सूरह अल-जुमुआ शब्द-दर-शब्द हिंदी | रंगकोडित व्याकरण कार्ड, अनुवाद और तजवीद

हिंदी में सूरह अल-जुमुआ (शुक्रवार की मण्डली) का शब्द-दर-शब्द अध्ययन करें। यह अध्याय शुक्रवार (जुमे) की नमाज़ के महत्व पर ज़ोर देता है, जहाँ मुसलमानों को अज़ान सुनते ही अपने सभी सांसारिक व्यापार छोड़कर अल्लाह के ज़िक्र की ओर दौड़ने का आदेश दिया गया है। यह उन लोगों को भी चेतावनी देता है जिन्हें अल्लाह का ज्ञान (तौरेत) दिया गया लेकिन उन्होंने उस पर अमल नहीं किया। यह इंटरैक्टिव अध्ययन गाइड रंग-कोडित व्याकरण कार्ड प्रदान करती है, जिससे पाठकों को संज्ञाओं, क्रियाओं और अव्ययों को स्पष्ट रूप से पहचानने में मदद मिलती है। सटीक तजवीद-अनुकूल लिप्यंतरण के साथ, यह संसाधन सुनिश्चित करता है कि आप ईश्वरीय आदेशों को सही उच्चारण और गहरी समझ के साथ पढ़ सकें।

In the name of God
संज्ञा (Sangya)
क्रिया (Kriya)
अव्यय (Avyay)
يُسَبِّحُ لِلَّهِ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ ٱلْمَلِكِ ٱلْقُدُّوسِ ٱلْعَزِيزِ ٱلْحَكِيمِ
yusabbiḥu lillahi mā fī l-samāwāti wamā fī l-arḍi l-maliki l-qudūsi l-ʿazīzi l-ḥakīmi
जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ पृथ्वी में है, सब अल्लाह की तसबीह (महिमा गान) कर रहे हैं, जो सम्राट है, अत्यंत पावन है, प्रभुत्वशाली और तत्वदर्शी है।
62:1
क्रिया
يُسَبِّحُ
तसबीह करता है
yusabbiḥu
संज्ञा
لِلَّهِ
अल्लाह की
lillahi
सर्वनाम
مَا
जो कुछ
अव्यय
فِى
में (है)
संज्ञा
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आकाशों
l-samāwāti
सर्वनाम
وَمَا
और जो कुछ
wamā
अव्यय
فِى
में (है)
संज्ञा
ٱلْأَرْضِ
पृथ्वी
l-arḍi
संज्ञा
ٱلْمَلِكِ
सम्राट
l-maliki
संज्ञा
ٱلْقُدُّوسِ
अत्यंत पावन
l-qudūsi
संज्ञा
ٱلْعَزِيزِ
प्रभुत्वशाली
l-ʿazīzi
संज्ञा
ٱلْحَكِيمِ
तत्वदर्शी
l-ḥakīmi
هُوَ ٱلَّذِى بَعَثَ فِى ٱلْأُمِّيِّـۧنَ رَسُولًۭا مِّنْهُمْ يَتْلُوا۟ عَلَيْهِمْ ءَايَـٰتِهِۦ وَيُزَكِّيهِمْ وَيُعَلِّمُهُمُ ٱلْكِتَـٰبَ وَٱلْحِكْمَةَ وَإِن كَانُوا۟ مِن قَبْلُ لَفِى ضَلَـٰلٍۢ مُّبِينٍۢ
huwa alladhī baʿatha fī l-umiyīna rasūlan min'hum yatlū ʿalayhim āyātihi wayuzakkīhim wayuʿallimuhumu l-kitāba wal-ḥik'mata wa-in kānū min qablu lafī ḍalālin mubīnin
वही है जिसने अनपढ़ लोगों में उन्हीं में से एक रसूल भेजा, जो उन्हें उसकी आयतें सुनाता है और उन्हें सँवारता है और उन्हें किताब और हिक्मत (बुद्धि) की शिक्षा देता है - यद्यपि वे इससे पहले स्पष्ट रूप से गुमराह थे।
62:2
सर्वनाम
هُوَ
वही
huwa
सर्वनाम
ٱلَّذِى
जिसने
alladhī
क्रिया
بَعَثَ
भेजा
baʿatha
अव्यय
فِى
के बीच
संज्ञा
ٱلْأُمِّيِّـۧنَ
अनपढ़ों
l-umiyīna
संज्ञा
رَسُولًۭا
एक रसूल
rasūlan
अव्यय
مِّنْهُمْ
उन्हीं में से
min'hum
क्रिया
يَتْلُوا۟
वह सुनाता है
yatlū
अव्यय
عَلَيْهِمْ
उन्हें
ʿalayhim
संज्ञा
ءَايَـٰتِهِۦ
उसकी आयतें
āyātihi
क्रिया
وَيُزَكِّيهِمْ
और उन्हें शुद्ध करता है
wayuzakkīhim
क्रिया
وَيُعَلِّمُهُمُ
और उन्हें सिखाता है
wayuʿallimuhumu
संज्ञा
ٱلْكِتَـٰبَ
किताब
l-kitāba
संज्ञा
وَٱلْحِكْمَةَ
और हिक्मत
wal-ḥik'mata
अव्यय
وَإِن
यद्यपि
wa-in
क्रिया
كَانُوا۟
वे थे
kānū
अव्यय
مِن
से
min
संज्ञा
قَبْلُ
पहले
qablu
अव्यय
لَفِى
निश्चित रूप से में
lafī
संज्ञा
ضَلَـٰلٍۢ
गुमराही
ḍalālin
संज्ञा
مُّبِينٍۢ
स्पष्ट
mubīnin
وَءَاخَرِينَ مِنْهُمْ لَمَّا يَلْحَقُوا۟ بِهِمْ ۚ وَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ
waākharīna min'hum lammā yalḥaqū bihim wahuwa l-ʿazīzu l-ḥakīmu
और उन्हीं में से उन दूसरे लोगों के लिए भी जो अभी उनसे नहीं मिले हैं। और वह प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है।
62:3
संज्ञा
وَءَاخَرِينَ
और दूसरों (के लिए)
waākharīna
अव्यय
مِنْهُمْ
उनमें से
min'hum
अव्यय
لَمَّا
जो अभी नहीं
lammā
क्रिया
يَلْحَقُوا۟
मिले हैं
yalḥaqū
अव्यय
بِهِمْ ۚ
उनसे
bihim
सर्वनाम
وَهُوَ
और वह
wahuwa
संज्ञा
ٱلْعَزِيزُ
प्रभुत्वशाली है
l-ʿazīzu
संज्ञा
ٱلْحَكِيمُ
तत्वदर्शी है
l-ḥakīmu
ذَٰلِكَ فَضْلُ ٱللَّهِ يُؤْتِيهِ مَن يَشَآءُ ۚ وَٱللَّهُ ذُو ٱلْفَضْلِ ٱلْعَظِيمِ
dhālika faḍlu l-lahi yu'tīhi man yashāu wal-lahu dhū l-faḍli l-ʿaẓīmi
यह अल्लाह का अनुग्रह (फ़ज़्ल) है, वह जिसे चाहता है उसे प्रदान करता है। और अल्लाह बड़े अनुग्रह वाला है।
62:4
सर्वनाम
ذَٰلِكَ
यह
dhālika
संज्ञा
فَضْلُ
अनुग्रह है
faḍlu
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह का
l-lahi
क्रिया
يُؤْتِيهِ
वह देता है उसे
yu'tīhi
सर्वनाम
مَن
जिसे
man
क्रिया
يَشَآءُ ۚ
वह चाहता है
yashāu
संज्ञा
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
संज्ञा
ذُو
वाला है
dhū
संज्ञा
ٱلْفَضْلِ
अनुग्रह
l-faḍli
संज्ञा
ٱلْعَظِيمِ
बहुत बड़े
l-ʿaẓīmi
مَثَلُ ٱلَّذِينَ حُمِّلُوا۟ ٱلتَّوْرَىٰةَ ثُمَّ لَمْ يَحْمِلُوهَا كَمَثَلِ ٱلْحِمَارِ يَحْمِلُ أَسْفَارًۢا ۚ بِئْسَ مَثَلُ ٱلْقَوْمِ ٱلَّذِينَ كَذَّبُوا۟ بِـَٔايَـٰتِ ٱللَّهِ ۚ وَٱللَّهُ لَا يَهْدِى ٱلْقَوْمَ ٱلظَّـٰلِمِينَ
mathalu alladhīna ḥummilū l-tawrāta thumma lam yaḥmilūhā kamathali l-ḥimāri yaḥmilu asfāran bi'sa mathalu l-qawmi alladhīna kadhabū biāyāti l-lahi wal-lahu lā yahdī l-qawma l-ẓālimīna
उन लोगों की मिसाल जिन्हें तौरात का भार सौंपा गया था, फिर उन्होंने उसे नहीं उठाया, उस गधे जैसी है जो बहुत सी किताबें लादे हुए हो। कितनी बुरी मिसाल है उन लोगों की जिन्होंने अल्लाह की आयतों को झुठलाया। और अल्लाह अत्याचारी लोगों को मार्ग नहीं दिखाता।
62:5
संज्ञा
مَثَلُ
मिसाल
mathalu
सर्वनाम
ٱلَّذِينَ
उन लोगों की जिन्हें
alladhīna
क्रिया
حُمِّلُوا۟
भार सौंपा गया
ḥummilū
संज्ञा
ٱلتَّوْرَىٰةَ
तौरात का
l-tawrāta
अव्यय
ثُمَّ
फिर
thumma
अव्यय
لَمْ
नहीं
lam
क्रिया
يَحْمِلُوهَا
उन्होंने उसे उठाया
yaḥmilūhā
संज्ञा
كَمَثَلِ
उसकी मिसाल जैसी है
kamathali
संज्ञा
ٱلْحِمَارِ
गधे
l-ḥimāri
क्रिया
يَحْمِلُ
जो लादे हुए है
yaḥmilu
संज्ञा
أَسْفَارًۢا ۚ
किताबें
asfāran
क्रिया
بِئْسَ
कितनी बुरी है
bi'sa
संज्ञा
مَثَلُ
मिसाल
mathalu
संज्ञा
ٱلْقَوْمِ
लोगों की
l-qawmi
सर्वनाम
ٱلَّذِينَ
जिन्होंने
alladhīna
क्रिया
كَذَّبُوا۟
झुठलाया
kadhabū
संज्ञा
بِـَٔايَـٰتِ
आयतों को
biāyāti
संज्ञा
ٱللَّهِ ۚ
अल्लाह की
l-lahi
संज्ञा
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
अव्यय
لَا
नहीं
क्रिया
يَهْدِى
मार्ग दिखाता
yahdī
संज्ञा
ٱلْقَوْمَ
लोगों को
l-qawma
संज्ञा
ٱلظَّـٰلِمِينَ
अत्याचारियों
l-ẓālimīna
قُلْ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ هَادُوٓا۟ إِن زَعَمْتُمْ أَنَّكُمْ أَوْلِيَآءُ لِلَّهِ مِن دُونِ ٱلنَّاسِ فَتَمَنَّوُا۟ ٱلْمَوْتَ إِن كُنتُمْ صَـٰدِقِينَ
qul yāayyuhā alladhīna hādū in zaʿamtum annakum awliyāu lillahi min dūni l-nāsi fatamannawū l-mawta in kuntum ṣādiqīna
कह दीजिए, "ऐ यहूदियों! यदि तुम यह समझते हो कि तुम ही अल्लाह के मित्र (अौलिया) हो दूसरे लोगों को छोड़कर, तो तुम मृत्यु की कामना करो यदि तुम सच्चे हो।"
62:6
क्रिया
قُلْ
कह दीजिए
qul
अव्यय
يَـٰٓأَيُّهَا
yāayyuhā
सर्वनाम
ٱلَّذِينَ
जो
alladhīna
क्रिया
هَادُوٓا۟
यहूदी बने
hādū
अव्यय
إِن
यदि
in
क्रिया
زَعَمْتُمْ
तुम समझते हो
zaʿamtum
अव्यय
أَنَّكُمْ
कि तुम
annakum
संज्ञा
أَوْلِيَآءُ
मित्र (अौलिया) हो
awliyāu
संज्ञा
لِلَّهِ
अल्लाह के
lillahi
अव्यय
مِن
छोड़कर
min
संज्ञा
دُونِ
सिवाए
dūni
संज्ञा
ٱلنَّاسِ
लोगों के
l-nāsi
क्रिया
فَتَمَنَّوُا۟
तो कामना करो
fatamannawū
संज्ञा
ٱلْمَوْتَ
मृत्यु की
l-mawta
अव्यय
إِن
यदि
in
क्रिया
كُنتُمْ
तुम हो
kuntum
संज्ञा
صَـٰدِقِينَ
सच्चे
ṣādiqīna
وَلَا يَتَمَنَّوْنَهُۥٓ أَبَدًۢا بِمَا قَدَّمَتْ أَيْدِيهِمْ ۚ وَٱللَّهُ عَلِيمٌۢ بِٱلظَّـٰلِمِينَ
walā yatamannawnahu abadan bimā qaddamat aydīhim wal-lahu ʿalīmun bil-ẓālimīna
परंतु वे अपने उन कर्मों के कारण जो उनके हाथ आगे भेज चुके हैं, कभी भी उसकी कामना नहीं करेंगे। और अल्लाह अत्याचारियों को अच्छी तरह जानता है।
62:7
अव्यय
وَلَا
और नहीं
walā
क्रिया
يَتَمَنَّوْنَهُۥٓ
वे कामना करेंगे उसकी
yatamannawnahu
संज्ञा
أَبَدًۢا
कभी भी
abadan
अव्यय
بِمَا
उसके कारण जो
bimā
क्रिया
قَدَّمَتْ
आगे भेजा है
qaddamat
संज्ञा
أَيْدِيهِمْ ۚ
उनके हाथों ने
aydīhim
संज्ञा
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
संज्ञा
عَلِيمٌۢ
सब जानने वाला है
ʿalīmun
संज्ञा
بِٱلظَّـٰلِمِينَ
अत्याचारियों को
bil-ẓālimīna
قُلْ إِنَّ ٱلْمَوْتَ ٱلَّذِى تَفِرُّونَ مِنْهُ فَإِنَّهُۥ مُلَـٰقِيكُمْ ۖ ثُمَّ تُرَدُّونَ إِلَىٰ عَـٰلِمِ ٱلْغَيْبِ وَٱلشَّهَـٰدَةِ فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
qul inna l-mawta alladhī tafirrūna min'hu fa-innahu mulāqīkum thumma turaddūna ilā ʿālimi l-ghaybi wal-shahādati fayunabbi-ukum bimā kuntum taʿmalūna
कह दीजिए, "निश्चित रूप से वह मृत्यु जिससे तुम भागते हो, वह तुम्हें मिल कर रहेगी। फिर तुम उसके पास वापस भेजे जाओगे जो छिपे और प्रत्यक्ष का जानने वाला है, फिर वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों से अवगत करा देगा जो तुम करते थे।"
62:8
क्रिया
قُلْ
कह दीजिए
qul
अव्यय
إِنَّ
निश्चित रूप से
inna
संज्ञा
ٱلْمَوْتَ
मृत्यु
l-mawta
सर्वनाम
ٱلَّذِى
जिससे
alladhī
क्रिया
تَفِرُّونَ
तुम भागते हो
tafirrūna
अव्यय
مِنْهُ
उससे
min'hu
अव्यय
فَإِنَّهُۥ
तो निश्चित रूप से वह
fa-innahu
संज्ञा
مُلَـٰقِيكُمْ ۖ
तुमसे मिलने वाली है
mulāqīkum
अव्यय
ثُمَّ
फिर
thumma
क्रिया
تُرَدُّونَ
तुम लौटाए जाओगे
turaddūna
अव्यय
إِلَىٰ
की ओर
ilā
संज्ञा
عَـٰلِمِ
जानने वाले
ʿālimi
संज्ञा
ٱلْغَيْبِ
परोक्ष (अनदेखे)
l-ghaybi
संज्ञा
وَٱلشَّهَـٰدَةِ
और प्रत्यक्ष के
wal-shahādati
क्रिया
فَيُنَبِّئُكُم
फिर वह तुम्हें बताएगा
fayunabbi-ukum
अव्यय
بِمَا
उससे जो
bimā
क्रिया
كُنتُمْ
तुम थे
kuntum
क्रिया
تَعْمَلُونَ
करते
taʿmalūna
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ إِذَا نُودِىَ لِلصَّلَوٰةِ مِن يَوْمِ ٱلْجُمُعَةِ فَٱسْعَوْا۟ إِلَىٰ ذِكْرِ ٱللَّهِ وَذَرُوا۟ ٱلْبَيْعَ ۚ ذَٰلِكُمْ خَيْرٌۭ لَّكُمْ إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
yāayyuhā alladhīna āmanū idhā nūdiya lilṣṣalati min yawmi l-jumuʿati fa-is'ʿaw ilā dhik'ri l-lahi wadharū l-bayʿa dhālikum khayrun lakum in kuntum taʿlamūna
ऐ ईमान लाने वालो! जब जुमा के दिन नमाज़ के लिए अज़ान दी जाए, तो अल्लाह के ज़िक्र (नमाज़) की ओर दौड़ पड़ो और व्यापार छोड़ दो। यह तुम्हारे लिए उत्तम है यदि तुम जानो।
62:9
अव्यय
يَـٰٓأَيُّهَا
yāayyuhā
सर्वनाम
ٱلَّذِينَ
जो
alladhīna
क्रिया
ءَامَنُوٓا۟
ईमान लाए
āmanū
अव्यय
إِذَا
जब
idhā
क्रिया
نُودِىَ
पुकारा जाए
nūdiya
संज्ञा
لِلصَّلَوٰةِ
नमाज़ के लिए
lilṣṣalati
अव्यय
مِن
में
min
संज्ञा
يَوْمِ
दिन
yawmi
संज्ञा
ٱلْجُمُعَةِ
जुमा के
l-jumuʿati
क्रिया
فَٱسْعَوْا۟
तो दौड़ पड़ो
fa-is'ʿaw
अव्यय
إِلَىٰ
की ओर
ilā
संज्ञा
ذِكْرِ
ज़िक्र (स्मरण)
dhik'ri
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह के
l-lahi
क्रिया
وَذَرُوا۟
और छोड़ दो
wadharū
संज्ञा
ٱلْبَيْعَ ۚ
खरीद-फरोख्त
l-bayʿa
सर्वनाम
ذَٰلِكُمْ
यह
dhālikum
संज्ञा
خَيْرٌۭ
बेहतर है
khayrun
अव्यय
لَّكُمْ
तुम्हारे लिए
lakum
अव्यय
إِن
यदि
in
क्रिया
كُنتُمْ
तुम
kuntum
क्रिया
تَعْلَمُونَ
जानते हो
taʿlamūna
فَإِذَا قُضِيَتِ ٱلصَّلَوٰةُ فَٱنتَشِرُوا۟ فِى ٱلْأَرْضِ وَٱبْتَغُوا۟ مِن فَضْلِ ٱللَّهِ وَٱذْكُرُوا۟ ٱللَّهَ كَثِيرًۭا لَّعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ
fa-idhā quḍiyati l-ṣalatu fa-intashirū fī l-arḍi wa-ib'taghū min faḍli l-lahi wa-udh'kurū l-laha kathīran laʿallakum tuf'liḥūna
फिर जब नमाज़ पूरी हो जाए तो ज़मीन में फैल जाओ और अल्लाह का फ़ज़्ल (रोजी) तलाश करो और अल्लाह को कसरत से याद करो ताकि तुम सफल हो सको।
62:10
अव्यय
فَإِذَا
फिर जब
fa-idhā
क्रिया
قُضِيَتِ
पूरी हो जाए
quḍiyati
संज्ञा
ٱلصَّلَوٰةُ
नमाज़
l-ṣalatu
क्रिया
فَٱنتَشِرُوا۟
तो फैल जाओ
fa-intashirū
अव्यय
فِى
में
संज्ञा
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन
l-arḍi
क्रिया
وَٱبْتَغُوا۟
और तलाश करो
wa-ib'taghū
अव्यय
مِن
से
min
संज्ञा
فَضْلِ
अनुग्रह (फ़ज़्ल)
faḍli
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह के
l-lahi
क्रिया
وَٱذْكُرُوا۟
और याद करो
wa-udh'kurū
संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह को
l-laha
संज्ञा
كَثِيرًۭا
बहुत ज़्यादा
kathīran
अव्यय
لَّعَلَّكُمْ
ताकि तुम
laʿallakum
क्रिया
تُفْلِحُونَ
सफल हो जाओ
tuf'liḥūna
وَإِذَا رَأَوْا۟ تِجَـٰرَةً أَوْ لَهْوًا ٱنفَضُّوٓا۟ إِلَيْهَا وَتَرَكُوكَ قَآئِمًۭا ۚ قُلْ مَا عِندَ ٱللَّهِ خَيْرٌۭ مِّنَ ٱللَّهْوِ وَمِنَ ٱلتِّجَـٰرَةِ ۚ وَٱللَّهُ خَيْرُ ٱلرَّٰزِقِينَ
wa-idhā ra-aw tijāratan aw lahwan infaḍḍū ilayhā watarakūka qāiman qul mā ʿinda l-lahi khayrun mina l-lahwi wamina l-tijārati wal-lahu khayru l-rāziqīna
और जब उन्होंने कोई व्यापार या तमाशा देखा तो वे उसकी ओर दौड़ पड़े और आपको खड़ा ही छोड़ दिया। कह दीजिए, "जो कुछ अल्लाह के पास है वह तमाशे और व्यापार से कहीं उत्तम है, और अल्लाह सबसे अच्छा रोज़ी देने वाला है।"
62:11
अव्यय
وَإِذَا
और जब
wa-idhā
क्रिया
رَأَوْا۟
उन्होंने देखा
ra-aw
संज्ञा
تِجَـٰرَةً
कोई व्यापार
tijāratan
अव्यय
أَوْ
या
aw
संज्ञा
لَهْوًا
खेल-तमाशा
lahwan
क्रिया
ٱنفَضُّوٓا۟
वे दौड़ पड़े
infaḍḍū
अव्यय
إِلَيْهَا
उसकी ओर
ilayhā
क्रिया
وَتَرَكُوكَ
और आपको छोड़ दिया
watarakūka
संज्ञा
قَآئِمًۭا ۚ
खड़ा हुआ
qāiman
क्रिया
قُلْ
कह दीजिए
qul
सर्वनाम
مَا
जो कुछ
संज्ञा
عِندَ
पास है
ʿinda
संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह के
l-lahi
संज्ञा
خَيْرٌۭ
ज़्यादा बेहतर है
khayrun
अव्यय
مِّنَ
से
mina
संज्ञा
ٱللَّهْوِ
तमाशे
l-lahwi
अव्यय
وَمِنَ
और
wamina
संज्ञा
ٱلتِّجَـٰرَةِ ۚ
व्यापार से
l-tijārati
संज्ञा
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
संज्ञा
خَيْرُ
सबसे अच्छा
khayru
संज्ञा
ٱلرَّٰزِقِينَ
रोज़ी देने वाला है
l-rāziqīna

समापन प्रार्थना (दुआ)

या अल्लाह, हम तेरा गहरा आभार व्यक्त करते हैं कि तूने हमें सूरह अल-जुमुआ शब्द-दर-शब्द का अध्ययन पूरा करने की तौफीक अता की। आसमानों और ज़मीन की हर चीज़ तेरी तस्बीह बयान करती है, जो बादशाह, अति-पवित्र, और हिकमत वाला है।

ऐ हमारे रब, हमें जुमे की नमाज़ की पाबंदी करने वालों में शामिल कर। जब भी तेरी इबादत के लिए पुकारा जाए, हमें दुनिया के व्यापार और खेल-तमाशे छोड़कर तेरी तरफ दौड़ने की तौफीक दे। हमें तेरे उस बेहतरीन रिज़्क का हक़दार बना जिसका तूने वादा किया है। हमें उन लोगों जैसा न बना जिन्होंने ज्ञान तो पाया लेकिन उस पर अमल नहीं किया।

इस शब्द-दर-शब्द अध्ययन को हमारे दिलों के लिए शिफा (उपचार) बना और इसे हमारे लिए एक ऐसा प्रकाश बना जो हमारे जीवन के हर कदम का मार्गदर्शन करे। आमीन।

सूरह अल-जुमुआ का शब्द-दर-शब्द विश्लेषण कैसे काम करता है

मानक अनुवादों के विपरीत जो आपको एक वाक्य का सामान्य अर्थ देते हैं, यह पृष्ठ एक अद्वितीय “पूर्ण संदर्भ” विधि का उपयोग करता है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए डेटा को दो अलग-अलग परतों में प्रदर्शित करते हैं ताकि आप सूरह अल-जुमुआ के प्रवाह को कभी न खोएं:

  • शीर्ष पंक्ति (संदर्भ): सूरह के समग्र संदेश और कथा को समझने के लिए पूर्ण अरबी आयत के साथ पूर्ण हिंदी अनुवाद पढ़ें।
  • निचली पंक्ति (विश्लेषण): अनुक्रम में हर एक शब्द का सटीक अर्थ, वर्तनी और मूल प्रकार देखने के लिए शब्द-दर-शब्द विवरण में उतरें।

सूरह अल-जुमुआ के लिए रंगकोडित व्याकरण गाइड को समझना

पढ़ते समय सहज रूप से कुरान की अरबी व्याकरण (नह्व और सर्फ) सीखें। यह संसाधन जटिल पाठ्यपुस्तक नियमों को तत्काल दृश्य संकेतों से बदल देता है। सूरह अल-जुमुआ का प्रत्येक शब्द एक इंटरैक्टिव “व्याकरण कार्ड” के रूप में प्रस्तुत किया गया है जिसमें तत्काल रंग-कोडिंग की सुविधा है:

  • संज्ञा (इस्म): नीले रंग में चिह्नित (नाम, स्थान, वस्तुएं)।
  • क्रिया (फेल): लाल रंग में चिह्नित (कार्य, काल)।
  • अव्यय/कण (हर्फ): हरे रंग में चिह्नित (पूर्वसर्ग, जोड़ने वाले शब्द)।

यह दृश्य सहायता आपको आयतों के भीतर वाक्य संरचनाओं और शब्दों के भेदों को तुरंत पहचानने में मदद करती है, जिससे तेजी से याद रखने और समझने में सहायता मिलती है।

सूरह अल-जुमुआ का लिप्यंतरण और उच्चारण

पढ़ना शुरू करने के लिए आपको अरबी लिपि पढ़ने में धाराप्रवाह होने की आवश्यकता नहीं है। हर शब्द कार्ड पर शामिल तजवीद-अनुकूल लिप्यंतरण के साथ अपने उच्चारण को सही करें। यह ध्वन्यात्मक गाइड आपको सूरह अल-जुमुआ में चुनौतीपूर्ण शब्दों का सही उच्चारण करने में मदद करती है, ध्वनि को सीधे अर्थ से जोड़ती है।

कुरान के आँकड़े: सूरह अल-जुमुआ के माध्यम से शब्दावली बनाना

कई छात्र कुरान की विशालता से अभिभूत महसूस करते हैं, लेकिन संख्याएं साबित करती हैं कि यह प्राप्त करने योग्य है। कुरान लगभग 77,797 कुल शब्दों से बना है, फिर भी शब्दावली अत्यधिक दोहराव वाली है।

  • कुल अद्वितीय शब्द: लगभग 14,870।
  • वास्तविक शब्द आधार: केवल ~2,000 शब्द।

सूरह अल-जुमुआ को शब्द-दर-शब्द पढ़कर, आप इस अध्याय में पाए जाने वाले आवश्यक शब्दों को सीख रहे हैं। चूंकि ये शब्द पूरे कुरान में बार-बार दोहराए जाते हैं, इसलिए इन आयतों में शब्दावली में महारत हासिल करना सीधे पूरी पवित्र पुस्तक को समझने में योगदान देता है।

सूरह अल-जुमुआ के साथ अपनी सलाह (नमाज़) को बढ़ाएं

पांच दैनिक नमाज़ों के दौरान, एक मुस्लिम औसतन 200-250 अरबी शब्दों का पाठ करता है और दोहराता है। यदि इन शब्दों को समझा नहीं जाता है, तो मन अक्सर भटक जाता है। सूरह अल-जुमुआ को शब्द-दर-शब्द पढ़ना आपको वास्तविक समय में इस शब्दावली को पहचानने में मदद करता है। जब आप प्रार्थना के लिए खड़े होते हैं और इस सूरह की आयतों का पाठ करते हैं, तो आप आखिरकार समझ पाएंगे कि आप अपने निर्माता से क्या कह रहे हैं, जिससे यह प्राप्त होगा:

  1. खुशू (एकाग्रता): सलाह के दौरान एक केंद्रित मन।
  2. गुणवत्ता: इबादत की उच्च आध्यात्मिक गुणवत्ता।
  3. जुड़ाव: पाठ (तिलावत) ۔
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