تَنزِيلُ ٱلْكِتَـٰبِ مِنَ ٱللَّهِ ٱلْعَزِيزِ ٱلْحَكِيمِ
Tanzeelul Kitaabi minal laahil 'Azeezil Hakeem
इस किताब का अवतरण अल्लाह की ओर से है, जो प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है।
46:2
संज्ञा
تَنزِيلُ
अवतरण
tanzīlu
संज्ञा
ٱلْكِتَـٰبِ
किताब का
l-kitābi
व्यक्तिवाचक संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह
l-lahi
संज्ञा
ٱلْعَزِيزِ
जो प्रभुत्वशाली
l-ʿazīzi
संज्ञा
ٱلْحَكِيمِ
जो तत्वदर्शी है
l-ḥakīmi
مَا خَلَقْنَا ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَآ إِلَّا بِٱلْحَقِّ وَأَجَلٍۢ مُّسَمًّۭى ۚ وَٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ عَمَّآ أُنذِرُوا۟ مُعْرِضُونَ
Maa khalaqnas samaawaati wal arda wa maa bainahumaaa illaa bilhaqqi wa ajalim musammaa; wallazena kafaroo 'ammaaa unziroo mu'ridoon
हमने आकाशों और धरती को और जो कुछ उनके बीच है सत्य के साथ और एक नियत अवधि ही के लिए पैदा किया है। और जिन लोगों ने इनकार किया है, जिस बात से उन्हें सावधान किया गया है वे उससे मुँह मोड़े हुए हैं।
46:3
क्रिया
خَلَقْنَا
हमने पैदा किया
khalaqnā
संज्ञा
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आकाशों को
l-samāwāti
संज्ञा
وَٱلْأَرْضَ
और धरती को
wal-arḍa
संज्ञा
بَيْنَهُمَآ
उन दोनों के बीच है
baynahumā
अव्यय
بِٱلْحَقِّ
सत्य के साथ
bil-ḥaqi
संज्ञा
وَأَجَلٍۢ
और एक अवधि (के लिए)
wa-ajalin
संज्ञा
مُّسَمًّۭى ۚ
जो नियत है
musamman
संज्ञा
وَٱلَّذِينَ
और जिन लोगों ने
wa-alladhīna
क्रिया
كَفَرُوا۟
इनकार किया
kafarū
क्रिया
أُنذِرُوا۟
उन्हें डराया गया है
undhirū
संज्ञा
مُعْرِضُونَ
मुँह मोड़े हुए हैं
muʿ'riḍūna
قُلْ أَرَءَيْتُم مَّا تَدْعُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ أَرُونِى مَاذَا خَلَقُوا۟ مِنَ ٱلْأَرْضِ أَمْ لَهُمْ شِرْكٌۭ فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ ۖ ٱئْتُونِى بِكِتَـٰبٍۢ مِّن قَبْلِ هَـٰذَآ أَوْ أَثَـٰرَةٍۢ مِّنْ عِلْمٍ إِن كُنتُمْ صَـٰدِقِينَ
Qul ara'aitum maa tad'oona min doonil laahi aroonee maazaa khalaqoo minal ardi am lahum shirkun fis samaawaati ee'toonee bikitaabim min qabli haazaaa aw asaaratim min 'ilmin in kuntum saadiqeen
कहो, "क्या तुमने उन्हें देखा भी है जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पुकारते हो? मुझे दिखाओ, उन्होंने धरती में से क्या पैदा किया है! या आकाशों में उनकी कोई साझीदारी है? इससे पहले की कोई किताब या ज्ञान का कोई अवशिष्ट मेरे पास ले आओ, यदि तुम सच्चे हो।"
46:4
क्रिया
أَرَءَيْتُم
क्या तुमने देखा
ara-aytum
क्रिया
تَدْعُونَ
तुम पुकारते हो
tadʿūna
व्यक्तिवाचक संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह
l-lahi
क्रिया
أَرُونِى
मुझे दिखाओ
arūnī
क्रिया
خَلَقُوا۟
उन्होंने पैदा किया है
khalaqū
संज्ञा
ٱلْأَرْضِ
धरती
l-arḍi
संज्ञा
شِرْكٌۭ
कोई साझीदारी है
shir'kun
संज्ञा
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ ۖ
आकाशों
l-samāwāti
क्रिया
ٱئْتُونِى
ले आओ मेरे पास
i'tūnī
अव्यय
بِكِتَـٰبٍۢ
कोई किताब
bikitābin
संज्ञा
أَثَـٰرَةٍۢ
कोई अवशिष्ट हिस्सा
athāratin
क्रिया
كُنتُمْ
तुम हो
kuntum
संज्ञा
صَـٰدِقِينَ
सच्चे
ṣādiqīna
وَمَنْ أَضَلُّ مِمَّن يَدْعُوا۟ مِن دُونِ ٱللَّهِ مَن لَّا يَسْتَجِيبُ لَهُۥٓ إِلَىٰ يَوْمِ ٱلْقِيَـٰمَةِ وَهُمْ عَن دُعَآئِهِمْ غَـٰفِلُونَ
Wa man adallu mimmany yad'oo min doonil laahi mal laa yastajeebu lahooo ilaa Yawmil Qiyaamati wa hum 'an du'aaa'ihim ghaafiloon
और उससे बढ़कर पथभ्रष्ट कौन है जो अल्लाह को छोड़कर ऐसे को पुकारे जो क़ियामत के दिन तक उसकी बात न सुन सके? और वे उनकी पुकार से भी बेख़बर हैं।
46:5
संज्ञा
أَضَلُّ
अधिक पथभ्रष्ट है
aḍallu
क्रिया
يَدْعُوا۟
पुकारता है
yadʿū
व्यक्तिवाचक संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह
l-lahi
क्रिया
يَسْتَجِيبُ
उत्तर दे सकते
yastajību
संज्ञा
ٱلْقِيَـٰمَةِ
क़ियामत के
l-qiyāmati
संज्ञा
دُعَآئِهِمْ
उनकी पुकार
duʿāihim
संज्ञा
غَـٰفِلُونَ
बेख़बर हैं
ghāfilūna
وَإِذَا حُشِرَ ٱلنَّاسُ كَانُوا۟ لَهُمْ أَعْدَآءًۭ وَكَانُوا۟ بِعِبَادَتِهِمْ كَـٰفِرِينَ
Wa izaa hushiran naasu kaanoo lahum a'daaa'anw wa kaanoo bi'ibaadatihim kaafireen
और जब लोग इकट्ठे किए जाएँगे तो वे उनके शत्रु होंगे और उनकी इबादत का इनकार करेंगे।
46:6
क्रिया
حُشِرَ
इकट्ठे किए जाएँगे
ḥushira
क्रिया
كَانُوا۟
तो वे होंगे
kānū
संज्ञा
أَعْدَآءًۭ
शत्रु
aʿdāan
क्रिया
وَكَانُوا۟
और वे होंगे
wakānū
अव्यय
بِعِبَادَتِهِمْ
उनकी इबादत का
biʿibādatihim
संज्ञा
كَـٰفِرِينَ
इनकार करनेवाले
kāfirīna
وَإِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ ءَايَـٰتُنَا بَيِّنَـٰتٍۢ قَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لِلْحَقِّ لَمَّا جَآءَهُمْ هَـٰذَا سِحْرٌۭ مُّبِينٌ
Wa izaa tutlaa 'alaihim Aayaatunaa baiyinaatin qaalal ladheena kafaroo lilhaqqi lammaa jaaa'ahum haazaa sihrum mubeen
और जब हमारी स्पष्ट आयतें उन्हें सुनाई जाती हैं तो जिन लोगों ने इनकार किया वे सत्य के विषय में, जबकि वह उनके पास आ गया है, कहते हैं कि "यह तो खुला जादू है।"
46:7
क्रिया
تُتْلَىٰ
सुनाई जाती हैं
tut'lā
अव्यय
عَلَيْهِمْ
उन्हें
ʿalayhim
संज्ञा
ءَايَـٰتُنَا
हमारी आयतें
āyātunā
संज्ञा
بَيِّنَـٰتٍۢ
स्पष्ट
bayyinātin
संज्ञा
ٱلَّذِينَ
जिन लोगों ने
alladhīna
क्रिया
كَفَرُوا۟
इनकार किया
kafarū
अव्यय
لِلْحَقِّ
सत्य के विषय में
lil'ḥaqqi
क्रिया
جَآءَهُمْ
वह उनके पास आ गया
jāahum
संज्ञा
سِحْرٌۭ
जादू है
siḥ'run
संज्ञा
مُّبِينٌ
खुला
mubīnun
أَمْ يَقُولُونَ ٱفْتَرَىٰهُ ۖ قُلْ إِنِ ٱفْتَرَيْتُهُۥ فَلَا تَمْلِكُونَ لِى مِنَ ٱللَّهِ شَيْـًٔا ۖ هُوَ أَعْلَمُ بِمَا تُفِيضُونَ فِيهِ ۖ كَفَىٰ بِهِۦ شَهِيدًۢا بَيْنِى وَبَيْنَكُمْ ۖ وَهُوَ ٱلْغَفُورُ ٱلرَّحِيمُ
Am yaqooloonaf taraahu qul inif taraituhoo falaa tamlikoona lee minal laahi shai'an Huwa a'lamu bimaa tufeedoona feehi kafaa bihee shaheedam bainee wa bainakum wa Huwal Ghafoorur Raheem
(क्या ऐसा है) या वे कहते हैं कि "इसने इसे स्वयं घड़ लिया है?" कहो, "यदि मैंने इसे स्वयं घड़ लिया है, तो तुम अल्लाह के मुक़ाबले में मेरे लिए किसी चीज़ का अधिकार नहीं रखते। तुम जो बातें बनाते हो उसे वह भली-भाँति जानता है। मेरे और तुम्हारे बीच वही गवाह के रूप में काफ़ी है। और वह बहुत क्षमा करनेवाला, अत्यन्त दयावान है।"
46:8
क्रिया
يَقُولُونَ
वे कहते हैं
yaqūlūna
क्रिया
ٱفْتَرَىٰهُ ۖ
उसने इसे स्वयं घड़ लिया है
if'tarāhu
क्रिया
ٱفْتَرَيْتُهُۥ
मैंने इसे स्वयं घड़ लिया है
if'taraytuhu
क्रिया
تَمْلِكُونَ
तुम अधिकार रखते हो
tamlikūna
अव्यय
مِنَ
के मुक़ाबले में
mina
व्यक्तिवाचक संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह
l-lahi
संज्ञा
شَيْـًٔا ۖ
किसी चीज़ का
shayan
संज्ञा
أَعْلَمُ
भली-भाँति जानता है
aʿlamu
क्रिया
تُفِيضُونَ
तुम बातें बनाते हो
tufīḍūna
अव्यय
فِيهِ ۖ
उसके विषय में
fīhi
संज्ञा
شَهِيدًۢا
गवाह के रूप में
shahīdan
संज्ञा
بَيْنِى
मेरे बीच
baynī
संज्ञा
وَبَيْنَكُمْ ۖ
और तुम्हारे बीच
wabaynakum
संज्ञा
ٱلْغَفُورُ
क्षमा करनेवाला है
l-ghafūru
संज्ञा
ٱلرَّحِيمُ
अत्यन्त दयावान
l-raḥīmu
قُلْ مَا كُنتُ بِدْعًۭا مِّنَ ٱلرُّسُلِ وَمَآ أَدْرِى مَا يُفْعَلُ بِى وَلَا بِكُمْ ۖ إِنْ أَتَّبِعُ إِلَّا مَا يُوحَىٰٓ إِلَىَّ وَمَآ أَنَا۠ إِلَّا نَذِيرٌۭ مُّبِينٌۭ
Qul maa kuntu bid'am minar Rusuli wa maaa adreee maa yuf'alu
bee wa laa bikum in attabi'u illaa maa yoohaaa ilaiya wa maaa ana illaa nazeerum mubeen
कहो, "मैं कोई नया रसूल तो नहीं हूँ, और न मैं यह जानता हूँ कि मेरे साथ क्या किया जाएगा और न यह (जानता हूँ) कि तुम्हारे साथ क्या (किया जाएगा)। मैं तो बस उसी का अनुसरण करता हूँ जो मेरी ओर प्रकाशना की जाती है; और मैं तो बस एक स्पष्ट सावधान करनेवाला हूँ।"
46:9
संज्ञा
بِدْعًۭا
कोई नया
bid'ʿan
संज्ञा
ٱلرُّسُلِ
रसूलों
l-rusuli
क्रिया
أَدْرِى
मैं जानता हूँ
adrī
क्रिया
يُفْعَلُ
किया जाएगा
yuf'ʿalu
अव्यय
بِكُمْ ۖ
तुम्हारे साथ
bikum
क्रिया
أَتَّبِعُ
मैं अनुसरण करता हूँ
attabiʿu
अव्यय
إِلَّا
सिवाय उसके
illā
क्रिया
يُوحَىٰٓ
प्रकाशना की जाती है
yūḥā
अव्यय
إِلَىَّ
मेरी ओर
ilayya
संज्ञा
نَذِيرٌۭ
एक सावधान करनेवाला
nadhīrun
संज्ञा
مُّبِينٌۭ
स्पष्ट
mubīnun
قُلْ أَرَءَيْتُمْ إِن كَانَ مِنْ عِندِ ٱللَّهِ وَكَفَرْتُم بِهِۦ وَشَهِدَ شَاهِدٌۭ مِّنۢ بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ عَلَىٰ مِثْلِهِۦ فَـَٔامَنَ وَٱسْتَكْبَرْتُمْ ۖ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يَهْدِى ٱلْقَوْمَ ٱلظَّـٰلِمِينَ
Qul ara'aytum in kaana min 'indil laahi wa kafartum bihee wa shahida shaahidum mim Baneee Israaa'eela 'alaa mislihee fa aamana wastakbartum; innal laaha laa yahdil qawmaz zaalimeen
कहो, "भला देखो तो, यदि यह अल्लाह की ओर से हुआ और तुमने इसका इनकार किया, जबकि इसराईल की सन्तान में से एक गवाह ने इसके जैसी एक चीज़ पर गवाही भी दी और ईमान भी ले आया, जबकि तुमने घमंड किया? निश्चय ही अल्लाह ज़ालिम लोगों को मार्ग नहीं दिखाता।"
46:10
क्रिया
أَرَءَيْتُمْ
भला देखो तो
ara-aytum
व्यक्तिवाचक संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह के
l-lahi
क्रिया
وَكَفَرْتُم
और तुमने इनकार किया
wakafartum
क्रिया
وَشَهِدَ
और गवाही दी
washahida
संज्ञा
شَاهِدٌۭ
एक गवाह ने
shāhidun
व्यक्तिवाचक संज्ञा
إِسْرَٰٓءِيلَ
इसराईल की
is'rāīla
संज्ञा
مِثْلِهِۦ
इसके जैसी बात
mith'lihi
क्रिया
فَـَٔامَنَ
फिर वह ईमान लाया
faāmana
क्रिया
وَٱسْتَكْبَرْتُمْ ۖ
जबकि तुमने घमंड किया
wa-is'takbartum
व्यक्तिवाचक संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह
l-laha
क्रिया
يَهْدِى
मार्ग दिखाता
yahdī
संज्ञा
ٱلْقَوْمَ
लोगों को
l-qawma
संज्ञा
ٱلظَّـٰلِمِينَ
ज़ालिम
l-ẓālimīna
وَقَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لِلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لَوْ كَانَ خَيْرًۭا مَّا سَبَقُونَآ إِلَيْهِ ۚ وَإِذْ لَمْ يَهْتَدُوا۟ بِهِۦ فَسَيَقُولُونَ هَـٰذَآ إِفْكٌۭ قَدِيمٌۭ
Wa qaalal ladheena kafaroo lilladheena aamanoo law kaana khairam maa sabaqoonaaa ilaih; wa iz lam yahtadoo bihee fasa yaqooloona haazaaa ifkun qadeem
और जिन लोगों ने इनकार किया उन्होंने ईमान लानेवालों के विषय में कहा, "यदि यह कुछ अच्छा होता तो वे इसकी ओर हमसे आगे न बढ़ जाते।" और चूँकि उन्होंने इसके द्वारा मार्ग नहीं पाया, अतः अब वे कहेंगे, "यह तो एक पुराना झूठ है।"
46:11
क्रिया
وَقَالَ
और कहा
waqāla
संज्ञा
ٱلَّذِينَ
जिन लोगों ने
alladhīna
क्रिया
كَفَرُوا۟
इनकार किया
kafarū
अव्यय
لِلَّذِينَ
उनके विषय में जो
lilladhīna
क्रिया
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
āmanū
संज्ञा
خَيْرًۭا
कुछ अच्छा
khayran
क्रिया
سَبَقُونَآ
वे हमसे आगे बढ़ते
sabaqūnā
अव्यय
إِلَيْهِ ۚ
इसकी ओर
ilayhi
क्रिया
يَهْتَدُوا۟
उन्होंने मार्ग पाया
yahtadū
अव्यय
بِهِۦ
इसके द्वारा
bihi
क्रिया
فَسَيَقُولُونَ
तो वे कहेंगे
fasayaqūlūna
संज्ञा
إِفْكٌۭ
एक झूठ है
if'kun
संज्ञा
قَدِيمٌۭ
पुराना
qadīmun
وَمِن قَبْلِهِۦ كِتَـٰبُ مُوسَىٰٓ إِمَامًۭا وَرَحْمَةًۭ ۚ وَهَـٰذَا كِتَـٰبٌۭ مُّصَدِّقٌۭ لِّسَانًا عَرَبِيًّۭا لِّيُنذِرَ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ وَبُشْرَىٰ لِلْمُحْسِنِينَ
Wa min qablihee kitaabu Moosaaa imaamanw wa rahmah; wa haazaa Kitaabum musaddiqul lisaanan 'Arabiyyal liyunziral ladheena zalamoo wa bushraa lilmuhsineen
और इससे पहले मूसा की किताब एक मार्गदर्शक और दयालुता बनाकर (उतरी थी)। और यह किताब अरबी भाषा में है, (पिछली किताबों की) पुष्टि करनेवाली; ताकि यह उन लोगों को सावधान कर दे जिन्होंने ज़ुल्म किया, और नेकी करनेवालों के लिए शुभ सूचना हो।
46:12
अव्यय
قَبْلِهِۦ
पहले इसके
qablihi
संज्ञा
كِتَـٰبُ
किताब थी
kitābu
व्यक्तिवाचक संज्ञा
مُوسَىٰٓ
मूसा की
mūsā
संज्ञा
إِمَامًۭا
एक मार्गदर्शक
imāman
संज्ञा
وَرَحْمَةًۭ ۚ
और एक दयालुता
waraḥmatan
संज्ञा
وَهَـٰذَا
और यह
wahādhā
संज्ञा
كِتَـٰبٌۭ
एक किताब है
kitābun
संज्ञा
مُّصَدِّقٌۭ
पुष्टि करनेवाली
muṣaddiqun
संज्ञा
لِّسَانًا
भाषा में
lisānan
संज्ञा
عَرَبِيًّۭا
अरबी
ʿarabiyyan
क्रिया
لِّيُنذِرَ
ताकि सावधान कर दे
liyundhira
संज्ञा
ٱلَّذِينَ
उन लोगों को जिन्होंने
alladhīna
क्रिया
ظَلَمُوا۟
ज़ुल्म किया
ẓalamū
संज्ञा
وَبُشْرَىٰ
और शुभ सूचना है
wabush'rā
अव्यय
لِلْمُحْسِنِينَ
नेकी करनेवालों के लिए
lil'muḥ'sinīna
إِنَّ ٱلَّذِينَ قَالُوا۟ رَبُّنَا ٱللَّهُ ثُمَّ ٱسْتَقَـٰمُوا۟ فَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ
Innal ladheena qaaloo Rabbunal laahu summas taqaamoo falaa khawfun 'alaihim wa laa hum yahzanoon
निश्चय ही जिन लोगों ने कहा, "हमारा रब अल्लाह है," फिर वे उस पर दृढ़ रहे, तो उनके लिए न तो कोई भय है और न वे दुखी होंगे।
46:13
संज्ञा
ٱلَّذِينَ
जिन लोगों ने
alladhīna
संज्ञा
رَبُّنَا
हमारा रब
rabbunā
व्यक्तिवाचक संज्ञा
ٱللَّهُ
अल्लाह है
l-lahu
क्रिया
ٱسْتَقَـٰمُوا۟
वे दृढ़ रहे
is'taqāmū
अव्यय
عَلَيْهِمْ
उन पर
ʿalayhim
क्रिया
يَحْزَنُونَ
दुखी होंगे
yaḥzanūna
أُو۟لَـٰٓئِكَ أَصْحَـٰبُ ٱلْجَنَّةِ خَـٰلِدِينَ فِيهَا جَزَآءًۢ بِمَا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ
Ulaaa'ika As-haabul Jannati khaalideena feehaa jazaaa'am bimaa kaanoo ya'maloon
वही जन्नत वाले हैं। वे उसमें सदैव रहेंगे, उसके बदले में जो वे करते थे।
46:14
संज्ञा
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग
ulāika
संज्ञा
أَصْحَـٰبُ
साथी हैं
aṣḥābu
संज्ञा
ٱلْجَنَّةِ
जन्नत के
l-janati
संज्ञा
خَـٰلِدِينَ
सदैव रहेंगे
khālidīna
संज्ञा
جَزَآءًۢ
बदले में
jazāan
क्रिया
يَعْمَلُونَ
करते
yaʿmalūna
وَوَصَّيْنَا ٱلْإِنسَـٰنَ بِوَٰلِدَيْهِ إِحْسَـٰنًا ۖ حَمَلَتْهُ أُمُّهُۥ كُرْهًۭا وَوَضَعَتْهُ كُرْهًۭا ۖ وَحَمْلُهُۥ وَفِصَـٰلُهُۥ ثَلَـٰثُونَ شَهْرًا ۚ حَتَّىٰٓ إِذَا بَلَغَ أَشُدَّهُۥ وَبَلَغَ أَرْبَعِينَ سَنَةًۭ قَالَ رَبِّ أَوْزِعْنِىٓ أَنْ أَشْكُرَ نِعْمَتَكَ ٱلَّتِىٓ أَنْعَمْتَ عَلَىَّ وَعَلَىٰ وَٰلِدَىَّ وَأَنْ أَعْمَلَ صَـٰلِحًۭا تَرْضَىٰهُ وَأَصْلِحْ لِى فِى ذُرِّيَّتِىٓ ۖ إِنِّى تُبْتُ إِلَيْكَ وَإِنِّى مِنَ ٱلْمُسْلِمِينَ
Wa wassainal insaana biwaalidaihi ihsaanan hamalathu ummuhoo kurhanw wa wada'athu kurhanw wa hamluhoo wa fisaaluhoo salaasoona shahraa; hattaaa izaa balagha ashuddahoo wa balagha arba'eena sanatan qaala
Rabbi awzi'neee an ashkura ni'matakal lateee an'amta 'alaiya wa 'alaa waalidaiya wa an a'mala saalihan tardaahu wa aslih lee fee zurriyyatee innee tubtu ilaika wa innee minal muslimeen
और हमने मनुष्य को अपने माता-पिता के साथ अच्छा व्यवहार करने का आदेश दिया। उसकी माँ ने उसे कष्ट के साथ पेट में रखा और उसे कष्ट ही के साथ जना। और उसके गर्भ में रहने और दूध छुड़ाने की अवधि तीस महीने है, यहाँ तक कि जब वह अपनी पूर्ण शक्ति को पहुँचा और चालीस वर्ष का हुआ, तो कहने लगा, "ऐ मेरे रब! मुझे सामर्थ्य दे कि मैं तेरे उस अनुग्रह के प्रति कृतज्ञ होऊँ, जो तूने मुझ पर और मेरे माता-पिता पर किया है, और ऐसा अच्छा कर्म करूँ जो तुझे प्रिय हो, और मेरे लिए मेरी सन्तान में भलाई रख दे। निश्चय ही मैंने तेरी ओर तौबा की है और निश्चय ही मैं आज्ञाकारियों (मुस्लिमों) में से हूँ।"
46:15
क्रिया
وَوَصَّيْنَا
और हमने आदेश दिया
wawaṣṣaynā
संज्ञा
ٱلْإِنسَـٰنَ
मनुष्य को
l-insāna
अव्यय
بِوَٰلِدَيْهِ
अपने माता-पिता के साथ
biwālidayhi
संज्ञा
إِحْسَـٰنًا ۖ
अच्छा व्यवहार करने का
iḥ'sānan
क्रिया
حَمَلَتْهُ
उसे गर्भ में रखा
ḥamalathu
संज्ञा
أُمُّهُۥ
उसकी माँ ने
ummuhu
संज्ञा
كُرْهًۭا
कष्ट के साथ
kur'han
क्रिया
وَوَضَعَتْهُ
और उसे जना
wawaḍaʿathu
संज्ञा
كُرْهًۭا ۖ
कष्ट के साथ
kur'han
संज्ञा
وَحَمْلُهُۥ
और उसका गर्भ
waḥamluhu
संज्ञा
وَفِصَـٰلُهُۥ
और उसका दूध छुड़ाना
wafiṣāluhu
संज्ञा
ثَلَـٰثُونَ
तीस
thalāthūna
संज्ञा
شَهْرًا ۚ
महीने है
shahran
अव्यय
حَتَّىٰٓ
यहाँ तक कि
ḥattā
क्रिया
بَلَغَ
वह पहुँचा
balagha
संज्ञा
أَشُدَّهُۥ
अपनी पूर्ण शक्ति को
ashuddahu
क्रिया
وَبَلَغَ
और हो गया
wabalagha
संज्ञा
أَرْبَعِينَ
चालीस
arbaʿīna
संज्ञा
سَنَةًۭ
वर्ष का
sanatan
क्रिया
أَوْزِعْنِىٓ
मुझे सामर्थ्य दे
awziʿ'nī
क्रिया
أَشْكُرَ
मैं कृतज्ञ होऊँ
ashkura
संज्ञा
نِعْمَتَكَ
तेरे अनुग्रह का
niʿ'mataka
क्रिया
أَنْعَمْتَ
तूने किया है
anʿamta
अव्यय
عَلَىَّ
मुझ पर
ʿalayya
संज्ञा
وَٰلِدَىَّ
मेरे माता-पिता
wālidayya
क्रिया
أَعْمَلَ
मैं करूँ
aʿmala
संज्ञा
صَـٰلِحًۭا
अच्छा कर्म
ṣāliḥan
क्रिया
تَرْضَىٰهُ
जिससे तू प्रसन्न हो
tarḍāhu
क्रिया
وَأَصْلِحْ
और भलाई रख दे
wa-aṣliḥ
संज्ञा
ذُرِّيَّتِىٓ ۖ
मेरी सन्तान
dhurriyyatī
अव्यय
إِنِّى
निश्चय ही मैंने
innī
क्रिया
تُبْتُ
तौबा की है
tub'tu
अव्यय
إِلَيْكَ
तेरी ओर
ilayka
अव्यय
وَإِنِّى
और निश्चय ही मैं
wa-innī
संज्ञा
ٱلْمُسْلِمِينَ
मुस्लिमों
l-mus'limīna
أُو۟لَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ نَتَقَبَّلُ عَنْهُمْ أَحْسَنَ مَا عَمِلُوا۟ وَنَتَجَاوَزُ عَن سَيِّـَٔاتِهِمْ فِىٓ أَصْحَـٰبِ ٱلْجَنَّةِ ۖ وَعْدَ ٱلصِّدْقِ ٱلَّذِى كَانُوا۟ يُوعَدُونَ
Ulaaa'ikal ladheena nataqabbalu 'anhum ahsana maa 'amiloo wa natajaawazu 'an saiyiaatihim feee As-haabil
Jannah; wa'das sidqil ladhee kaanoo yoo'adoon
यही वे लोग हैं जिनके अच्छे कर्मों को हम स्वीकार कर लेंगे और उनकी बुराइयों को क्षमा कर देंगे। (ये) जन्नतवालों में होंगे, उस सच्चे वादे के अनुसार जो उनसे किया जाता रहा है।
46:16
संज्ञा
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग
ulāika
संज्ञा
ٱلَّذِينَ
वे हैं जिनके
alladhīna
क्रिया
نَتَقَبَّلُ
हम स्वीकार कर लेंगे
nataqabbalu
संज्ञा
أَحْسَنَ
सबसे अच्छे
aḥsana
क्रिया
عَمِلُوا۟
उन्होंने कर्म किए
ʿamilū
क्रिया
وَنَتَجَاوَزُ
और हम दरगुज़र करेंगे
wanatajāwazu
संज्ञा
سَيِّـَٔاتِهِمْ
उनकी बुराइयों
sayyiātihim
संज्ञा
أَصْحَـٰبِ
साथियों
aṣḥābi
संज्ञा
ٱلْجَنَّةِ ۖ
जन्नत के
l-janati
संज्ञा
ٱلصِّدْقِ
सच्चा
l-ṣid'qi
क्रिया
يُوعَدُونَ
किए जाते थे
yūʿadūna
وَٱلَّذِى قَالَ لِوَٰلِدَيْهِ أُفٍّۢ لَّكُمَآ أَتَعِدَانِنِىٓ أَنْ أُخْرَجَ وَقَدْ خَلَتِ ٱلْقُرُونُ مِن قَبْلِى وَهُمَا يَسْتَغِيثَانِ ٱللَّهَ وَيْلَكَ ءَامِنْ إِنَّ وَعْدَ ٱللَّهِ حَقٌّۭ فَيَقُولُ مَا هَـٰذَآ إِلَّآ أَسَـٰطِيرُ ٱلْأَوَّلِينَ
Wallazee qaala liwaalidaihi uffil lakumaaa ata'idaanineee an ukhraja wa qad khalati quroonu min qablee wa humaa yastagheesaanil laaha wailaka aamin inna wa'dal laahi haqqun fa yaqoolu maa haazaaa illaaa asaateerul awwaleen
किन्तु जिस व्यक्ति ने अपने माता-पिता से कहा, "धिक्कार है तुम पर! क्या तुम मुझे यह डरावा देते हो कि मैं (क़ब्र से जीवित करके) निकाला जाऊँगा, जबकि मुझसे पहले कितनी ही पीढ़ियाँ गुज़र चुकी हैं?" और वे दोनों अल्लाह से फ़रियाद करते हैं (और बेटे से कहते हैं), "तेरा बुरा हो! ईमान ले आ। निश्चय ही अल्लाह का वादा सच्चा है।" फिर वह कहता है, "ये तो बस पूर्वजों की कहानियाँ हैं।"
46:17
संज्ञा
وَٱلَّذِى
और वह व्यक्ति जिसने
wa-alladhī
अव्यय
لِوَٰلِدَيْهِ
अपने माता-पिता से
liwālidayhi
संज्ञा
أُفٍّۢ
धिक्कार है
uffin
अव्यय
لَّكُمَآ
तुम दोनों पर
lakumā
क्रिया
أَتَعِدَانِنِىٓ
क्या तुम मुझे डराते हो
ataʿidāninī
क्रिया
أُخْرَجَ
मैं निकाला जाऊँगा
ukh'raja
क्रिया
خَلَتِ
गुज़र चुकी हैं
khalati
संज्ञा
ٱلْقُرُونُ
कितनी ही पीढ़ियाँ
l-qurūnu
अव्यय
قَبْلِى
मुझसे पहले
qablī
सर्वनाम
وَهُمَا
और वे दोनों
wahumā
क्रिया
يَسْتَغِيثَانِ
फ़रियाद करते हैं
yastaghīthāni
व्यक्तिवाचक संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह से
l-laha
संज्ञा
وَيْلَكَ
तेरा बुरा हो
waylaka
क्रिया
ءَامِنْ
ईमान ले आ
āmin
व्यक्तिवाचक संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह का
l-lahi
संज्ञा
حَقٌّۭ
सच्चा है
ḥaqqun
क्रिया
فَيَقُولُ
फिर वह कहता है
fayaqūlu
संज्ञा
أَسَـٰطِيرُ
कहानियों के
asāṭīru
संज्ञा
ٱلْأَوَّلِينَ
पूर्वजों की
l-awalīna
أُو۟لَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ حَقَّ عَلَيْهِمُ ٱلْقَوْلُ فِىٓ أُمَمٍۢ قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهِم مِّنَ ٱلْجِنِّ وَٱلْإِنسِ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا۟ خَـٰسِرِينَ
Ulaaa'ikal ladheena haqqa 'alaihimul qawlu feee umamin qad khalat min qablihim minal jinni wal insi innahum kaanoo khaasireen
यही वे लोग हैं जिन पर जिन्नों और मनुष्यों के उन समुदायों में जो उनसे पहले गुज़र चुके हैं, यातना का आदेश सिद्ध हो चुका है। निस्संदेह वे घाटे में रहनेवाले थे।
46:18
संज्ञा
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग
ulāika
संज्ञा
ٱلَّذِينَ
वे हैं जिनपर
alladhīna
क्रिया
حَقَّ
सिद्ध हो चुका है
ḥaqqa
अव्यय
عَلَيْهِمُ
उनपर
ʿalayhimu
संज्ञा
ٱلْقَوْلُ
आदेश
l-qawlu
संज्ञा
أُمَمٍۢ
उन समुदायों के
umamin
क्रिया
خَلَتْ
गुज़र चुके हैं
khalat
अव्यय
قَبْلِهِم
उनसे पहले
qablihim
संज्ञा
ٱلْجِنِّ
जिन्नों
l-jini
संज्ञा
وَٱلْإِنسِ ۖ
और मनुष्यों
wal-insi
अव्यय
إِنَّهُمْ
निस्संदेह वे
innahum
संज्ञा
خَـٰسِرِينَ
घाटे में रहनेवाले
khāsirīna
وَلِكُلٍّۢ دَرَجَـٰتٌۭ مِّمَّا عَمِلُوا۟ ۖ وَلِيُوَفِّيَهُمْ أَعْمَـٰلَهُمْ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ
Wa likullin darajaatum mimmaa 'amiloo wa liyuwaffiyahum a'maalahum wa hum laa yuzlamoon
और प्रत्येक के लिए उनके कर्मों के अनुसार श्रेणियाँ हैं, और ताकि वह (अल्लाह) उन्हें उनके कर्मों का पूरा बदला दे, और उन पर कोई ज़ुल्म नहीं किया जाएगा।
46:19
अव्यय
وَلِكُلٍّۢ
और प्रत्येक के लिए
walikullin
संज्ञा
دَرَجَـٰتٌۭ
श्रेणियाँ हैं
darajātun
अव्यय
مِّمَّا
उसमें से जो
mimmā
क्रिया
عَمِلُوا۟ ۖ
उन्होंने कर्म किए
ʿamilū
क्रिया
وَلِيُوَفِّيَهُمْ
और ताकि वह उन्हें पूरा दे
waliyuwaffiyahum
संज्ञा
أَعْمَـٰلَهُمْ
उनके कर्मों का बदला
aʿmālahum
सर्वनाम
وَهُمْ
और उनपर
wahum
क्रिया
يُظْلَمُونَ
ज़ुल्म किया जाएगा
yuẓ'lamūna
وَيَوْمَ يُعْرَضُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ عَلَى ٱلنَّارِ أَذْهَبْتُمْ طَيِّبَـٰتِكُمْ فِى حَيَاتِكُمُ ٱلدُّنْيَا وَٱسْتَمْتَعْتُم بِهَا فَٱلْيَوْمَ تُجْزَوْنَ عَذَابَ ٱلْهُونِ بِمَا كُنتُمْ تَسْتَكْبِرُونَ فِى ٱلْأَرْضِ بِغَيْرِ ٱلْحَقِّ وَبِمَا كُنتُمْ تَفْسُقُونَ
Wa Yawma yu'radul ladheena kafaroo 'alan Naari azhabtum taiyibaatikum fee hayaatikumud dunyaa wastamta'tum bihaa fal Yawma tujzawna 'azaabal hooni bimaa kuntum tastakbiroona fil ardi bighairil haqqi wa bimaa kuntum tafsuqoon
और जिस दिन वे लोग जिन्होंने इनकार किया, आग के सामने पेश किए जाएँगे। (उनसे कहा जाएगा), "तुम अपने सांसारिक जीवन में अपनी अच्छी और पवित्र चीज़ें नष्ट कर चुके और उनका मज़ा ले चुके; अतः आज तुम्हें अपमानजनक यातना दी जाएगी, क्योंकि तुम धरती में बिना किसी हक़ के घमंड करते थे और इसलिए कि तुम अवज्ञा करते थे।"
46:20
संज्ञा
وَيَوْمَ
और जिस दिन
wayawma
क्रिया
يُعْرَضُ
पेश किए जाएँगे
yuʿ'raḍu
संज्ञा
ٱلَّذِينَ
वे लोग जिन्होंने
alladhīna
क्रिया
كَفَرُوا۟
इनकार किया
kafarū
संज्ञा
ٱلنَّارِ
आग के
l-nāri
क्रिया
أَذْهَبْتُمْ
तुम नष्ट कर चुके
adhhabtum
संज्ञा
طَيِّبَـٰتِكُمْ
अपनी अच्छी चीज़ें
ṭayyibātikum
संज्ञा
حَيَاتِكُمُ
अपने जीवन
ḥayātikumu
संज्ञा
ٱلدُّنْيَا
सांसारिक
l-dun'yā
क्रिया
وَٱسْتَمْتَعْتُم
और मज़ा ले चुके
wa-is'tamtaʿtum
संज्ञा
فَٱلْيَوْمَ
अतः आज
fal-yawma
क्रिया
تُجْزَوْنَ
तुम्हें बदला दिया जाएगा
tuj'zawna
संज्ञा
عَذَابَ
यातना का
ʿadhāba
संज्ञा
ٱلْهُونِ
अपमानजनक
l-hūni
क्रिया
كُنتُمْ
तुम थे
kuntum
क्रिया
تَسْتَكْبِرُونَ
घमंड करते
tastakbirūna
संज्ञा
ٱلْأَرْضِ
धरती
l-arḍi
अव्यय
بِغَيْرِ
बिना
bighayri
संज्ञा
ٱلْحَقِّ
किसी हक़ के
l-ḥaqi
अव्यय
وَبِمَا
और इसलिए कि
wabimā
क्रिया
كُنتُمْ
तुम थे
kuntum
क्रिया
تَفْسُقُونَ
अवज्ञा करते
tafsuqūna
۞ وَٱذْكُرْ أَخَا عَادٍ إِذْ أَنذَرَ قَوْمَهُۥ بِٱلْأَحْقَافِ وَقَدْ خَلَتِ ٱلنُّذُرُ مِنۢ بَيْنِ يَدَيْهِ وَمِنْ خَلْفِهِۦٓ أَلَّا تَعْبُدُوٓا۟ إِلَّا ٱللَّهَ إِنِّىٓ أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍۢ
Wazkur akhaa 'Aadin iz anzara qawmahoo bil Ahqaafi wa qad khalatin nuzuru mim baini yadaihi wa min khalfiheee allaa ta'budooo illal laaha inneee akhaafu 'alaikum 'azaaba Yawmin 'azeem
और आद के भाई (हूद) को याद करो, जब उसने अपनी क़ौम को अह्क़ाफ़ (रेत के टीलों) में सावधान किया था—और उससे पहले और उसके बाद भी डरानेवाले गुज़र चुके हैं—कि "अल्लाह के सिवा किसी की इबादत मत करो। निश्चय ही मुझे तुम्हारे बारे में एक बड़े दिन की यातना का भय है।"
46:21
क्रिया
۞ وَٱذْكُرْ
और याद करो
wa-udh'kur
व्यक्तिवाचक संज्ञा
عَادٍ
आद के
ʿādin
क्रिया
أَنذَرَ
उसने सावधान किया था
andhara
संज्ञा
قَوْمَهُۥ
अपनी क़ौम को
qawmahu
अव्यय
بِٱلْأَحْقَافِ
अह्क़ाफ़ में
bil-aḥqāfi
अव्यय
وَقَدْ
और निस्संदेह
waqad
क्रिया
خَلَتِ
गुज़र चुके हैं
khalati
संज्ञा
ٱلنُّذُرُ
सावधान करनेवाले
l-nudhuru
संज्ञा
يَدَيْهِ
उसके
yadayhi
संज्ञा
خَلْفِهِۦٓ
उसके बाद भी
khalfihi
क्रिया
تَعْبُدُوٓا۟
तुम इबादत करो
taʿbudū
व्यक्तिवाचक संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह के
l-laha
अव्यय
إِنِّىٓ
निश्चय ही मुझे
innī
अव्यय
عَلَيْكُمْ
तुम पर
ʿalaykum
संज्ञा
عَذَابَ
यातना का
ʿadhāba
संज्ञा
يَوْمٍ
एक दिन की
yawmin
قَالُوٓا۟ أَجِئْتَنَا لِتَأْفِكَنَا عَنْ ءَالِهَتِنَا فَأْتِنَا بِمَا تَعِدُنَآ إِن كُنتَ مِنَ ٱلصَّـٰدِقِينَ
Qaalooo aji'tanaa lita'fikanaa 'an aalihatinaa fa'tinaa bimaa ta'idunaaa in kunta minas saadiqeen
उन्होंने कहा, "क्या तू हमारे पास इसलिए आया है कि हमें हमारे पूज्यों से फेर दे? तो ले आ वह चीज़ जिससे तू हमें डराता है, यदि तू सच्चों में से है!"
46:22
क्रिया
قَالُوٓا۟
उन्होंने कहा
qālū
क्रिया
أَجِئْتَنَا
क्या तू हमारे पास आया है
aji'tanā
क्रिया
لِتَأْفِكَنَا
ताकि तू हमें फेर दे
litafikanā
संज्ञा
ءَالِهَتِنَا
हमारे पूज्यों
ālihatinā
क्रिया
فَأْتِنَا
तो ले आ हमारे पास
fatinā
क्रिया
تَعِدُنَآ
तू हमें डराता है
taʿidunā
संज्ञा
ٱلصَّـٰدِقِينَ
सच्चे लोगों
l-ṣādiqīna
قَالَ إِنَّمَا ٱلْعِلْمُ عِندَ ٱللَّهِ وَأُبَلِّغُكُم مَّآ أُرْسِلْتُ بِهِۦ وَلَـٰكِنِّىٓ أَرَىٰكُمْ قَوْمًۭا تَجْهَلُونَ
Qaala innamal 'ilmu 'indal laahi wa uballighukum maaa ursiltu bihee wa laakinneee araakum qawman tajhaloon
उसने कहा, "इसका ज्ञान तो बस अल्लाह के पास है। मैं तो तुम्हें वही पहुँचा रहा हूँ जो देकर मुझे भेजा गया है; किन्तु मैं देख रहा हूँ कि तुम अज्ञानता का प्रदर्शन कर रहे हो।"
46:23
संज्ञा
ٱلْعِلْمُ
ज्ञान
l-ʿil'mu
व्यक्तिवाचक संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह के
l-lahi
क्रिया
وَأُبَلِّغُكُم
और मैं तुम्हें पहुँचा रहा हूँ
wa-uballighukum
क्रिया
أُرْسِلْتُ
मैं भेजा गया हूँ
ur'sil'tu
अव्यय
وَلَـٰكِنِّىٓ
किन्तु मैं
walākinnī
क्रिया
أَرَىٰكُمْ
तुम्हें देख रहा हूँ
arākum
संज्ञा
قَوْمًۭا
ऐसे लोग
qawman
क्रिया
تَجْهَلُونَ
जो अज्ञानता दिखा रहे हो
tajhalūna
فَلَمَّا رَأَوْهُ عَارِضًۭا مُّسْتَقْبِلَ أَوْدِيَتِهِمْ قَالُوا۟ هَـٰذَا عَارِضٌۭ مُّمْطِرُنَا ۚ بَلْ هُوَ مَا ٱسْتَعْجَلْتُم بِهِۦ ۖ رِيحٌۭ فِيهَا عَذَابٌ أَلِيمٌۭ
Falammaa ra awuhu 'aaridam mustaqbila awdiyatihim qaaloo haazaa 'aaridum mumtirunaa; bal huwa mas ta'jaltum bihee reehun feehaa 'azaabun aleem
फिर जब उन्होंने उसे एक बादल के रूप में देखा जो उनकी घाटियों की ओर बढ़ा चला आ रहा था, तो कहने लगे, "यह तो बादल है, जो हमपर बरसेगा!" नहीं, बल्कि यह वही चीज़ है जिसकी तुम जल्दी मचा रहे थे; एक आँधी है जिसमें दुखद यातना है।
46:24
अव्यय
فَلَمَّا
फिर जब
falammā
क्रिया
رَأَوْهُ
उन्होंने उसे देखा
ra-awhu
संज्ञा
عَارِضًۭا
एक बादल के रूप में
ʿāriḍan
संज्ञा
مُّسْتَقْبِلَ
सामने आते हुए
mus'taqbila
संज्ञा
أَوْدِيَتِهِمْ
अपनी घाटियों के
awdiyatihim
क्रिया
قَالُوا۟
उन्होंने कहा
qālū
संज्ञा
عَارِضٌۭ
एक बादल है
ʿāriḍun
संज्ञा
مُّمْطِرُنَا ۚ
जो हमपर बरसेगा
mum'ṭirunā
क्रिया
ٱسْتَعْجَلْتُم
तुम जल्दी मचा रहे थे
is'taʿjaltum
संज्ञा
رِيحٌۭ
एक आँधी है
rīḥun
संज्ञा
عَذَابٌ
एक यातना है
ʿadhābun
تُدَمِّرُ كُلَّ شَىْءٍۭ بِأَمْرِ رَبِّهَا فَأَصْبَحُوا۟ لَا يُرَىٰٓ إِلَّا مَسَـٰكِنُهُمْ ۚ كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْقَوْمَ ٱلْمُجْرِمِينَ
Tudammiru kulla shai'im bi amri Rabbihaa fa asbahoo laa yuraaa illaa masaakinuhum; kazaalika najzil qawmal mujrimeen
जो अपने रब के आदेश से हर चीज़ को नष्ट कर देगी। अतः वे ऐसे हो गए कि उनके रहने के स्थानों के अतिरिक्त कुछ दिखाई नहीं देता था। हम अपराधी लोगों को इसी प्रकार बदला देते हैं।
46:25
क्रिया
تُدَمِّرُ
वह नष्ट कर देगी
tudammiru
संज्ञा
شَىْءٍۭ
चीज़ को
shayin
अव्यय
بِأَمْرِ
आदेश से
bi-amri
संज्ञा
رَبِّهَا
अपने रब के
rabbihā
क्रिया
فَأَصْبَحُوا۟
अतः वे हो गए
fa-aṣbaḥū
क्रिया
يُرَىٰٓ
दिखाई देता था
yurā
संज्ञा
مَسَـٰكِنُهُمْ ۚ
उनके घरों के
masākinuhum
अव्यय
كَذَٰلِكَ
इसी प्रकार
kadhālika
क्रिया
نَجْزِى
हम बदला देते हैं
najzī
संज्ञा
ٱلْقَوْمَ
लोगों को
l-qawma
संज्ञा
ٱلْمُجْرِمِينَ
जो अपराधी हैं
l-muj'rimīna
وَلَقَدْ مَكَّنَّـٰهُمْ فِيمَآ إِن مَّكَّنَّـٰكُمْ فِيهِ وَجَعَلْنَا لَهُمْ سَمْعًۭا وَأَبْصَـٰرًۭا وَأَفْـِٔدَةًۭ فَمَآ أَغْنَىٰ عَنْهُمْ سَمْعُهُمْ وَلَآ أَبْصَـٰرُهُمْ وَلَآ أَفْـِٔدَتُهُم مِّن شَىْءٍ إِذْ كَانُوا۟ يَجْحَدُونَ بِـَٔايَـٰتِ ٱللَّهِ وَحَاقَ بِهِم مَّا كَانُوا۟ بِهِۦ يَسْتَهْزِءُونَ
Wa laqad makkannaahum feemaaa im makkannaakum feehi wa ja'alnaa lahum sam'anw wa absaaranw wa af'idatan famaaa aghnaa 'anhum sam'uhum wa laaa absaaruhum wa laaa af'idatuhum min shai'in iz kaanoo yajhadoona bi Aayaatil laahi wa haaqa bihim maa kaanoo bihee yastahzi'oon
और निस्संदेह हमने उन्हें उन चीज़ों में सामर्थ्य दिया था जिनमें तुम्हें सामर्थ्य नहीं दिया, और हमने उन्हें कान, आँखें और दिल दिए थे; किन्तु न उनके कान उनके कुछ काम आए, न उनकी आँखें और न उनके दिल, जब वे अल्लाह की आयतों का इनकार करने लगे; और जिस चीज़ की वे हँसी उड़ाते थे उसी ने उन्हें आ घेरा।
46:26
अव्यय
وَلَقَدْ
और निस्संदेह
walaqad
क्रिया
مَكَّنَّـٰهُمْ
हमने उन्हें सामर्थ्य दिया था
makkannāhum
क्रिया
مَّكَّنَّـٰكُمْ
हमने तुम्हें सामर्थ्य दिया
makkannākum
क्रिया
وَجَعَلْنَا
और हमने बनाए
wajaʿalnā
संज्ञा
وَأَبْصَـٰرًۭا
और आँखें
wa-abṣāran
संज्ञा
وَأَفْـِٔدَةًۭ
और दिल
wa-afidatan
क्रिया
أَغْنَىٰ
काम आए
aghnā
संज्ञा
سَمْعُهُمْ
उनके कान
samʿuhum
संज्ञा
أَبْصَـٰرُهُمْ
उनकी आँखें
abṣāruhum
संज्ञा
أَفْـِٔدَتُهُم
उनके दिल
afidatuhum
क्रिया
يَجْحَدُونَ
इनकार करने
yajḥadūna
अव्यय
بِـَٔايَـٰتِ
आयतों का
biāyāti
व्यक्तिवाचक संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह की
l-lahi
क्रिया
وَحَاقَ
और आ घेरा
waḥāqa
क्रिया
يَسْتَهْزِءُونَ
हँसी उड़ाते
yastahziūna
وَلَقَدْ أَهْلَكْنَا مَا حَوْلَكُم مِّنَ ٱلْقُرَىٰ وَصَرَّفْنَا ٱلْـَٔايَـٰتِ لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ
Wa laqad ahlaknaa maa hawlakum minal quraa wa sarrafnal aayaati la'allahum yarji'oon
और निस्संदेह हमने तुम्हारे आस-पास की बस्तियों को नष्ट कर दिया, और हमने आयतों को तरह-तरह से बयान किया ताकि वे लौट आएँ।
46:27
अव्यय
وَلَقَدْ
और निस्संदेह
walaqad
क्रिया
أَهْلَكْنَا
हमने नष्ट कर दिया
ahlaknā
संज्ञा
حَوْلَكُم
तुम्हारे आस-पास थीं
ḥawlakum
संज्ञा
ٱلْقُرَىٰ
बस्तियों
l-qurā
क्रिया
وَصَرَّفْنَا
और हमने तरह-तरह से बयान किया
waṣarrafnā
संज्ञा
ٱلْـَٔايَـٰتِ
आयतों को
l-āyāti
अव्यय
لَعَلَّهُمْ
ताकि वे
laʿallahum
क्रिया
يَرْجِعُونَ
लौट आएँ
yarjiʿūna
فَلَوْلَا نَصَرَهُمُ ٱلَّذِينَ ٱتَّخَذُوا۟ مِن دُونِ ٱللَّهِ قُرْبَانًا ءَالِهَةًۢ ۖ بَلْ ضَلُّوا۟ عَنْهُمْ ۚ وَذَٰلِكَ إِفْكُهُمْ وَمَا كَانُوا۟ يَفْتَرُونَ
Falaw laa nasarahumul ladheenat takhazoo min doonil laahi qurbaanan aalihatam bal dalloo 'anhum; wa zaalika ifkuhum wa maa kaanoo yaftaroon
तो अल्लाह को छोड़कर सामीप्य प्राप्त करने के लिए उन्होंने जिन्हें पूज्य बना लिया था, उन्होंने उनकी सहायता क्यों नहीं की? बल्कि वे तो उनसे गुम हो गए, और यह उनका झूठ था और वह जो वे घड़ते थे।
46:28
अव्यय
فَلَوْلَا
तो क्यों नहीं
falawlā
क्रिया
نَصَرَهُمُ
सहायता की उनकी
naṣarahumu
संज्ञा
ٱلَّذِينَ
उन्होंने जिन्हें
alladhīna
क्रिया
ٱتَّخَذُوا۟
उन्होंने बना लिया था
ittakhadhū
व्यक्तिवाचक संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह को
l-lahi
संज्ञा
قُرْبَانًا
सामीप्य प्राप्त करने के लिए
qur'bānan
संज्ञा
ءَالِهَةًۢ ۖ
पूज्य
ālihatan
क्रिया
ضَلُّوا۟
वे गुम हो गए
ḍallū
अव्यय
عَنْهُمْ ۚ
उनसे
ʿanhum
संज्ञा
وَذَٰلِكَ
और यह
wadhālika
संज्ञा
إِفْكُهُمْ
उनका झूठ था
if'kuhum
क्रिया
يَفْتَرُونَ
घड़ते
yaftarūna
وَإِذْ صَرَفْنَآ إِلَيْكَ نَفَرًۭا مِّنَ ٱلْجِنِّ يَسْتَمِعُونَ ٱلْقُرْءَانَ فَلَمَّا حَضَرُوهُ قَالُوٓا۟ أَنصِتُوا۟ ۖ فَلَمَّا قُضِىَ وَلَّوْا۟ إِلَىٰ قَوْمِهِم مُّنذِرِينَ
Wa iz sarafnaaa ilaika nafaram minal jinni yastami'oonal Qur-aana falammaa hadaroohu qaalooo ansitoo falammaa qudiya wallaw ilaa qawmihim munzireen
और (याद करो) जब हमने जिन्नों के एक गिरोह को तुम्हारी ओर फेर दिया जो क़ुरआन सुन रहे थे। फिर जब वे वहाँ उपस्थित हुए तो कहने लगे, 'चुप रहो।' फिर जब (पाठ) पूरा हो गया तो वे सावधान करनेवाले बनकर अपनी क़ौम की ओर पलट गए।
46:29
क्रिया
صَرَفْنَآ
हमने फेर दिया
ṣarafnā
अव्यय
إِلَيْكَ
तुम्हारी ओर
ilayka
संज्ञा
نَفَرًۭا
एक गिरोह को
nafaran
संज्ञा
ٱلْجِنِّ
जिन्नों
l-jini
क्रिया
يَسْتَمِعُونَ
जो सुन रहे थे
yastamiʿūna
संज्ञा
ٱلْقُرْءَانَ
क़ुरआन
l-qur'āna
अव्यय
فَلَمَّا
फिर जब
falammā
क्रिया
حَضَرُوهُ
वे उपस्थित हुए वहाँ
ḥaḍarūhu
क्रिया
قَالُوٓا۟
वे कहने लगे
qālū
क्रिया
أَنصِتُوا۟ ۖ
चुप रहो
anṣitū
अव्यय
فَلَمَّا
फिर जब
falammā
क्रिया
قُضِىَ
पूरा हो गया
quḍiya
क्रिया
وَلَّوْا۟
वे पलट गए
wallaw
संज्ञा
قَوْمِهِم
अपनी क़ौम
qawmihim
संज्ञा
مُّنذِرِينَ
सावधान करनेवाले बनकर
mundhirīna
قَالُوا۟ يَـٰقَوْمَنَآ إِنَّا سَمِعْنَا كِتَـٰبًا أُنزِلَ مِنۢ بَعْدِ مُوسَىٰ مُصَدِّقًۭا لِّمَا بَيْنَ يَدَيْهِ يَهْدِىٓ إِلَى ٱلْحَقِّ وَإِلَىٰ طَرِيقٍۢ مُّسْتَقِيمٍۢ
Qaaloo yaa qawmanaaa innaa sami'naa kitaaban unzila mim ba'di Moosa musaddiqal limaa baina yadaihi yahdeee ilal haqqi wa ilaa tareeqim mustaqeem
उन्होंने कहा, 'ऐ हमारी क़ौम! निस्संदेह हमने एक किताब सुनी है जो मूसा के बाद उतारी गई है, जो अपने से पूर्व की पुष्टि करनेवाली है, वह सत्य और सीधे मार्ग की ओर मार्गदर्शन करती है।
46:30
क्रिया
قَالُوا۟
उन्होंने कहा
qālū
अव्यय
يَـٰقَوْمَنَآ
ऐ हमारी क़ौम
yāqawmanā
अव्यय
إِنَّا
निस्संदेह हमने
innā
क्रिया
سَمِعْنَا
सुनी है
samiʿ'nā
संज्ञा
كِتَـٰبًا
एक किताब
kitāban
क्रिया
أُنزِلَ
जो उतारी गई है
unzila
व्यक्तिवाचक संज्ञा
مُوسَىٰ
मूसा के
mūsā
संज्ञा
مُصَدِّقًۭا
पुष्टि करनेवाली है
muṣaddiqan
संज्ञा
يَدَيْهِ
उसके
yadayhi
क्रिया
يَهْدِىٓ
वह मार्गदर्शन करती है
yahdī
अव्यय
وَإِلَىٰ
और की ओर
wa-ilā
संज्ञा
طَرِيقٍۢ
मार्ग
ṭarīqin
संज्ञा
مُّسْتَقِيمٍۢ
सीधे
mus'taqīmin
يَـٰقَوْمَنَآ أَجِيبُوا۟ دَاعِىَ ٱللَّهِ وَءَامِنُوا۟ بِهِۦ يَغْفِرْ لَكُم مِّن ذُنُوبِكُمْ وَيُجِرْكُم مِّنْ عَذَابٍ أَلِيمٍۢ
Yaa qawmanaaa ajeeboo daa'iyal laahi wa aaminoo bihee yaghfir lakum min zunoobikum wa yujirkum min 'azaabin aleem
'ऐ हमारी क़ौम! अल्लाह की ओर बुलानेवाले की बात मान लो और उसपर ईमान ले आओ, वह तुम्हारे पापों को क्षमा कर देगा और तुम्हें दुखद यातना से बचाएगा।
46:31
अव्यय
يَـٰقَوْمَنَآ
ऐ हमारी क़ौम
yāqawmanā
क्रिया
أَجِيبُوا۟
बात मान लो
ajībū
संज्ञा
دَاعِىَ
बुलानेवाले की
dāʿiya
व्यक्तिवाचक संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह की ओर
l-lahi
क्रिया
وَءَامِنُوا۟
और ईमान ले आओ
waāminū
क्रिया
يَغْفِرْ
वह क्षमा कर देगा
yaghfir
अव्यय
لَكُم
तुम्हारे लिए
lakum
संज्ञा
ذُنُوبِكُمْ
तुम्हारे पापों को
dhunūbikum
क्रिया
وَيُجِرْكُم
और तुम्हें बचाएगा
wayujir'kum
संज्ञा
عَذَابٍ
यातना
ʿadhābin
وَمَن لَّا يُجِبْ دَاعِىَ ٱللَّهِ فَلَيْسَ بِمُعْجِزٍۢ فِى ٱلْأَرْضِ وَلَيْسَ لَهُۥ مِن دُونِهِۦٓ أَوْلِيَآءُ ۚ أُو۟لَـٰٓئِكَ فِى ضَلَـٰلٍۢ مُّبِينٍ
Wa mal laa yujib daa'iyal laahi falaisa bimu'jizin fil ardi wa laisa lahoo min dooniheee awliyaaa'; ulaaa'ika fee dalaalim mubeen
और जो अल्लाह की ओर बुलानेवाले की बात नहीं मानेगा, तो वह धरती में (अल्लाह को) विवश करनेवाला नहीं है, और न उसके सिवा उसके कोई रक्षक होंगे; यही लोग स्पष्ट मार्गभ्रष्टता में हैं।'
46:32
क्रिया
يُجِبْ
बात मानेगा
yujib
संज्ञा
دَاعِىَ
बुलानेवाले की
dāʿiya
व्यक्तिवाचक संज्ञा
ٱللَّهِ
अल्लाह की ओर
l-lahi
क्रिया
فَلَيْسَ
तो वह नहीं है
falaysa
संज्ञा
بِمُعْجِزٍۢ
विवश करनेवाला
bimuʿ'jizin
संज्ञा
ٱلْأَرْضِ
धरती
l-arḍi
क्रिया
وَلَيْسَ
और नहीं
walaysa
अव्यय
دُونِهِۦٓ
सिवाय उसके
dūnihi
संज्ञा
أَوْلِيَآءُ ۚ
कोई रक्षक
awliyāu
संज्ञा
أُو۟لَـٰٓئِكَ
यही लोग
ulāika
संज्ञा
ضَلَـٰلٍۢ
मार्गभ्रष्टता
ḍalālin
संज्ञा
مُّبِينٍ
स्पष्ट
mubīnin
أَوَلَمْ يَرَوْا۟ أَنَّ ٱللَّهَ ٱلَّذِى خَلَقَ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ وَلَمْ يَعْىَ بِخَلْقِهِنَّ بِقَـٰدِرٍ عَلَىٰٓ أَن يُحْـِۧىَ ٱلْمَوْتَىٰ ۚ بَلَىٰٓ إِنَّهُۥ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ قَدِيرٌۭ
awalam yaraw annal laahal lazee khalaqas samaawaati wal arda wa lam ya'ya bikhal qihinna biqaadirin 'alaaa any yuhyiyal mawtaa; balaaa innahoo 'alaa kulli shai'in qadeer
क्या उन्होंने नहीं देखा कि अल्लाह, जिसने आकाशों और धरती को पैदा किया और उन्हें पैदा करने से नहीं थका, क्या वह इस बात की सामर्थ्य नहीं रखता कि मुर्दों को जीवित कर दे? क्यों नहीं, निश्चय ही वह हर चीज़ की सामर्थ्य रखता है।
46:33
अव्यय
أَوَلَمْ
क्या नहीं
awalam
क्रिया
يَرَوْا۟
उन्होंने देखा
yaraw
व्यक्तिवाचक संज्ञा
ٱللَّهَ
अल्लाह
l-laha
संज्ञा
ٱلَّذِى
वह है जिसने
alladhī
क्रिया
خَلَقَ
पैदा किया
khalaqa
संज्ञा
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आकाशों
l-samāwāti
संज्ञा
وَٱلْأَرْضَ
और धरती को
wal-arḍa
अव्यय
بِخَلْقِهِنَّ
उन्हें पैदा करने से
bikhalqihinna
संज्ञा
بِقَـٰدِرٍ
सामर्थ्य रखता
biqādirin
क्रिया
يُحْـِۧىَ
जीवित कर दे
yuḥ'yiya
संज्ञा
ٱلْمَوْتَىٰ ۚ
मुर्दों को
l-mawtā
अव्यय
بَلَىٰٓ
क्यों नहीं
balā
अव्यय
إِنَّهُۥ
निश्चय ही वह
innahu
संज्ञा
قَدِيرٌۭ
सामर्थ्य रखनेवाला है
qadīrun
وَيَوْمَ يُعْرَضُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ عَلَى ٱلنَّارِ أَلَيْسَ هَـٰذَا بِٱلْحَقِّ ۖ قَالُوا۟ بَلَىٰ وَرَبِّنَا ۚ قَالَ فَذُوقُوا۟ ٱلْعَذَابَ بِمَا كُنتُمْ تَكْفُرُونَ
Wa Yawma yu'radul ladheena kafaroo 'alan Naari alaisa haazaa bilhaqqi qaaloo balaa wa Rabbinaa; qaala fazooqul 'azaaba bimaa kuntum takfuroon
और जिस दिन वे लोग जिन्होंने इनकार किया, आग के सामने पेश किए जाएँगे, (उनसे कहा जाएगा) 'क्या यह सत्य नहीं है?' वे कहेंगे, 'क्यों नहीं, हमारे रब की क़सम!' वह कहेगा, 'तो यातना का मज़ा चखो, उसका बदला जो तुम इनकार करते थे।'
46:34
संज्ञा
وَيَوْمَ
और जिस दिन
wayawma
क्रिया
يُعْرَضُ
पेश किए जाएँगे
yuʿ'raḍu
संज्ञा
ٱلَّذِينَ
वे लोग जिन्होंने
alladhīna
क्रिया
كَفَرُوا۟
इनकार किया
kafarū
संज्ञा
ٱلنَّارِ
आग के
l-nāri
अव्यय
أَلَيْسَ
क्या नहीं है
alaysa
अव्यय
بِٱلْحَقِّ ۖ
सत्य
bil-ḥaqi
क्रिया
قَالُوا۟
वे कहेंगे
qālū
अव्यय
بَلَىٰ
क्यों नहीं
balā
संज्ञा
وَرَبِّنَا ۚ
क़सम हमारे रब की
warabbinā
क्रिया
فَذُوقُوا۟
तो चखो
fadhūqū
संज्ञा
ٱلْعَذَابَ
यातना का मज़ा
l-ʿadhāba
अव्यय
بِمَا
उसका बदला जो
bimā
क्रिया
كُنتُمْ
तुम थे
kuntum
क्रिया
تَكْفُرُونَ
इनकार करते
takfurūna
فَٱصْبِرْ كَمَا صَبَرَ أُو۟لُوا۟ ٱلْعَزْمِ مِنَ ٱلرُّسُلِ وَلَا تَسْتَعْجِل لَّهُمْ ۚ كَأَنَّهُمْ يَوْمَ يَرَوْنَ مَا يُوعَدُونَ لَمْ يَلْبَثُوٓا۟ إِلَّا سَاعَةًۭ مِّن نَّهَارٍۭ ۚ بَلَـٰغٌۭ ۚ فَهَلْ يُهْلَكُ إِلَّا ٱلْقَوْمُ ٱلْفَـٰسِقُونَ
Fasbir kamaa sabara ulul 'azmi minar Rusuli wa laa tasta'jil lahum; ka annahum Yawma yarawna maa yoo'adoona lam yalbasooo illaa saa'atam min nahaar; balaagh; fahal yuhlaku illal qawmul faasiqoon
अतः तुम धैर्य रखो, जैसे दृढ़ संकल्प वाले रसूलों ने धैर्य रखा; और उनके लिए जल्दी न करो। जिस दिन वे उसे देख लेंगे जिसका उनसे वादा किया जा रहा है, (तो ऐसा प्रतीत होगा) मानो वे दिन की एक घड़ी भर ही ठहरे थे। (यह) एक सन्देश है, तो क्या अवज्ञाकारी लोगों के सिवा कोई और भी नष्ट किया जाएगा?
46:35
क्रिया
فَٱصْبِرْ
अतः तुम धैर्य रखो
fa-iṣ'bir
क्रिया
صَبَرَ
धैर्य रखा
ṣabara
संज्ञा
أُو۟لُوا۟
वालों ने
ulū
संज्ञा
ٱلْعَزْمِ
दृढ़ संकल्प
l-ʿazmi
संज्ञा
ٱلرُّسُلِ
रसूलों
l-rusuli
क्रिया
تَسْتَعْجِل
तुम जल्दी करो
tastaʿjil
अव्यय
لَّهُمْ ۚ
उनके लिए
lahum
अव्यय
كَأَنَّهُمْ
मानो वे
ka-annahum
क्रिया
يَرَوْنَ
वे देख लेंगे
yarawna
क्रिया
يُوعَدُونَ
उनसे वादा किया जा रहा है
yūʿadūna
क्रिया
يَلْبَثُوٓا۟
वे ठहरे थे
yalbathū
संज्ञा
سَاعَةًۭ
एक घड़ी
sāʿatan
संज्ञा
نَّهَارٍۭ ۚ
दिन
nahārin
संज्ञा
بَلَـٰغٌۭ ۚ
एक सन्देश है
balāghun
क्रिया
يُهْلَكُ
नष्ट किया जाएगा
yuh'laku
संज्ञा
ٱلْقَوْمُ
लोगों के
l-qawmu
संज्ञा
ٱلْفَـٰسِقُونَ
जो अवज्ञाकारी हैं
l-fāsiqūna