सूरह अल-हाक्का शब्द-दर-शब्द हिंदी | रंगकोडित व्याकरण कार्ड, अनुवाद और तजवीद

हिंदी में सूरह अल-हाक्का (सुनिश्चित सत्य / कयामत) का शब्द-दर-शब्द अध्ययन करें। यह सूरह कयामत के दिन की वास्तविकता और उसके अनिवार्य रूप से आने का वर्णन करती है। यह पिछली कौमों (जैसे आद, समूद और फिरौन) के विनाश की याद दिलाती है जिन्होंने इस दिन को झुठलाया था। सूरह उस दृश्य का सजीव चित्रण करती है जब लोगों को उनके कर्मों की किताब दी जाएगी—कुछ को उनके दाएं हाथ में (सफलता और खुशी) और कुछ को बाएं हाथ में (विनाश और पछतावा)। यह कुरान की सच्चाई और पैगंबर (स.अ.व) की सत्यता की भी दृढ़ता से पुष्टि करती है। यह इंटरैक्टिव अध्ययन गाइड रंग-कोडित व्याकरण कार्ड प्रदान करती है।

In the name of God
संज्ञा (Sangya)
क्रिया (Kriya)
अव्यय (Avyay)
ٱلْحَآقَّةُ
al-ḥāqqatu
वह होने वाली (महाप्रलय)!
69:1
संज्ञा
ٱلْحَآقَّةُ
निश्चित होने वाली
al-ḥāqatu
مَا ٱلْحَآقَّةُ
ma l-ḥāqqatu
क्या है वह होने वाली?
69:2
अव्यय
مَا
क्या (है)
संज्ञा
ٱلْحَآقَّةُ
वह होने वाली
l-ḥāqatu
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا ٱلْحَآقَّةُ
wamā adrāka ma l-ḥāqqatu
और तुम्हें क्या मालूम कि वह होने वाली क्या है?
69:3
अव्यय
وَمَآ
और क्या
wamā
क्रिया
أَدْرَىٰكَ
तुम्हें पता कराया
adrāka
अव्यय
مَا
कि क्या है
संज्ञा
ٱلْحَآقَّةُ
वह होने वाली
l-ḥāqatu
كَذَّبَتْ ثَمُودُ وَعَادٌۢ بِٱلْقَارِعَةِ
kadhabat thamūdu waʿādun bil-qāriʿati
समूद और आद ने उस कड़कड़ाने वाली (आफ़त) को झुठलाया।
69:4
क्रिया
كَذَّبَتْ
झुठलाया
kadhabat
विशेष संज्ञा
ثَمُودُ
समूद (ने)
thamūdu
विशेष संज्ञा
وَعَادٌۢ
और आद (ने)
waʿādun
संज्ञा
بِٱلْقَارِعَةِ
कड़कड़ाने वाली को
bil-qāriʿati
فَأَمَّا ثَمُودُ فَأُهْلِكُوا۟ بِٱلطَّاغِيَةِ
fa-ammā thamūdu fa-uh'likū bil-ṭāghiyati
तो रहे समूद, तो वे एक प्रचण्ड विस्फोट से विनष्ट कर दिए गए।
69:5
अव्यय
فَأَمَّا
तो रहा (मामला)
fa-ammā
विशेष संज्ञा
ثَمُودُ
समूद का
thamūdu
क्रिया
فَأُهْلِكُوا۟
तो वे हलाक किए गए
fa-uh'likū
संज्ञा
بِٱلطَّاغِيَةِ
बड़ी कड़क से
bil-ṭāghiyati
وَأَمَّا عَادٌۭ فَأُهْلِكُوا۟ بِرِيحٍۢ صَرْصَرٍ عَاتِيَةٍۢ
wa-ammā ʿādun fa-uh'likū birīḥin ṣarṣarin ʿātiyatin
और रहे आद, तो वे एक अत्यन्त तीव्र गर्जती हुई आँधी से विनष्ट कर दिए गए,
69:6
अव्यय
وَأَمَّا
और रहा (मामला)
wa-ammā
विशेष संज्ञा
عَادٌۭ
आद का
ʿādun
क्रिया
فَأُهْلِكُوا۟
तो वे हलाक किए गए
fa-uh'likū
संज्ञा
بِرِيحٍۢ
एक हवा से
birīḥin
संज्ञा
صَرْصَرٍ
तेज़ आवाज़ वाली
ṣarṣarin
संज्ञा
عَاتِيَةٍۢ
बेकाबू
ʿātiyatin
سَخَّرَهَا عَلَيْهِمْ سَبْعَ لَيَالٍۢ وَثَمَـٰنِيَةَ أَيَّامٍ حُسُومًۭا فَتَرَى ٱلْقَوْمَ فِيهَا صَرْعَىٰ كَأَنَّهُمْ أَعْجَازُ نَخْلٍ خَاوِيَةٍۢ
sakharahā ʿalayhim sabʿa layālin wathamāniyata ayyāmin ḥusūman fatarā l-qawma fīhā ṣarʿā ka-annahum aʿjāzu nakhlin khāwiyatin
जिसे उसने उनपर लगातार सात रात और आठ दिन तक चलाए रखा, तो तुम वहाँ उन लोगों को पछाड़ खाकर गिरे हुए देखते जैसे वे खजूर के खोखले तने हों।
69:7
क्रिया
سَخَّرَهَا
उसने उसे मुसल्लत किया
sakharahā
अव्यय
عَلَيْهِمْ
उन पर
ʿalayhim
संज्ञा
سَبْعَ
सात
sabʿa
संज्ञा
لَيَالٍۢ
रातें
layālin
संज्ञा
وَثَمَـٰنِيَةَ
और आठ
wathamāniyata
संज्ञा
أَيَّامٍ
दिन
ayyāmin
संज्ञा
حُسُومًۭا
लगातार
ḥusūman
क्रिया
فَتَرَى
तो तुम देखते
fatarā
संज्ञा
ٱلْقَوْمَ
लोगों को
l-qawma
अव्यय
فِيهَا
उसमें
fīhā
संज्ञा
صَرْعَىٰ
गिरे पड़े
ṣarʿā
सर्वनाम
كَأَنَّهُمْ
जैसे कि वे
ka-annahum
संज्ञा
أَعْجَازُ
खजूर के तने
aʿjāzu
संज्ञा
نَخْلٍ
खजूर के
nakhlin
संज्ञा
خَاوِيَةٍۢ
खोखले
khāwiyatin
فَهَلْ تَرَىٰ لَهُم مِّنۢ بَاقِيَةٍۢ
fahal tarā lahum min bāqiyatin
तो क्या उनमें से कोई तुम्हें बचा हुआ दिखाई देता है?
69:8
अव्यय
فَهَلْ
तो क्या
fahal
क्रिया
تَرَىٰ
तुम देखते हो
tarā
अव्यय
لَهُم
उनमें से
lahum
अव्यय
مِّنۢ
कोई
min
संज्ञा
بَاقِيَةٍۢ
बचा-खुचा
bāqiyatin
وَجَآءَ فِرْعَوْنُ وَمَن قَبْلَهُۥ وَٱلْمُؤْتَفِكَـٰتُ بِٱلْخَاطِئَةِ
wajāa fir'ʿawnu waman qablahu wal-mu'tafikātu bil-khāṭi-ati
और फ़िरऔन और उससे पहले के लोगों और उलट दी जाने वाली बस्तियों ने बड़ी ख़ता (पाप) की।
69:9
क्रिया
وَجَآءَ
और लाया
wajāa
विशेष संज्ञा
فِرْعَوْنُ
फ़िरऔन
fir'ʿawnu
अव्यय
وَمَن
और जो
waman
संज्ञा
قَبْلَهُۥ
उससे पहले (थे)
qablahu
संज्ञा
وَٱلْمُؤْتَفِكَـٰتُ
और उलट दी गई बस्तियाँ
wal-mu'tafikātu
संज्ञा
بِٱلْخَاطِئَةِ
गुनेहगारी के साथ
bil-khāṭi-ati
فَعَصَوْا۟ رَسُولَ رَبِّهِمْ فَأَخَذَهُمْ أَخْذَةًۭ رَّابِيَةً
faʿaṣaw rasūla rabbihim fa-akhadhahum akhdhatan rābiyatan
उन्होंने अपने रब के रसूल की नाफ़रमानी की, तो उसने उन्हें बड़ी सख़्ती से पकड़ लिया।
69:10
क्रिया
فَعَصَوْا۟
तो उन्होंने नाफ़रमानी की
faʿaṣaw
संज्ञा
رَسُولَ
रसूल की
rasūla
संज्ञा
رَبِّهِمْ
अपने रब के
rabbihim
क्रिया
فَأَخَذَهُمْ
तो उसने उन्हें पकड़ा
fa-akhadhahum
संज्ञा
أَخْذَةًۭ
पकड़ना
akhdhatan
संज्ञा
رَّابِيَةً
बड़ी सख़्त
rābiyatan
إِنَّا لَمَّا طَغَا ٱلْمَآءُ حَمَلْنَـٰكُمْ فِى ٱلْجَارِيَةِ
innā lammā ṭaghā l-māu ḥamalnākum fī l-jāriyati
जब पानी हद से गुज़र गया, तो हमने तुम्हें चलती नौका में सवार किया।
69:11
अव्यय
إِنَّا
बेशक हम
innā
अव्यय
لَمَّا
जब
lammā
क्रिया
طَغَا
उमड़ पड़ा
ṭaghā
संज्ञा
ٱلْمَآءُ
पानी
l-māu
क्रिया
حَمَلْنَـٰكُمْ
हमने तुम्हें सवार किया
ḥamalnākum
अव्यय
فِى
में
संज्ञा
ٱلْجَارِيَةِ
चलती (कश्ती)
l-jāriyati
لِنَجْعَلَهَا لَكُمْ تَذْكِرَةًۭ وَتَعِيَهَآ أُذُنٌۭ وَٰعِيَةٌۭ
linajʿalahā lakum tadhkiratan wataʿiyahā udhunun wāʿiyatun
ताकि हम उसे तुम्हारे लिए एक याद दिलाना बनाएँ और याद रखने वाला कान उसे सुरक्षित रखे।
69:12
क्रिया
لِنَجْعَلَهَا
ताकि हम उसे बनाएँ
linajʿalahā
अव्यय
لَكُمْ
तुम्हारे लिए
lakum
संज्ञा
تَذْكِرَةًۭ
नसीहत
tadhkiratan
क्रिया
وَتَعِيَهَآ
और उसे याद रखे
wataʿiyahā
संज्ञा
أُذُنٌۭ
कान
udhunun
संज्ञा
وَٰعِيَةٌۭ
सुरक्षित रखने वाला
wāʿiyatun
فَإِذَا نُفِخَ فِى ٱلصُّورِ نَفْخَةٌۭ وَٰحِدَةٌۭ
fa-idhā nufikha fī l-ṣūri nafkhatun wāḥidatun
फिर जब सूर (नरसिंघा) में एक बार फूँक मारी जाएगी,
69:13
अव्यय
فَإِذَا
फिर जब
fa-idhā
क्रिया
نُفِخَ
फूँका जाएगा
nufikha
अव्यय
فِى
में
संज्ञा
ٱلصُّورِ
सूर (नरसिंघा)
l-ṣūri
संज्ञा
نَفْخَةٌۭ
एक फूँक
nafkhatun
संज्ञा
وَٰحِدَةٌۭ
सिर्फ एक
wāḥidatun
وَحُمِلَتِ ٱلْأَرْضُ وَٱلْجِبَالُ فَدُكَّتَا دَكَّةًۭ وَٰحِدَةًۭ
waḥumilati l-arḍu wal-jibālu fadukkatā dakkatan wāḥidatan
और ज़मीन और पहाड़ उठा लिए जाएँगे और एक ही चोट में चकनाचूर कर दिए जाएँगे,
69:14
क्रिया
وَحُمِلَتِ
और उठाए जाएँगे
waḥumilati
संज्ञा
ٱلْأَرْضُ
ज़मीन
l-arḍu
संज्ञा
وَٱلْجِبَالُ
और पहाड़
wal-jibālu
क्रिया
فَدُكَّتَا
तो वे कूट दिए जाएँगे
fadukkatā
संज्ञा
دَكَّةًۭ
एक बार कूटने से
dakkatan
संज्ञा
وَٰحِدَةًۭ
सिर्फ एक
wāḥidatan
فَيَوْمَئِذٍۢ وَقَعَتِ ٱلْوَاقِعَةُ
fayawma-idhin waqaʿati l-wāqiʿatu
तो उस दिन होने वाली (क़ियामत) हो जाएगी,
69:15
संज्ञा
فَيَوْمَئِذٍۢ
तो उस दिन
fayawma-idhin
क्रिया
وَقَعَتِ
वाक़िअ हो जाएगी
waqaʿati
संज्ञा
ٱلْوَاقِعَةُ
वाक़िआ (क़ियामत)
l-wāqiʿatu
وَٱنشَقَّتِ ٱلسَّمَآءُ فَهِىَ يَوْمَئِذٍۢ وَاهِيَةٌۭ
wa-inshaqqati l-samāu fahiya yawma-idhin wāhiyatun
और आसमान फट जाएगा, तो उस दिन वह कमज़ोर होगा,
69:16
क्रिया
وَٱنشَقَّتِ
और फट जाएगा
wa-inshaqqati
संज्ञा
ٱلسَّمَآءُ
आसमान
l-samāu
सर्वनाम
فَهِىَ
तो वह
fahiya
संज्ञा
يَوْمَئِذٍۢ
उस दिन
yawma-idhin
संज्ञा
وَاهِيَةٌۭ
कमज़ोर/फटा हुआ
wāhiyatun
وَٱلْمَلَكُ عَلَىٰٓ أَرْجَآئِهَا ۚ وَيَحْمِلُ عَرْشَ رَبِّكَ فَوْقَهُمْ يَوْمَئِذٍۢ ثَمَـٰنِيَةٌۭ
wal-malaku ʿalā arjāihā wayaḥmilu ʿarsha rabbika fawqahum yawma-idhin thamāniyatun
और फ़रिश्ते उसके किनारों पर होंगे, और उस दिन तुम्हारे रब के अर्श को आठ (फ़रिश्ते) अपने ऊपर उठाएँगे।
69:17
संज्ञा
وَٱلْمَلَكُ
और फ़रिश्ते
wal-malaku
अव्यय
عَلَىٰٓ
किनारों पर
ʿalā
संज्ञा
أَرْجَآئِهَا ۚ
उसके किनारों पर
arjāihā
क्रिया
وَيَحْمِلُ
और उठाएँगे
wayaḥmilu
संज्ञा
عَرْشَ
अर्श (सिंहासन)
ʿarsha
संज्ञा
رَبِّكَ
तुम्हारे रब का
rabbika
संज्ञा
فَوْقَهُمْ
उनसे ऊपर
fawqahum
संज्ञा
يَوْمَئِذٍۢ
उस दिन
yawma-idhin
संज्ञा
ثَمَـٰنِيَةٌۭ
आठ
thamāniyatun
يَوْمَئِذٍۢ تُعْرَضُونَ لَا تَخْفَىٰ مِنكُمْ خَافِيَةٌۭ
yawma-idhin tuʿ'raḍūna lā takhfā minkum khāfiyatun
उस दिन तुम पेश किए जाओगे; तुम्हारी कोई छिपी बात छिपी न रहेगी।
69:18
संज्ञा
يَوْمَئِذٍۢ
उस दिन
yawma-idhin
क्रिया
تُعْرَضُونَ
तुम पेश किए जाओगे
tuʿ'raḍūna
अव्यय
لَا
नहीं
क्रिया
تَخْفَىٰ
छिपी रहेगी
takhfā
अव्यय
مِنكُمْ
तुम में से
minkum
संज्ञा
خَافِيَةٌۭ
कोई छिपी बात
khāfiyatun
فَأَمَّا مَنْ أُوتِىَ كِتَـٰبَهُۥ بِيَمِينِهِۦ فَيَقُولُ هَآؤُمُ ٱقْرَءُوا۟ كِتَـٰبِيَهْ
fa-ammā man ūtiya kitābahu biyamīnihi fayaqūlu hāumu iq'raū kitābiyah
फिर जिसे उसका आमाल-नामा (कर्म-पुस्तिका) उसके दाहिने हाथ में दिया गया, वह कहेगा, "लो, मेरा आमाल-नामा पढ़ो!
69:19
अव्यय
فَأَمَّا
तो रहा वह
fa-ammā
संज्ञा
مَنْ
जिसे
man
क्रिया
أُوتِىَ
दिया गया
ūtiya
संज्ञा
كِتَـٰبَهُۥ
उसका पत्र
kitābahu
संज्ञा
بِيَمِينِهِۦ
दाहिने हाथ में
biyamīnihi
क्रिया
فَيَقُولُ
तो वह कहेगा
fayaqūlu
संज्ञा
هَآؤُمُ
लो/पकड़ो
hāumu
क्रिया
ٱقْرَءُوا۟
पढ़ो
iq'raū
संज्ञा
كِتَـٰبِيَهْ
मेरा पत्र
kitābiyah
إِنِّى ظَنَنتُ أَنِّى مُلَـٰقٍ حِسَابِيَهْ
innī ẓanantu annī mulāqin ḥisābiyah
मुझे यक़ीन था कि मैं अपना हिसाब पाने वाला हूँ।"
69:20
अव्यय
إِنِّى
बेशक मैं
innī
क्रिया
ظَنَنتُ
यक़ीन रखता था
ẓanantu
अव्यय
أَنِّى
कि मैं
annī
संज्ञा
مُلَـٰقٍ
मिलने वाला हूँ
mulāqin
संज्ञा
حِسَابِيَهْ
अपने हिसाब को
ḥisābiyah
فَهُوَ فِى عِيشَةٍۢ رَّاضِيَةٍۢ
fahuwa fī ʿīshatin rāḍiyatin
तो वह एक पसन्दीदा ऐश (जीवन) में होगा,
69:21
सर्वनाम
فَهُوَ
तो वह
fahuwa
अव्यय
فِى
में
संज्ञा
عِيشَةٍۢ
जीवन
ʿīshatin
संज्ञा
رَّاضِيَةٍۢ
पसन्दीदा
rāḍiyatin
فِى جَنَّةٍ عَالِيَةٍۢ
fī jannatin ʿāliyatin
एक ऊँचे बाग़ में,
69:22
अव्यय
فِى
में
संज्ञा
جَنَّةٍ
जन्नत (बाग़)
jannatin
संज्ञा
عَالِيَةٍۢ
बुलंद
ʿāliyatin
قُطُوفُهَا دَانِيَةٌۭ
quṭūfuhā dāniyatun
जिसके फलों के गुच्छे झुके हुए (नज़दीक) होंगे।
69:23
संज्ञा
قُطُوفُهَا
उसके फल
quṭūfuhā
संज्ञा
دَانِيَةٌۭ
करीब/झुके हुए
dāniyatun
كُلُوا۟ وَٱشْرَبُوا۟ هَنِيٓـًٔۢا بِمَآ أَسْلَفْتُمْ فِى ٱلْأَيَّامِ ٱلْخَالِيَةِ
kulū wa-ish'rabū hanīan bimā aslaftum fī l-ayāmi l-khāliyati
(उनसे कहा जाएगा): "मज़े से खाओ और पियो, उन आमाल के बदले जो तुमने गुज़रे हुए दिनों में आगे भेजे थे।"
69:24
क्रिया
كُلُوا۟
खाओ
kulū
क्रिया
وَٱشْرَبُوا۟
और पियो
wa-ish'rabū
संज्ञा
هَنِيٓـًٔۢا
खुशगवारी से
hanīan
अव्यय
بِمَآ
उसके बदले जो
bimā
क्रिया
أَسْلَفْتُمْ
तुमने पहले किया
aslaftum
अव्यय
فِى
में
संज्ञा
ٱلْأَيَّامِ
दिनों
l-ayāmi
संज्ञा
ٱلْخَالِيَةِ
गुज़रे हुए
l-khāliyati
وَأَمَّا مَنْ أُوتِىَ كِتَـٰبَهُۥ بِشِمَالِهِۦ فَيَقُولُ يَـٰلَيْتَنِى لَمْ أُوتَ كِتَـٰبِيَهْ
wa-ammā man ūtiya kitābahu bishimālihi fayaqūlu yālaytanī lam ūta kitābiyah
परन्तु जिसे उसका आमाल-नामा उसके बाएँ हाथ में दिया गया, वह कहेगा, "काश! मुझे मेरा आमाल-नामा न दिया गया होता,
69:25
अव्यय
وَأَمَّا
रहा वह जो
wa-ammā
संज्ञा
مَنْ
जिसे
man
क्रिया
أُوتِىَ
दिया गया
ūtiya
संज्ञा
كِتَـٰبَهُۥ
उसका पत्र
kitābahu
संज्ञा
بِشِمَالِهِۦ
उसके बाएँ हाथ में
bishimālihi
क्रिया
فَيَقُولُ
तो वह कहेगा
fayaqūlu
अव्यय
يَـٰلَيْتَنِى
हाए काश मैं
yālaytanī
अव्यय
لَمْ
न (होता)
lam
क्रिया
أُوتَ
दिया गया
ūta
संज्ञा
كِتَـٰبِيَهْ
मेरा पत्र
kitābiyah
وَلَمْ أَدْرِ مَا حِسَابِيَهْ
walam adri mā ḥisābiyah
और मैं न जानता कि मेरा हिसाब क्या है।
69:26
अव्यय
وَلَمْ
और नहीं
walam
क्रिया
أَدْرِ
मैंने जाना
adri
अव्यय
مَا
क्या (है)
संज्ञा
حِسَابِيَهْ
मेरा हिसाब
ḥisābiyah
يَـٰلَيْتَهَا كَانَتِ ٱلْقَاضِيَةَ
yālaytahā kānati l-qāḍiyata
काश! वही (मौत) अन्त कर देने वाली होती!
69:27
अव्यय
يَـٰلَيْتَهَا
काश कि वह
yālaytahā
क्रिया
كَانَتِ
होती
kānati
संज्ञा
ٱلْقَاضِيَةَ
खत्म कर देने वाली
l-qāḍiyata
مَآ أَغْنَىٰ عَنِّى مَالِيَهْ ۜ
mā aghnā ʿannī māliyah
मेरा माल मेरे किसी काम न आया।
69:28
अव्यय
مَآ
नहीं
क्रिया
أَغْنَىٰ
काम आया
aghnā
अव्यय
عَنِّى
मेरे
ʿannī
संज्ञा
مَالِيَهْ ۜ
मेरा माल
māliyah
هَلَكَ عَنِّى سُلْطَـٰنِيَهْ
halaka ʿannī sul'ṭāniyah
मेरी सत्ता (अधिकार) मुझसे जाती रही।"
69:29
क्रिया
هَلَكَ
खत्म हो गई
halaka
अव्यय
عَنِّى
मुझसे
ʿannī
संज्ञा
سُلْطَـٰنِيَهْ
मेरी सत्ता
sul'ṭāniyah
خُذُوهُ فَغُلُّوهُ
khudhūhu faghullūhu
(आदेश होगा): "इसे पकड़ो और इसे तौक़ (बेड़ियाँ) पहना दो,
69:30
क्रिया
خُذُوهُ
इसे पकड़ो
khudhūhu
क्रिया
فَغُلُّوهُ
फिर इसे बेड़ियाँ डालो
faghullūhu
ثُمَّ ٱلْجَحِيمَ صَلُّوهُ
thumma l-jaḥīma ṣallūhu
फिर इसे भड़कती हुई आग में झोंक दो।
69:31
अव्यय
ثُمَّ
फिर
thumma
संज्ञा
ٱلْجَحِيمَ
भड़कती आग में
l-jaḥīma
क्रिया
صَلُّوهُ
इसे झोंक दो
ṣallūhu
ثُمَّ فِى سِلْسِلَةٍۢ ذَرْعُهَا سَبْعُونَ ذِرَاعًۭا فَٱسْلُكُوهُ
thumma fī sil'silatin dharʿuhā sabʿūna dhirāʿan fa-us'lukūhu
फिर उसे एक ऐसी जंजीर में जकड़ दो जिसकी लंबाई सत्तर हाथ हो।"
69:32
अव्यय
ثُمَّ
फिर
thumma
अव्यय
فِى
में
संज्ञा
سِلْسِلَةٍۢ
एक जंजीर
sil'silatin
संज्ञा
ذَرْعُهَا
उसकी नाप
dharʿuhā
संज्ञा
سَبْعُونَ
सत्तर
sabʿūna
संज्ञा
ذِرَاعًۭا
हाथ/गज़
dhirāʿan
क्रिया
فَٱسْلُكُوهُ
तो इसे जकड़ दो
fa-us'lukūhu
إِنَّهُۥ كَانَ لَا يُؤْمِنُ بِٱللَّهِ ٱلْعَظِيمِ
innahu kāna lā yu'minu bil-lahi l-ʿaẓīmi
बेशक वह महान अल्लाह पर ईमान नहीं लाता था,
69:33
अव्यय
إِنَّهُۥ
बेशक वह
innahu
क्रिया
كَانَ
था
kāna
अव्यय
لَا
नहीं
क्रिया
يُؤْمِنُ
ईमान लाता
yu'minu
विशेष संज्ञा
بِٱللَّهِ
अल्लाह पर
bil-lahi
संज्ञा
ٱلْعَظِيمِ
जो बड़ा महान है
l-ʿaẓīmi
وَلَا يَحُضُّ عَلَىٰ طَعَامِ ٱلْمِسْكِينِ
walā yaḥuḍḍu ʿalā ṭaʿāmi l-mis'kīni
और न ही मिसकीन (निर्धन) को खाना खिलाने पर उकसाता था।
69:34
अव्यय
وَلَا
और नहीं
walā
क्रिया
يَحُضُّ
प्रेरित करता था
yaḥuḍḍu
अव्यय
عَلَىٰ
पर
ʿalā
संज्ञा
طَعَامِ
खाना खिलाने
ṭaʿāmi
संज्ञा
ٱلْمِسْكِينِ
मिसकीन (निर्धन) के
l-mis'kīni
فَلَيْسَ لَهُ ٱلْيَوْمَ هَـٰهُنَا حَمِيمٌۭ
falaysa lahu l-yawma hāhunā ḥamīmun
अतः आज यहाँ उसका कोई सच्चा मित्र नहीं है,
69:35
क्रिया
فَلَيْسَ
तो नहीं है
falaysa
अव्यय
لَهُ
उसके लिए
lahu
संज्ञा
ٱلْيَوْمَ
आज
l-yawma
संज्ञा
هَـٰهُنَا
यहाँ
hāhunā
संज्ञा
حَمِيمٌۭ
कोई हमदर्द दोस्त
ḥamīmun
وَلَا طَعَامٌ إِلَّا مِنْ غِسْلِينٍۢ
walā ṭaʿāmun illā min ghis'līnin
और न ही ज़ख़्मों के धोवन के सिवा कोई खाना,
69:36
अव्यय
وَلَا
और न
walā
संज्ञा
طَعَامٌ
कोई खाना
ṭaʿāmun
अव्यय
إِلَّا
सिवाय
illā
अव्यय
مِنْ
से
min
संज्ञा
غِسْلِينٍۢ
ज़ख़्मों का धोवन
ghis'līnin
لَّا يَأْكُلُهُۥٓ إِلَّا ٱلْخَـٰطِـُٔونَ
lā yakuluhu illā l-khāṭiūna
जिसे खताकारों (अपराधियों) के सिवा कोई न खाएगा।
69:37
अव्यय
لَّا
नहीं
क्रिया
يَأْكُلُهُۥٓ
इसे खाएंगे
yakuluhu
अव्यय
إِلَّا
सिवाय
illā
संज्ञा
ٱلْخَـٰطِـُٔونَ
खताकारों के
l-khāṭiūna
فَلَآ أُقْسِمُ بِمَا تُبْصِرُونَ
falā uq'simu bimā tub'ṣirūna
तो मैं उन चीज़ों की क़सम खाता हूँ जिन्हें तुम देखते हो,
69:38
अव्यय
فَلَآ
तो नहीं/बल्कि
falā
क्रिया
أُقْسِمُ
मैं क़सम खाता हूँ
uq'simu
अव्यय
بِمَا
उसकी जो
bimā
क्रिया
تُبْصِرُونَ
तुम देखते हो
tub'ṣirūna
وَمَا لَا تُبْصِرُونَ
wamā lā tub'ṣirūna
और उनकी भी जिन्हें तुम नहीं देखते,
69:39
अव्यय
وَمَا
और उसकी जो
wamā
अव्यय
لَا
नहीं
क्रिया
تُبْصِرُونَ
तुम देखते हो
tub'ṣirūna
إِنَّهُۥ لَقَوْلُ رَسُولٍۢ كَرِيمٍۢ
innahu laqawlu rasūlin karīmin
कि बेशक यह (क़ुरआन) एक प्रतिष्ठित रसूल का लाया हुआ कलाम है।
69:40
अव्यय
إِنَّهُۥ
बेशक यह
innahu
संज्ञा
لَقَوْلُ
ज़रूर बात है
laqawlu
संज्ञा
رَسُولٍۢ
एक रसूल की
rasūlin
संज्ञा
كَرِيمٍۢ
प्रतिष्ठित
karīmin
وَمَا هُوَ بِقَوْلِ شَاعِرٍۢ ۚ قَلِيلًۭا مَّا تُؤْمِنُونَ
wamā huwa biqawli shāʿirin qalīlan mā tu'minūna
यह किसी कवि की वाणी नहीं है; तुम बहुत कम ही ईमान लाते हो।
69:41
अव्यय
وَمَا
और नहीं
wamā
सर्वनाम
هُوَ
वह
huwa
संज्ञा
بِقَوْلِ
किसी कवि की बात
biqawli
संज्ञा
شَاعِرٍۢ ۚ
शायर (कवि) की
shāʿirin
संज्ञा
قَلِيلًۭا
बहुत कम
qalīlan
अव्यय
مَّا
जो कि
क्रिया
تُؤْمِنُونَ
तुम ईमान लाते हो
tu'minūna
وَلَا بِقَوْلِ كَاهِنٍۢ ۚ قَلِيلًۭا مَّا تَذَكَّرُونَ
walā biqawli kāhinin qalīlan mā tadhakkarūna
और न यह किसी ज्योतिषी (काहिन) की वाणी है; तुम बहुत कम ही ध्यान देते हो।
69:42
अव्यय
وَلَا
और न
walā
संज्ञा
بِقَوْلِ
किसी ज्योतिषी की बात
biqawli
संज्ञा
كَاهِنٍۢ ۚ
काहिन (ज्योतिषी) की
kāhinin
संज्ञा
قَلِيلًۭा
बहुत कम
qalīlan
अव्यय
مَّا
जो कि
क्रिया
تَذَكَّرُونَ
तुम नसीहत लेते हो
tadhakkarūna
تَنزِيلٌۭ مِّن رَّبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ
tanzīlun min rabbi l-ʿālamīna
यह सारे संसार के रब की ओर से अवतरित है।
69:43
संज्ञा
تَنزِيلٌۭ
उतारा हुआ है
tanzīlun
अव्यय
مِّن
की तरफ से
min
संज्ञा
رَّبِّ
रब
संज्ञा
ٱلْعَـٰلَمِينَ
सारे जहानों के
l-ʿālamīna
وَلَوْ تَقَوَّلَ عَلَيْنَا بَعْضَ ٱلْأَقَاوِيلِ
walaw taqawwala ʿalaynā baʿḍa l-aqāwīli
और यदि इसने (मुहम्मद ने) हमारे नाम पर कोई बात घड़ ली होती,
69:44
अव्यय
وَلَوْ
और अगर
walaw
क्रिया
تَقَوَّلَ
वह घड़ लेता
taqawwala
अव्यय
عَلَيْنَا
हम पर
ʿalaynā
संज्ञा
بَعْضَ
कुछ
baʿḍa
संज्ञा
ٱلْأَقَاوِيلِ
बातें
l-aqāwīli
لَأَخَذْنَا مِنْهُ بِٱلْيَمِينِ
la-akhadhnā min'hu bil-yamīni
तो हम उसका दाहिना हाथ पकड़ लेते,
69:45
क्रिया
لَأَخَذْنَا
तो अलबत्ता हम पकड़ लेते
la-akhadhnā
अव्यय
مِنْهُ
उससे
min'hu
संज्ञा
بِٱلْيَمِينِ
दाहिने हाथ से
bil-yamīni
ثُمَّ لَقَطَعْنَا مِنْهُ ٱلْوَتِينَ
thumma laqaṭaʿnā min'hu l-watīna
फिर हम उसकी गर्दन की नस (शाह-रग) काट देते,
69:46
अव्यय
ثُمَّ
फिर
thumma
क्रिया
لَقَطَعْنَا
अलबत्ता हम काट देते
laqaṭaʿnā
अव्यय
مِنْهُ
उसकी
min'hu
संज्ञा
ٱلْوَتِينَ
शाह-रग (गर्दन की नस)
l-watīna
فَمَا مِنكُم مِّنْ أَحَدٍ عَنْهُ حَـٰجِزِينَ
famā minkum min aḥadin ʿanhu ḥājizīna
और तुममें से कोई भी उसे (सज़ा से) बचाने वाला न होता।
69:47
अव्यय
فَمَا
तो नहीं
famā
अव्यय
مِنكُم
तुममें से
minkum
अव्यय
مِّنْ
कोई
min
संज्ञा
أَحَدٍ
एक भी
aḥadin
अव्यय
عَنْهُ
उसे
ʿanhu
संज्ञा
حَـٰجِزِينَ
रोकने वाला
ḥājizīna
وَإِنَّهُۥ لَتَذْكِرَةٌۭ لِّلْمُتَّقِينَ
wa-innahu latadhkiratun lil'muttaqīna
और बेशक यह (क़ुरआन) डर रखने वालों (मुत्तक़ियों) के लिए एक नसीहत है।
69:48
अव्यय
وَإِنَّهُۥ
और बेशक वह
wa-innahu
संज्ञा
لَتَذْكِرَةٌۭ
अलबत्ता नसीहत है
latadhkiratun
संज्ञा
لِّلْمُتَّقِينَ
डर रखने वालों के लिए
lil'muttaqīna
وَإِنَّا لَنَعْلَمُ أَنَّ مِنكُم مُّكَذِّبِينَ
wa-innā lanaʿlamu anna minkum mukadhibīna
और हम जानते हैं कि तुममें से कुछ इसे झुठलाने वाले हैं।
69:49
अव्यय
وَإِنَّا
और बेशक हम
wa-innā
क्रिया
لَنَعْلَمُ
ज़रूर जानते हैं
lanaʿlamu
अव्यय
أَنَّ
कि
anna
अव्यय
مِنكُم
तुममें से
minkum
संज्ञा
مُّكَذِّبِينَ
झुठलाने वाले
mukadhibīna
وَإِنَّهُۥ لَحَسْرَةٌ عَلَى ٱلْكَـٰفِرِينَ
wa-innahu laḥasratun ʿalā l-kāfirīna
और बेशक यह (क़ुरआन) काफ़िरों (इनकार करने वालों) के लिए पछतावा होगा।
69:50
अव्यय
وَإِنَّهُۥ
और बेशक वह
wa-innahu
संज्ञा
لَحَسْرَةٌ
अलबत्ता पछतावा है
laḥasratun
अव्यय
عَلَى
पर
ʿalā
संज्ञा
ٱلْكَـٰفِرِينَ
इनकार करने वालों
l-kāfirīna
وَإِنَّهُۥ لَحَقُّ ٱلْيَقِينِ
wa-innahu laḥaqqu l-yaqīni
और बेशक यह पूर्ण सत्य (हक़ुल यक़ीन) है।
69:51
अव्यय
وَإِنَّهُۥ
और बेशक वह
wa-innahu
संज्ञा
لَحَقُّ
अलबत्ता हक़ (सत्य)
laḥaqqu
संज्ञा
ٱلْيَقِينِ
पूर्ण यक़ीन का
l-yaqīni
فَسَبِّحْ بِٱسْمِ رَبِّكَ ٱلْعَظِيمِ
fasabbiḥ bi-is'mi rabbika l-ʿaẓīmi
अतः तुम अपने महान रब के नाम की तस्बीह (महिमा गान) करो।
69:52
क्रिया
فَسَبِّحْ
अतः महिमा गान करो
fasabbiḥ
संज्ञा
بِٱسْمِ
नाम के साथ
bi-is'mi
संज्ञा
رَبِّكَ
अपने रब के
rabbika
संज्ञा
ٱلْعَظِيمِ
जो बड़ा महान है
l-ʿaẓīmi

समापन प्रार्थना (दुआ)

या अल्लाह, हम तेरा गहरा आभार व्यक्त करते हैं कि तूने हमें सूरह अल-हाक्का शब्द-दर-शब्द का अध्ययन पूरा करने की तौफीक अता की।

ऐ हमारे रब, हमारे दिलों में कयामत के दिन का पक्का यकीन पैदा कर। हमें उन लोगों में शामिल कर जिन्हें कयामत के दिन उनका कर्म-पत्र (किताब) उनके दाएं हाथ में दिया जाएगा, और हमें उस दिन की रुसवाई और बाएं हाथ वालों के अंजाम से महफूज़ रख। हमें पिछली कौमों की नाफरमानी और उनके विनाश से सबक सीखने की तौफीक अता फरमा। ऐ अल्लाह, कुरान को हमारे दिलों की बहार बना और हमें इसके बताए हुए रास्ते पर चलने की हिदायत दे।

इस शब्द-दर-शब्द अध्ययन को हमारे दिलों के लिए शिफा (उपचार) बना और इसे हमारे लिए एक ऐसा प्रकाश बना जो हमारे जीवन के हर कदम का मार्गदर्शन करे। आमीन।

सूरह अल-हाक्का का शब्द-दर-शब्द विश्लेषण कैसे काम करता है

मानक अनुवादों के विपरीत जो आपको एक वाक्य का सामान्य अर्थ देते हैं, यह पृष्ठ एक अद्वितीय “पूर्ण संदर्भ” विधि का उपयोग करता है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए डेटा को दो अलग-अलग परतों में प्रदर्शित करते हैं ताकि आप सूरह अल-हाक्का के प्रवाह को कभी न खोएं:

  • शीर्ष पंक्ति (संदर्भ): सूरह के समग्र संदेश और कथा को समझने के लिए पूर्ण अरबी आयत के साथ पूर्ण हिंदी अनुवाद पढ़ें।
  • निचली पंक्ति (विश्लेषण): अनुक्रम में हर एक शब्द का सटीक अर्थ, वर्तनी और मूल प्रकार देखने के लिए शब्द-दर-शब्द विवरण में उतरें।

सूरह अल-हाक्का के लिए रंगकोडित व्याकरण गाइड को समझना

पढ़ते समय सहज रूप से कुरान की अरबी व्याकरण (नह्व और सर्फ) सीखें। यह संसाधन जटिल पाठ्यपुस्तक नियमों को तत्काल दृश्य संकेतों से बदल देता है। सूरह अल-हाक्का का प्रत्येक शब्द एक इंटरैक्टिव “व्याकरण कार्ड” के रूप में प्रस्तुत किया गया है जिसमें तत्काल रंग-कोडिंग की सुविधा है:

  • संज्ञा (इस्म): नीले रंग में चिह्नित (नाम, स्थान, वस्तुएं)।
  • क्रिया (फेल): लाल रंग में चिह्नित (कार्य, काल)।
  • अव्यय/कण (हर्फ): हरे रंग में चिह्नित (पूर्वसर्ग, जोड़ने वाले शब्द)।

यह दृश्य सहायता आपको आयतों के भीतर वाक्य संरचनाओं और शब्दों के भेदों को तुरंत पहचानने में मदद करती है, जिससे तेजी से याद रखने और समझने में सहायता मिलती है।

सूरह अल-हाक्का का लिप्यंतरण और उच्चारण

पढ़ना शुरू करने के लिए आपको अरबी लिपि पढ़ने में धाराप्रवाह होने की आवश्यकता नहीं है। हर शब्द कार्ड पर शामिल तजवीद-अनुकूल लिप्यंतरण के साथ अपने उच्चारण को सही करें। यह ध्वन्यात्मक गाइड आपको सूरह अल-हाक्का में चुनौतीपूर्ण शब्दों का सही उच्चारण करने में मदद करती है, ध्वनि को सीधे अर्थ से जोड़ती है।

कुरान के आँकड़े: सूरह अल-हाक्का के माध्यम से शब्दावली बनाना

कई छात्र कुरान की विशालता से अभिभूत महसूस करते हैं, लेकिन संख्याएं साबित करती हैं कि यह प्राप्त करने योग्य है। कुरान लगभग 77,797 कुल शब्दों से बना है, फिर भी शब्दावली अत्यधिक दोहराव वाली है।

  • कुल अद्वितीय शब्द: लगभग 14,870।
  • वास्तविक शब्द आधार: केवल ~2,000 शब्द।

सूरह अल-हाक्का को शब्द-दर-शब्द पढ़कर, आप इस अध्याय में पाए जाने वाले आवश्यक शब्दों को सीख रहे हैं। चूंकि ये शब्द पूरे कुरान में बार-बार दोहराए जाते हैं, इसलिए इन आयतों में शब्दावली में महारत हासिल करना सीधे पूरी पवित्र पुस्तक को समझने में योगदान देता है।

सूरह अल-हाक्का के साथ अपनी सलाह (नमाज़) को बढ़ाएं

पांच दैनिक नमाज़ों के दौरान, एक मुस्लिम औसतन 200-250 अरबी शब्दों का पाठ करता है और दोहराता है। यदि इन शब्दों को समझा नहीं जाता है, तो मन अक्सर भटक जाता है। सूरह अल-हाक्का को शब्द-दर-शब्द पढ़ना आपको वास्तविक समय में इस शब्दावली को पहचानने में मदद करता है। जब आप प्रार्थना के लिए खड़े होते हैं और इस सूरह की आयतों का पाठ करते हैं, तो आप आखिरकार समझ पाएंगे कि आप अपने निर्माता से क्या कह रहे हैं, जिससे यह प्राप्त होगा:

  1. खुशू (एकाग्रता): सलाह ۔
  2. गुणवत्ता: इबादत की उच्च आध्यात्मिक गुणवत्ता।
  3. जुड़ाव: पाठ (तिलावत) ۔
Image showing Quran and Surah Haqqah Written On ItSurah Haqqah Word by Word Urdu | سورۃ الحاقة لفظی ترجمہ اور گرائمر
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