
संज्ञा (Noun)
क्रिया (Verb)
अव्यय (Particle)
4:151
أُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْكَـٰفِرُونَ حَقًّۭا ۚ وَأَعْتَدْنَا لِلْكَـٰفِرِينَ عَذَابًا مُّهِينًۭا
ulāika humu l-kāfirūna ḥaqqan wa-aʿtadnā lil'kāfirīna ʿadhāban muhīnan
यही लोग वास्तव में काफ़िर हैं और हमने काफ़िरों के लिए अपमानजनक अज़ाब तैयार कर रखा है।
सर्वनाम
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग
ulāika
सर्वनाम
هُمُ
वे
humu
संज्ञा
ٱلْكَـٰفِرُونَ
काफ़िर हैं
l-kāfirūna
संज्ञा
حَقًّۭا ۚ
पक्के (वास्तव में)
ḥaqqan
क्रिया
وَأَعْتَدْنَا
और हमने तैयार किया है
wa-aʿtadnā
अव्यय
لِلْكَـٰفِرِينَ
काफ़िरों के लिए
lil'kāfirīna
संज्ञा
عَذَابًا
अज़ाब
ʿadhāban
संज्ञा
مُّهِينًۭا
अपमानजनक
muhīnan
4:152
وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ بِٱللَّهِ وَرُسُلِهِۦ وَلَمْ يُفَرِّقُوا۟ بَيْنَ أَحَدٍۢ مِّنْهُمْ أُو۟لَـٰٓئِكَ سَوْفَ يُؤْتِيهِمْ أُجُورَهُمْ ۗ وَكَانَ ٱللَّهُ غَفُورًۭا رَّحِيمًۭا
wa-alladhīna āmanū bil-lahi warusulihi walam yufarriqū bayna aḥadin min'hum ulāika sawfa yu'tīhim ujūrahum wakāna l-lahu ghafūran raḥīman
और जो लोग अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाए और उन्होंने उनमें से किसी के बीच अंतर नहीं किया, यही लोग हैं जिन्हें वह जल्द ही उनका अजर (प्रतिदान) देगा। और अल्लाह बड़ा क्षमाशील, दयावान है।
अव्यय
وَٱلَّذِينَ
और जो लोग
wa-alladhīna
क्रिया
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
āmanū
अव्यय
بِٱللَّهِ
अल्लाह पर
bil-lahi
संज्ञा
وَرُسُلِهِۦ
और उसके रसूलों पर
warusulihi
अव्यय
وَلَمْ
और नहीं
walam
क्रिया
يُفَرِّقُوا۟
उन्होंने फर्क किया
yufarriqū
संज्ञा
بَيْنَ
बीच
bayna
संज्ञा
أَحَدٍۢ
किसी एक के
aḥadin
अव्यय
مِّنْهُمْ
उनमें से
min'hum
सर्वनाम
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग
ulāika
अव्यय
سَوْفَ
जल्द ही
sawfa
क्रिया
يُؤْتِيهِمْ
वह उन्हें देगा
yu'tīhim
संज्ञा
أُجُورَهُمْ ۗ
उनके अजर
ujūrahum
क्रिया
وَكَانَ
और है
wakāna
संज्ञा
ٱللَّهُ
अल्लाह
l-lahu
संज्ञा
غَفُورًۭا
बड़ा माफ करने वाला
ghafūran
संज्ञा
رَّحِيمًۭا
मेहरबान
raḥīman
4:153
يَسْـَٔلُكَ أَهْلُ ٱلْكِتَـٰبِ أَن تُنَزِّلَ عَلَيْهِمْ كِتَـٰبًۭا مِّنَ ٱلسَّمَآءِ ۚ فَقَدْ سَأَلُوا۟ مُوسَىٰٓ أَكْبَرَ مِن ذَٰلِكَ فَقَالُوٓا۟ أَرِنَا ٱللَّهَ جَهْرَةًۭ فَأَخَذَتْهُمُ ٱلصَّـٰعِقَةُ بِظُلْمِهِمْ ۚ ثُمَّ ٱتَّخَذُوا۟ ٱلْعِجْلَ مِنۢ بَعْدِ مَا جَآءَتْهُمُ ٱلْبَيِّنَـٰتُ فَعَفَوْنَا عَن ذَٰلِكَ ۚ وَءَاتَيْنَا مُوسَىٰ سُلْطَـٰنًۭا مُّبِينًۭا
yasaluka ahlu l-kitābi an tunazzila ʿalayhim kitāban mina l-samāi faqad sa-alū mūsā akbara min dhālika faqālū arinā l-laha jahratan fa-akhadhathumu l-ṣāʿiqatu biẓul'mihim thumma ittakhadhū l-ʿij'la min baʿdi mā jāathumu l-bayinātu faʿafawnā ʿan dhālika waātaynā mūsā sul'ṭānan mubīnan
ये किताब वाले तुमसे माँग करते है कि तुम उनपर आकाश से एक किताब उतार लाओ। मूसा से तो ये इससे भी बड़ी माँग कर चुके है। उन्होंने कहा था, "हमें अल्लाह को प्रत्यक्ष (सामने) दिखा दो।" तब उनके इस ज़ुल्म के कारण एक कड़क (बिजली) ने उन्हें आ दबोचा। फिर वे बछड़े को अपना इष्ट बना बैठे, हालाँकि उनके पास खुली निशालियाँ आ चुकी थी। फिर हमने इसे माफ़ कर दिया और हमने मूसा को स्पष्ट ज़ोर (प्रभुत्व) एवं प्रमाण प्रदान किया।
क्रिया
يَسْـَٔلُكَ
तुमसे सवाल करते हैं
yasaluka
संज्ञा
أَهْلُ
लोग
ahlu
संज्ञा
ٱلْكِتَـٰبِ
किताब (वाले)
l-kitābi
अव्यय
أَن
कि
an
क्रिया
تُنَزِّلَ
तुम उतार लाओ
tunazzila
अव्यय
عَلَيْهِمْ
उन पर
ʿalayhim
संज्ञा
كِتَـٰبًۭا
एक किताब
kitāban
अव्यय
مِّنَ
से
mina
संज्ञा
ٱلسَّمَآءِ ۚ
आसमान
l-samāi
अव्यय
فَقَدْ
तो बेशक
faqad
क्रिया
سَأَلُوا۟
उन्होंने सवाल किया था
sa-alū
संज्ञा
مُوسَىٰٓ
मूसा से
mūsā
संज्ञा
أَكْبَرَ
बड़ा
akbara
अव्यय
مِن
से
min
सर्वनाम
ذَٰلِكَ
इस
dhālika
अव्यय
فَقَالُوٓا۟
तो उन्होंने कहा
faqālū
क्रिया
أَرِنَا
हमें दिखाओ
arinā
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह को
l-laha
संज्ञा
جَهْرَةًۭ
खुल्लम-खुल्ला (प्रत्यक्ष)
jahratan
अव्यय
فَأَخَذَتْهُمُ
तो आ पकड़ा उन्हें
fa-akhadhathumu
संज्ञा
ٱلصَّـٰعِقَةُ
बिजली (कड़क) ने
l-ṣāʿiqatu
अव्यय
بِظُلْمِهِمْ ۚ
उनके ज़ुल्म के कारण
biẓul'mihim
अव्यय
ثُمَّ
फिर
thumma
क्रिया
ٱتَّخَذُوا۟
उन्होंने बना लिया
ittakhadhū
संज्ञा
ٱلْعِجْلَ
बछड़े को
l-ʿij'la
अव्यय
مِنۢ
से
min
संज्ञा
بَعْدِ
बाद
baʿdi
सर्वनाम
مَا
इसके कि
mā
क्रिया
جَآءَتْهُمُ
आ चुकीं उनके पास
jāathumu
संज्ञा
ٱلْبَيِّنَـٰتُ
खुली निशानियां
l-bayinātu
अव्यय
فَعَفَوْنَا
तो हमने माफ कर दिया
faʿafawnā
अव्यय
عَن
से
ʿan
सर्वनाम
ذَٰلِكَ ۚ
इस (कसूर)
dhālika
अव्यय
وَءَاتَيْنَا
और हमने दिया
waātaynā
संज्ञा
مُوسَىٰ
मूसा को
mūsā
संज्ञा
سُلْطَـٰنًۭا
दलील (प्रमाण)
sul'ṭānan
संज्ञा
مُّبِينًۭا
खुला (स्पष्ट)
mubīnan
4:154
وَرَفَعْنَا فَوْقَهُمُ ٱلطُّورَ بِمِيثَـٰقِهِمْ وَقُلْنَا لَهُمُ ٱدْخُلُوا۟ ٱلْبَابَ سُجَّدًۭا وَقُلْنَا لَهُمْ لَا تَعْدُوا۟ فِى ٱلسَّبْتِ وَأَخَذْنَا مِنْهُم مِّيثَـٰقًا غَلِيظًۭا
warafaʿnā fawqahumu l-ṭūra bimīthāqihim waqul'nā lahumu ud'khulū l-bāba sujjadan waqul'nā lahum lā taʿdū fī l-sabti wa-akhadhnā min'hum mīthāqan ghalīẓan
और उनके वचन (की मज़बूती) के लिए हमने उनके ऊपर तूर पहाड़ को उठाया और उनसे कहा, "दरवाज़े में सजदा करते हुए प्रवेश करो।" और उनसे कहा, "सब्त (शनिवार) के दिन ज़्यादती न करना।" और हमने उनसे मज़बूत वचन लिया।
क्रिया
وَرَفَعْنَا
और हमने उठाया
warafaʿnā
संज्ञा
فَوْقَهُمُ
उनके ऊपर
fawqahumu
संज्ञा
ٱلطُّورَ
तूर (पहाड़)
l-ṭūra
अव्यय
بِمِيثَـٰقِهِمْ
उनके वादे के लिए
bimīthāqihim
क्रिया
وَقُلْنَا
और हमने कहा
waqul'nā
अव्यय
لَهُمُ
उनसे
lahumu
क्रिया
ٱدْخُلُوا۟
दाखिल हो जाओ
ud'khulū
संज्ञा
ٱلْبَابَ
दरवाज़े में
l-bāba
संज्ञा
سُجَّدًۭا
सजदा करते हुए
sujjadan
क्रिया
وَقُلْنَا
और हमने कहा
waqul'nā
अव्यय
لَهُمْ
उनसे
lahum
अव्यय
لَا
मत
lā
क्रिया
تَعْدُوا۟
हद से बढ़ना (ज़्यादती करना)
taʿdū
अव्यय
فِى
में
fī
संज्ञा
ٱلسَّبْتِ
सब्त (शनिवार)
l-sabti
क्रिया
وَأَخَذْنَا
और हमने लिया
wa-akhadhnā
अव्यय
مِنْهُم
उनसे
min'hum
संज्ञा
مِّيثَـٰقًا
वादा (वचन)
mīthāqan
संज्ञा
غَلِيظًۭا
गाढ़ा (मज़बूत)
ghalīẓan
4:155
فَبِمَا نَقْضِهِم مِّيثَـٰقَهُمْ وَكُفْرِهِم بِـَٔايَـٰتِ ٱللَّهِ وَقَتْلِهِمُ ٱلْأَنۢبِيَآءَ بِغَيْرِ حَقٍّۢ وَقَوْلِهِمْ قُلُوبُنَا غُلْفٌۢ ۚ بَلْ طَبَعَ ٱللَّهُ عَلَيْهَا بِكُفْرِهِمْ فَلَا يُؤْمِنُونَ إِلَّا قَلِيلًۭا
fabimā naqḍihim mīthāqahum wakuf'rihim biāyāti l-lahi waqatlihimu l-anbiyāa bighayri ḥaqqin waqawlihim qulūbunā ghul'fun bal ṭabaʿa l-lahu ʿalayhā bikuf'rihim falā yu'minūna illā qalīlan
तो (इन पर लानत थी) इनके अपनी प्रतिज्ञा भंग करने के कारण, और अल्लाह की आयतों के इनकार के कारण, और नबियों को नाहक़ क़त्ल करने के कारण और इनके यह कहने के कारण कि "हमारे दिल सुरक्षित (गिलाफों में) है" - नहीं, बल्कि इनके इनकार के कारण अल्लाह ने दिलों पर ठप्पा लगा दिया है। अतः ये ईमान थोड़े ही लाते है।
अव्यय
فَبِمَا
तो कारण
fabimā
संज्ञा
نَقْضِهِم
उनके तोड़ने के
naqḍihim
संज्ञा
مِّيثَـٰقَهُمْ
उनका वादा
mīthāqahum
संज्ञा
وَكُفْرِهِم
और उनके इनकार
wakuf'rihim
अव्यय
بِـَٔايَـٰتِ
आयतों के
biāyāti
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह की
l-lahi
संज्ञा
وَقَتْلِهِمُ
और उनके क़त्ल करने
waqatlihimu
संज्ञा
ٱلْأَنۢبِيَآءَ
नबियों को
l-anbiyāa
अव्यय
بِغَيْرِ
बिना
bighayri
संज्ञा
حَقٍّۢ
हक़ (नाहक़)
ḥaqqin
संज्ञा
وَقَوْلِهِمْ
और उनके कहने
waqawlihim
संज्ञा
قُلُوبُنَا
हमारे दिल
qulūbunā
संज्ञा
غُلْفٌۢ ۚ
गिलाफ में (बंद)
ghul'fun
अव्यय
بَلْ
बल्कि
bal
क्रिया
طَبَعَ
मुहर लगा दी
ṭabaʿa
संज्ञा
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
l-lahu
अव्यय
عَلَيْهَا
उन पर
ʿalayhā
अव्यय
بِكُفْرِهِمْ
उनके कुफ्र के कारण
bikuf'rihim
अव्यय
فَلَا
तो न
falā
क्रिया
يُؤْمِنُونَ
वे ईमान लाते हैं
yu'minūna
अव्यय
إِلَّا
मगर
illā
संज्ञा
قَلِيلًۭا
थोड़ा
qalīlan
4:156
وَبِكُفْرِهِمْ وَقَوْلِهِمْ عَلَىٰ مَرْيَمَ بُهْتَـٰنًا عَظِيمًۭا
wabikuf'rihim waqawlihim ʿalā maryama buh'tānan ʿaẓīman
और उनके कुफ़्र (इनकार) के कारण और मरियम पर भारी बुहतान (आरोप) लगाने के कारण।
अव्यय
وَبِكُفْرِهِمْ
और उनके कुफ्र के कारण
wabikuf'rihim
संज्ञा
وَقَوْلِهِمْ
और उनके कहने (के कारण)
waqawlihim
अव्यय
عَلَىٰ
पर
ʿalā
संज्ञा
مَرْيَمَ
मरियम
maryama
संज्ञा
بُهْتَـٰنًا
बुहतान (आरोप)
buh'tānan
संज्ञा
عَظِيمًۭا
बहुत बड़ा (भारी)
ʿaẓīman
4:157
وَقَوْلِهِمْ إِنَّا قَتَلْنَا ٱلْمَسِيحَ عِيسَى ٱبْنَ مَرْيَمَ رَسُولَ ٱللَّهِ وَمَا قَتَلُوهُ وَمَا صَلَبُوهُ وَلَـٰكِن شُبِّهَ لَهُمْ ۚ وَإِنَّ ٱلَّذِينَ ٱخْتَلَفُوا۟ فِيهِ لَفِى شَكٍّۢ مِّنْهُ ۚ مَا لَهُم بِهِۦ مِنْ عِلْمٍ إِلَّا ٱتِّبَاعَ ٱلظَّنِّ ۚ وَمَا قَتَلُوهُ يَقِينًۢا
waqawlihim innā qatalnā l-masīḥa ʿīsā ib'na maryama rasūla l-lahi wamā qatalūhu wamā ṣalabūhu walākin shubbiha lahum wa-inna alladhīna ikh'talafū fīhi lafī shakkin min'hu mā lahum bihi min ʿil'min illā ittibāʿa l-ẓani wamā qatalūhu yaqīnan
और उनके यह कहने के कारण कि "हमने अल्लाह के रसूल, मरियम के बेटे मसीह ईसा को क़त्ल कर दिया" - हालाँकि न तो उन्होंने उसे क़त्ल किया और न उसे सूली पर चढ़ाया, बल्कि मामला उनके लिए संदिग्ध (मुश्तबा) बना दिया गया। और जो लोग इसमें मतभेद कर रहे है, वे निश्चय ही इस विषय में संदेह में है। गुमान (अटकल) के पीछे चलने के अतिरिक्त उन्हें इसका कोई ज्ञान नहीं। और उन्होंने उसे (ईसा को) यक़ीनन क़त्ल नहीं किया।
संज्ञा
وَقَوْلِهِمْ
और उनके कहने के कारण
waqawlihim
अव्यय
إِنَّا
बेशक हमने
innā
क्रिया
قَتَلْنَا
क़त्ल किया
qatalnā
संज्ञा
ٱلْمَسِيحَ
मसीह
l-masīḥa
संज्ञा
عِيسَى
ईसा
ʿīsā
संज्ञा
ٱبْنَ
बेटे
ib'na
संज्ञा
مَرْيَمَ
मरियम के
maryama
संज्ञा
رَسُولَ
रसूल
rasūla
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह के
l-lahi
अव्यय
وَمَا
और न
wamā
क्रिया
قَتَلُوهُ
उन्होंने उसे क़त्ल किया
qatalūhu
अव्यय
وَمَا
और न
wamā
क्रिया
صَلَبُوهُ
उसे सूली दी
ṣalabūhu
अव्यय
وَلَـٰكِن
लेकिन
walākin
क्रिया
شُبِّهَ
हमशक्ल बना दिया गया
shubbiha
अव्यय
لَهُمْ ۚ
उनके लिए
lahum
अव्यय
وَإِنَّ
और बेशक
wa-inna
सर्वनाम
ٱلَّذِينَ
जिन्होंने
alladhīna
क्रिया
ٱخْتَلَفُوا۟
मतभेद किया
ikh'talafū
अव्यय
فِيهِ
इस बारे में
fīhi
अव्यय
لَفِى
ज़रूर में हैं
lafī
संज्ञा
شَكٍّۢ
शक
shakkin
अव्यय
مِّنْهُ ۚ
इससे
min'hu
अव्यय
مَا
नहीं
mā
अव्यय
لَهُم
उन्हें
lahum
अव्यय
بِهِۦ
उसका
bihi
अव्यय
مِنْ
कोई
min
संज्ञा
عِلْمٍ
इल्म (ज्ञान)
ʿil'min
अव्यय
إِلَّا
सिवाय
illā
संज्ञा
ٱتِّبَاعَ
पीछे चलने के
ittibāʿa
संज्ञा
ٱلظَّنِّ ۚ
गुमान (अटकल)
l-ẓani
अव्यय
وَمَا
और नहीं
wamā
क्रिया
قَتَلُوهُ
उन्होंने क़त्ल किया उसे
qatalūhu
संज्ञा
يَقِينًۢا
यकीनन
yaqīnan
4:158
بَل رَّفَعَهُ ٱللَّهُ إِلَيْهِ ۚ وَكَانَ ٱللَّهُ عَزِيزًا حَكِيمًۭا
bal rafaʿahu l-lahu ilayhi wakāna l-lahu ʿazīzan ḥakīman
बल्कि अल्लाह ने उसे अपनी ओर उठा लिया। अल्लाह प्रभुत्वशाली (ज़बरदस्त), तत्वदर्शी (हिकमत वाला) है।
अव्यय
بَل
बल्कि
bal
क्रिया
رَّفَعَهُ
उसे उठा लिया
rafaʿahu
संज्ञा
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
l-lahu
अव्यय
إِلَيْهِ ۚ
अपनी तरफ
ilayhi
क्रिया
وَكَانَ
और है
wakāna
संज्ञा
ٱللَّهُ
अल्लाह
l-lahu
संज्ञा
عَزِيزًا
ज़बरदस्त
ʿazīzan
संज्ञा
حَكِيمًۭا
हिकमत वाला
ḥakīman
4:159
وَإِن مِّنْ أَهْلِ ٱلْكِتَـٰبِ إِلَّا لَيُؤْمِنَنَّ بِهِۦ قَبْلَ مَوْتِهِۦ ۖ وَيَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ يَكُونُ عَلَيْهِمْ شَهِيدًۭا
wa-in min ahli l-kitābi illā layu'minanna bihi qabla mawtihi wayawma l-qiyāmati yakūnu ʿalayhim shahīdan
और किताबवालों में से कोई ऐसा न होगा जो उसकी (ईसा की) मृत्यु से पहले उसपर ईमान न ले आए, और क़ियामत के दिन वह उनपर गवाह होगा।
अव्यय
وَإِن
और नहीं
wa-in
अव्यय
مِّنْ
में से
min
संज्ञा
أَهْلِ
अहले (वाले)
ahli
संज्ञा
ٱلْكِتَـٰبِ
किताब
l-kitābi
अव्यय
إِلَّا
मगर
illā
क्रिया
لَيُؤْمِنَنَّ
ज़रूर ईमान लाएगा
layu'minanna
अव्यय
بِهِۦ
उस पर
bihi
संज्ञा
قَبْلَ
पहले
qabla
संज्ञा
مَوْتِهِۦ ۖ
उसकी मौत के
mawtihi
संज्ञा
وَيَوْمَ
और दिन
wayawma
संज्ञा
ٱلْقِيَـٰمَةِ
कयामत के
l-qiyāmati
क्रिया
يَكُونُ
वह होगा
yakūnu
अव्यय
عَلَيْهِمْ
उन पर
ʿalayhim
संज्ञा
شَهِيدًۭا
गवाह
shahīdan
4:160
فَبِظُلْمٍۢ مِّنَ ٱلَّذِينَ هَادُوا۟ حَرَّمْنَا عَلَيْهِمْ طَيِّبَـٰتٍ أُحِلَّتْ لَهُمْ وَبِصَدِّهِمْ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ كَثِيرًۭا
fabiẓul'min mina alladhīna hādū ḥarramnā ʿalayhim ṭayyibātin uḥillat lahum wabiṣaddihim ʿan sabīli l-lahi kathīran
तो उन लोगों के बड़े ज़ुल्म के कारण जो यहूदी बन गए, हमने उनपर अच्छी पाक चीज़ें हराम कर दीं जो उनके लिए हलाल थीं, और इसके कारण कि वे अल्लाह के रास्ते से बहुत रोकते थे।
अव्यय
فَبِظُلْمٍۢ
तो उस ज़ुल्म के कारण
fabiẓul'min
अव्यय
مِّنَ
की तरफ से
mina
सर्वनाम
ٱلَّذِينَ
जिन्होंने
alladhīna
क्रिया
هَادُوا۟
यहूदी बने
hādū
क्रिया
حَرَّمْنَا
हमने हराम कर दी
ḥarramnā
अव्यय
عَلَيْهِمْ
उन पर
ʿalayhim
संज्ञा
طَيِّبَـٰتٍ
पाक चीज़ें
ṭayyibātin
क्रिया
أُحِلَّتْ
हलाल की गयी थीं
uḥillat
अव्यय
لَهُمْ
उनके लिए
lahum
अव्यय
وَبِصَدِّهِمْ
और उनके रोकने के कारण
wabiṣaddihim
अव्यय
عَن
से
ʿan
संज्ञा
سَبِيلِ
रास्ते
sabīli
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह के
l-lahi
संज्ञा
كَثِيرًۭا
बहुत (अक्सर)
kathīran
4:161
وَأَخْذِهِمُ ٱلرِّبَوٰا۟ وَقَدْ نُهُوا۟ عَنْهُ وَأَكْلِهِمْ أَمْوَٰلَ ٱلنَّاسِ بِٱلْحَقِّ ۚ وَأَعْتَدْنَا لِلْكَـٰفِرِينَ مِنْهُمْ عَذَابًا أَلِيمًۭا
wa-akhdhihimu l-riba waqad nuhū ʿanhu wa-aklihim amwāla l-nāsi bil-bāṭili wa-aʿtadnā lil'kāfirīna min'hum ʿadhāban alīman
और इसलिए कि वे ब्याज लेते थे, जबकि उससे उन्हें रोका गया था और इसलिए कि वे नाहक़ लोगों का माल खाते थे। और हमने उनमें से इनकार करनेवालों के लिए दुखद अज़ाब तैयार कर रखा है।
अव्यय
وَأَخْذِهِمُ
और उनके लेने के कारण
wa-akhdhihimu
संज्ञा
ٱلرِّبَوٰا۟
ब्याज (सूद)
l-riba
अव्यय
وَقَدْ
हालांकि यकीनन
waqad
क्रिया
نُهُوا۟
उन्हें रोका गया था
nuhū
अव्यय
عَنْهُ
उससे
ʿanhu
अव्यय
وَأَكْلِهِمْ
और उनके खाने के कारण
wa-aklihim
संज्ञा
أَمْوَٰلَ
माल
amwāla
संज्ञा
ٱلنَّاسِ
लोगों का
l-nāsi
अव्यय
بِٱلْبَـٰطِلِ ۚ
नाहक़ (गलत तरीके से)
bil-bāṭili
क्रिया
وَأَعْتَدْنَا
और हमने तैयार किया है
wa-aʿtadnā
अव्यय
لِلْكَـٰفِرِينَ
काफ़िरों के लिए
lil'kāfirīna
अव्यय
مِنْهُمْ
उनमें से
min'hum
संज्ञा
عَذَابًا
अज़ाब
ʿadhāban
संज्ञा
أَلِيمًۭا
दर्दनाक
alīman
4:162
لَّـٰكِنِ ٱلرَّٰسِخُونَ فِى ٱلْعِلْمِ مِنْهُمْ وَٱلْمُؤْمِنُونَ يُؤْمِنُونَ بِمَآ أُنزِلَ إِلَيْكَ وَمَآ أُنزِلَ مِن قَبْلِكَ ۚ وَٱلْمُقِيمِينَ ٱلصَّلَوٰةَ ۚ وَٱلْمُؤْتُونَ ٱلزَّكَوٰةَ وَٱلْمُؤْمِنُونَ بِٱللَّهِ وَٱلْيَوْمِ ٱلْـَٔاخِرِ أُو۟لَـٰٓئِكَ سَنُؤْتِيهِمْ أَجْرًا عَظِيمًا
lākini l-rāsikhūna fī l-ʿil'mi min'hum wal-mu'minūna yu'minūna bimā unzila ilayka wamā unzila min qablika wal-muqīmīna l-ṣalata wal-mu'tūna l-zakata wal-mu'minūna bil-lahi wal-yawmi l-ākhiri ulāika sanu'tīhim ajran ʿaẓīman
लेकिन उनमें से जो लोग ज्ञान में पक्के है और वे ईमानवाले जो उसपर ईमान लाते है जो (ऐ मुहम्मद) तुम्हारी ओर अवतरित हुआ और जो तुमसे पहले अवतरित हुआ, और वे जो नमाज़ क़ायम करनेवाले है, और वे जो ज़कात देनेवाले है और अल्लाह और अन्तिम दिन पर ईमान रखनेवाले है, यही वे लोग है जिन्हें हम शीघ्र ही बड़ा अजर (प्रतिदान) प्रदान करेंगे।
अव्यय
لَّـٰكِنِ
लेकिन
lākini
संज्ञा
ٱلرَّٰسِخُونَ
मज़बूत (पक्के) लोग
l-rāsikhūna
अव्यय
فِى
में
fī
संज्ञा
ٱلْعِلْمِ
इल्म (ज्ञान)
l-ʿil'mi
अव्यय
مِنْهُمْ
उनमें से
min'hum
संज्ञा
وَٱلْمُؤْمِنُونَ
और ईमान वाले
wal-mu'minūna
क्रिया
يُؤْمِنُونَ
ईमान लाते हैं
yu'minūna
अव्यय
بِمَآ
उस पर जो
bimā
क्रिया
أُنزِلَ
उतारा गया
unzila
अव्यय
إِلَيْكَ
तुम्हारी तरफ
ilayka
अव्यय
وَمَآ
और जो
wamā
क्रिया
أُنزِلَ
उतारा गया
unzila
अव्यय
مِن
से
min
संज्ञा
قَبْلِكَ ۚ
तुमसे पहले
qablika
संज्ञा
وَٱلْمُقِيمِينَ
और कायम करने वाले
wal-muqīmīna
संज्ञा
ٱلصَّلَوٰةَ ۚ
नमाज़
l-ṣalata
संज्ञा
وَٱلْمُؤْتُونَ
और देने वाले
wal-mu'tūna
संज्ञा
ٱلزَّكَوٰةَ
ज़कात
l-zakata
संज्ञा
وَٱلْمُؤْمِنُونَ
और ईमान वाले
wal-mu'minūna
अव्यय
بِٱللَّهِ
अल्लाह पर
bil-lahi
अव्यय
وَٱلْيَوْمِ
और दिन पर
wal-yawmi
संज्ञा
ٱلْـَٔاخِرِ
आखिरत के
l-ākhiri
सर्वनाम
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग
ulāika
क्रिया
سَنُؤْتِيهِمْ
हम उन्हें देंगे
sanu'tīhim
संज्ञा
أَجْرًا
अजर
ajran
संज्ञा
عَظِيمًا
बड़ा
ʿaẓīman
4:163
۞ إِنَّآ أَوْحَيْنَآ إِلَيْكَ كَمَآ أَوْحَيْنَآ إِلَىٰ نُوحٍۢ وَٱلنَّبِيِّـۧنَ مِنۢ بَعْدِهِۦ ۚ وَأَوْحَيْنَآ إِلَىٰٓ إِبْرَٰهِيمَ وَإِسْمَـٰعِيلَ وَإِسْحَـٰقَ وَيَعْقُوبَ وَٱلْأَسْبَاطِ وَعِيسَىٰ وَأَيُّوبَ وَيُونُسَ وَهَـٰرُونَ وَسُلَيْمَـٰنَ ۚ وَءَاتَيْنَا دَاوُۥدَ زَبُورًۭا
innā awḥaynā ilayka kamā awḥaynā ilā nūḥin wal-nabiyīna min baʿdihi wa-awḥaynā ilā ib'rāhīma wa-is'māʿīla wa-is'ḥāqa wayaʿqūba wal-asbāṭi waʿīsā wa-ayyūba wayūnusa wahārūna wasulaymāna waātaynā dāwūda zabūran
(ऐ मुहम्मद!) हमने तुम्हारी ओर उसी तरह 'वही' (प्रकाशना) भेजी है जिस तरह नूह और उसके बाद के नबियों की ओर भेजी थी, और हमने इबराहीम, इसमाईल, इसहाक़, याक़ूब और उसकी संतान और ईसा, अय्यूब, यूनुस, हारून और सुलैमान की ओर 'वही' भेजी, और दाऊद को हमने 'ज़बूर' प्रदान की।
अव्यय
۞ إِنَّآ
बेशक हमने
innā
अव्यय
إِلَيْكَ
तुम्हारी तरफ
ilayka
अव्यय
كَمَآ
जैसा कि
kamā
क्रिया
أَوْحَيْنَآ
हमने वही भेजी
awḥaynā
अव्यय
إِلَىٰ
तरफ
ilā
संज्ञा
نُوحٍۢ
नूह
nūḥin
संज्ञा
وَٱلنَّبِيِّـۧنَ
और नबियों की
wal-nabiyīna
अव्यय
مِنۢ
से
min
संज्ञा
بَعْدِهِۦ ۚ
उसके बाद
baʿdihi
क्रिया
وَأَوْحَيْنَآ
और हमने वही भेजी
wa-awḥaynā
अव्यय
إِلَىٰٓ
तरफ
ilā
संज्ञा
إِبْرَٰهِيمَ
इब्राहीम
ib'rāhīma
संज्ञा
وَإِسْمَـٰعِيلَ
और इस्माईल
wa-is'māʿīla
संज्ञा
وَإِسْحَـٰقَ
और इसहाक़
wa-is'ḥāqa
संज्ञा
وَيَعْقُوبَ
और याक़ूब
wayaʿqūba
संज्ञा
وَٱلْأَسْبَاطِ
और औलाद (संतान)
wal-asbāṭi
संज्ञा
وَعِيسَىٰ
और ईसा
waʿīsā
संज्ञा
وَأَيُّوبَ
और अय्यूब
wa-ayyūba
संज्ञा
وَيُونُسَ
और यूनुस
wayūnusa
संज्ञा
وَهَـٰرُونَ
और हारून
wahārūna
संज्ञा
وَسُلَيْمَـٰنَ ۚ
और सुलैमान
wasulaymāna
अव्यय
وَءَاتَيْنَا
और हमने दी
waātaynā
संज्ञा
دَاوُۥدَ
दाऊद को
dāwūda
संज्ञा
زَبُورًۭا
ज़बूर (किताब)
zabūran
4:164
وَرُسُلًۭا قَدْ قَصَصْنَـٰهُمْ عَلَيْكَ مِن قَبْلُ وَرُسُلًۭا لَّمْ نَقْصُصْهُمْ عَلَيْكَ ۚ وَكَلَّمَ ٱللَّهُ مُوسَىٰ تَكْلِيمًۭا
warusulan qad qaṣaṣnāhum ʿalayka min qablu warusulan lam naqṣuṣ'hum ʿalayka wakallama l-lahu mūsā taklīman
और कितने ही रसूलों को (भेजा) जिनका वृत्तान्त इससे पहले हम तुम्हें सुना चुके है और कितने ही ऐसे रसूल (भेजे) जिनका वृत्तान्त हमने तुम्हें नहीं सुनाया - और अल्लाह ने मूसा से साक्षात बात की -
संज्ञा
وَرُسُلًۭا
और (भेजे) रसूल
warusulan
अव्यय
قَدْ
यकीनन
qad
क्रिया
قَصَصْنَـٰهُمْ
हमने किस्सा सुनाया उनका
qaṣaṣnāhum
अव्यय
عَلَيْكَ
तुमको
ʿalayka
अव्यय
مِن
से
min
संज्ञा
قَبْلُ
पहले
qablu
संज्ञा
وَرُسُلًۭا
और रसूल
warusulan
अव्यय
لَّمْ
नहीं
lam
क्रिया
نَقْصُصْهُمْ
हमने किस्सा सुनाया उनका
naqṣuṣ'hum
अव्यय
عَلَيْكَ ۚ
तुमको
ʿalayka
क्रिया
وَكَلَّمَ
और बात की
wakallama
संज्ञा
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
l-lahu
संज्ञा
مُوسَىٰ
मूसा से
mūsā
संज्ञा
تَكْلِيمًۭا
बात करना (साक्षात)
taklīman
4:165
رُّسُلًۭا مُّبَشِّرِينَ وَمُنذِرِينَ لِئَلَّا يَكُونَ لِلنَّاسِ عَلَى ٱللَّهِ حُجَّةٌۢ بَعْدَ ٱلرُّسُلِ ۚ وَكَانَ ٱللَّهُ عَزِيزًا حَكِيمًۭا
rusulan mubashirīna wamundhirīna li-allā yakūna lilnnāsi ʿalā l-lahi ḥujjatun baʿda l-rusuli wakāna l-lahu ʿazīzan ḥakīman
सारे रसूल शुभ-सूचना देनेवाले और सचेतकर्ता बनाकर भेजे गए, ताकि रसूलों के आ जाने के पश्चात लोगों के पास अल्लाह के मुक़ाबले में कोई तर्क (हुज्जत) बाक़ी न रहे। अल्लाह प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है।
संज्ञा
رُّسُلًۭا
रसूल
rusulan
संज्ञा
مُّبَشِّرِينَ
खुशखबरी देने वाले
mubashirīna
संज्ञा
وَمُنذِرِينَ
और डराने वाले
wamundhirīna
अव्यय
لِئَلَّا
ताकि न रहे
li-allā
क्रिया
يَكُونَ
हो
yakūna
अव्यय
لِلنَّاسِ
लोगों के लिए
lilnnāsi
अव्यय
عَلَى
पर (खिलाफ)
ʿalā
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह के
l-lahi
संज्ञा
حُجَّةٌۢ
कोई हुज्जत (तर्क)
ḥujjatun
संज्ञा
بَعْدَ
बाद
baʿda
संज्ञा
ٱلرُّسُلِ ۚ
रसूलों के
l-rusuli
क्रिया
وَكَانَ
और है
wakāna
संज्ञा
ٱللَّهُ
अल्लाह
l-lahu
संज्ञा
عَزِيزًا
ज़बरदस्त (प्रभुत्वशाली)
ʿazīzan
संज्ञा
حَكِيمًۭا
हिकमत वाला
ḥakīman
4:166
لَّـٰكِنِ ٱللَّهُ يَشْهَدُ بِمَآ أَنزَلَ إِلَيْكَ ۖ أَنزَلَهُۥ بِعِلْمِهِۦ ۖ وَٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ يَشْهَدُونَ ۚ وَكَفَىٰ بِٱللَّهِ شَهِيدًا
lākini l-lahu yashhadu bimā anzala ilayka anzalahu biʿil'mihi wal-malāikatu yashhadūna wakafā bil-lahi shahīdan
लेकिन अल्लाह गवाही देता है उस चीज़ (क़ुरआन) के हक़ में जो उसने तुमपर अवतरित की है। उसे अपने ज्ञान से अवतरित किया है और फ़रिश्ते भी गवाही देते है, और गवाह के तौर पर अल्लाह काफ़ी है।
अव्यय
لَّـٰكِنِ
लेकिन
lākini
संज्ञा
ٱللَّهُ
अल्लाह
l-lahu
क्रिया
يَشْهَدُ
गवाही देता है
yashhadu
अव्यय
بِمَآ
उस पर जो
bimā
क्रिया
أَنزَلَ
उसने उतारा है
anzala
अव्यय
إِلَيْكَ ۖ
तुम्हारी तरफ
ilayka
क्रिया
أَنزَلَهُۥ
उसने उतारा है उसे
anzalahu
अव्यय
بِعِلْمِهِۦ ۖ
अपने इल्म (ज्ञान) से
biʿil'mihi
संज्ञा
وَٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ
और फ़रिश्ते
wal-malāikatu
क्रिया
يَشْهَدُونَ ۚ
गवाही देते हैं
yashhadūna
क्रिया
وَكَفَىٰ
और काफी है
wakafā
अव्यय
بِٱللَّهِ
अल्लाह
bil-lahi
संज्ञा
شَهِيدًا
गवाह
shahīdan
4:167
إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ وَصَدُّوا۟ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ قَدْ ضَلُّوا۟ ضَلَـٰلًۢا بَعِيدًا
inna alladhīna kafarū waṣaddū ʿan sabīli l-lahi qad ḍallū ḍalālan baʿīdan
जिन लोगों ने इनकार किया और अल्लाह के मार्ग से रोका वे भटककर बहुत दूर जा पड़े।
अव्यय
إِنَّ
बेशक
inna
सर्वनाम
ٱلَّذِينَ
जिन्होंने
alladhīna
क्रिया
كَفَرُوا۟
इनकार किया
kafarū
क्रिया
وَصَدُّوا۟
और रोका
waṣaddū
अव्यय
عَن
से
ʿan
संज्ञा
سَبِيلِ
रास्ते
sabīli
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह के
l-lahi
अव्यय
قَدْ
यकीनन
qad
क्रिया
ضَلُّوا۟
वो भटक गए
ḍallū
संज्ञा
ضَلَـٰلًۢا
गुमराही (भटकना)
ḍalālan
संज्ञा
بَعِيدًا
दूर की
baʿīdan
4:168
إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ وَظَلَمُوا۟ لَمْ يَكُنِ ٱللَّهُ لِيَغْفِرَ لَهُمْ وَلَا لِيَهْدِيَهُمْ طَرِيقًا
inna alladhīna kafarū waẓalamū lam yakuni l-lahu liyaghfira lahum walā liyahdiyahum ṭarīqan
जिन लोगों ने इनकार किया और ज़ुल्म किया उन्हें अल्लाह कदापि क्षमा न करेगा और न उन्हें कोई राह दिखाएगा,
अव्यय
إِنَّ
बेशक
inna
सर्वनाम
ٱلَّذِينَ
जिन्होंने
alladhīna
क्रिया
كَفَرُوا۟
इनकार किया
kafarū
क्रिया
وَظَلَمُوا۟
और ज़ुल्म किया
waẓalamū
अव्यय
لَمْ
नहीं
lam
क्रिया
يَكُنِ
है
yakuni
संज्ञा
ٱللَّهُ
अल्लाह
l-lahu
अव्यय
لِيَغْفِرَ
कि माफ करे
liyaghfira
अव्यय
لَهُمْ
उन्हें
lahum
अव्यय
وَلَا
और न
walā
अव्यय
لِيَهْدِيَهُمْ
वह राह दिखाएगा उन्हें
liyahdiyahum
संज्ञा
طَرِيقًا
कोई रास्ता
ṭarīqan
4:169
إِلَّا طَرِيقَ جَهَنَّمَ خَـٰلِدِينَ فِيهَآ أَبَدًۭا ۚ وَكَانَ ذَٰلِكَ عَلَى ٱللَّهِ يَسِيرًۭا
illā ṭarīqa jahannama khālidīna fīhā abadan wakāna dhālika ʿalā l-lahi yasīran
सिवाय जहन्नम के रास्ते के, जिसमें वे सदैव रहनेवाले है। और यह अल्लाह के लिए आसान है।
अव्यय
إِلَّا
सिवाय
illā
संज्ञा
طَرِيقَ
रास्ते के
ṭarīqa
संज्ञा
جَهَنَّمَ
जहन्नम के
jahannama
संज्ञा
خَـٰلِدِينَ
हमेशा रहेंगे
khālidīna
अव्यय
فِيهَآ
उसमें
fīhā
संज्ञा
أَبَدًۭا ۚ
हमेशा
abadan
क्रिया
وَكَانَ
और है
wakāna
सर्वनाम
ذَٰلِكَ
यह
dhālika
अव्यय
عَلَى
पर
ʿalā
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह
l-lahi
संज्ञा
يَسِيرًۭا
आसान
yasīran
4:170
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ قَدْ جَآءَكُمُ ٱلرَّسُولُ بِٱلْحَقِّ مِن رَّبِّكُمْ فَـَٔامِنُوا۟ خَيْرًۭا لَّكُمْ ۚ وَإِن تَكْفُرُوا۟ فَإِنَّ لِلَّهِ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۚ وَكَانَ ٱللَّهُ عَلِيمًا حَكِيمًۭا
yāayyuhā l-nāsu qad jāakumu l-rasūlu bil-ḥaqi min rabbikum faāminū khayran lakum wa-in takfurū fa-inna lillahi mā fī l-samāwāti wal-arḍi wakāna l-lahu ʿalīman ḥakīman
ऐ लोगो! यह रसूल तुम्हारे पास तुम्हारे रब की ओर से सत्य लेकर आ गया है; तो ईमान ले आओ, तुम्हारे लिए अच्छा है। और यदि इनकार करोगे तो (जान लो कि) आकाशों और धरती में जो कुछ है अल्लाह ही का है। और अल्लाह सब कुछ जाननेवाला, तत्वदर्शी है।
अव्यय
يَـٰٓأَيُّهَا
ऐ
yāayyuhā
संज्ञा
ٱلنَّاسُ
लोगो
l-nāsu
अव्यय
قَدْ
यकीनन
qad
क्रिया
جَآءَكُمُ
तुम्हारे पास आ गया
jāakumu
संज्ञा
ٱلرَّسُولُ
रसूल
l-rasūlu
अव्यय
بِٱلْحَقِّ
हक़ (सत्य) के साथ
bil-ḥaqi
अव्यय
مِن
से
min
संज्ञा
رَّبِّكُمْ
तुम्हारे रब
rabbikum
क्रिया
فَـَٔامِنُوا۟
तो ईमान लाओ
faāminū
संज्ञा
خَيْرًۭا
बेहतर है
khayran
अव्यय
لَّكُمْ ۚ
तुम्हारे लिए
lakum
अव्यय
وَإِن
और अगर
wa-in
क्रिया
تَكْفُرُوا۟
तुम इनकार करोगे
takfurū
अव्यय
فَإِنَّ
तो बेशक
fa-inna
अव्यय
لِلَّهِ
अल्लाह के लिए है
lillahi
सर्वनाम
مَا
जो कुछ
mā
अव्यय
فِى
में है
fī
संज्ञा
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों
l-samāwāti
संज्ञा
وَٱلْأَرْضِ ۚ
और ज़मीन
wal-arḍi
क्रिया
وَكَانَ
और है
wakāna
संज्ञा
ٱللَّهُ
अल्लाह
l-lahu
संज्ञा
عَلِيمًا
जानने वाला
ʿalīman
संज्ञा
حَكِيمًۭا
हिकमत वाला
ḥakīman
4:171
يَـٰٓأَهْلَ ٱلْكِتَـٰبِ لَا تَغْلُوا۟ فِى دِينِكُمْ وَلَا تَقُولُوا۟ عَلَى ٱللَّهِ إِلَّا ٱلْحَقَّ ۚ إِنَّمَا ٱلْمَسِيحُ عِيسَى ٱبْنُ مَرْيَمَ رَسُولُ ٱللَّهِ وَكَلِمَتُهُۥٓ أَلْقَىٰهَآ إِلَىٰ مَرْيَمَ وَرُوحٌۭ مِّنْهُ ۖ فَـَٔامِنُوا۟ بِٱللَّهِ وَرُسُلِهِۦ ۖ وَلَا تَقُولُوا۟ ثَلَـٰثَةٌ ۚ ٱنتَهُوا۟ خَيْرًۭا لَّكُمْ ۚ إِنَّمَا ٱللَّهُ إِلَـٰهٌۭ وَٰحِدٌۭ ۖ سُبْحَـٰنَهُۥٓ أَن يَكُونَ لَهُۥ وَلَدٌۭ ۘ لَّهُۥ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ ۗ وَكَفَىٰ بِٱللَّهِ وَكِيلًۭا
yāahla l-kitābi lā taghlū fī dīnikum walā taqūlū ʿalā l-lahi illā l-ḥaqa innamā l-masīḥu ʿīsā ub'nu maryama rasūlu l-lahi wakalimatuhu alqāhā ilā maryama warūḥun min'hu faāminū bil-lahi warusulihi walā taqūlū thalāthatun intahū khayran lakum innamā l-lahu ilāhun wāḥidun sub'ḥānahu an yakūna lahu waladun lahu mā fī l-samāwāti wamā fī l-arḍi wakafā bil-lahi wakīlan
ऐ किताबवालों! अपने धर्म (दीन) में हद से न बढ़ो और अल्लाह के विषय में सच के सिवा कुछ न कहो। मसीह ईसा, मरियम का बेटा, बस अल्लाह का एक रसूल था और उसका एक 'कलमा' (शब्द) था, जिसे उसने मरियम की ओर भेजा था, और उसकी ओर से एक रूह था। अतः अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाओ और न कहो कि '(ईश्वर) तीन है।' बाज़ आ जाओ, यह तुम्हारे ही लिए अच्छा है। अल्लाह तो बस अकेला पूज्य है। वह इससे महान और उच्च है कि उसका कोई बेटा हो। आकाशों और धरती में जो कुछ है उसी का है, और अल्लाह काम बनाने के लिए काफ़ी है।
अव्यय
يَـٰٓأَهْلَ
ऐ (किताब) वाले
yāahla
संज्ञा
ٱلْكِتَـٰبِ
किताब
l-kitābi
अव्यय
لَا
मत
lā
क्रिया
تَغْلُوا۟
हद से बढ़ो
taghlū
अव्यय
فِى
में
fī
संज्ञा
دِينِكُمْ
अपने दीन
dīnikum
अव्यय
وَلَا
और न
walā
क्रिया
تَقُولُوا۟
तुम कहो
taqūlū
अव्यय
عَلَى
बारे में
ʿalā
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह के
l-lahi
अव्यय
إِلَّا
सिवाय
illā
संज्ञा
ٱلْحَقَّ ۚ
हक़ (सच)
l-ḥaqa
अव्यय
إِنَّمَا
सिर्फ
innamā
संज्ञा
ٱلْمَسِيحُ
मसीह
l-masīḥu
संज्ञा
عِيسَى
ईसा
ʿīsā
संज्ञा
ٱبْنُ
बेटा
ub'nu
संज्ञा
مَرْيَمَ
मरियम का
maryama
संज्ञा
رَسُولُ
रसूल है
rasūlu
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह का
l-lahi
संज्ञा
وَكَلِمَتُهُۥٓ
और उसका कलमा (शब्द)
wakalimatuhu
क्रिया
أَلْقَىٰهَآ
उसने डाला उसे
alqāhā
अव्यय
إِلَىٰ
तरफ
ilā
संज्ञा
مَرْيَمَ
मरियम के
maryama
संज्ञा
وَرُوحٌۭ
और एक रूह
warūḥun
अव्यय
مِّنْهُ ۖ
उसकी तरफ से
min'hu
क्रिया
فَـَٔامِنُوا۟
तो ईमान लाओ
faāminū
अव्यय
بِٱللَّهِ
अल्लाह पर
bil-lahi
संज्ञा
وَرُسُلِهِۦ ۖ
और उसके रसूलों पर
warusulihi
अव्यय
وَلَا
और मत
walā
क्रिया
تَقُولُوا۟
कहो
taqūlū
संज्ञा
ثَلَـٰثَةٌ ۚ
तीन (हैं)
thalāthatun
क्रिया
ٱنتَهُوا۟
रुक जाओ
intahū
संज्ञा
خَيْرًۭا
बेहतर है
khayran
अव्यय
لَّكُمْ ۚ
तुम्हारे लिए
lakum
अव्यय
إِنَّمَا
सिर्फ
innamā
संज्ञा
ٱللَّهُ
अल्लाह
l-lahu
संज्ञा
إِلَـٰهٌۭ
इलाह (पूज्य) है
ilāhun
संज्ञा
وَٰحِدٌۭ ۖ
एक (अकेला)
wāḥidun
संज्ञा
سُبْحَـٰنَهُۥٓ
वह पाक है
sub'ḥānahu
अव्यय
أَن
कि
an
क्रिया
يَكُونَ
हो
yakūna
अव्यय
لَهُۥ
उसके लिए
lahu
संज्ञा
وَلَدٌۭ ۘ
कोई औलाद (बेटा)
waladun
अव्यय
لَّهُۥ
उसी के लिए है
lahu
सर्वनाम
مَا
जो कुछ
mā
अव्यय
فِى
में है
fī
संज्ञा
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आसमानों
l-samāwāti
अव्यय
وَمَا
और जो कुछ
wamā
अव्यय
فِى
में है
fī
संज्ञा
ٱلْأَرْضِ ۗ
ज़मीन
l-arḍi
क्रिया
وَكَفَىٰ
और काफी है
wakafā
अव्यय
بِٱللَّهِ
अल्लाह
bil-lahi
संज्ञा
وَكِيلًۭا
कारसाज़ (काम बनाने वाला)
wakīlan
4:172
لَّن يَسْتَنكِفَ ٱلْمَسِيحُ أَن يَكُونَ عَبْدًۭا لِّلَّهِ وَلَا ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ ٱلْمُقَرَّبُونَ ۚ وَمَن يَسْتَنكِفْ عَنْ عِبَادَتِهِۦ وَيَسْتَكْبِرْ فَسَيَحْشُرُهُمْ إِلَيْهِ جَمِيعًۭا
lan yastankifa l-masīḥu an yakūna ʿabdan lillahi walā l-malāikatu l-muqarabūna waman yastankif ʿan ʿibādatihi wayastakbir fasayaḥshuruhum ilayhi jamīʿan
मसीह को हरगिज़ इससे ईर्ष्या या संकोच नहीं कि वह अल्लाह का बंदा हो और न निकटतम फ़रिश्तों को। और जो उसकी बन्दगी (इबादत) से ईर्ष्या या संकोच करे और घमंड करे, तो वह उन सबको अपने पास इकट्ठा करेगा।
अव्यय
لَّن
हरगिज़ नहीं
lan
क्रिया
يَسْتَنكِفَ
आर (संकोच/घृणा) करेगा
yastankifa
संज्ञा
ٱلْمَسِيحُ
मसीह
l-masīḥu
अव्यय
أَن
कि
an
क्रिया
يَكُونَ
वह हो
yakūna
संज्ञा
عَبْدًۭا
बंदा
ʿabdan
अव्यय
لِّلَّهِ
अल्लाह का
lillahi
अव्यय
وَلَا
और न
walā
संज्ञा
ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ
फ़रिश्तों को
l-malāikatu
संज्ञा
ٱلْمُقَرَّبُونَ ۚ
निकटतम (करीबी)
l-muqarabūna
अव्यय
وَمَن
और जो कोई
waman
क्रिया
يَسْتَنكِفْ
आर (संकोच) करे
yastankif
अव्यय
عَنْ
से
ʿan
संज्ञा
عِبَادَتِهِۦ
उसकी इबादत
ʿibādatihi
क्रिया
وَيَسْتَكْبِرْ
और घमंड (तकब्बुर) करे
wayastakbir
क्रिया
فَسَيَحْشُرُهُمْ
तो वह जमा करेगा उन्हें
fasayaḥshuruhum
अव्यय
إِلَيْهِ
अपनी तरफ
ilayhi
संज्ञा
جَمِيعًۭا
सबको
jamīʿan
4:173
فَأَمَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ فَيُوَفِّيهِمْ أُجُورَهُمْ وَيَزِيدُهُم مِّن فَضْلِهِۦ ۖ وَأَمَّا ٱلَّذِينَ ٱسْتَنكَفُوا۟ وَٱسْتَكْبَرُوا۟ فَيُعَذِّبُهُمْ عَذَابًا أَلِيمًۭا وَلَا يَجِدُونَ لَهُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ وَلِيًّۭا وَلَا نَصِيرًۭا
fa-ammā alladhīna āmanū waʿamilū l-ṣāliḥāti fayuwaffīhim ujūrahum wayazīduhum min faḍlihi wa-ammā alladhīna is'tankafū wa-is'takbarū fayuʿadhibuhum ʿadhāban alīman walā yajidūna lahum min dūni l-lahi waliyyan walā naṣīran
फिर जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उन्हें तो वह उनका पूरा-पूरा प्रतिदान (अजर) देगा और अपने उदार अनुग्रह (फज़ल) से उन्हें और ज़्यादा देगा। रहे वे लोग जिन्होंने (बन्दगी से) संकोच और घमंड किया, तो उन्हें वह दुखद अज़ाब देगा। और वे अल्लाह के सिवा न तो अपना कोई मित्र पाएंगे और न सहायक।
अव्यय
فَأَمَّا
तो रहे
fa-ammā
सर्वनाम
ٱلَّذِينَ
वे लोग जो
alladhīna
क्रिया
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
āmanū
क्रिया
وَعَمِلُوا۟
और अमल किए
waʿamilū
संज्ञा
ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ
नेक
l-ṣāliḥāti
क्रिया
فَيُوَفِّيهِمْ
तो वह पूरा देगा उन्हें
fayuwaffīhim
संज्ञा
أُجُورَهُمْ
उनका अजर
ujūrahum
क्रिया
وَيَزِيدُهُم
और वह ज़्यादा देगा उन्हें
wayazīduhum
अव्यय
مِّن
से
min
संज्ञा
فَضْلِهِۦ ۖ
अपने फज़ल
faḍlihi
अव्यय
وَأَمَّا
और रहे
wa-ammā
सर्वनाम
ٱلَّذِينَ
वो जिन्होंने
alladhīna
क्रिया
ٱسْتَنكَفُوا۟
आर (संकोच) किया
is'tankafū
क्रिया
وَٱسْتَكْبَرُوا۟
और घमंड किया
wa-is'takbarū
क्रिया
فَيُعَذِّبُهُمْ
तो वह अज़ाब देगा उन्हें
fayuʿadhibuhum
संज्ञा
عَذَابًا
अज़ाब
ʿadhāban
संज्ञा
أَلِيمًۭا
दर्दनाक
alīman
अव्यय
وَلَا
और न
walā
क्रिया
يَجِدُونَ
वे पाएंगे
yajidūna
अव्यय
لَهُم
अपने लिए
lahum
अव्यय
مِّن
से
min
संज्ञा
دُونِ
सिवाय
dūni
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह के
l-lahi
संज्ञा
وَلِيًّۭا
कोई दोस्त
waliyyan
अव्यय
وَلَا
और न
walā
संज्ञा
نَصِيرًۭا
कोई मददगार
naṣīran
4:174
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ قَدْ جَآءَكُم بُرْهَـٰنٌۭ مِّن رَّبِّكُمْ وَأَنزَلْنَآ إِلَيْكُمْ نُورًۭا مُّبِينًۭا
yāayyuhā l-nāsu qad jāakum bur'hānun min rabbikum wa-anzalnā ilaykum nūran mubīnan
ऐ लोगो! तुम्हारे पास तुम्हारे रब की ओर से एक प्रमाण (दलील) आ चुका है और हमने तुम्हारी ओर एक स्पष्ट प्रकाश (नूर) उतार दिया है।
अव्यय
يَـٰٓأَيُّهَا
ऐ
yāayyuhā
संज्ञा
ٱلنَّاسُ
लोगो
l-nāsu
अव्यय
قَدْ
यकीनन
qad
क्रिया
جَآءَكُم
आ गया तुम्हारे पास
jāakum
संज्ञा
بُرْهَـٰنٌۭ
प्रमाण (दलील)
bur'hānun
अव्यय
مِّن
से
min
संज्ञा
رَّبِّكُمْ
तुम्हारे रब
rabbikum
क्रिया
وَأَنزَلْنَآ
और हमने उतारा
wa-anzalnā
अव्यय
إِلَيْكُمْ
तुम्हारी तरफ
ilaykum
संज्ञा
نُورًۭا
एक नूर (प्रकाश)
nūran
संज्ञा
مُّبِينًۭا
साफ़ (स्पष्ट)
mubīnan
4:175
فَأَمَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ بِٱللَّهِ وَٱعْتَصَمُوا۟ بِهِۦ فَسَيُدْخِلُهُمْ فِى رَحْمَةٍۢ مِّنْهُ وَفَضْلٍۢ وَيَهْدِيهِمْ إِلَيْهِ صِرَٰطًۭا مُّسْتَقِيمًۭا
fa-ammā alladhīna āmanū bil-lahi wa-iʿ'taṣamū bihi fasayud'khiluhum fī raḥmatin min'hu wafaḍlin wayahdīhim ilayhi ṣirāṭan mus'taqīman
अतः जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और उसे मज़बूती से पकड़ लिया, उन्हें वह जल्द ही अपनी दयालुता और उदार अनुग्रह (फज़ल) में दाख़िल करेगा और उन्हें अपनी ओर (पहुँचने का) सीधा मार्ग दिखाएगा।
अव्यय
فَأَمَّا
तो रहे
fa-ammā
सर्वनाम
ٱلَّذِينَ
वो लोग जो
alladhīna
क्रिया
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
āmanū
अव्यय
بِٱللَّهِ
अल्लाह पर
bil-lahi
क्रिया
وَٱعْتَصَمُوا۟
और मज़बूती से पकड़ा
wa-iʿ'taṣamū
अव्यय
بِهِۦ
उसे
bihi
क्रिया
فَسَيُدْخِلُهُمْ
तो वह दाखिल करेगा उन्हें
fasayud'khiluhum
अव्यय
فِى
में
fī
संज्ञा
رَحْمَةٍۢ
रहमत
raḥmatin
अव्यय
مِّنْهُ
अपनी तरफ से
min'hu
संज्ञा
وَفَضْلٍۢ
और फज़ल
wafaḍlin
क्रिया
وَيَهْدِيهِمْ
और राह दिखाएगा उन्हें
wayahdīhim
अव्यय
إِلَيْهِ
अपनी तरफ
ilayhi
संज्ञा
صِرَٰطًۭا
रास्ते की
ṣirāṭan
संज्ञा
مُّسْتَقِيمًۭا
सीधा
mus'taqīman
4:176
يَسْتَفْتُونَكَ قُلِ ٱللَّهُ يُفْتِيكُمْ فِى ٱلْكَلَـٰلَةِ ۚ إِنِ ٱمْرُؤٌا۟ هَلَكَ لَيْسَ لَهُۥ وَلَدٌۭ وَلَهُۥٓ أُخْتٌۭ فَلَهَا نِصْفُ مَا تَرَكَ ۚ وَهُوَ يَرِثُهَآ إِن لَّمْ يَكُن لَّهَا وَلَدٌۭ ۚ فَإِن كَانَتَا ٱثْنَتَيْنِ فَلَهُمَا ٱلثُّلُثَانِ مِمَّا تَرَكَ ۚ وَإِن كَانُوٓا۟ إِخْوَةًۭ رِّجَالًۭا وَنِسَآءًۭ فَلِلذَّكَرِ مِثْلُ حَظِّ ٱلْأُنثَيَيْنِ ۗ يُبَيِّنُ ٱللَّهُ لَكُمْ أَن تَضِلُّوا۟ ۗ وَٱللَّهُ بِكُلِّ شَىْءٍ عَلِيمٌۢ
yastaftūnaka quli l-lahu yuf'tīkum fī l-kalālati ini im'ru-on halaka laysa lahu waladun walahu ukh'tun falahā niṣ'fu mā taraka wahuwa yarithuhā in lam yakun lahā waladun fa-in kānatā ith'natayni falahumā l-thuluthāni mimmā taraka wa-in kānū ikh'watan rijālan wanisāan falildhakari mith'lu ḥaẓẓi l-unthayayni yubayyinu l-lahu lakum an taḍillū wal-lahu bikulli shayin ʿalīmun
वे तुमसे 'कलाला' (जिसके माता-पिता और संतान न हो) के विषय में फ़तवा पूछते है। कहो, "अल्लाह तुम्हें कलाला के विषय में फ़तवा देता है: यदि कोई पुरुष मर जाए और उसकी कोई संतान न हो और उसकी एक बहन हो तो उसके लिए उस (सम्पत्ति) का आधा है जो वह छोड़ मरे। और वह (पुरुष) उस (बहन) का वारिस होगा यदि उसकी (बहन की) कोई संतान न हो। लेकिन यदि दो बहनें हो, तो उनके लिए उस (सम्पत्ति) का दो-तिहाई है जो वह छोड़ मरे। और यदि भाई-बहन, पुरुष और स्त्रियाँ (मिले-जुले) हो तो पुरुष का हिस्सा दो स्त्रियों के हिस्से के बराबर होगा। अल्लाह तुम्हारे लिए (आदेश) स्पष्ट करता है ताकि तुम भटक न जाओ। और अल्लाह हर चीज़ का जाननेवाला है।"
क्रिया
يَسْتَفْتُونَكَ
वे तुमसे फतवा पूछते हैं
yastaftūnaka
क्रिया
قُلِ
कह दो
quli
संज्ञा
ٱللَّهُ
अल्लाह
l-lahu
क्रिया
يُفْتِيكُمْ
फतवा देता है तुम्हें
yuf'tīkum
अव्यय
فِى
बारे में
fī
संज्ञा
ٱلْكَلَـٰلَةِ ۚ
कलाला (लावारिस)
l-kalālati
अव्यय
إِنِ
अगर
ini
संज्ञा
ٱمْرُؤٌا۟
कोई मर्द
im'ru-on
क्रिया
هَلَكَ
मर जाए
halaka
क्रिया
لَيْسَ
नहीं है
laysa
अव्यय
لَهُۥ
उसके लिए
lahu
संज्ञा
وَلَدٌۭ
कोई औलाद
waladun
अव्यय
وَلَهُۥٓ
और उसकी है
walahu
संज्ञा
أُخْتٌۭ
एक बहन
ukh'tun
अव्यय
فَلَهَا
तो उसके लिए है
falahā
संज्ञा
نِصْفُ
आधा
niṣ'fu
सर्वनाम
مَا
उसका जो
mā
क्रिया
تَرَكَ ۚ
उसने छोड़ा
taraka
सर्वनाम
وَهُوَ
और वह
wahuwa
क्रिया
يَرِثُهَآ
वारिस होगा उसका
yarithuhā
अव्यय
إِن
अगर
in
अव्यय
لَّمْ
नहीं
lam
क्रिया
يَكُن
हो
yakun
अव्यय
لَّهَا
उसके लिए
lahā
संज्ञा
وَلَدٌۭ ۚ
कोई औलाद
waladun
अव्यय
فَإِن
फिर अगर
fa-in
क्रिया
كَانَتَا
वे दो हों
kānatā
संज्ञा
ٱثْنَتَيْنِ
दो (बहनें)
ith'natayni
अव्यय
فَلَهُمَا
तो उन दोनों के लिए है
falahumā
संज्ञा
ٱلثُّلُثَانِ
दो तिहाई
l-thuluthāni
अव्यय
مِمَّا
उसका जो
mimmā
क्रिया
تَرَكَ ۚ
उसने छोड़ा
taraka
अव्यय
وَإِن
और अगर
wa-in
क्रिया
كَانُوٓا۟
वे हों
kānū
संज्ञा
إِخْوَةًۭ
भाई बहन
ikh'watan
संज्ञा
رِّجَالًۭا
मर्द
rijālan
संज्ञा
وَنِسَآءًۭ
और औरतें
wanisāan
अव्यय
فَلِلذَّكَرِ
तो मर्द के लिए है
falildhakari
संज्ञा
مِثْلُ
बराबर
mith'lu
संज्ञा
حَظِّ
हिस्से के
ḥaẓẓi
संज्ञा
ٱلْأُنثَيَيْنِ ۗ
दो औरतों के
l-unthayayni
क्रिया
يُبَيِّنُ
साफ़ करता है
yubayyinu
संज्ञा
ٱللَّهُ
अल्लाह
l-lahu
अव्यय
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
lakum
अव्यय
أَن
कि कहीं
an
क्रिया
تَضِلُّوا۟ ۗ
तुम भटक जाओ
taḍillū
संज्ञा
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
अव्यय
بِكُلِّ
हर
bikulli
संज्ञा
شَىْءٍ
चीज़ का
shayin
संज्ञा
عَلِيمٌۢ
जानने वाला है
ʿalīmun
समापन प्रार्थना (दुआ)
या अल्लाह, हम तेरा शुक्र अदा करते हैं कि तूने हमें सूरह अन-निसा शब्द-दर-शब्द का अध्ययन पूरा करने की तौफीक दी। हमें उन लोगों में शामिल कर जो तेरे न्याय के निजाम को समझते हैं और उस पर चलते हैं।
ऐ सबसे बड़े न्यायकारी, हमारे दिलों में अनाथों, महिलाओं और कमज़ोरों के अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता पैदा कर। हमें रिश्तों को जोड़ने वाला बना और समाज में इन्साफ कायम करने की हिम्मत अता कर, जैसा कि इस सूरह में आदेश दिया गया है।
इस शब्द-दर-शब्द ज्ञान को हमारे चरित्र का हिस्सा बना। इसे हमारे लिए दुनिया में हिदायत और आखिरत में मगफिरत का ज़रिया बना। आमीन।

