum
क्रिया
وَعَسَىٰٓ
और हो सकता है
waʿasā
अव्यय
أَن
कि
an
क्रिया
تَكْرَهُوا۟
तुम नापसंद करो
takrahū
संज्ञा
شَيْـًۭٔا
किसी चीज़ को
shayan
सर्वनाम
وَهُوَ
और वह
wahuwa
संज्ञा
خَيْرٌۭ
बेहतर हो
khayrun
अव्यय
لَّكُمْ ۖ
तुम्हारे लिए
lakum
क्रिया
وَعَسَىٰٓ
और हो सकता है
waʿasā
अव्यय
أَن
कि
an
क्रिया
تُحِبُّوا۟
तुम पसंद करो
tuḥibbū
संज्ञा
شَيْـًۭٔا
किसी चीज़ को
shayan
सर्वनाम
وَهُوَ
और वह
wahuwa
संज्ञा
شَرٌّۭ
बुरी हो
sharrun
अव्यय
لَّكُمْ ۗ
तुम्हारे लिए
lakum
संज्ञा
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
क्रिया
يَعْلَمُ
जानता है
yaʿlamu
सर्वनाम
وَأَنتُمْ
और तुम
wa-antum
अव्यय
لَا
नहीं
lā
क्रिया
تَعْلَمُونَ
जानते
taʿlamūna
2:217
يَسْـَٔلُونَكَ عَنِ ٱلشَّهْرِ ٱلْحَرَامِ قِتَالٍۢ فِيهِ ۖ قُلْ قِتَالٌۭ فِيهِ كَبِيرٌۭ ۖ وَصَدٌّ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ وَكُفْرٌۢ بِهِۦ وَٱلْمَسْجِدِ ٱلْحَرَامِ وَإِخْرَاجُ أَهْلِهِۦ مِنْهُ أَكْبَرُ عِندَ ٱللَّهِ ۚ وَٱلْفِتْنَةُ أَكْبَرُ مِنَ ٱلْقَتْلِ ۗ وَلَا يَزَالُونَ يُقَـٰتِلُونَكُمْ حَتَّىٰ يَرُدُّوكُمْ عَن دِينِكُمْ إِنِ ٱسْتَطَـٰعُوا۟ ۚ وَمَن يَرْتَدِدْ مِنكُمْ عَن دِينِهِۦ فَيَمُتْ وَهُوَ كَافِرٌۭ فَأُو۟لَـٰٓئِكَ حَبِطَتْ أَعْمَـٰلُهُمْ فِى ٱلدُّنْيَا وَٱلْـَٔاخِرَةِ ۖ وَأُو۟لَـٰٓئِكَ أَصْحَـٰبُ ٱلنَّارِ ۖ هُمْ فِيهَا خَـٰلِدُونَ
Yas'alūnaka ʿani l-shahri l-ḥarāmi qitālin fīhi qul qitālun fīhi kabīrun wa ṣaddun ʿan sabīli Allāhi wa kuf'run bihī wal-masjidi l-ḥarāmi wa ikh'rāju ahlihī min'hu akbaru ʿinda Allāhi wal-fitnatu akbaru mina l-qatli wa lā yazālūna yuqātilūnakum ḥattā yaruddūkum ʿan dīnikum ini is'taṭāʿū wa man yartadid minkum ʿan dīnihī fayamut wa huwa kāfirun fa-ulāika ḥabiṭat aʿmāluhum fī l-dun'yā wal-ākhirati wa ulāika aṣḥābu l-nāri hum fīhā khālidūn
वे तुमसे आदरणीय महीने में युद्ध के विषय में पूछते है। कहो, "उसमें लड़ना बड़ी बुरी बात है, परन्तु अल्लाह के मार्ग से रोकना, उसके साथ इनकार करना, मस्जिदे हराम (काबा) से रोकना और उसके लोगों को उससे निकालना, अल्लाह की नज़र में इससे भी बढ़कर बुरा है। और फ़ितना (उत्पीड़न), क़त्ल से भी बढ़कर संगीन है।" वे तो तुमसे बराबर लड़ते ही रहेंगे, ताकि तुम्हें तुम्हारे दीन से फेर दें, यदि उनका बस चले। और तुममें से जो कोई अपने दीन से फिरे और अविश्वासी होकर मरे, तो ऐसे लोगों का किया-धरा दुनिया और आख़िरत दोनों में नष्ट हो गया, और वे आग (जहन्नम) में पड़नेवाले है, वे उसी में सदैव रहेंगे।
क्रिया
يَسْـَٔلُونَكَ
वे तुमसे पूछते हैं
yasalūnaka
अव्यय
عَنِ
के बारे में
ʿani
संज्ञा
ٱلشَّهْرِ
महीने
l-shahri
संज्ञा
ٱلْحَرَامِ
हराम
l-ḥarāmi
संज्ञा
قِتَالٍۢ
लड़ने के
qitālin
अव्यय
فِيهِ ۖ
उसमें
fīhi
क्रिया
قُلْ
कह दो
qul
संज्ञा
قِتَالٌۭ
लड़ना
qitālun
अव्यय
فِيهِ
उसमें
fīhi
संज्ञा
كَبِيرٌۭ ۖ
बड़ा (गुनाह) है
kabīrun
संज्ञा
وَصَدٌّ
और रोकना
waṣaddun
अव्यय
عَن
से
ʿan
संज्ञा
سَبِيلِ
रास्ते
sabīli
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह के
l-lahi
संज्ञा
وَكُفْرٌۢ
और कुफ़्र करना
wakuf'run
अव्यय
بِهِۦ
उसका
bihi
संज्ञा
وَٱلْمَسْجِدِ
और मस्जिद-ए-
wal-masjidi
संज्ञा
ٱلْحَرَامِ
हराम से (रोकना)
l-ḥarāmi
संज्ञा
وَإِخْرَاجُ
और निकालना
wa-ikh'rāju
संज्ञा
أَهْلِهِۦ
उसके रहने वालों को
ahlihi
अव्यय
مِنْهُ
उससे
min'hu
संज्ञा
أَكْبَرُ
बड़ा (गुनाह) है
akbaru
संज्ञा
عِندَ
नज़दीक
ʿinda
संज्ञा
ٱللَّهِ ۚ
अल्लाह के
l-lahi
संज्ञा
وَٱلْفِتْنَةُ
और फितना
wal-fit'natu
संज्ञा
أَكْبَرُ
बड़ा है
akbaru
अव्यय
مِنَ
से
mina
संज्ञा
ٱلْقَتْلِ ۗ
क़त्ल
l-qatli
अव्यय
وَلَا
और नहीं
walā
क्रिया
يَزَالُونَ
वे बाज़ आएंगे
yazālūna
क्रिया
يُقَـٰتِلُونَكُمْ
तुमसे लड़ने से
yuqātilūnakum
अव्यय
حَتَّىٰ
यहाँ तक कि
ḥattā
क्रिया
يَرُدُّوكُمْ
वे तुम्हें फेर दें
yaruddūkum
अव्यय
عَن
से
ʿan
संज्ञा
دِينِكُمْ
तुम्हारे दीन
dīnikum
अव्यय
إِنِ
अगर
ini
क्रिया
ٱسْتَطَـٰعُوا۟ ۚ
वे सकें
is'taṭāʿū
अव्यय
وَمَن
और जो कोई
waman
क्रिया
يَرْتَدِدْ
फिर जाए
yartadid
अव्यय
مِنكُمْ
तुम में से
minkum
अव्यय
عَن
से
ʿan
संज्ञा
دِينِهِۦ
अपने दीन
dīnihi
क्रिया
فَيَمُتْ
फिर मर जाए
fayamut
सर्वनाम
وَهُوَ
इस हाल में कि वह
wahuwa
संज्ञा
كَافِرٌۭ
काफ़िर हो
kāfirun
सर्वनाम
فَأُو۟لَـٰٓئِكَ
तो वही लोग
fa-ulāika
क्रिया
حَبِطَتْ
अकारथ गए
ḥabiṭat
संज्ञा
أَعْمَـٰلُهُمْ
उनके अमल
aʿmāluhum
अव्यय
فِى
में
fī
संज्ञा
ٱلدُّنْيَا
दुनिया
l-dun'yā
संज्ञा
وَٱلْـَٔاخِرَةِ ۖ
और आखिरत में
wal-ākhirati
सर्वनाम
وَأُو۟لَـٰٓئِكَ
और वही लोग
wa-ulāika
संज्ञा
أَصْحَـٰبُ
वाले हैं
aṣḥābu
संज्ञा
ٱلنَّارِ ۖ
आग के
l-nāri
सर्वनाम
هُمْ
वे
hum
अव्यय
فِيهَا
उसमें
fīhā
संज्ञा
خَـٰلِدُونَ
हमेशा रहेंगे
khālidūna
2:218
إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَٱلَّذِينَ هَاجَرُوا۟ وَجَـٰهَدُوا۟ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ أُو۟لَـٰٓئِكَ يَرْجُونَ رَحْمَتَ ٱللَّهِ ۚ وَٱللَّهُ غَفُورٌۭ رَّحِيمٌۭ
Inna alladhīna āmanū wal-ladhīna hājarū wa jāhadū fī sabīli Allāhi ulāika yarjūna raḥmata Allāhi wal-lahu ghafūrun raḥīm
जो लोग ईमान लाए और जिन्होंने हिजरत की और अल्लाह के मार्ग में जी-जान से संघर्ष किया, वही अल्लाह की दयालुता के अधिकारी हैं। और अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है।
अव्यय
إِنَّ
बेशक
inna
सर्वनाम
ٱلَّذِينَ
वो लोग जो
alladhīna
क्रिया
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
āmanū
सर्वनाम
وَٱلَّذِينَ
और वो लोग जो
wa-alladhīna
क्रिया
هَاجَرُوا۟
हिजरत की
hājarū
क्रिया
وَجَـٰهَدُوا۟
और जिहाद किया
wajāhadū
अव्यय
فِى
में
fī
संज्ञा
سَبِيلِ
रास्ते
sabīli
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह के
l-lahi
सर्वनाम
أُو۟لَـٰٓئِكَ
वही लोग
ulāika
क्रिया
يَرْجُونَ
उम्मीद रखते हैं
yarjūna
संज्ञा
رَحْمَتَ
रहमत की
raḥmata
संज्ञा
ٱللَّهِ ۚ
अल्लाह की
l-lahi
संज्ञा
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
संज्ञा
غَفُورٌۭ
बड़ा बख्शने वाला है
ghafūrun
संज्ञा
رَّحِيمٌۭ
बहुत मेहरबान है
raḥīmun
2:219
۞ يَسْـَٔلُونَكَ عَنِ ٱلْخَمْرِ وَٱلْمَيْسِرِ ۖ قُلْ فِيهِمَآ إِثْمٌۭ كَبِيرٌۭ وَمَنَـٰفِعُ لِلنَّاسِ وَإِثْمُهُمَآ أَكْبَرُ مِن نَّفْعِهِمَا ۗ وَيَسْـَٔلُونَكَ مَاذَا يُنفِقُونَ قُلِ ٱلْعَفْوَ ۗ كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ ٱللَّهُ لَكُمُ ٱلْـَٔايَـٰتِ لَعَلَّكُمْ تَتَفَكَّرُونَ
Yas'alūnaka ʿani l-khamri wal-maysiri qul fīhimā ith'mun kabīrun wa manāfiʿu lilnnāsi wa ith'muhumā akbaru min nafʿihimā wa yas'alūnaka mādhā yunfiqūna quli l-ʿafwa kadhālika yubayyinu Allāhu lakumu l-āyāti laʿallakum tatafakkarūn
वे तुमसे शराब और जूए के विषय में पूछते हैं। कहो, "उन दोनों में बड़ा गुनाह है और लोगों के लिए कुछ फ़ायदे भी हैं, परन्तु उनका गुनाह उनके फ़ायदे से कहीं बढ़कर है।" और वे तुमसे पूछते है कि "क्या ख़र्च करें?" कहो, "जो ज़रूरत से ज़्यादा हो।" इस प्रकार अल्लाह तुम्हारे लिए आयतें खोल-खोलकर बयान करता है, ताकि तुम सोच-विचार करो।
क्रिया
۞ يَسْـَٔلُونَكَ
वे तुमसे पूछते हैं
yasalūnaka
अव्यय
عَنِ
के बारे में
ʿani
संज्ञा
ٱلْخَمْرِ
शराब
l-khamri
संज्ञा
وَٱلْمَيْسِرِ ۖ
और जुए
wal-maysiri
क्रिया
قُلْ
कह दो
qul
अव्यय
فِيهِمَآ
उन दोनों में
fīhimā
संज्ञा
إِثْمٌۭ
गुनाह है
ith'mun
संज्ञा
كَبِيرٌۭ
बड़ा
kabīrun
संज्ञा
وَمَنَـٰفِعُ
और फायदे
wamanāfiʿu
संज्ञा
لِلنَّاسِ
लोगों के लिए
lilnnāsi
संज्ञा
وَإِثْمُهُمَآ
और उन दोनों का गुनाह
wa-ith'muhumā
संज्ञा
أَكْبَرُ
बड़ा है
akbaru
अव्यय
مِن
से
min
संज्ञा
نَّفْعِهِمَا ۗ
उनके फायदे
nafʿihimā
क्रिया
وَيَسْـَٔلُونَكَ
और वे तुमसे पूछते हैं
wayasalūnaka
अव्यय
مَاذَا
क्या
mādhā
क्रिया
يُنفِقُونَ
वे खर्च करें
yunfiqūna
क्रिया
قُلِ
कह दो
quli
संज्ञा
ٱلْعَفْوَ ۗ
जो ज़्यादा हो
l-ʿafwa
अव्यय
كَذَٰلِكَ
इसी तरह
kadhālika
क्रिया
يُبَيِّنُ
बयान करता है
yubayyinu
संज्ञा
ٱللَّهُ
अल्लाह
l-lahu
अव्यय
لَكُمُ
तुम्हारे लिए
lakumu
संज्ञा
ٱلْـَٔايَـٰتِ
आयतें
l-āyāti
अव्यय
لَعَلَّكُمْ
ताकि तुम
laʿallakum
क्रिया
تَتَفَكَّرُونَ
गौर करो
tatafakkarūna
2:220
فِى ٱلدُّنْيَا وَٱلْـَٔاخِرَةِ ۗ وَيَسْـَٔلُونَكَ عَنِ ٱلْيَتَـٰمَىٰ ۖ قُلْ إِصْلَاحٌۭ لَّهُمْ خَيْرٌۭ ۖ وَإِن تُخَالِطُوهُمْ فَإِخْوَٰنُكُمْ ۚ وَٱللَّهُ يَعْلَمُ ٱلْمُفْسِدَ مِنَ ٱلْمُصْلِحِ ۚ وَلَوْ شَآءَ ٱللَّهُ لَأَعْنَتَكُمْ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٌۭ
Fī l-dun'yā wal-ākhirati wa yas'alūnaka ʿani l-yatāmā qul iṣ'lāḥun lahum khayrun wa in tukhāliṭūhum fa-ikh'wānukum wal-lahu yaʿlamu l-muf'sida mina l-muṣ'liḥi walaw shāa Allāhu la-aʿnatakum inna Allāha ʿazīzun ḥakīm
दुनिया और आख़िरत के विषय में। और वे तुमसे अनाथों के विषय में पूछते हैं। कह दो, "उनके लिए सुधार करना ही उत्तम है। और यदि तुम अपना और उनका रहना-सहना सम्मिलित रखो, तो वे तुम्हारे भाई ही तो हैं। अल्लाह बिगाड़नेवाले को बनानेवाले से अलग पहचानता है। और यदि अल्लाह चाहता तो तुम्हें कठिनाई में डाल देता। निश्चय ही अल्लाह प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है।"
अव्यय
فِى
बारे में
fī
संज्ञा
ٱلدُّنْيَا
दुनिया
l-dun'yā
संज्ञा
وَٱلْـَٔاخِرَةِ ۗ
और आख़िरत के
wal-ākhirati
क्रिया
وَيَسْـَٔلُونَكَ
और वे तुमसे पूछते हैं
wayasalūnaka
अव्यय
عَنِ
के बारे में
ʿani
संज्ञा
ٱلْيَتَـٰمَىٰ ۖ
यतीमों के
l-yatāmā
क्रिया
قُلْ
कह दो
qul
संज्ञा
إِصْلَاحٌۭ
सुधार करना
iṣ'lāḥun
अव्यय
لَّهُمْ
उनके लिए
lahum
संज्ञा
خَيْرٌۭ ۖ
बेहतर है
khayrun
अव्यय
وَإِن
और अगर
wa-in
क्रिया
تُخَالِطُوهُمْ
तुम उन्हें मिला लो
tukhāliṭūhum
संज्ञा
فَإِخْوَٰنُكُمْ ۚ
तो वे तुम्हारे भाई हैं
fa-ikh'wānukum
संज्ञा
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
क्रिया
يَعْلَمُ
जानता है
yaʿlamu
संज्ञा
ٱلْمُفْسِدَ
बिगाड़ने वाले को
l-muf'sida
अव्यय
مِنَ
से
mina
संज्ञा
ٱلْمُصْلِحِ ۚ
सुधारने वाले को
l-muṣ'liḥi
अव्यय
وَلَوْ
और अगर
walaw
क्रिया
شَآءَ
चाहता
shāa
संज्ञा
ٱللَّهُ
अल्लाह
l-lahu
क्रिया
لَأَعْنَتَكُمْ ۚ
तो तुम्हें मुश्किल में डाल देता
la-aʿnatakum
अव्यय
إِنَّ
बेशक
inna
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह
l-laha
संज्ञा
عَزِيزٌ
प्रभुत्वशाली है
ʿazīzun
संज्ञा
حَكِيمٌۭ
तत्वदर्शी है
ḥakīmun
2:221
وَلَا تَنكِحُوا۟ ٱلْمُشْرِكَـٰتِ حَتَّىٰ يُؤْمِنَّ ۚ وَلَأَمَةٌۭ mُّؤْمِنَةٌ خَيْرٌۭ مِّن مُّشْرِكَةٍۢ وَلَوْ أَعْجَبَتْكُمْ ۗ وَلَا تُنكِحُوا۟ ٱلْمُشْرِكِينَ حَتَّىٰ يُؤْمِنُوا۟ ۚ وَلَعَبْدٌۭ مُّؤْمِنٌ خَيْرٌۭ مِّن مُّشْرِكٍۢ وَلَوْ أَعْجَبَكُمْ ۗ أُو۟لَـٰٓئِكَ يَدْعُونَ إِلَى ٱلنَّارِ ۖ وَٱللَّهُ يَدْعُوٓا۟ إِلَى ٱلْجَنَّةِ وَٱلْمَغْفِرَةِ بِإِذْنِهِۦ ۖ وَيُبَيِّنُ ءَايَـٰتِهِۦ لِلنَّاسِ لَعَلَّهُمْ يَتَذَكَّrُونَ
Wa lā tankiḥū l-mush'rikāti ḥattā yu'minna wala-amatun mu'minatun khayrun min mush'rikatin walaw aʿjabatkum wa lā tunkiḥū l-mush'rikīna ḥattā yu'minū walaʿabdun mu'minun khayrun min mush'rikin walaw aʿjabakum ulāika yadʿūna ilā l-nāri wal-lahu yadʿū ilā l-janati wal-maghfirati bi-idh'nihī wa yubayyinu āyātihī lilnnāsi laʿallahum yatadhakkarūn
और मुशरिक (बहुदेववादी) स्त्रियों से विवाह न करो जब तक कि वे ईमान न ले आएँ। एक ईमानवाली बांदी एक मुशरिक स्त्री से कहीं उत्तम है, चाहे वह तुम्हें कितनी ही भली क्यों न लगे। और न (अपनी स्त्रियों का) मुशरिक पुरुषों से विवाह करो, जब तक कि वे ईमान न ले आएँ। एक ईमानवाला ग़ुलाम एक मुशरिक से कहीं उत्तम है, चाहे वह तुम्हें कितना ही भला क्यों न लगे। वे आग की ओर बुलाते हैं और अल्लाह अपनी अनुज्ञा से जन्नत और क्षमा की ओर बुलाता है। और वह अपनी आयतें लोगों के लिए खोल-खोलकर बयान करता है, ताकि वे नसीहत हासिल करें।
अव्यय
وَلَا
और न
walā
क्रिया
تَنكِحُوا۟
निकाह करो
tankiḥū
संज्ञा
ٱلْمُشْرِكَـٰتِ
मुशरिक औरतों से
l-mush'rikāti
अव्यय
حَتَّىٰ
जब तक
ḥattā
क्रिया
يُؤْمِنَّ ۚ
वे ईमान न लाएं
yu'minna
संज्ञा
وَلَأَمَةٌۭ
और बेशक एक बांदी
wala-amatun
संज्ञा
مُّؤْمِنَةٌ
ईमानवाली
mu'minatun
संज्ञा
خَيْرٌۭ
बेहतर है
khayrun
अव्यय
مِّن
से
min
संज्ञा
مُّشْرِكَةٍۢ
मुशरिक औरत
mush'rikatin
अव्यय
وَلَوْ
चाहे
walaw
क्रिया
أَعْجَبَتْكُمْ ۗ
वह तुम्हें अच्छी लगे
aʿjabatkum
अव्यय
وَلَا
और न
walā
क्रिया
تُنكِحُوا۟
निकाह करो
tunkiḥū
संज्ञा
ٱلْمُشْرِكِينَ
मुशरिक मर्दों से
l-mush'rikīna
अव्यय
حَتَّىٰ
जब तक
ḥattā
क्रिया
يُؤْمِنُوا۟ ۚ
वे ईमान न लाएं
yu'minū
संज्ञा
وَلَعَبْدٌۭ
और बेशक एक गुलाम
walaʿabdun
संज्ञा
مُّؤْمِنٌ
ईमानवाला
mu'minun
संज्ञा
خَيْرٌۭ
बेहतर है
khayrun
अव्यय
مِّن
से
min
संज्ञा
مُّشْرِكٍۢ
मुशरिक मर्द
mush'rikin
अव्यय
وَلَوْ
चाहे
walaw
क्रिया
أَعْجَبَكُمْ ۗ
वह तुम्हें अच्छा लगे
aʿjabakum
सर्वनाम
أُو۟لَـٰٓئِكَ
वे लोग
ulāika
क्रिया
يَدْعُونَ
बुलाते हैं
yadʿūna
अव्यय
إِلَى
की तरफ
ilā
संज्ञा
ٱلنَّارِ ۖ
आग
l-nāri
संज्ञा
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
क्रिया
يَدْعُوٓا۟
बुलाता है
yadʿū
अव्यय
إِلَى
की तरफ
ilā
संज्ञा
ٱلْجَنَّةِ
जन्नत
l-janati
संज्ञा
وَٱلْمَغْفِرَةِ
और मगफिरत
wal-maghfirati
अव्यय
بِإِذْنِهِۦ ۖ
अपने हुक्म से
bi-idh'nihi
क्रिया
وَيُبَيِّنُ
और वह बयान करता है
wayubayyinu
संज्ञा
ءَايَـٰتِهِۦ
अपनी आयतें
āyātihi
संज्ञा
لِلنَّاسِ
लोगों के लिए
lilnnāsi
अव्यय
لَعَلَّهُمْ
ताकि वे
laʿallahum
क्रिया
يَتَذَكَّrُونَ
नसीहत लें
yatadhakkarūna
2:222
وَيَسْـَٔلُونَكَ عَنِ ٱلْمَحِيضِ ۖ قُلْ هُوَ أَذًۭى فَٱعْتَزِلُوا۟ ٱلنِّسَآءَ فِى ٱلْمَحِيضِ ۖ وَلَا تَقْرَبُوهُنَّ حَتَّىٰ يَطْهُرْنَ ۖ فَإِذَا تَطَهَّرْنَ فَأْتُوهُنَّ مِنْ حَيْثُ أَمَرَكُمُ ٱللَّهُ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ يُحِبُّ ٱلتَّوَّٰبِينَ وَيُحِبُّ ٱلْمُتَطَهِّرِينَ
Wa yas'alūnaka ʿani l-maḥīḍi qul huwa adhan faʿtazilū l-nisāa fī l-maḥīḍi wa lā taqrabūhunna ḥattā yaṭhur'na fa-idhā taṭahharna fatūhunna min ḥaythu amarakumu Allāhu inna Allāha yuḥibbu l-tawābīna wa yuḥibbu l-mutaṭahirīn
और वे तुमसे मासिक धर्म के विषय में पूछते हैं। कहो, "वह एक तकलीफ़ की चीज़ है। अतः मासिक धर्म की दशा में स्त्रियों से अलग रहो और जब तक कि वे पाक-साफ़ न हो जाएँ, उनके निकट न जाओ। फिर जब वे भली-भाँति पाक-साफ़ हो जाएँ तो उनके पास उस प्रकार जाओ, जिस प्रकार अल्लाह ने तुम्हें आदेश दिया है।" निश्चय ही अल्लाह तौबा करनेवालों को पसन्द करता है और वह उन्हें भी पसन्द करता है जो अच्छी तरह सफ़ाई-सुथराई करते हैं।
क्रिया
وَيَسْـَٔلُونَكَ
और वे तुमसे पूछते हैं
wayasalūnaka
अव्यय
عَنِ
के बारे में
ʿani
संज्ञा
ٱلْمَحِيضِ ۖ
मासिक धर्म
l-maḥīḍi
क्रिया
قُلْ
कह दो
qul
सर्वनाम
هُوَ
वह
huwa
संज्ञा
أَذًۭى
एक तकलीफ है
adhan
क्रिया
فَٱعْتَزِلُوا۟
तो अलग रहो
fa-iʿ'tazilū
संज्ञा
ٱلنِّسَآءَ
औरतों से
l-nisāa
अव्यय
فِى
में
fī
संज्ञा
ٱلْمَحِيضِ ۖ
मासिक धर्म के
l-maḥīḍi
अव्यय
وَلَا
और न
walā
क्रिया
تَقْرَبُوهُنَّ
उनके करीब जाओ
taqrabūhunna
अव्यय
حَتَّىٰ
जब तक
ḥattā
क्रिया
يَطْهُرْنَ ۖ
वे पाक न हो जाएं
yaṭhur'na
अव्यय
فَإِذَا
फिर जब
fa-idhā
क्रिया
تَطَهَّرْنَ
वे पाक हो जाएं
taṭahharna
क्रिया
فَأْتُوهُنَّ
तो उनके पास जाओ
fatūhunna
अव्यय
مِنْ
वहाँ से
min
अव्यय
حَيْثُ
जहाँ से
ḥaythu
क्रिया
أَمَرَكُمُ
तुम्हें हुक्म दिया है
amarakumu
संज्ञा
ٱللَّهُ ۚ
अल्लाह ने
l-lahu
अव्यय
إِنَّ
बेशक
inna
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह
l-laha
क्रिया
يُحِبُّ
पसंद करता है
yuḥibbu
संज्ञा
ٱلتَّوَّٰبِينَ
तौबा करने वालों को
l-tawābīna
क्रिया
وَيُحِبُّ
और पसंद करता है
wayuḥibbu
संज्ञा
ٱلْمُتَطَهِّرِينَ
पाक रहने वालों को
l-mutaṭahirīna
2:223
نِسَآؤُكُمْ حَرْثٌۭ لَّكُمْ فَأْتُوا۟ حَرْثَكُمْ أَنَّىٰ شِئْتُمْ ۖ وَقَدِّمُوا۟ لِأَنفُسِكُمْ ۚ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَٱعْلَمُوٓا۟ أَنَّكُم مُّلَـٰقُوهُ ۗ وَبَشِّرِ ٱلْمُؤْمِنِينَ
Nisāukum ḥarthun lakum fa'tū ḥarthakum annā shi'tum wa qaddimū li-anfusikum wattaqū Allāha waʿlamū annakum mulāqūhu wa bashiri l-mu'minīn
तुम्हारी स्त्रियाँ तुम्हारी खेती हैं। अतः तुम अपनी खेती में जिस प्रकार चाहो आओ। और अपने लिए (आगे) भेजो। और अल्लाह का डर रखो और जान रखो कि तुम्हें उससे मिलना है। और ईमानवालों को शुभ-सूचना दे दो!
संज्ञा
نِسَآؤُكُمْ
तुम्हारी औरतें
nisāukum
संज्ञा
حَرْثٌۭ
खेती हैं
ḥarthun
अव्यय
لَّكُمْ
तुम्हारे लिए
lakum
क्रिया
فَأْتُوا۟
तो आओ
fatū
संज्ञा
حَرْثَكُمْ
अपनी खेती में
ḥarthakum
अव्यय
أَنَّىٰ
जैसे
annā
क्रिया
شِئْتُمْ ۖ
तुम चाहो
shi'tum
क्रिया
وَقَدِّمُوا۟
और आगे भेजो
waqaddimū
अव्यय
لِأَنفُسِكُمْ ۚ
अपने लिए
li-anfusikum
क्रिया
وَٱتَّقُوا۟
और डरो
wa-ittaqū
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह से
l-laha
क्रिया
وَٱعْلَمُوٓا۟
और जान लो
wa-iʿ'lamū
अव्यय
أَنَّكُم
कि तुम
annakum
संज्ञा
مُّلَـٰقُوهُ ۗ
उससे मिलने वाले हो
mulāqūhu
क्रिया
وَبَشِّرِ
और खुशखबरी दे दो
wabashiri
संज्ञा
ٱلْمُؤْمِنِينَ
ईमान वालों को
l-mu'minīna
2:224
وَلَا تَجْعَلُوا۟ ٱللَّهَ عُرْضَةًۭ لِّأَيْمَـٰنِكُمْ أَن تَبَرُّوا۟ وَتَتَّقُوا۟ وَتُصْلِحُوا۟ بَيْنَ ٱلنَّاسِ ۗ وَٱللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌۭ
Wa lā tajʿalū Allāha ʿur'ḍatan li-aymānikum an tabarrū wa tattaqū wa tuṣ'liḥū bayna l-nāsi wal-lahu samīʿun ʿalīm
और अल्लाह को अपनी क़समों का निशाना न बनाओ, ताकि तुम नेकी करने, डर रखने और लोगों के बीच सुधार करने से बचो। अल्लाह सब कुछ सुननेवाला, जाननेवाला है।
अव्यय
وَلَا
और न
walā
क्रिया
تَجْعَلُوا۟
तुम बनाओ
tajʿalū
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह को
l-laha
संज्ञा
عُرْضَةًۭ
निशाना
ʿur'ḍatan
संज्ञा
لِّأَيْمَـٰنِكُمْ
अपनी कसमों का
li-aymānikum
अव्यय
أَن
कि
an
क्रिया
تَبَرُّوا۟
तुम नेकी करो
tabarrū
क्रिया
وَتَتَّقُوا۟
और डरो
watattaqū
क्रिया
وَتُصْلِحُوا۟
और तुम सुलह कराओ
watuṣ'liḥū
संज्ञा
بَيْنَ
बीच में
bayna
संज्ञा
ٱلنَّاسِ ۗ
लोगों के
l-nāsi
संज्ञा
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
संज्ञा
سَمِيعٌ
सुनने वाला है
samīʿun
संज्ञा
عَلِيمٌۭ
जानने वाला है
ʿalīmun
2:225
لَّا يُؤَاخِذُكُمُ ٱللَّهُ بِٱللَّغْوِ فِىٓ أَيْمَـٰنِكُمْ وَلَـٰكِن يُؤَاخِذُكُم بِمَا كَسَبَتْ قُلُوبُكُمْ ۗ وَٱللَّهُ غَفُورٌ حَلِيمٌۭ
Lā yuākhidhukumu Allāhu bil-laghwi fī aymānikum wa lākin yuākhidhukum bimā kasabat qulūbukum wal-lahu ghafūrun ḥalīm
अल्लाह तुम्हारी उन क़समों पर तुम्हें नहीं पकड़ता जो यूँ ही मुँह से निकल गई हों, लेकिन उन क़समों पर वह तुम्हें अवश्य पकड़ेगा, जो तुम्हारे दिल के इरादे का नतीजा हों। अल्लाह बड़ा क्षमाशील, सहनशील है।
अव्यय
لَّا
नहीं
lā
क्रिया
يُؤَاخِذُكُمُ
तुम्हें पकड़ता
yuākhidhukumu
संज्ञा
ٱللَّهُ
अल्लाह
l-lahu
संज्ञा
بِٱللَّغْوِ
बेइरादा बात पर
bil-laghwi
अव्यय
فِىٓ
में
fī
संज्ञा
أَيْمَـٰنِكُمْ
तुम्हारी कसमों के
aymānikum
अव्यय
وَلَـٰكِن
लेकिन
walākin
क्रिया
يُؤَاخِذُكُم
वह तुम्हें पकड़ता है
yuākhidhukum
अव्यय
بِمَا
उस पर जो
bimā
क्रिया
كَسَبَتْ
कमाई की
kasabat
संज्ञा
قُلُوبُكُمْ ۗ
तुम्हारे दिलों ने
qulūbukum
संज्ञा
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
संज्ञा
غَفُورٌ
बड़ा बख्शने वाला है
ghafūrun
संज्ञा
حَلِيمٌۭ
बहुत सहनशील है
ḥalīmun
2:226
لِّلَّذِينَ يُؤْلُونَ مِن نِّسَآئِهِمْ تَرَبُّصُ أَرْبَعَةِ أَشْهُرٍۢ ۖ فَإِن فَآءُو فَإِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌۭ رَّحِيمٌۭ
Lilladhīna yu'lūna min nisāihim tarabbuṣu arbaʿati ashhurin fa-in fāū fa-inna Allāha ghafūrun raḥīm
जो लोग अपनी स्त्रियों से (संभोग न करने की) क़सम खा बैठें, उनके लिए चार महीने की प्रतिक्षा है। फिर यदि वे लौट आएँ, तो अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है।
अव्यय
لِّلَّذِينَ
उन लोगों के लिए जो
lilladhīna
क्रिया
يُؤْلُونَ
कसम खाते हैं
yu'lūna
अव्यय
مِن
से
min
संज्ञा
نِّسَآئِهِمْ
अपनी औरतों
nisāihim
संज्ञा
تَرَبُّصُ
इंतजार है
tarabbuṣu
संज्ञा
أَرْبَعَةِ
चार
arbaʿati
संज्ञा
أَشْهُرٍۢ ۖ
महीनों का
ashhurin
अव्यय
فَإِن
फिर अगर
fa-in
क्रिया
فَآءُو
वे पलट आएं
fāū
अव्यय
فَإِنَّ
तो बेशक
fa-inna
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह
l-laha
संज्ञा
غَفُورٌۭ
बख्शने वाला है
ghafūrun
संज्ञा
رَّحِيمٌۭ
मेहरबान है
raḥīmun
2:227
وَإِنْ عَزَمُوا۟ ٱلطَّلَـٰقَ فَإِنَّ ٱللَّهَ سَمِيعٌ عَلِيمٌۭ
Wa in ʿazamū l-ṭalāqa fa-inna Allāha samīʿun ʿalīm
और यदि उन्होंने तलाक़ का निश्चय कर लिया हो, तो अल्लाह सब कुछ सुननेवाला, जाननेवाला है।
अव्यय
وَإِنْ
और अगर
wa-in
क्रिया
عَزَمُوا۟
वे पक्का इरादा कर लें
ʿazamū
संज्ञा
ٱلطَّلَـٰقَ
तलाक़ का
l-ṭalāqa
अव्यय
فَإِنَّ
तो बेशक
fa-inna
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह
l-laha
संज्ञा
سَمِيعٌ
सब कुछ सुनने वाला है
samīʿun
संज्ञा
عَلِيمٌۭ
सब कुछ जानने वाला है
ʿalīmun
2:228
وَٱلْمُطَلَّقَـٰتُ يَتَرَبَّصْنَ بِأَنفُسِهِنَّ ثَلَـٰثَةَ قُرُوٓءٍۢ ۚ وَلَا يَحِلُّ لَهُنَّ أَن يَكْتُمْنَ مَا خَلَقَ ٱللَّهُ فِىٓ أَرْحَامِهِنَّ إِن كُنَّ يُؤْمِنَّ بِٱللَّهِ وَٱلْيَوْمِ ٱلْـَٔاخِرِ ۚ وَبُعُولَتُهُنَّ أَحَقُّ بِرَدِّهِنَّ فِى ذَٰلِكَ إِنْ أَرَادُوٓا۟ إِصْلَـٰحًۭا ۚ وَلَهُنَّ مِثْلُ ٱلَّذِى عَلَيْهِنَّ بِٱلْمَعْرُوفِ ۚ وَلِلرِّجَالِ عَلَيْهِنَّ دَرَجَةٌۭ ۗ وَٱللَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٌ
Wal-muṭallaqātu yatarabbaṣna bi-anfusihinna thalāthata qurūin wa lā yaḥillu lahunna an yaktum'na mā khalaqa Allāhu fī arḥāmihinna in kunna yu'minna billāhi wal-yawmi l-ākhiri wa buʿūlatuhunna aḥaqqu biraddihinna fī dhālika in arādū iṣ'lāḥan wa lahunna mith'lu alladhī ʿalayhinna bil-maʿrūfi walilrrijāli ʿalayhinna darajatun wal-lahu ʿazīzun ḥakīm
और तलाक़ दी हुई स्त्रियाँ तीन मासिक धर्म तक अपने-आपको प्रतीक्षा में रखें। और यदि वे अल्लाह और अन्तिम दिन पर ईमान रखती हैं तो उनके लिए यह वैध नहीं कि अल्लाह ने उनके गर्भाशयों में जो कुछ पैदा किया है, उसे छिपाएँ। और इस अवधि में उनके पति, यदि सम्बन्धों को सुधारना चाहें, तो वे उन्हें लौटा लेने के ज़्यादा हक़दार हैं। और स्त्रियों के लिए भी सामान्य नियम के अनुसार वैसे ही अधिकार हैं, जैसे उनपर ज़िम्मेदारियाँ हैं। अलबत्ता पुरुषों को उनपर एक दर्जा हासिल है। और अल्लाह प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है।
संज्ञा
وَٱلْمُطَلَّقَـٰتُ
और तलाक़ दी हुई औरतें
wal-muṭalaqātu
क्रिया
يَتَرَبَّصْنَ
इंतज़ार करें
yatarabbaṣna
संज्ञा
بِأَنفُسِهِنَّ
अपने आप को
bi-anfusihinna
संज्ञा
ثَلَـٰثَةَ
तीन
thalāthata
संज्ञा
قُرُوٓءٍۢ ۚ
मासिक धर्म तक
qurūin
अव्यय
وَلَا
और नहीं
walā
क्रिया
يَحِلُّ
जायज़ है
yaḥillu
अव्यय
لَهُنَّ
उनके लिए
lahunna
अव्यय
أَن
कि
an
क्रिया
يَكْتُمْنَ
वे छुपाएं
yaktum'na
अव्यय
مَا
उसे जो
mā
क्रिया
خَلَقَ
पैदा किया है
khalaqa
संज्ञा
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
l-lahu
अव्यय
فِىٓ
में
fī
संज्ञा
أَرْحَامِهِنَّ
उनके गर्भाशयों
arḥāmihinna
अव्यय
إِن
अगर
in
क्रिया
كُنَّ
वे
kunna
क्रिया
يُؤْمِنَّ
ईमान रखती हैं
yu'minna
संज्ञा
بِٱللَّهِ
अल्लाह पर
bil-lahi
संज्ञा
وَٱلْيَوْمِ
और दिन पर
wal-yawmi
संज्ञा
ٱلْـَٔاخِرِ ۚ
आखिरी
l-ākhiri
संज्ञा
وَبُعُولَتُهُنَّ
और उनके पति
wabuʿūlatuhunna
संज्ञा
أَحَقُّ
ज़्यादा हकदार हैं
aḥaqqu
संज्ञा
بِرَدِّهِنَّ
उन्हें लौटा लेने के
biraddihinna
अव्यय
فِى
में
fī
सर्वनाम
ذَٰلِكَ
उस (अवधि)
dhālika
अव्यय
إِنْ
अगर
in
क्रिया
أَرَادُوٓا۟
वे चाहें
arādū
संज्ञा
إِصْلَـٰحًۭا ۚ
सुधार करना
iṣ'lāḥan
अव्यय
وَلَهُنَّ
और उनके लिए हैं
walahunna
संज्ञा
مِثْلُ
उसी तरह (अधिकार)
mith'lu
सर्वनाम
ٱلَّذِى
जैसे कि
alladhī
अव्यय
عَلَيْهِنَّ
उन पर हैं
ʿalayhinna
संज्ञा
بِٱلْمَعْرُوفِ ۚ
दस्तूर के मुताबिक
bil-maʿrūfi
संज्ञा
وَلِلرِّجَالِ
और मर्दों के लिए
walilrrijāli
अव्यय
عَلَيْهِنَّ
उन पर
ʿalayhinna
संज्ञा
دَرَجَةٌۭ ۗ
एक दर्जा है
darajatun
संज्ञा
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
संज्ञा
عَزِيزٌ
प्रभुत्वशाली है
ʿazīzun
संज्ञा
حَكِيمٌ
तत्वदर्शी है
ḥakīmun
2:229
ٱلطَّلَـٰقُ مَرَّتَانِ ۖ فَإِمْسَاكٌۢ بِمَعْرُوفٍ أَوْ تَسْرِيحٌۢ بِإِحْسَـٰنٍۢ ۗ وَلَا يَحِلُّ لَكُمْ أَن تَأْخُذُوا۟ مِمَّآ ءَاتَيْتُمُوهُنَّ شَيْـًٔا إِلَّآ أَن يَخَافَآ أَلَّا يُقِيمَا حُدُودَ ٱللَّهِ ۖ فَإِنْ خِفْتُمْ أَلَّا يُقِيمَا حُدُودَ ٱللَّهِ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِمَا فِيمَا ٱفْتَدَتْ بِهِۦ ۗ تِلْكَ حُدُودَ ٱللَّهِ فَلَا تَعْتَدُوهَا ۚ وَمَن يَتَعَدَّ حُدُودَ ٱللَّهِ فَأُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلظَّـٰلِمُونَ
Aṭ-ṭalāqu marratāni fa-im'sākun bimaʿrūfin aw tasrīḥun bi-iḥ'sānin wa lā yaḥillu lakum an takhudhū mimmā ātaytumūhunna shay-an illā an yakhāfā allā yuqīmā ḥudūda Allāhi fa-in khif'tum allā yuqīmā ḥudūda Allāhi falā junāḥa ʿalayhimā fīmā if'tadat bihī til'ka ḥudūdu Allāhi falā taʿtadūhā wa man yataʿadda ḥudūda Allāhi fa-ulāika humu l-ẓālimūn
तलाक़ दो बार है। फिर या तो सामान्य नियम के अनुसार (स्त्री को) रोक लिया जाए या भले तरीक़े से विदा कर दिया जाए। और तुम्हारे लिए यह हलाल नहीं कि जो कुछ तुम उन्हें दे चुके हो, उसमें से कुछ वापस लो, الا यह कि दोनों को भय हो कि वे अल्लाह की सीमाओं पर क़ायम न रह सकेंगे। तो यदि तुम्हें भय हो कि वे अल्लाह की सीमाओं पर क़ायम न रहेंगे, तो स्त्री जो कुछ देकर छुटकारा प्राप्त कर ले, उसमें उन दोनों पर कोई गुनाह नहीं। ये अल्लाह की सीमाएँ हैं, अतः इनका उल्लंघन न करो। और जो अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करेंगे, तो ऐसे ही लोग ज़ालिम हैं।
संज्ञा
ٱلطَّلَـٰقُ
तलाक़
al-ṭalāqu
संज्ञा
مَرَّتَانِ ۖ
दो बार है
marratāni
संज्ञा
فَإِمْسَاكٌۢ
फिर रोक लेना है
fa-im'sākun
संज्ञा
بِمَعْرُوفٍ
अच्छे तरीके से
bimaʿrūfin
अव्यय
أَوْ
या
aw
संज्ञा
تَسْرِيحٌۢ
छोड़ देना है
tasrīḥun
संज्ञा
بِإِحْسَـٰنٍۢ ۗ
भलाई के साथ
bi-iḥ'sānin
अव्यय
وَلَا
और नहीं
walā
क्रिया
يَحِلُّ
हलाल है
yaḥillu
अव्यय
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
lakum
अव्यय
أَن
कि
an
क्रिया
تَأْخُذُوا۟
तुम लो
takhudhū
अव्यय
مِمَّآ
उसमें से जो
mimmā
क्रिया
ءَاتَيْتُمُوهُنَّ
तुमने उन्हें दिया है
ātaytumūhunna
संज्ञा
شَيْـًٔا
कुछ भी
shayan
अव्यय
إِلَّآ
सिवाय
illā
अव्यय
أَن
इसके कि
an
क्रिया
يَخَافَآ
वे दोनों डरें
yakhāfā
अव्यय
أَلَّا
कि न
allā
क्रिया
يُقِيمَا
वे दोनों कायम रख सकेंगे
yuqīmā
संज्ञा
حُدُودَ
हदों को
ḥudūda
संज्ञा
ٱللَّهِ ۖ
अल्लाह की
l-lahi
अव्यय
فَإِنْ
फिर अगर
fa-in
क्रिया
خِفْتُمْ
तुम डरो
khif'tum
अव्यय
أَلَّا
कि न
allā
क्रिया
يُقِيمَا
वे दोनों कायम रख सकेंगे
yuqīmā
संज्ञा
حُدُودَ
हदों को
ḥudūda
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह की
l-lahi
अव्यय
فَلَا
तो कोई नहीं
falā
संज्ञा
جُنَاحَ
गुनाह
junāḥa
अव्यय
عَلَيْهِمَا
उन दोनों पर
ʿalayhimā
अव्यय
فِيمَا
उसमें जो
fīmā
क्रिया
ٱفْتَدَتْ
वह फिदिया दे
if'tadat
अव्यय
بِهِۦ ۗ
उसके बदले
bihi
सर्वनाम
تِلْكَ
ये
til'ka
संज्ञा
حُdُودُ
हदें हैं
ḥudūdu
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह की
l-lahi
अव्यय
فَلَا
तो न
falā
क्रिया
تَعْتَدُوهَا ۚ
उनसे आगे बढ़ो
taʿtadūhā
अव्यय
وَمَن
और जो
waman
क्रिया
يَتَعَدَّ
आगे बढ़ेगा
yataʿadda
संज्ञा
حُدُودَ
हदों से
ḥudūda
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह की
l-lahi
सर्वनाम
فَأُو۟لَـٰٓئِكَ
तो वही लोग
fa-ulāika
सर्वनाम
هُمُ
ही
humu
संज्ञा
ٱلظَّـٰلِمُونَ
ज़ालिम हैं
l-ẓālimūna
2:230
فَإِن طَلَّقَهَا فَلَا تَحِلُّ لَهُۥ مِنۢ بَعْدُ حَتَّىٰ تَنكِحَ زَوْجًا غَيْرَهُۥ ۗ فَإِن طَلَّقَهَا فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِمَآ أَن يَتَرَاجَعَآ إِن ظَنَّآ أَن يُقِيمَا حُدُودَ ٱللَّهِ ۗ وَتِلْكَ حُدُودُ ٱللَّهِ يُبَيِّنُهَا لِقَوْمٍۢ يَعْلَمُونَ
Fa-in ṭallaqahā falā taḥillu lahū min baʿdu ḥattā tankiḥa zawjan ghayrahū fa-in ṭallaqahā falā junāḥa ʿalayhimā an yatarājaʿā in ẓannā an yuqīmā ḥudūda Allāhi wa til'ka ḥudūdu Allāhi yubayyinuhā liqawmin yaʿlamūn
फिर यदि वह उसे (तीसरी बार) तलाक़ दे दे, तो इसके पश्चात वह उसके लिए हलाल नहीं, जब तक कि वह किसी दूसरे पति से निकाह न कर ले। फिर यदि वह उसे तलाक़ दे दे, तो उन दोनों के लिए एक-दूसरे की ओर लौट आने में कोई गुनाह नहीं, यदि वे समझते हों कि अल्लाह की सीमाओं पर क़ायम रह सकते हैं। ये अल्लाह की सीमाएँ हैं, जिन्हें वह उन लोगों के लिए बयान करता है जो जानना चाहते हैं।
अव्यय
فَإِن
फिर अगर
fa-in
क्रिया
طَلَّقَهَا
वह उसे तलाक़ दे
ṭallaqahā
अव्यय
فَلَا
तो नहीं
falā
क्रिया
تَحِلُّ
वह हलाल है
taḥillu
अव्यय
لَهُۥ
उसके लिए
lahu
अव्यय
مِنۢ
से
min
संज्ञा
بَعْدُ
बाद
baʿdu
अव्यय
حَتَّىٰ
जब तक
ḥattā
क्रिया
تَنكِحَ
वह निकाह न कर ले
tankiḥa
संज्ञा
زَوْجًا
किसी पति से
zawjan
संज्ञा
غَيْرَهُۥ ۗ
उसके अलावा
ghayrahu
अव्यय
فَإِن
फिर अगर
fa-in
क्रिया
طَلَّقَهَا
वह उसे तलाक़ दे
ṭallaqahā
अव्यय
فَلَا
तो कोई नहीं
falā
संज्ञा
جُنَاحَ
गुनाह
junāḥa
अव्यय
عَلَيْهِمَآ
उन दोनों पर
ʿalayhimā
अव्यय
أَن
कि
an
क्रिया
يَتَرَاجَعَآ
वे दोनों लौट आएं
yatarājaʿā
अव्यय
إِن
अगर
in
क्रिया
ظَنَّآ
वे दोनों समझें
ẓannā
अव्यय
أَن
कि
an
क्रिया
يُقِيمَا
वे कायम रख सकेंगे
yuqīmā
संज्ञा
حُدُودَ
हदों को
ḥudūda
संज्ञा
ٱللَّهِ ۗ
अल्लाह की
l-lahi
सर्वनाम
وَتِلْكَ
और ये
watil'ka
संज्ञा
حُدُودُ
हदें हैं
ḥudūdu
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह की
l-lahi
क्रिया
يُبَيِّنُهَا
वह उन्हें बयान करता है
yubayyinuhā
संज्ञा
لِقَوْمٍۢ
उन लोगों के लिए
liqawmin
क्रिया
يَعْلَمُونَ
जो जानते हैं
yaʿlamūna
2:231
وَإِذَا طَلَّقْتُمُ ٱلنِّسَآءَ فَبَلَغْنَ أَجَلَهُنَّ فَأَمْسِكُوهُنَّ بِمَعْرُوفٍ أَوْ سَرِّحُوهُنَّ بِمَعْرُوفٍۢ ۚ وَلَا تُمْسِكُوهُنَّ ضِرَارًۭا لِّتَعْتَدُوا۟ ۚ وَمَن يَفْعَلْ ذَٰلِكَ فَقَدْ ظَلَمَ نَفْسَهُۥ ۚ وَلَا تَتَّخِذُوٓا۟ ءَايَـٰتِ ٱللَّهِ هُزُوًۭا ۚ وَٱذْكُرُوا۟ نِعْمَتَ ٱللَّهِ عَلَيْكُمْ وَمَآ أَنزَلَ عَلَيْكُم مِّنَ ٱلْكِتَـٰبِ وَٱلْحِكْمَةِ يَعِظُكُم بِهِۦ ۚ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَٱعْلَمُوٓا۟ أَنَّ ٱللَّهَ بِكُلِّ شَىْءٍ عَلِيمٌۭ
Wa idhā ṭallaqtumu l-nisāa fabalaghna ajalahunna fa-amsikūhunna bimaʿrūfin aw sarriḥūhunna bimaʿrūfin wa lā tum'sikūhunna ḍirāran litaʿtadū wa man yafʿal dhālika faqad ẓalama nafsahu wa lā tattakhidhū āyāti Allāhi huzuwan wadhkurū niʿ'mata Allāhi ʿalaykum wa mā anzala ʿalaykum mina l-kitābi wal-ḥik'mati yaʿiẓukum bihī wattaqū Allāha waʿlamū anna Allāha bikulli shay-in ʿalīm
और जब तुम स्त्रियों को तलाक़ दो और वे अपनी नियत अवधि (इद्दत) को पहुँच जाएँ, तो या तो उन्हें भले तरीक़े से रोक लो या भले तरीक़े से विदा कर दो। केवल नुक़सान पहुँचाने के इरादे से उन्हें न रोको कि यह ज़्यादती होगी। और जो ऐसा करेगा, वह वास्तव में अपने ही ऊपर ज़ुल्म करेगा। अल्लाह की आयतों को हँसी-खेल न बनाओ और अपने ऊपर अल्लाह की नेमतों को याद करो और उस किताब और हिकमत (तत्वदर्शिता) को भी, जो उसने तुमपर उतारी है, जिसके द्वारा वह तुम्हें नसीहत करता है। और अल्लाह का डर रखो और जान लो कि अल्लाह हर चीज़ को जानता है।
अव्यय
وَإِذَا
और जब
wa-idhā
क्रिया
طَلَّقْتُمُ
तुम तलाक़ दो
ṭallaqtumu
संज्ञा
ٱلنِّسَآءَ
औरतों को
l-nisāa
क्रिया
فَبَلَغْنَ
और वे पहुँच जाएं
fabalaghna
संज्ञा
أَجَلَهُنَّ
अपनी (इद्दत की) मुद्दत को
ajalahunna
क्रिया
فَأَمْسِكُوهُنَّ
तो उन्हें रोक लो
fa-amsikūhunna
संज्ञा
بِمَعْرُوفٍ
भले तरीके से
bimaʿrūfin
अव्यय
أَوْ
या
aw
क्रिया
سَرِّحُوهُنَّ
उन्हें छोड़ दो
sarriḥūhunna
संज्ञा
بِمَعْرُوفٍۢ ۚ
भले तरीके से
bimaʿrūfin
अव्यय
وَلَا
और न
walā
क्रिया
تُمْسِكُوهُنَّ
उन्हें रोको
tum'sikūhunna
संज्ञा
ضِرَارًۭا
नुकसान पहुँचाने के लिए
ḍirāran
क्रिया
لِّتَعْتَدُوا۟ ۚ
ताकि तुम ज़्यादती करो
litaʿtadū
अव्यय
وَمَن
और जो
waman
क्रिया
يَفْعَلْ
करेगा
yafʿal
सर्वनाम
ذَٰلِكَ
ऐसा
dhālika
अव्यय
فَقَدْ
तो बेशक
faqad
क्रिया
ظَلَمَ
उसने ज़ुल्म किया
ẓalama
संज्ञा
نَفْسَهُۥ ۚ
अपने ऊपर
nafsahu
अव्यय
وَلَا
और न
walā
क्रिया
تَتَّخِذُوٓا۟
बनाओ
tattakhidhū
संज्ञा
ءَايَـٰتِ
आयतों को
āyāti
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह की
l-lahi
संज्ञा
هُزُوًۭا ۚ
मजाक
huzuwan
क्रिया
وَٱذْكُرُوا۟
और याद करो
wa-udh'kurū
संज्ञा
نِعْمَتَ
नेमत को
niʿ'mata
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह की
l-lahi
अव्यय
عَلَيْكُمْ
अपने ऊपर
ʿalaykum
अव्यय
وَمَآ
और जो
wamā
क्रिया
أَنزَلَ
उसने उतारा
anzala
अव्यय
عَلَيْكُم
तुम पर
ʿalaykum
अव्यय
مِّنَ
से
mina
संज्ञा
ٱلْكِتَـٰبِ
किताब
l-kitābi
संज्ञा
وَٱلْحِكْمَةِ
और हिकमत
wal-ḥik'mati
क्रिया
يَعِظُكُم
वह तुम्हें नसीहत करता है
yaʿiẓukum
अव्यय
بِهِۦ ۚ
उससे
bihi
क्रिया
وَٱتَّقُوا۟
और डरो
wa-ittaqū
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह से
l-laha
क्रिया
وَٱعْلَمُوٓا۟
और जान लो
wa-iʿ'lamū
अव्यय
أَنَّ
कि
anna
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह
l-laha
संज्ञा
بِكُلِّ
हर
bikulli
संज्ञा
شَىْءٍ
चीज़ को
shayin
संज्ञा
عَلِيمٌۭ
जानने वाला है
ʿalīmun
2:232
وَإِذَا طَلَّقْتُمُ ٱلنِّسَآءَ فَبَلَغْنَ أَجَلَهُنَّ فَلَا تَعْضُلُوهُنَّ أَن يَنكِحْنَ أَزْوَٰجَهُنَّ إِذَا تَرَٰضَوْا۟ بَيْنَهُم بِٱلْمَعْرُوفِ ۗ ذَٰلِكَ يُوعَظُ بِهِۦ مَن كَانَ مِنكُمْ يُؤْمِنُ بِٱللَّهِ وَٱلْيَوْمِ ٱلْـَٔاخِرِ ۗ ذَٰلِكُمْ أَزْكَىٰ لَكُمْ وَأَطْهَرُ ۗ وَٱللَّهُ يَعْلَمُ وَأَنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ
Wa idhā ṭallaqtumu l-nisāa fabalaghna ajalahunna falā taʿḍulūhunna an yankiḥ'na azwājahunna idhā tarāḍaw baynahum bil-maʿrūfi dhālika yūʿaẓu bihī man kāna minkum yu'minu billāhi wal-yawmi l-ākhiri dhālikum azkā lakum wa aṭharu wal-lahu yaʿlamu wa antum lā taʿlamūn
और जब तुम स्त्रियों को तलाक़ दो और वे अपनी इद्दत की अवधि को पहुँच जाएँ, तो उन्हें अपने होनेवाले पतियों से निकाह करने से न रोको, जबकि वे सामान्य नियम के अनुसार आपस में राज़ी हों। यह नसीहत तुममें से उसको की जाती है जो अल्लाह और अन्तिम दिन पर ईमान रखता हो। यह तुम्हारे लिए ज़्यादा शिष्ट और ज़्यादा पाक-साफ़ बात है। अल्लाह जानता है, तुम नहीं जानते।
अव्यय
وَإِذَا
और जब
wa-idhā
क्रिया
طَلَّقْتُمُ
तुम तलाक़ दो
ṭallaqtumu
संज्ञा
ٱلنِّسَآءَ
औरतों को
l-nisāa
क्रिया
فَبَلَغْنَ
और वे पहुँच जाएं
fabalaghna
संज्ञा
أَجَلَهُنَّ
अपनी मुद्दत को
ajalahunna
अव्यय
فَلَا
तो न
falā
क्रिया
تَعْضُلُوهُنَّ
उन्हें रोको
taʿḍulūhunna
अव्यय
أَن
कि
an
क्रिया
يَنكِحْنَ
वे निकाह करें
yankiḥ'na
संज्ञा
أَزْوَٰجَهُنَّ
अपने पतियों से
azwājahunna
अव्यय
إِذَا
जब
idhā
क्रिया
تَرَٰضَوْا۟
वे राज़ी हों
tarāḍaw
संज्ञा
بَيْنَهُم
आपस में
baynahum
संज्ञा
بِٱلْمَعْرُوفِ ۗ
भले तरीके से
bil-maʿrūfi
सर्वनाम
ذَٰلِكَ
यह
dhālika
क्रिया
يُوعَظُ
नसीहत की जाती है
yūʿaẓu
अव्यय
بِهِۦ
उसकी
bihi
अव्यय
مَن
जो कोई
man
क्रिया
كَانَ
हो
kāna
अव्यय
مِنكُمْ
तुम में से
minkum
क्रिया
يُؤْمِنُ
ईमान रखता हो
yu'minu
संज्ञा
بِٱللَّهِ
अल्लाह पर
bil-lahi
संज्ञा
وَٱلْيَوْمِ
और दिन पर
wal-yawmi
संज्ञा
ٱلْـَٔاخِرِ ۗ
आखिरी
l-ākhiri
सर्वनाम
ذَٰلِكُمْ
यह
dhālikum
संज्ञा
أَزْكَىٰ
ज़्यादा अच्छा है
azkā
अव्यय
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
lakum
संज्ञा
وَأَطْهَرُ ۗ
और ज़्यादा पाक है
wa-aṭharu
संज्ञा
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
क्रिया
يَعْلَمُ
जानता है
yaʿlamu
सर्वनाम
وَأَنتُمْ
और तुम
wa-antum
अव्यय
لَا
नहीं
lā
क्रिया
تَعْلَمُونَ
जानते
taʿlamūna
2:233
۞ وَٱلْوَٰلِدَٰتُ يُرْضِعْنَ أَوْلَـٰدَهُنَّ حَوْلَيْنِ كَامِلَيْنِ ۖ لِمَنْ أَرَادَ أَن يُتِمَّ ٱلرَّضَاعَةَ ۚ وَعَلَى ٱلْمَوْلُودِ لَهُۥ رِزْقُهُنَّ وَكِسْوَتُهُنَّ بِٱلْمَعْرُوفِ ۚ لَا تُكَلَّفُ نَفْسٌ إِلَّا وُسْعَهَا ۚ لَا تُضَآرَّ وَٰلِدَةٌۢ بِوَلَدِهَا وَلَا مَوْلُودٌۭ لَّهُۥ بِوَلَدِهِۦ ۚ وَعَلَى ٱلْوَارِثِ مِثْلُ ذَٰلِكَ ۗ فَإِنْ أَرَادَا فِصَالًا عَن تَرَاضٍۢ مِّنْهُمَا وَتَشَاوُرٍۢ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِمَا ۗ وَإِنْ أَرَدتُّمْ أَن تَسْتَرْضِعُوٓا۟ أَوْلَـٰدَكُمْ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْكُمْ إِذَا سَلَّمْتُم مَّآ ءَاتَيْتُم بِٱلْمَعْرُوفِ ۗ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَٱعْلَمُوٓا۟ أَنَّ ٱللَّهَ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌۭ
Wal-wālidātu yur'ḍiʿ'na awlādahunna ḥawlayni kāmilayni liman arāda an yutimma l-raḍāʿata wa ʿalā l-mawlūdi lahū riz'quhunna wa kis'watuhunna bil-maʿrūfi lā tukallafu nafsun illā wus'ʿahā lā tuḍārra wālidatun biwaladihā wa lā mawlūdun lahū biwaladihi wa ʿalā l-wārithi mith'lu dhālika fa-in arādā fiṣālan ʿan tarāḍin min'humā wa tashāwurin falā junāḥa ʿalayhimā wa in aradttum an tastarḍiʿū awlādakum falā junāḥa ʿalaykum idhā sallamtum mā ātaytum bil-maʿrūfi wattaqū Allāha waʿlamū anna Allāha bimā taʿmalūna baṣīr
और माएँ अपनी सन्तान को पूरे दो वर्ष दूध पिलाएँ, यह उसके लिए है जो दूध पिलाने की अवधि पूरी करना चाहे। और जिसका बच्चा है उसपर सामान्य नियम के अनुसार उनका खाना और कपड़ा लाज़िम है। किसी पर उसकी समाई से बढ़कर बोझ नहीं डाला जाता। न माँ को उसकी सन्तान के कारण कोई हानि पहुँचाई जाए और न बाप को उसकी सन्तान के कारण। और इसी तरह की ज़िम्मेदारी वारिस पर भी है। फिर यदि वे दोनों आपसी रज़ामंदी और परामर्श से दूध छुड़ाना चाहें तो उन दोनों पर कोई गुनाह नहीं। और यदि तुम अपनी सन्तान को किसी दूसरी स्त्री से दूध पिलवाना चाहो तो इसमें भी तुमपर कोई गुनाह नहीं, जबकि जो कुछ तुम सामान्य नियम के अनुसार दो, उसे भली-भाँति अदा करो। और अल्लाह का डर रखो और जान लो कि जो कुछ तुम करते हो, अल्लाह उसे देख रहा है।
संज्ञा
۞ وَٱلْوَٰلِدَٰتُ
और माएँ
wal-wālidātu
क्रिया
يُرْضِعْنَ
दूध पिलाएं
yur'ḍiʿ'na
संज्ञा
أَوْلَـٰدَهُنَّ
अपनी औलाद को
awlādahunna
संज्ञा
حَوْلَيْنِ
दो साल
ḥawlayni
संज्ञा
كَامِلَيْنِ ۖ
पूरे
kāmilayni
अव्यय
لِمَنْ
उसके लिए जो
liman
क्रिया
أَرَادَ
इरादा करे
arāda
अव्यय
أَن
कि
an
क्रिया
يُتِمَّ
वह पूरी करे
yutimma
संज्ञा
ٱلرَّضَاعَةَ ۚ
दूध पिलाने की मुद्दत
l-raḍāʿata
अव्यय
وَعَلَى
और पर है
waʿalā
संज्ञा
ٱلْمَوْلُودِ
जिसका बच्चा है
l-mawlūdi
अव्यय
لَهُۥ
(यानी बाप)
lahu
संज्ञा
رِزْقُهُنَّ
उनका खाना
riz'quhunna
संज्ञा
وَكِسْوَتُهُنَّ
और उनका कपड़ा
wakis'watuhunna
संज्ञा
بِٱلْمَعْرُوفِ ۚ
दस्तूर के मुताबिक
bil-maʿrūfi
अव्यय
لَا
नहीं
lā
क्रिया
تُكَلَّفُ
ज़िम्मेदारी डाली जाती
tukallafu
संज्ञा
نَفْسٌ
किसी जान पर
nafsun
अव्यय
إِلَّا
मगर
illā
संज्ञा
وُسْعَهَا ۚ
उसकी ताक़त के
wus'ʿahā
अव्यय
لَا
न
lā
क्रिया
تُضَآرَّ
नुकसान पहुँचाया जाए
tuḍārra
संज्ञा
وَٰلِدَةٌۢ
माँ को
wālidatun
संज्ञा
بِوَلَدِهَا
उसके बच्चे की वजह से
biwaladihā
अव्यय
وَلَا
और न
walā
संज्ञा
مَوْلُودٌۭ
(बाप) को जिसके लिए बच्चा है
mawlūdun
अव्यय
لَّهُۥ
उसके
lahu
संज्ञा
بِوَلَدِهِۦ ۚ
उसके बच्चे की वजह से
biwaladihi
अव्यय
وَعَلَى
और पर है
waʿalā
संज्ञा
ٱلْوَارِثِ
वारिस के
l-wārithi
संज्ञा
مِثْلُ
उसी तरह
mith'lu
सर्वनाम
ذَٰلِكَ ۗ
यह (ज़िम्मेदारी)
dhālika
अव्यय
فَإِنْ
फिर अगर
fa-in
क्रिया
أَرَادَا
वे दोनों चाहें
arādā
संज्ञा
فِصَالًا
दूध छुड़ाना
fiṣālan
अव्यय
عَن
से
ʿan
संज्ञा
تَرَاضٍۢ
आपसी रज़ामंदी
tarāḍin
अव्यय
مِّنْهُمَا
उन दोनों की
min'humā
संज्ञा
وَتَشَاوُرٍۢ
और मशवरे से
watashāwurin
अव्यय
فَلَا
तो कोई नहीं
falā
संज्ञा
جُنَاحَ
गुनाह
junāḥa
अव्यय
عَلَيْهِمَا ۗ
उन दोनों पर
ʿalayhimā
अव्यय
وَإِنْ
और अगर
wa-in
क्रिया
أَرَدتُّمْ
तुम चाहो
aradttum
अव्यय
أَن
कि
an
क्रिया
تَسْتَرْضِعُوٓا۟
तुम दूध पिलवाओ
tastarḍiʿū
संज्ञा
أَوْلَـٰدَكُمْ
अपनी औलाद को
awlādakum
अव्यय
فَلَا
तो कोई नहीं
falā
संज्ञा
جُنَاحَ
गुनाह
junāḥa
अव्यय
عَلَيْكُمْ
तुम पर
ʿalaykum
अव्यय
إِذَا
जब
idhā
क्रिया
سَلَّمْتُم
तुम दे दो
sallamtum
अव्यय
مَّآ
जो
mā
क्रिया
ءَاتَيْتُم
तुमने तय किया
ātaytum
संज्ञा
بِٱلْمَعْرُوفِ ۗ
दस्तूर के मुताबिक
bil-maʿrūfi
क्रिया
وَٱتَّقُوا۟
और डरो
wa-ittaqū
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह से
l-laha
क्रिया
وَٱعْلَمُوٓا۟
और जान लो
wa-iʿ'lamū
अव्यय
أَنَّ
कि
anna
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह
l-laha
अव्यय
بِمَا
उसको जो
bimā
क्रिया
تَعْمَلُونَ
तुम करते हो
taʿmalūna
संज्ञा
بَصِيرٌۭ
देख रहा है
baṣīrun
2:234
وَٱلَّذِينَ يُتَوَفَّوْنَ مِنكُمْ وَيَذَرُونَ أَزْوَٰجًۭا يَتَرَبَّصْنَ بِأَنفُسِهِنَّ أَرْبَعَةَ أَشْهُرٍۢ وَعَشْرًۭا ۖ فَإِذَا بَلَغْنَ أَجَلَهُنَّ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْكُمْ فِيمَا فَعَلْنَ فِىٓ أَنفُسِهِنَّ بِٱلْمَعْرُوفِ ۗ وَٱللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرٌۭ
Wal-ladhīna yutawaffawna minkum wa yadharūna azwājan yatarabbaṣna bi-anfusihinna arbaʿata ashhurin wa ʿashran fa-idhā balaghna ajalahunna falā junāḥa ʿalaykum fīmā faʿalna fī anfusihinna bil-maʿrūfi wal-lahu bimā taʿmalūna khabīr
और तुममें से जो लोग मर जाएँ और अपने पीछे पत्नियाँ छोड़ जाएँ, तो वे पत्नियाँ चार महीने दस दिन अपने-आपको प्रतीक्षा में रखें। फिर जब वे अपनी (इद्दत की) अवधि को पहुँच जाएँ, तो सामान्य नियम के अनुसार वे अपने लिए जो कुछ करें, उसमें तुमपर कोई गुनाह नहीं। तुम जो कुछ करते हो, अल्लाह उसकी ख़बर रखता है।
सर्वनाम
وَٱلَّذِينَ
और वो लोग जो
wa-alladhīna
क्रिया
يُتَوَفَّوْنَ
मर जाएं
yutawaffawna
अव्यय
مِنكُمْ
तुम में से
minkum
क्रिया
وَيَذَرُونَ
और पीछे छोड़ जाएं
wayadharūna
संज्ञा
أَزْوَٰجًۭا
पत्नियां
azwājan
क्रिया
يَتَرَبَّصْنَ
वे इंतज़ार करें
yatarabbaṣna
संज्ञा
بِأَنفُسِهِنَّ
अपने आप को
bi-anfusihinna
संज्ञा
أَرْبَعَةَ
चार
arbaʿata
संज्ञा
أَشْهُرٍۢ
महीने
ashhurin
संज्ञा
وَعَشْرًۭا ۖ
और दस दिन
waʿashran
अव्यय
فَإِذَا
फिर जब
fa-idhā
क्रिया
بَلَغْنَ
वे पहुँच जाएं
balaghna
संज्ञा
أَجَلَهُنَّ
अपनी मुद्दत को
ajalahunna
अव्यय
فَلَا
तो कोई नहीं
falā
संज्ञा
جُنَاحَ
गुनाह
junāḥa
अव्यय
عَلَيْكُمْ
तुम पर
ʿalaykum
अव्यय
فِيمَا
उसमें जो
fīmā
क्रिया
فَعَلْنَ
वे करें
faʿalna
अव्यय
فِىٓ
बारे में
fī
संज्ञा
أَنفُسِهِنَّ
अपने
anfusihinna
संज्ञा
بِٱلْمَعْرُوفِ ۗ
भले तरीके से
bil-maʿrūfi
संज्ञा
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
अव्यय
بِمَا
उससे जो
bimā
क्रिया
تَعْمَلُونَ
तुम करते हो
taʿmalūna
संज्ञा
خَبِيرٌۭ
पूरी तरह खबरदार है
khabīrun
2:235
وَلَا جُنَاحَ عَلَيْكُمْ فِيمَا عَرَّضْتُم بِهِۦ مِنْ خِطْبَةِ ٱلنِّسَآءِ أَوْ أَكْنَنتُمْ فِىٓ أَنفُسِكُمْ ۚ عَلِمَ ٱللَّهُ أَنَّكُمْ سَتَذْكُرُونَهُنَّ وَلَـٰكِن لَّا تُوَاعِدُوهُنَّ سِرًّا إِلَّآ أَن تَقُولُوا۟ قَوْلًۭا مَّعْرُوفًۭا ۚ وَلَا تَعْزِمُوا۟ عُقْدَةَ ٱلنِّكَاحِ حَتَّىٰ يَبْلُغَ ٱلْكِتَـٰبُ أَجَلَهُۥ ۚ وَٱعْلَمُوٓا۟ أَنَّ ٱللَّهَ يَعْلَمُ مَا فِىٓ أَنفُسِكُمْ فَٱحْذَرُوهُ ۚ وَٱعْلَمُوٓا۟ أَنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌ حَلِيمٌۭ
Wa lā junāḥa ʿalaykum fīmā ʿarraḍtum bihī min khiṭ'bati l-nisāi aw aknantum fī anfusikum ʿalima Allāhu annakum satadhkurūnahunna wa lākin lā tuwāʿidūhunna sirran illā an taqūlū qawlan maʿrūfan wa lā taʿzimū ʿuq'data l-nikāḥi ḥattā yablugha l-kitābu ajalahū waʿlamū anna Allāha yaʿlamu mā fī anfusikum fa-iḥ'dharūhu waʿlamū anna Allāha ghafūrun ḥalīm
और इसमें तुमपर कोई गुनाह नहीं कि तुम संकेतों में उन स्त्रियों से निकाह का प्रस्ताव करो, या अपने दिलों में छिपा रखो। अल्लाह जानता है कि तुम उनका ज़िक्र ज़रूर करोगे, लेकिन चोरी-छिपे उनसे कोई वादा न करो, सिवाय इसके कि तुम कोई भली बात कहो। और निकाह की गाँठ तब तक न बाँधो जब तक कि निर्धारित अवधि पूरी न हो जाए। और जान लो कि अल्लाह तुम्हारे दिलों की बात जानता है, तो उससे डरो। और जान लो कि अल्लाह बड़ा क्षमाशील, सहनशील है।
अव्यय
وَلَا
और नहीं
walā
संज्ञा
جُنَاحَ
कोई गुनाह
junāḥa
अव्यय
عَلَيْكُمْ
तुम पर
ʿalaykum
अव्यय
فِيمَا
उसमें जो
fīmā
क्रिया
عَرَّضْتُم
तुम इशारा करो
ʿarraḍtum
अव्यय
بِهِۦ
उसके साथ
bihi
अव्यय
مِنْ
से
min
संज्ञा
خِطْبَةِ
निकाह के पैगाम
khiṭ'bati
संज्ञा
ٱلنِّسَآءِ
औरतों को
l-nisāi
अव्यय
أَوْ
या
aw
क्रिया
أَكْنَنتُمْ
तुम छुपाओ
aknantum
अव्यय
فِىٓ
में
fī
संज्ञा
أَنفُسِكُمْ ۚ
अपने दिलों के
anfusikum
क्रिया
عَلِمَ
जान लिया
ʿalima
संज्ञा
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
l-lahu
अव्यय
أَنَّكُمْ
कि तुम
annakum
क्रिया
سَتَذْكُرُونَهُنَّ
उनका ज़िक्र करोगे
satadhkurūnahunna
अव्यय
وَلَـٰكِن
लेकिन
walākin
अव्यय
لَّا
न
lā
क्रिया
تُوَاعِدُوهُنَّ
उनसे वादा करो
tuwāʿidūhunna
संज्ञा
سِرًّا
चुपके से
sirran
अव्यय
إِلَّآ
सिवाय
illā
अव्यय
أَن
इसके कि
an
क्रिया
تَقُولُوا۟
तुम कहो
taqūlū
संज्ञा
قَوْلًۭا
कोई बात
qawlan
संज्ञा
مَّعْرُوفًۭا ۚ
भली
maʿrūfan
अव्यय
وَلَا
और न
walā
क्रिया
تَعْزِمُوا۟
पक्का इरादा करो
taʿzimū
संज्ञा
عُقْدَةَ
गांठ का
ʿuq'data
संज्ञा
ٱلنِّكَاحِ
निकाह की
l-nikāḥi
अव्यय
حَتَّىٰ
जब तक
ḥattā
क्रिया
يَبْلُغَ
पहुँच जाए
yablugha
संज्ञा
ٱلْكِتَـٰبُ
लिखा हुआ
l-kitābu
संज्ञा
أَجَلَهُۥ ۚ
अपनी मुद्दत को
ajalahu
क्रिया
وَٱعْلَمُوٓا۟
और जान लो
wa-iʿ'lamū
अव्यय
أَنَّ
कि
anna
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह
l-laha
क्रिया
يَعْلَمُ
जानता है
yaʿlamu
अव्यय
مَا
जो
mā
अव्यय
فِىٓ
में है
fī
संज्ञा
أَنفُسِكُمْ
तुम्हारे दिलों के
anfusikum
क्रिया
فَٱحْذَرُوهُ ۚ
तो उससे डरो
fa-iḥ'dharūhu
क्रिया
وَٱعْلَمُوٓا۟
और जान लो
wa-iʿ'lamū
अव्यय
أَنَّ
कि
anna
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह
l-laha
संज्ञा
غَفُورٌ
बड़ा बख्शने वाला है
ghafūrun
संज्ञा
حَلِيمٌۭ
बहुत सहनशील है
ḥalīmun
2:236
لَّا جُنَاحَ عَلَيْكُمْ إِن طَلَّقْتُمُ ٱلنِّسَآءَ مَا لَمْ تَمَسُّوهُنَّ أَوْ تَفْرِضُوا۟ لَهُنَّ فَرِيضَةًۭ ۚ وَمَتِّعُوهُنَّ عَلَى ٱلْمُوسِعِ قَدَرُهُۥ وَعَلَى ٱلْمُقْتِرِ قَدَرُهُۥ مَتَـٰعًۢا بِٱلْمَعْرُوفِ ۖ حَقًّا عَلَى ٱلْمُحْسِنِينَ
Lā junāḥa ʿalaykum in ṭallaqtumu l-nisāa mā lam tamassūhunna aw tafriḍū lahunna farīḍatan wa mattiʿūhunna ʿalā l-mūsiʿi qadaruhū wa ʿalā l-muq'tiri qadaruhū matāʿan bil-maʿrūfi ḥaqqan ʿalā l-muḥ'sinīn
तुम पर कोई गुनाह नहीं यदि तुम स्त्रियों को तलाक़ दे दो, इस स्थिति में कि तुमने उन्हें हाथ न लगाया हो या कोई मह्र नियत न किया हो। हाँ, उन्हें कुछ सामान दो; समाईवाले पर उसकी समाई के अनुसार और तंगदस्त पर उसकी समाई के अनुसार सामान्य नियम के मुताबिक़ देना अनिवार्य है। यह उत्तमकारों पर एक हक़ है।
अव्यय
لَّا
नहीं
lā
संज्ञा
جُنَاحَ
कोई गुनाह
junāḥa
अव्यय
عَلَيْكُمْ
तुम पर
ʿalaykum
अव्यय
إِن
अगर
in
क्रिया
طَلَّقْتُمُ
तुम तलाक़ दो
ṭallaqtumu
संज्ञा
ٱلنِّسَآءَ
औरतों को
l-nisāa
अव्यय
مَا لَمْ
जब तक कि न
mā lam
क्रिया
تَمَسُّوهُنَّ
तुमने उन्हें छुआ हो
tamassūhunna
अव्यय
أَوْ
या
aw
क्रिया
تَفْرِضُوا۟
तुमने मुक़र्रर किया हो
tafriḍū
अव्यय
لَهُنَّ
उनके लिए
lahunna
संज्ञा
فَرِيضَةًۭ ۚ
कोई महर
farīḍatan
क्रिया
وَمَتِّعُوهُنَّ
और उन्हें कुछ सामान दो
wamattiʿūhunna
अव्यय
عَلَى
पर
ʿalā
संज्ञा
ٱلْمُوسِعِ
अमीर के
l-mūsiʿi
संज्ञा
قَدَرُهُۥ
उसकी हैसियत के मुताबिक
qadaruhu
अव्यय
وَعَلَى
और पर
waʿalā
संज्ञा
ٱلْمُقْتِرِ
गरीब के
l-muq'tiri
संज्ञा
قَدَرُهُۥ
उसकी हैसियत के मुताबिक
qadaruhu
संज्ञा
مَتَـٰعًۢا
सामान देना
matāʿan
संज्ञा
بِٱلْمَعْرُوفِ ۖ
दस्तूर के मुताबिक
bil-maʿrūfi
संज्ञा
حَقًّا
एक हक है
ḥaqqan
अव्यय
عَلَى
पर
ʿalā
संज्ञा
ٱلْمُحْسِنِينَ
नेकी करने वालों के
l-muḥ'sinīna
2:237
وَإِن طَلَّقْتُمُوهُنَّ مِن قَبْلِ أَن تَمَسُّوهُنَّ وَقَدْ فَرَضْتُمْ لَهُنَّ فَرِيضَةًۭ فَنِصْفُ مَا فَرَضْتُمْ إِلَّآ أَن يَعْفُونَ أَوْ يَعْفُوَا۟ ٱلَّذِى بِيَدِهِۦ عُقْدَةُ ٱلنِّكَاحِ ۚ وَأَن تَعْفُوٓا۟ أَقْرَبُ لِلتَّقْوَىٰ ۚ وَلَا تَنسَوُا۟ ٱلْفَضْلَ بَيْنَكُمْ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ
Wa in ṭallaqtumūhunna min qabli an tamassūhunna wa qad faraḍtum lahunna farīḍatan faniṣ'fu mā faraḍtum illā an yaʿfūna aw yaʿfuwā alladhī biyadihī ʿuq'datu l-nikāḥi wa an taʿfū aqrabu lilttaqwā wa lā tansawū l-faḍla baynakum inna Allāha bimā taʿmalūna baṣīr
और यदि तुम उन्हें हाथ लगाने से पहले तलाक़ दो, जबकि तुम उनके लिए कोई मह्र नियत कर चुके हो, तो जो कुछ तुमने नियत किया था उसका आधा देना होगा, सिवाय इसके कि वे स्वयं माफ़ कर दें या वह माफ़ कर दे जिसके हाथ में निकाह की गाँठ है। और यह कि तुम माफ़ कर दो, तो यह तक़वा (धर्मपरायणता) से ज़्यादा करीब है। और आपस में उदारता को न भूलो। निश्चय ही तुम जो कुछ करते हो, अल्लाह उसे देख रहा है।
अव्यय
وَإِن
और अगर
wa-in
क्रिया
طَلَّقْتُمُوهُنَّ
तुम उन्हें तलाक़ दो
ṭallaqtumūhunna
अव्यय
مِن
से
min
संज्ञा
قَبْلِ
पहले
qabli
अव्यय
أَن
कि
an
क्रिया
تَمَسُّوهُنَّ
तुम उन्हें छुओ
tamassūhunna
अव्यय
وَقَدْ
और निश्चित ही
waqad
क्रिया
فَرَضْتُمْ
तुमने मुक़र्रर कर दिया
faraḍtum
अव्यय
لَهُنَّ
उनके लिए
lahunna
संज्ञा
فَرِيضَةًۭ
कोई महर
farīḍatan
संज्ञा
فَنِصْفُ
तो आधा है
faniṣ'fu
अव्यय
مَا
उसका जो
mā
क्रिया
فَرَضْتُمْ
तुमने मुक़र्रर किया
faraḍtum
अव्यय
إِلَّآ
सिवाय
illā
अव्यय
أَن
इसके कि
an
क्रिया
يَعْفُونَ
वे (औरतें) माफ कर दें
yaʿfūna
अव्यय
أَوْ
या
aw
क्रिया
يَعْفُوَا۟
माफ कर दे
yaʿfuwā
सर्वनाम
ٱلَّذِى
वह जिसके
alladhī
संज्ञा
بِيَدِهِۦ
हाथ में है
biyadihi
संज्ञा
عُقْدَةُ
गांठ
ʿuq'datu
संज्ञा
ٱلنِّكَاحِ ۚ
निकाह की
l-nikāḥi
अव्यय
وَأَن
और यह कि
wa-an
क्रिया
تَعْفُوٓا۟
तुम माफ कर दो
taʿfū
संज्ञा
أَقْرَبُ
ज़्यादा करीब है
aqrabu
संज्ञा
لِلتَّقْوَىٰ ۚ
तक़वा के
lilttaqwā
अव्यय
وَلَا
और न
walā
क्रिया
تَنسَوُا۟
भूलो
tansawū
संज्ञा
ٱلْفَضْلَ
एहसान को
l-faḍla
संज्ञा
بَيْنَكُمْ ۚ
अपने बीच
baynakum
अव्यय
إِنَّ
बेशक
inna
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह
l-laha
अव्यय
بِمَا
उसको जो
bimā
क्रिया
تَعْمَلُونَ
तुम करते हो
taʿmalūna
संज्ञा
بَصِيرٌ
देख रहा है
baṣīrun
2:238
حَـٰفِظُوا۟ عَلَى ٱلصَّلَوَٰتِ وَٱلصَّلَوٰةِ ٱلْوُسْطَىٰ وَقُومُوا۟ لِلَّهِ قَـٰنِتِينَ
Ḥāfiẓū ʿalā l-ṣalawāti wal-ṣalati l-wus'ṭā wa qūmū lillāhi qānitīn
नमाज़ों की पाबन्दी करो, विशेष रूप से बीच की नमाज़ की। और अल्लाह के आगे विनम्रतापूर्वक खड़े हुआ करो।
क्रिया
حَـٰفِظُوا۟
पाबंदी करो
ḥāfiẓū
अव्यय
عَلَى
की
ʿalā
संज्ञा
ٱلصَّلَوَٰتِ
नमाज़ों
l-ṣalawāti
संज्ञा
وَٱلصَّلَوٰةِ
और नमाज़ की
wal-ṣalati
संज्ञा
ٱلْوُسْطَىٰ
बीच वाली
l-wus'ṭā
क्रिया
وَقُومُوا۟
और खड़े हो
waqūmū
संज्ञा
لِلَّهِ
अल्लाह के लिए
lillahi
संज्ञा
قَـٰنِتِينَ
विनम्रतापूर्वक
qānitīna
2:239
فَإِنْ خِفْتُمْ فَرِجَالًا أَوْ رُكْبَانًۭا ۖ فَإِذَآ أَمِنتُمْ فَٱذْكُرُوا۟ ٱللَّهَ كَمَا عَلَّمَكُم مَّا لَمْ تَكُونُوا۟ تَعْلَمُونَ
Fa-in khif'tum farijālan aw ruk'bānan fa-idhā amintum fādhkurū Allāha kamā ʿallamakum mā lam takūnū taʿlamūn
फिर यदि तुम्हें भय हो तो पैदल या सवार ही सही। फिर जब तुम निश्चिन्त हो जाओ तो अल्लाह को उसी तरह याद करो, जैसे उसने तुम्हें वह बात सिखाई है, जिसे तुम जानते न थे।
अव्यय
فَإِنْ
फिर अगर
fa-in
क्रिया
خِفْتُمْ
तुम्हें डर हो
khif'tum
संज्ञा
فَرِجَالًا
तो पैदल
farijālan
अव्यय
أَوْ
या
aw
संज्ञा
رُكْبَانًۭا ۖ
सवार
ruk'bānan
अव्यय
فَإِذَآ
फिर जब
fa-idhā
क्रिया
أَمِنتُمْ
तुम अमन में हो जाओ
amintum
क्रिया
فَٱذْكُرُوا۟
तो याद करो
fa-udh'kurū
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह को
l-laha
अव्यय
كَمَا
जैसे
kamā
क्रिया
عَلَّمَكُم
उसने तुम्हें सिखाया
ʿallamakum
अव्यय
مَّا
जो
mā
अव्यय
لَمْ
न
lam
क्रिया
تَكُونُوا۟
थे तुम
takūnū
क्रिया
تَعْلَمُونَ
जानते
taʿlamūna
2:240
وَٱلَّذِينَ يُتَوَفَّوْنَ مِنكُمْ وَيَذَرُونَ أَزْوَٰجًۭا وَصِيَّةًۭ لِّأَزْوَٰجِهِم مَّتَـٰعًا إِلَى ٱلْحَوْلِ غَيْرَ إِخْرَاجٍۢ ۚ فَإِنْ خَرَجْنَ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْكُمْ فِى مَا فَعَلْنَ فِىٓ أَنفُسِهِنَّ مِن مَّعْرُوفٍۢ ۗ وَٱللَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٌۭ
Wal-ladhīna yutawaffawna minkum wa yadharūna azwājan waṣiyyatan li-azwājihim matāʿan ilā l-ḥawli ghayra ikh'rājin fa-in kharajna falā junāḥa ʿalaykum fī mā faʿalna fī anfusihinna min maʿrūfin wal-lahu ʿazīzun ḥakīm
और तुममें से जो लोग मर जाएँ और पत्नियाँ छोड़ जाएँ, वे अपनी पत्नियों के हक़ में एक वर्ष तक के ख़र्च की वसीयत कर जाएँ और यह कि वे निकाली न जाएँ। फिर यदि वे स्वयं निकल जाएँ, तो सामान्य नियम के अनुसार वे अपने मामले में जो कुछ करें, उसकी तुमपर कोई ज़िम्मेदारी नहीं। अल्लाह प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है।
सर्वनाम
وَٱلَّذِينَ
और जो लोग
wa-alladhīna
क्रिया
يُتَوَفَّوْنَ
मर जाएं
yutawaffawna
अव्यय
مِنكُمْ
तुम में से
minkum
क्रिया
وَيَذَرُونَ
और छोड़ जाएं
wayadharūna
संज्ञा
أَزْوَٰجًۭا
पत्नियां
azwājan
संज्ञा
وَصِيَّةًۭ
वसीयत है
waṣiyyatan
संज्ञा
لِّأَزْوَٰجِهِم
अपनी पत्नियों के लिए
li-azwājihim
संज्ञा
مَّتَـٰعًا
सामान देने की
matāʿan
अव्यय
إِلَى
तक
ilā
संज्ञा
ٱلْحَوْلِ
एक साल
l-ḥawli
संज्ञा
غَيْرَ
बिना
ghayra
संज्ञा
إِخْرَاجٍۢ ۚ
निकाले जाने के
ikh'rājin
अव्यय
فَإِنْ
फिर अगर
fa-in
क्रिया
خَرَجْنَ
वे निकल जाएं
kharajna
अव्यय
فَلَا
तो कोई नहीं
falā
संज्ञा
جُنَاحَ
गुनाह
junāḥa
अव्यय
عَلَيْكُمْ
तुम पर
ʿalaykum
अव्यय
فِى
में
fī
अव्यय
مَا
जो
mā
क्रिया
فَعَلْنَ
वे करें
faʿalna
अव्यय
فِىٓ
बारे में
fī
संज्ञा
أَنفُسِهِنَّ
अपने
anfusihinna
अव्यय
مِن
से
min
संज्ञा
مَّعْرُوفٍۢ ۗ
भलाई
maʿrūfin
संज्ञा
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
संज्ञा
عَزِيزٌ
प्रभुत्वशाली है
ʿazīzun
संज्ञा
حَكِيمٌۭ
तत्वदर्शी है
ḥakīmun
2:241
وَلِلْمُطَلَّقَـٰتِ مَتَـٰعٌۢ بِٱلْمَعْرُوفِ ۖ حَقًّا عَلَى ٱلْمُتَّقِينَ
Wa lil'muṭallaqāti matāʿun bil-maʿrūfi ḥaqqan ʿalā l-mutaqīn
और तलाक़ दी हुई स्त्रियों को भी सामान्य नियम के अनुसार जीवन-निर्वाह के लिए कुछ देना अनिवार्य है। यह डर रखनेवालों पर एक हक़ है।
संज्ञा
وَلِلْمُطَلَّقَـٰتِ
और तलाक़ दी हुई औरतों के लिए
walil'muṭallaqāti
संज्ञा
مَتَـٰعٌۢ
सामान है
matāʿun
संज्ञा
بِٱلْمَعْرُوفِ ۖ
दस्तूर के मुताबिक
bil-maʿrūfi
संज्ञा
حَقًّا
एक हक
ḥaqqan
अव्यय
عَلَى
पर
ʿalā
संज्ञा
ٱلْمُتَّقِينَ
डर रखने वालों के
l-mutaqīna
2:242
كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ ٱللَّهُ لَكُمْ ءَايَـٰتِهِۦ لَعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ
Kadhālika yubayyinu Allāhu lakum āyātihī laʿallakum taʿqilūn
इसी प्रकार अल्लाह तुम्हारे लिए अपनी आयतें खोल-खोलकर बयान करता है, ताकि तुम समझ-बूझ से काम लो।
अव्यय
كَذَٰلِكَ
इसी तरह
kadhālika
क्रिया
يُبَيِّنُ
बयान करता है
yubayyinu
संज्ञा
ٱللَّهُ
अल्लाह
l-lahu
अव्यय
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
lakum
संज्ञा
ءَايَـٰتِهِۦ
अपनी आयतें
āyātihi
अव्यय
لَعَلَّكُمْ
ताकि तुम
laʿallakum
क्रिया
تَعْقِلُونَ
समझो
taʿqilūna
2:243
۞ أَلَمْ تَرَ إِلَى ٱلَّذِينَ خَرَجُوا۟ مِن دِيَـٰرِهِمْ وَهُمْ أُلُوفٌ حَذَرَ ٱلْمَوْتِ فَقَالَ لَهُمُ ٱللَّهُ مُوتُوا۟ ثُمَّ أَحْيَـٰهُمْ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَذُو فَضْلٍ عَلَى ٱلنَّاسِ وَلَـٰكِنَّ أَكْثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يَشْكُرُونَ
Alam tara ilā alladhīna kharajū min diyārihim wa hum ulūfun ḥadhara l-mawti faqāla lahumu Allāhu mūtū thumma aḥyāhum inna Allāha ladhū faḍlin ʿalā l-nāsi wa lākinna akthara l-nāsi lā yashkurūn
क्या तुमने उन लोगों को नहीं देखा जो मौत के डर से अपने घरों से निकल पड़े, जबकि वे हज़ारों की संख्या में थे? तो अल्लाह ने उनसे कहा, "मर जाओ।" फिर उसने उन्हें जीवित कर दिया। निश्चय ही अल्लाह लोगों पर बड़ा अनुग्रह करनेवाला है, किन्तु अधिकतर लोग कृतज्ञता नहीं दिखाते।
अव्यय
۞ أَلَمْ
क्या नहीं
alam
क्रिया
تَرَ
तुमने देखा
tara
अव्यय
إِلَى
की तरफ
ilā
सर्वनाम
ٱلَّذِينَ
उन लोगों को
alladhīna
क्रिया
خَرَجُوا۟
जो निकले
kharajū
अव्यय
مِن
से
min
संज्ञा
دِيَـٰرِهِمْ
अपने घरों
diyārihim
सर्वनाम
وَهُمْ
और वे
wahum
संज्ञा
أُلُوفٌ
हज़ारों थे
ulūfun
संज्ञा
حَذَرَ
डर से
ḥadhara
संज्ञा
ٱلْمَوْتِ
मौत के
l-mawti
क्रिया
فَقَالَ
तो कहा
faqāla
अव्यय
لَهُمُ
उनसे
lahumu
संज्ञा
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
l-lahu
क्रिया
مُوتُوا۟
"मर जाओ"
mūtū
अव्यय
ثُمَّ
फिर
thumma
क्रिया
أَحْيَـٰهُمْ ۚ
उन्हें ज़िंदा किया
aḥyāhum
अव्यय
إِنَّ
बेशक
inna
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह
l-laha
संज्ञा
لَذُو
ज़रूर वाला है
ladhū
संज्ञा
فَضْلٍ
फ़ज़ल
faḍlin
अव्यय
عَلَى
पर
ʿalā
संज्ञा
ٱلنَّاسِ
लोगों
l-nāsi
अव्यय
وَلَـٰكِنَّ
लेकिन
walākinna
संज्ञा
أَكْثَرَ
अक्सर
akthara
संज्ञा
ٱلنَّاسِ
लोग
l-nāsi
अव्यय
لَا
नहीं
lā
क्रिया
يَشْكُرُونَ
शुक्र करते
yashkurūna
2:244
وَقَـٰتِلُوا۟ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ وَٱعْلَمُوٓا۟ أَنَّ ٱللَّهَ سَمِيعٌ عَلِيمٌۭ
Waqātilū fī sabīli Allāhi waʿlamū anna Allāha samīʿun ʿalīm
और अल्लाह के मार्ग में युद्ध करो और जान लो कि अल्लाह सब कुछ सुननेवाला, जाननेवाला है।
क्रिया
وَقَـٰتِلُوا۟
और लड़ो
waqātilū
अव्यय
فِى
में
fī
संज्ञा
سَبِيلِ
रास्ते
sabīli
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह के
l-lahi
क्रिया
وَٱعْلَمُوٓا۟
और जान लो
wa-iʿ'lamū
अव्यय
أَنَّ
कि
anna
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह
l-laha
संज्ञा
سَمِيعٌ
सुनने वाला है
samīʿun
संज्ञा
عَلِيمٌۭ
जानने वाला है
ʿalīmun
2:245
مَّن ذَا ٱلَّذِى يُقْرِضُ ٱللَّهَ قَرْضًا حَسَنًۭا فَيُضَـٰعِفَهُۥ لَهُۥٓ أَضْعَافًۭا كَثِيرَةًۭ ۚ وَٱللَّهُ يَقْبِضُ وَيَبْصُۜطُ وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
Man dhā alladhī yuq'riḍu Allāha qarḍan ḥasanan fayuḍāʿifahū lahū aḍʿāfan kathīratan wal-lahu yaqbiḍu wa yabṣuṭu wa ilayhi tur'jaʿūn
कौन है जो अल्लाह को अच्छा क़र्ज़ दे, ताकि अल्लाह उसे उसके लिए कई गुना बढ़ा दे? अल्लाह ही तंगी भी देता है और विस्तार भी प्रदान करता है। और उसी की ओर तुम्हें लौटना है।
अव्यय
مَّن
कौन है
man
सर्वनाम
ذَا
वह
dhā
सर्वनाम
ٱلَّذِى
जो
alladhī
क्रिया
يُقْرِضُ
क़र्ज़ दे
yuq'riḍu
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह को
l-laha
संज्ञा
قَرْضًا
क़र्ज़
qarḍan
संज्ञा
حَسَنًۭا
अच्छा
ḥasanan
क्रिया
فَيُضَـٰعِفَهُۥ
तो वह उसे बढ़ा दे
fayuḍāʿifahu
अव्यय
لَهُۥٓ
उसके लिए
lahu
संज्ञा
أَضْعَافًۭا
कई गुना
aḍʿāfan
संज्ञा
كَثِيرَةًۭ ۚ
बहुत
kathīratan
संज्ञा
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
क्रिया
يَقْبِضُ
तंगी करता है
yaqbiḍu
क्रिया
وَيَبْصُۜطُ
और कुशादगी देता है
wayabṣuṭu
अव्यय
وَإِلَيْهِ
और उसी की तरफ
wa-ilayhi
क्रिया
تُرْجَعُونَ
तुम लौटाए जाओगे
tur'jaʿūna
2:246
أَلَمْ تَرَ إِلَى ٱلْمَلَإِ مِنۢ بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ مِنۢ بَعْدِ مُوسَىٰٓ إِذْ قَالُوا۟ لِنَبِىٍّۢ لَّهُمُ ٱبْعَثْ لَنَا مَلِكًۭا نُّقَـٰتِلْ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ ۖ قَالَ هَلْ عَسَيْتُمْ إِن كُتِبَ عَلَيْكُمُ ٱلْقِتَالُ أَلَّا تُقَـٰتِلُوا۟ ۖ قَالُوا۟ وَمَا لَنَآ أَلَّا نُقَـٰتِلَ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ وَقَدْ أُخْرِجْنَا مِن دِيَـٰرِنَا وَأَبْنَآئِنَا ۖ فَلَمَّا كُتِبَ عَلَيْهِمُ ٱلْقِتَالُ تَوَلَّوْا۟ إِلَّا قَلِيلًۭا مِّنْهُمْ ۗ وَٱللَّهُ عَلِيمٌۢ بِٱلظَّـٰلِمِينَ
Alam tara ilā l-mala-i min banī is'rāīla min baʿdi mūsā idh qālū linabiyyin lahumu ib'ʿath lanā malikan nuqātil fī sabīli Allāhi qāla hal ʿasaytum in kutiba ʿalaykumu l-qitālu allā tuqātilū qālū wa mā lanā allā nuqātila fī sabīli Allāhi wa qad ukh'rij'nā min diyārinā wa abnāinā falammā kutiba ʿalayhimu l-qitālu tawallaw illā qalīlan min'hum wal-lahu ʿalīmun bil-ẓālimīn
क्या तुमने मूसा के बाद इसराईल की सन्तान के सरदारों को नहीं देखा, जब उन्होंने अपने एक नबी से कहा, "हमारे लिए एक राजा नियुक्त कर दीजिए, ताकि हम अल्लाह के मार्ग में युद्ध करें।" उसने कहा, "कहीं ऐसा तो नहीं कि यदि तुम पर युद्ध अनिवार्य कर दिया जाए तो तुम युद्ध न करो?" वे बोले, "भला हम अल्लाह के मार्ग में युद्ध क्यों न करेंगे, जबकि हम अपने घरों और अपनी सन्तानों से अलग कर दिए गए हैं?" किन्तु जब उनपर युद्ध अनिवार्य कर दिया गया तो उनमें से थोड़े लोगों को छोड़कर बाक़ी सब फिर गए। अल्लाह तो ज़ालिमों को भली-भाँति जानता है।
अव्यय
أَلَمْ
क्या नहीं
alam
क्रिया
تَرَ
तुमने देखा
tara
अव्यय
إِلَى
की तरफ
ilā
संज्ञा
ٱلْمَلَإِ
सरदारों को
l-mala-i
अव्यय
مِنۢ
से
min
संज्ञा
بَنِىٓ
बनी
banī
संज्ञा
إِسْرَٰٓءِيلَ
इसराईल
is'rāīla
अव्यय
مِنۢ
के
min
संज्ञा
بَعْدِ
बाद
baʿdi
संज्ञा
مُوسَىٰٓ
मूसा के
mūsā
अव्यय
إِذْ
जब
idh
क्रिया
قَالُوا۟
उन्होंने कहा
qālū
संज्ञा
لِنَبِىٍّۢ
एक नबी से
linabiyyin
अव्यय
لَّهُمُ
अपने
lahumu
क्रिया
ٱبْعَثْ
मुक़र्रर कर दो
ib'ʿath
अव्यय
لَنَا
हमारे लिए
lanā
संज्ञा
مَلِكًۭا
एक बादशाह
malikan
क्रिया
نُّقَـٰتِلْ
हम लड़ें
nuqātil
अव्यय
فِى
में
fī
संज्ञा
سَبِيلِ
रास्ते
sabīli
संज्ञा
ٱللَّهِ ۖ
अल्लाह के
l-lahi
क्रिया
قَالَ
उसने कहा
qāla
अव्यय
هَلْ
क्या
hal
क्रिया
عَسَيْتُمْ
तुमसे यह हो सकता है
ʿasaytum
अव्यय
إِن
कि अगर
in
क्रिया
كُتِبَ
फ़र्ज़ कर दिया जाए
kutiba
अव्यय
عَلَيْكُمُ
तुम पर
ʿalaykumu
संज्ञा
ٱلْقِتَالُ
लड़ना
l-qitālu
अव्यय
أَلَّا
कि न
allā
क्रिया
تُقَـٰتِلُوا۟ ۖ
तुम लड़ो
tuqātilū
क्रिया
قَالُوا۟
उन्होंने कहा
qālū
अव्यय
وَمَا
और क्या है
wamā
अव्यय
لَنَآ
हमारे लिए
lanā
अव्यय
أَلَّا
कि न
allā
क्रिया
نُقَـٰتِلَ
हम लड़ें
nuqātila
अव्यय
فِى
में
fī
संज्ञा
سَبِيلِ
रास्ते
sabīli
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह के
l-lahi
अव्यय
وَقَدْ
जबकि
waqad
क्रिया
أُخْرِجْنَا
हम निकाले गए
ukh'rij'nā
अव्यय
مِن
से
min
संज्ञा
دِيَـٰرِنَا
अपने घरों
diyārinā
संज्ञा
وَأَبْنَآئِنَا ۖ
और अपने बेटों से
wa-abnāinā
अव्यय
فَلَمَّا
फिर जब
falammā
क्रिया
كُتِبَ
लिख दिया गया
kutiba
अव्यय
عَلَيْهِمُ
उन पर
ʿalayhimu
संज्ञा
ٱلْقِتَالُ
लड़ना
l-qitālu
क्रिया
تَوَلَّوْا۟
वे फिर गए
tawallaw
अव्यय
إِلَّا
सिवाय
illā
संज्ञा
قَلِيلًۭا
थोड़े के
qalīlan
अव्यय
مِّنْهُمْ ۗ
उनमें से
min'hum
संज्ञा
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
संज्ञा
عَلِيمٌۢ
जानने वाला है
ʿalīmun
संज्ञा
بِٱلظَّـٰلِمِينَ
ज़ालिमों को
bil-ẓālimīna
2:247
وَقَالَ لَهُمْ نَبِيُّهُمْ إِنَّ ٱللَّهَ قَدْ بَعَثَ لَكُمْ طَالُوتَ مَلِكًۭا ۚ قَالُوٓا۟ أَنَّىٰ يَكُونُ لَهُ ٱلْمُلْكُ عَلَيْنَا وَنَحْنُ أَحَقُّ بِٱلْمُلْكِ مِنْهُ وَلَمْ يُؤْتَ سَعَةًۭ مِّنَ ٱلْمَالِ ۚ قَالَ إِنَّ ٱللَّهَ ٱصْطَفَىٰهُ عَلَيْكُمْ وَزَادَهُۥ بَسْطَةًۭ فِى ٱلْعِلْمِ وَٱلْجِسْمِ ۖ وَٱللَّهُ يُؤْتِى مُلْكَهُۥ مَن يَشَآءُ ۚ وَٱللَّهُ وَٰسِعٌ عَلِيمٌۭ
Wa qāla lahum nabiyyuhum inna Allāha qad baʿatha lakum ṭālūta malikan qālū annā yakūnu lahu l-mul'ku ʿalaynā wa naḥnu aḥaqqu bil-mul'ki min'hu wa lam yu'ta saʿatan mina l-māli qāla inna Allāha iṣ'ṭafāhu ʿalaykum wa zādahū basṭatan fī l-ʿil'mi wal-jis'mi wal-lahu yu'tī mul'kahū man yashāu wal-lahu wāsiʿun ʿalīm
और उनके नबी ने उनसे कहा, "अल्लाह ने तुम्हारे लिए तालूत को राजा नियुक्त किया है।" वे बोले, "उसकी हमपर हुकूमत कैसे हो सकती है, जबकि हम हुकूमत के उससे ज़्यादा हक़दार हैं और उसे माल की बहुतायत भी प्राप्त नहीं है?" उसने कहा, "अल्लाह ने उसे तुमपर चुन लिया है और उसे ज्ञान और शारीरिक गठन में तुमसे ज़्यादा विस्तार प्रदान किया है। और अल्लाह जिसे चाहता है, अपना राज्य प्रदान करता है। अल्लाह बड़ी समाईवाला, सर्वज्ञ है।"
क्रिया
وَقَالَ
और कहा
waqāla
अव्यय
لَهُمْ
उनसे
lahum
संज्ञा
نَبِيُّهُمْ
उनके नबी ने
nabiyyuhum
अव्यय
إِنَّ
बेशक
inna
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह ने
l-laha
अव्यय
قَدْ
निश्चित ही
qad
क्रिया
بَعَثَ
भेजा है
baʿatha
अव्यय
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
lakum
संज्ञा
طَالُوتَ
तालूत को
ṭālūta
संज्ञा
مَلِكًۭا ۚ
बादशाह बनाकर
malikan
क्रिया
قَالُوٓا۟
उन्होंने कहा
qālū
अव्यय
أَنَّىٰ
कैसे
annā
क्रिया
يَكُونُ
हो सकती है
yakūnu
अव्यय
لَهُ
उसको
lahu
संज्ञा
ٱلْمُلْكُ
बादशाही
l-mul'ku
अव्यय
عَلَيْنَا
हम पर
ʿalaynā
सर्वनाम
وَنَحْنُ
जबकि हम
wanaḥnu
संज्ञा
أَحَقُّ
ज़्यादा हकदार हैं
aḥaqqu
संज्ञा
بِٱلْمُلْكِ
बादशाही के
bil-mul'ki
अव्यय
مِنْهُ
उससे
min'hu
अव्यय
وَلَمْ
और नहीं
walam
क्रिया
يُؤْتَ
वह दिया गया
yu'ta
संज्ञा
سَعَةًۭ
बहुतायत
saʿatan
अव्यय
مِّنَ
से
mina
संज्ञा
ٱلْمَالِ ۚ
माल की
l-māli
क्रिया
قَالَ
उसने कहा
qāla
अव्यय
إِنَّ
बेशक
inna
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह ने
l-laha
क्रिया
ٱصْطَفَىٰهُ
उसे चुन लिया है
iṣ'ṭafāhu
अव्यय
عَلَيْكُمْ
तुम पर
ʿalaykum
क्रिया
وَزَادَهُۥ
और उसे ज़्यादा दिया है
wazādahū
संज्ञा
بَسْطَةًۭ
विस्तार
basṭatan
अव्यय
فِى
में
fī
संज्ञा
ٱلْعِلْمِ
ज्ञान
l-ʿil'mi
संज्ञा
وَٱلْجِسْمِ ۖ
और जिस्म में
wal-jis'mi
संज्ञा
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
क्रिया
يُؤْتِى
देता है
yu'tī
संज्ञा
مُلْكَهُۥ
अपनी बादशाहत
mul'kahu
अव्यय
مَن
जिसे
man
क्रिया
يَشَآءُ ۚ
वह चाहता है
yashāu
संज्ञा
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
संज्ञा
وَٰسِعٌ
बड़ी समाई वाला है
wāsiʿun
संज्ञा
عَلِيمٌۭ
सब कुछ जानने वाला है
ʿalīmun
2:248
وَقَالَ لَهُمْ نَبِيُّهُمْ إِنَّ ءَايَةَ مُلْكِهِۦٓ أَن يَأْتِيَكُمُ ٱلتَّابُوتُ فِيهِ سَكِينَةٌۭ مِّن رَّبِّكُمْ وَبَقِيَّةٌۭ مِّمَّا تَرَكَ ءَالُ مُوسَىٰ وَءَالُ هَـٰرُونَ تَحْمِلُهُ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ ۚ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةًۭ لَّكُمْ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
Wa qāla lahum nabiyyuhum inna āyata mul'kihī an yatiyakumu l-tābūtu fīhi sakīnatun min rabbikum wa baqiyyatun mimmā taraka ālu mūsā wa ālu hārūna taḥmiluhu l-malāikatu inna fī dhālika laāyatan lakum in kuntum mu'minīn
और उनके नबी ने उनसे कहा, "उसकी बादशाही की निशानी यह है कि तुम्हारे पास वह संदूक आ जाएगा, जिसमें तुम्हारे रब की ओर से सकीना (प्रशान्ति) है और आले-मूसा और आले-हारून का छोड़ा हुआ अवशेष भी है, जिसे फ़रिश्ते उठाए हुए होंगे। निश्चय ही इसमें तुम्हारे लिए एक बड़ी निशानी है, यदि तुम ईमानवाले हो।"
क्रिया
وَقَالَ
और कहा
waqāla
अव्यय
لَهُمْ
उनसे
lahum
संज्ञा
نَبِيُّهُمْ
उनके नबी ने
nabiyyuhum
अव्यय
إِنَّ
बेशक
inna
संज्ञा
ءَايَةَ
निशानी
āyata
संज्ञा
مُلْكِهِۦٓ
उसकी बादशाही की
mul'kihi
अव्यय
أَن
यह है कि
an
क्रिया
يَأْتِيَكُمُ
तुम्हारे पास आएगा
yatiyakumu
संज्ञा
ٱلتَّابُوتُ
संदूक
l-tābūtu
अव्यय
فِيهِ
जिसमें
fīhi
संज्ञा
سَكِينَةٌۭ
सुकून है
sakīnatun
अव्यय
مِّن
से
min
संज्ञा
رَّبِّكُمْ
तुम्हारे रब की
rabbikum
संज्ञा
وَبَقِيَّةٌۭ
और बची हुई चीजें
wabaqiyyatun
अव्यय
مِّمَّا
उसमें से जो
mimmā
क्रिया
تَرَكَ
छोड़ा
taraka
संज्ञा
ءَالُ
परिवार ने
ālu
संज्ञा
مُوسَىٰ
मूसा के
mūsā
संज्ञा
وَءَالُ
और परिवार ने
waālu
संज्ञा
هَـٰرُونَ
हारून के
hārūna
क्रिया
تَحْمِلُهُ
उसे उठाए हुए हैं
taḥmiluhu
संज्ञा
ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ ۚ
फरिश्ते
l-malāikatu
अव्यय
إِنَّ
बेशक
inna
अव्यय
فِى
में
fī
सर्वनाम
ذَٰلِكَ
इसमें
dhālika
संज्ञा
لَـَٔايَةًۭ
एक निशानी है
laāyatan
अव्यय
لَّكُمْ
तुम्हारे लिए
lakum
अव्यय
إِن
अगर
in
क्रिया
كُنتُم
हो तुम
kuntum
संज्ञा
مُّؤْمِنِينَ
ईमान वाले
mu'minīna
2:249
فَلَمَّا فَصَلَ طَالُوتُ بِٱلْجُنُودِ قَالَ إِنَّ ٱللَّهَ مُبْتَلِيكُم بِنَهَرٍۢ فَمَن شَرِبَ مِنْهُ فَلَيْسَ مِنِّى وَمَن لَّمْ يَطْعَمْهُ فَإِنَّهُۥ مِنِّىٓ إِلَّا مَنِ ٱغْتَرَفَ غُرْفَةًۢ بِيَدِهِۦ ۚ فَشَرِبُوا۟ مِنْهُ إِلَّا قَلِيلًۭا مِّنْهُمْ ۚ فَلَمَّا جَاوَزَهُۥ هُوَ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ مَعَهُۥ قَالُوا۟ لَا طَاقَةَ لَنَا ٱلْيَوْمَ بِجَالُوتَ وَجُنُودِهِۦ ۚ قَالَ ٱلَّذِينَ يَظُنُّونَ أَنَّهُم مُّلَـٰقُوا۟ ٱللَّهِ كَم مِّن فِئَةٍۢ قَلِيلَةٍ غَلَبَتْ فِئَةًۭ كَثِيرَةًۢ بِإِذْنِ ٱللَّهِ ۗ وَٱللَّهُ مَعَ ٱلصَّـٰبِرِينَ
Falammā faṣala ṭālūtu bil-junūdi qāla inna Allāha mub'talīkum binaharin faman shariba min'hu falaysa minnī wa man lam yaṭʿamhu fa-innahu minnī illā mani igh'tarafa ghur'fatan biyadihi fasharibū min'hu illā qalīlan min'hum falammā jāwazahū huwa wal-ladhīna āmanū maʿahū qālū lā ṭāqata lanā l-yawma bijālūta wa junūdihī qāla alladhīna yaẓunnūna annahum mulāqū Allāhi kam min fi-atin qalīlatin ghalabat fi-atan kathīratan bi-idh'ni Allāhi wal-lahu maʿa l-ṣābirīn
फिर जब तालूत सेनाओं के साथ निकला, तो उसने कहा, "अल्लाह एक नदी द्वारा तुम्हारी परीक्षा लेनेवाला है। तो जिसने उसका पानी पिया, वह मेरा नहीं। और जिसने उसे न चखा, वह मेरा है, सिवाय उसके जो एक चुल्लू अपने हाथ से ले ले।" फिर उनमें से थोड़े लोगों को छोड़कर बाक़ी सबने उसे पी लिया। फिर जब वह और जो उसके साथ ईमान लाए थे, नदी पार कर गए, तो वे बोले, "आज हममें जालूत और उसकी सेनाओं का मुक़ाबला करने की ताक़त नहीं।" जो लोग समझते थे कि उन्हें अल्लाह से मिलना है, उन्होंने कहा, "कितनी ही बार ऐसा हुआ है कि एक छोटी-सी टुकड़ी ने अल्लाह के हुक्म से एक बड़ी टुकड़ी पर विजय प्राप्त की है! और अल्लाह सब्र करनेवालों के साथ है।"
अव्यय
فَلَمَّا
फिर जब
falammā
क्रिया
فَصَلَ
निकला
faṣala
संज्ञा
طَالُوتُ
तालूत
ṭālūtu
संज्ञा
بِٱلْجُنُودِ
सेनाओं के साथ
bil-junūdi
क्रिया
قَالَ
उसने कहा
qāla
अव्यय
إِنَّ
बेशक
inna
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह
l-laha
संज्ञा
مُبْتَلِيكُم
तुम्हें आज़माने वाला है
mub'talīkum
संज्ञा
بِنَهَرٍۢ
एक नहर से
binaharin
अव्यय
فَمَن
तो जो
faman
क्रिया
شَرِبَ
पिएगा
shariba
अव्यय
مِنْهُ
उससे
min'hu
क्रिया
فَلَيْسَ
तो वह नहीं है
falaysa
अव्यय
مِنِّى
मुझसे
minnī
अव्यय
وَمَن
और जो
waman
अव्यय
لَّمْ
नहीं
lam
क्रिया
يَطْعَمْهُ
उसे चखेगा
yaṭʿamhu
अव्यय
فَإِنَّهُۥ
तो बेशक वह
fa-innahu
अव्यय
مِنِّىٓ
मुझसे है
minnī
अव्यय
إِلَّا
सिवाय
illā
अव्यय
مَنِ
उसके जो
mani
क्रिया
ٱغْتَرَفَ
ले ले
igh'tarafa
संज्ञा
غُرْفَةًۢ
एक चुल्लू
ghur'fatan
संज्ञा
بِيَدِهِۦ ۚ
अपने हाथ से
biyadihi
क्रिया
فَشَرِبُوا۟
तो उन्होंने पी लिया
fasharibū
अव्यय
مِنْهُ
उससे
min'hu
अव्यय
إِلَّا
सिवाय
illā
संज्ञा
قَلِيلًۭا
कुछ के
qalīlan
अव्यय
مِّنْهُمْ ۚ
उनमें से
min'hum
अव्यय
فَلَمَّا
फिर जब
falammā
क्रिया
جَاوَزَهُۥ
उसे पार किया
jāwazahu
सर्वनाम
هُوَ
उसने
huwa
सर्वनाम
وَٱلَّذِينَ
और उन लोगों ने
wa-alladhīna
क्रिया
ءَامَنُوا۟
जो ईमान लाए
āmanū
सर्वनाम
مَعَهُۥ
उसके साथ
maʿahu
क्रिया
قَالُوا۟
वे बोले
qālū
अव्यय
لَا
नहीं है
lā
संज्ञा
طَاقَةَ
ताक़त
ṭāqata
अव्यय
لَنَا
हम में
lanā
संज्ञा
ٱلْيَوْمَ
आज
l-yawma
संज्ञा
بِجَالُوتَ
जालूत का (मुक़ाबला करने की)
bijālūta
संज्ञा
وَجُنُودِهِۦ ۚ
और उसकी सेनाओं का
wajunūdihi
क्रिया
قَالَ
कहा
qāla
सर्वनाम
ٱلَّذِينَ
उन लोगों ने जो
alladhīna
क्रिया
يَظُنُّونَ
यकीन रखते थे
yaẓunnūna
अव्यय
أَنَّهُم
कि वे
annahum
संज्ञा
مُّلَـٰقُوا۟
मिलने वाले हैं
mulāqū
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह से
l-lahi
अव्यय
كَم
कितने ही
kam
अव्यय
مِّن
से
min
संज्ञा
فِئَةٍۢ
गिरोह
fi-atin
संज्ञा
قَلِيلَةٍ
छोटे
qalīlatin
क्रिया
غَلَبَتْ
ग़ालिब आए हैं
ghalabat
संज्ञा
فِئَةًۭ
गिरोह पर
fi-atan
संज्ञा
كَثِيرَةًۢ
बड़े
kathīratan
अव्यय
بِإِذْنِ
हुक्म से
bi-idh'ni
संज्ञा
ٱللَّهِ ۗ
अल्लाह के
l-lahi
संज्ञा
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
अव्यय
مَعَ
साथ है
maʿa
संज्ञा
ٱلصَّـٰبِرِينَ
सब्र करने वालों के
l-ṣābirīna
2:250
وَلَمَّا بَرَزُوا۟ لِجَالُوتَ وَجُنُودِهِۦ قَالُوا۟ رَبَّنَآ أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْرًۭا وَثَبِّتْ أَقْدَامَنَا وَٱنصُرْنَا عَلَى ٱلْقَوْمِ ٱلْكَـٰفِرِينَ
Wa lammā barazū lijālūta wa junūdihī qālū rabbanā afrigh ʿalaynā ṣabran wa thabbit aqdāmanā wanṣurnā ʿalā l-qawmi l-kāfirīn
और जब वे जालूत और उसकी सेनाओं के मुक़ाबले में निकले तो कहा, "हमारे रब! हम पर सब्र उंडेल दे, हमारे क़दम जमा दे और इनकार करनेवाली क़ौम के मुक़ाबले में हमारी मदद कर।"
अव्यय
وَلَمَّا
और जब
walammā
क्रिया
بَرَزُوا۟
वे सामने आए
barazū
संज्ञा
لِجَالُوتَ
जालूत के
lijālūta
संज्ञा
وَجُنُودِهِۦ
और उसकी सेनाओं के
wajunūdihi
क्रिया
قَالُوا۟
उन्होंने कहा
qālū
संज्ञा
رَبَّنَآ
ऐ हमारे रब
rabbanā
क्रिया
أَفْرِغْ
उंडेल दे
afrigh
अव्यय
عَلَيْنَا
हम पर
ʿalaynā
संज्ञा
صَبْرًۭا
सब्र
ṣabran
क्रिया
وَثَبِّتْ
और जमा दे
wathabbit
संज्ञा
أَقْدَامَنَا
हमारे क़दम
aqdāmanā
क्रिया
وَٱنصُرْنَا
और हमारी मदद कर
wa-unṣur'nā
अव्यय
عَلَى
के खिलाफ
ʿalā
संज्ञा
ٱلْقَوْمِ
क़ौम
l-qawmi
संज्ञा
ٱلْكَـٰفِرِينَ
काफ़िरों के
l-kāfirīna
