सूरह फ़ातिर शब्द-दर-शब्द हिंदी | रंगकोडित व्याकरण कार्ड, अनुवाद और तजवीद

इस उन्नत अध्ययन मार्गदर्शिका के साथ हिंदी में सूरह फ़ातिर (अध्याय 35) का शब्द-दर-शब्द अनुभव करें, जिसे समझ को गहरा करने और तिलावत (पाठ) को बेहतर बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस पृष्ठ में अद्वितीय रंग-कोडित व्याकरण कार्ड हैं, जो पाठकों को अरबी पाठ की स्पष्ट समझ के लिए संज्ञा, क्रिया और अव्यय के बीच दृष्टिगत रूप से अंतर करने में सक्षम बनाते हैं। सटीक उच्चारण के लिए स्पष्ट लिप्यंतरण के साथ, यह संसाधन सुनिश्चित करता है कि हर आयत को उचित तजवीद के साथ पढ़ा जाए। नमाज़ में एकाग्रता बढ़ाने के लिए आदर्श, यह संवादात्मक उपकरण अध्याय 35 के अर्थों को स्पष्ट करता है, जो आकाश और पृथ्वी के रचयिता (फ़ातिर), देवदूतों और ईश्वर की असीमित शक्ति के ईश्वरीय संदेश से सीधे जोड़ता है।

In the name of God
संज्ञा (Sangya)
क्रिया (Kriya)
अव्यय (Avyay)
ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ فَاطِرِ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ جَاعِلِ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةِ رُسُلًا أُو۟لِىٓ أَجْنِحَةٍۢ مَّثْنَىٰ وَثُلَـٰثَ وَرُبَـٰعَ ۚ يَزِيدُ فِى ٱلْخَلْقِ مَا يَشَآءُ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ قَدِيرٌۭ
al-ḥamdu lillahi fāṭiri l-samāwāti wal-arḍi jāʿili l-malāikati rusulan ulī ajniḥatin mathnā wathulātha warubāʿa yazīdu fī l-khalqi mā yashāu inna l-laha ʿalā kulli shayin qadīrun
सब प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है, जो आकाशों और धरती का बनानेवाला है, जो दो-दो, तीन-तीन और चार-चार भुजाओंवाले फ़रिश्तों को सन्देशवाहक बनाता है। वह अपनी संरचना में जैसी चाहता है अभिवृद्धि करता है। निश्चय ही अल्लाह को हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है।
35:1
संज्ञा (Sangya)
ٱلْحَمْدُ
सब प्रशंसा
al-ḥamdu
संज्ञा (Sangya)
لِلَّهِ
अल्लाह के लिए
lillahi
संज्ञा (Sangya)
فَاطِرِ
बनानेवाला
fāṭiri
संज्ञा (Sangya)
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आकाशों का
l-samāwāti
संज्ञा (Sangya)
وَٱلْأَرْضِ
और धरती का
wal-arḍi
संज्ञा (Sangya)
جَاعِلِ
बनानेवाला
jāʿili
संज्ञा (Sangya)
ٱلْمَلَـٰٓئِكَةِ
फ़रिश्तों को
l-malāikati
संज्ञा (Sangya)
رُسُلًا
सन्देशवाहक
rusulan
संज्ञा (Sangya)
أُو۟لِىٓ
भुजाओंवाले
ulī
संज्ञा (Sangya)
أَجْنِحَةٍۢ
भुजाओंवाले
ajniḥatin
संज्ञा (Sangya)
مَّثْنَىٰ
दो-दो
mathnā
संज्ञा (Sangya)
وَثُلَـٰثَ
और तीन-तीन
wathulātha
संज्ञा (Sangya)
وَرُبَـٰعَ ۚ
और चार-चार
warubāʿa
क्रिया (Kriya)
يَزِيدُ
वह बढ़ाता है
yazīdu
अव्यय (Avyay)
فِى
में
संज्ञा (Sangya)
ٱلْخَلْقِ
संरचना
l-khalqi
सर्वनाम (Sarvnaam)
مَا
जो
क्रिया (Kriya)
يَشَآءُ ۚ
वह चाहता है
yashāu
अव्यय (Avyay)
إِنَّ
निश्चय ही
inna
संज्ञा (Sangya)
ٱللَّهَ
अल्लाह
l-laha
अव्यय (Avyay)
عَلَىٰ
पर
ʿalā
संज्ञा (Sangya)
كُلِّ
हर
kulli
संज्ञा (Sangya)
شَىْءٍۢ
चीज़ की
shayin
संज्ञा (Sangya)
قَدِيرٌۭ
सामर्थ्य है
qadīrun
مَّا يَفْتَحِ ٱللَّهُ لِلنَّاسِ مِن رَّحْمَةٍۢ فَلَا مُمْسِكَ لَهَا ۖ وَمَا يُمْسِكْ فَلَا مُرْسِلَ لَهُۥ مِنۢ بَعْدِهِۦ ۚ وَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ
mā yaftaḥi l-lahu lilnnāsi min raḥmatin falā mum'sika lahā wamā yum'sik falā mur'sila lahu min baʿdihi wahuwa l-ʿazīzu l-ḥakīmu
अल्लाह लोगों के लिए दयालुता में से जो कुछ खोल दे, उसे कोई रोकनेवाला नहीं। और जिसे वह रोक ले, तो उसके बाद उसे कोई जारी करनेवाला नहीं। वह अत्यन्त प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है।
35:2
सर्वनाम (Sarvnaam)
مَّا
जो कुछ
क्रिया (Kriya)
يَفْتَحِ
खोल दे
yaftaḥi
संज्ञा (Sangya)
ٱللَّهُ
अल्लाह
l-lahu
संज्ञा (Sangya)
لِلنَّاسِ
लोगों के लिए
lilnnāsi
अव्यय (Avyay)
مِن
से
min
संज्ञा (Sangya)
رَّحْمَةٍۢ
दयालुता
raḥmatin
अव्यय (Avyay)
فَلَا
तो कोई नहीं
falā
संज्ञा (Sangya)
مُمْسِكَ
रोकनेवाला
mum'sika
अव्यय (Avyay)
لَهَا ۖ
उसे
lahā
अव्यय (Avyay)
وَمَا
और जिसे
wamā
क्रिया (Kriya)
يُمْسِكْ
वह रोक ले
yum'sik
अव्यय (Avyay)
فَلَا
तो कोई नहीं
falā
संज्ञा (Sangya)
مُرْسِلَ
जारी करनेवाला
mur'sila
अव्यय (Avyay)
لَهُۥ
उसे
lahu
अव्यय (Avyay)
مِنۢ
के
min
संज्ञा (Sangya)
بَعْدِهِۦ ۚ
बाद
baʿdihi
सर्वनाम (Sarvnaam)
وَهُوَ
और वह
wahuwa
संज्ञा (Sangya)
ٱلْعَزِيزُ
अत्यन्त प्रभुत्वशाली
l-ʿazīzu
संज्ञा (Sangya)
ٱلْحَكِيمُ
तत्वदर्शी है
l-ḥakīmu
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ ٱذْكُرُوا۟ نِعْمَتَ ٱللَّهِ عَلَيْكُمْ ۚ هَلْ مِنْ خَـٰلِقٍ غَيْرُ ٱللَّهِ يَرْزُقُكُم مِّنَ ٱلسَّمَآءِ وَٱلْأَرْضِ ۚ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ فَأَنَّىٰ تُؤْفَكُونَ
yāayyuhā l-nāsu udh'kurū niʿ'mata l-lahi ʿalaykum hal min khāliqin ghayru l-lahi yarzuqukum mina l-samāi wal-arḍi lā ilāha illā huwa fa-annā tu'fakūna
ऐ लोगो! अल्लाह की तुमपर जो अनुकम्पा है, उसे याद करो। क्या अल्लाह के सिवा कोई और पैदा करनेवाला है, जो तुम्हें आकाश और धरती से रोज़ी देता हो? उसके सिवा कोई पूज्य-प्रभु नहीं। तो तुम कहाँ से उलटे भटके चले जा रहे हो?
35:3
अव्यय (Avyay)
يَـٰٓأَيُّهَا
yāayyuhā
संज्ञा (Sangya)
ٱلنَّاسُ
लोगो
l-nāsu
क्रिया (Kriya)
ٱذْكُرُوا۟
याद करो
udh'kurū
संज्ञा (Sangya)
نِعْمَتَ
अनुकम्पा
niʿ'mata
संज्ञा (Sangya)
ٱللَّهِ
अल्लाह की
l-lahi
अव्यय (Avyay)
عَلَيْكُمْ ۚ
तुमपर
ʿalaykum
अव्यय (Avyay)
هَلْ
क्या
hal
अव्यय (Avyay)
مِنْ
कोई
min
संज्ञा (Sangya)
خَـٰلِقٍ
पैदा करनेवाला
khāliqin
संज्ञा (Sangya)
غَيْرُ
अलावा
ghayru
संज्ञा (Sangya)
ٱللَّهِ
अल्लाह के
l-lahi
क्रिया (Kriya)
يَرْزُقُكُم
तुम्हें रोज़ी देता है
yarzuqukum
अव्यय (Avyay)
مِّنَ
से
mina
संज्ञा (Sangya)
ٱلسَّمَآءِ
आकाश
l-samāi
संज्ञा (Sangya)
وَٱلْأَرْضِ ۚ
और धरती से
wal-arḍi
अव्यय (Avyay)
لَآ
नहीं
संज्ञा (Sangya)
إِلَـٰهَ
कोई पूज्य-प्रभु
ilāha
अव्यय (Avyay)
إِلَّا
सिवा
illā
सर्वनाम (Sarvnaam)
هُوَ ۖ
उसके
huwa
अव्यय (Avyay)
فَأَنَّىٰ
तो कहाँ
fa-annā
क्रिया (Kriya)
تُؤْفَكُونَ
भटके चले जा रहे हो
tu'fakūna
وَإِن يُكَذِّبُوكَ فَقَدْ كُذِّبَتْ رُسُلٌۭ مِّن قَبْلِكَ ۚ وَإِلَى ٱللَّهِ تُرْجَعُ ٱلْأُمُورُ
wa-in yukadhibūka faqad kudhibat rusulun min qablika wa-ilā l-lahi tur'jaʿu l-umūru
और अगर ये तुम्हें झुठलाएँ तो तुमसे पहले भी रसूल झुठलाए जा चुके हैं। और सारे मामले अल्लाह ही की ओर लौटते हैं।
35:4
अव्यय (Avyay)
وَإِن
और अगर
wa-in
क्रिया (Kriya)
يُكَذِّبُوكَ
ये तुम्हें झुठलाएँ
yukadhibūka
अव्यय (Avyay)
فَقَدْ
तो निश्चय ही
faqad
क्रिया (Kriya)
كُذِّبَتْ
झुठलाए गए
kudhibat
संज्ञा (Sangya)
رُسُلٌۭ
रसूल
rusulun
अव्यय (Avyay)
مِّن
से
min
संज्ञा (Sangya)
قَبْلِكَ ۚ
तुमसे पहले
qablika
अव्यय (Avyay)
وَإِلَى
और ओर
wa-ilā
संज्ञा (Sangya)
ٱللَّهِ
अल्लाह ही की
l-lahi
क्रिया (Kriya)
تُرْجَعُ
लौटाए जाते हैं
tur'jaʿu
संज्ञा (Sangya)
ٱلْأُمُورُ
सारे मामले
l-umūru
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ إِنَّ وَعْدَ ٱللَّهِ حَقٌّۭ ۖ فَلَا تَغُرَّنَّكُمُ ٱلْحَيَوٰةُ ٱلدُّنْيَا ۖ وَلَا يَغُرَّنَّكُم بِٱللَّهِ ٱلْغَرُورُ
yāayyuhā l-nāsu inna waʿda l-lahi ḥaqqun falā taghurrannakumu l-ḥayatu l-dun'yā walā yaghurrannakum bil-lahi l-gharūru
ऐ लोगो! निश्चय ही अल्लाह का वादा सच्चा है। अतः सांसारिक जीवन तुम्हें धोखे में न डाले और न वह धोखेबाज़ तुम्हें अल्लाह के विषय में धोखा दे।
35:5
अव्यय (Avyay)
يَـٰٓأَيُّهَا
yāayyuhā
संज्ञा (Sangya)
ٱلنَّاسُ
लोगो
l-nāsu
अव्यय (Avyay)
إِنَّ
निश्चय ही
inna
संज्ञा (Sangya)
وَعْدَ
वादा
waʿda
संज्ञा (Sangya)
ٱللَّهِ
अल्लाह का
l-lahi
संज्ञा (Sangya)
حَقٌّۭ ۖ
सच्चा है
ḥaqqun
अव्यय (Avyay)
فَلَا
तो न
falā
क्रिया (Kriya)
تَغُرَّنَّكُمُ
तुम्हें धोखे में डाले
taghurrannakumu
संज्ञा (Sangya)
ٱلْحَيَوٰةُ
जीवन
l-ḥayatu
संज्ञा (Sangya)
ٱلدُّنْيَا ۖ
सांसारिक
l-dun'yā
अव्यय (Avyay)
وَلَا
और न
walā
क्रिया (Kriya)
يَغُرَّنَّكُم
तुम्हें धोखा दे
yaghurrannakum
संज्ञा (Sangya)
بِٱللَّهِ
अल्लाह के बारे में
bil-lahi
संज्ञा (Sangya)
ٱلْغَرُورُ
धोखेबाज़
l-gharūru
إِنَّ ٱلشَّيْطَـٰنَ لَكُمْ عَدُوٌّۭ فَٱتَّخِذُوهُ عَدُوًّا ۚ إِنَّمَا يَدْعُوا۟ حِزْبَهُۥ لِيَكُونُوا۟ مِنْ أَصْحَـٰبِ ٱلسَّعِيرِ
inna l-shayṭāna lakum ʿaduwwun fa-ittakhidhūhu ʿaduwwan innamā yadʿū ḥiz'bahu liyakūnū min aṣḥābi l-saʿīri
निश्चय ही शैतान तुम्हारा शत्रु है, तो तुम भी उसे शत्रु ही समझो। वह तो अपने गिरोह को केवल इसलिए बुलाता है कि वे दहकती आग वालों में सम्मिलित हो जाएँ।
35:6
अव्यय (Avyay)
إِنَّ
निश्चय ही
inna
संज्ञा (Sangya)
ٱلشَّيْطَـٰنَ
शैतान
l-shayṭāna
अव्यय (Avyay)
لَكُمْ
तुम्हारा
lakum
संज्ञा (Sangya)
عَدُوٌّۭ
शत्रु है
ʿaduwwun
क्रिया (Kriya)
فَٱتَّخِذُوهُ
तो उसे समझो
fa-ittakhidhūhu
संज्ञा (Sangya)
عَدُوًّا ۚ
शत्रु
ʿaduwwan
अव्यय (Avyay)
إِنَّمَا
केवल
innamā
क्रिया (Kriya)
يَدْعُوا۟
वह बुलाता है
yadʿū
संज्ञा (Sangya)
حِزْبَهُۥ
अपने गिरोह को
ḥiz'bahu
क्रिया (Kriya)
لِيَكُونُوا۟
ताकि वे हो जाएँ
liyakūnū
अव्यय (Avyay)
مِنْ
में से
min
संज्ञा (Sangya)
أَصْحَـٰبِ
वालों
aṣḥābi
संज्ञा (Sangya)
ٱلسَّعِيرِ
दहकती आग
l-saʿīri
ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لَهُمْ عَذَابٌۭ شَدِيدٌۭ ۖ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ لَهُم مَّغْفِرَةٌۭ وَأَجْرٌۭ كَبِيرٌ
alladhīna kafarū lahum ʿadhābun shadīdun wa-alladhīna āmanū waʿamilū l-ṣāliḥāti lahum maghfiratun wa-ajrun kabīrun
जिन लोगों ने इनकार किया उनके लिए कठोर यातना है, और जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उनके लिए क्षमा और बड़ा प्रतिदान है।
35:7
सर्वनाम (Sarvnaam)
ٱلَّذِينَ
जो लोग
alladhīna
क्रिया (Kriya)
كَفَرُوا۟
इनकार किया
kafarū
अव्यय (Avyay)
لَهُمْ
उनके लिए
lahum
संज्ञा (Sangya)
عَذَابٌۭ
यातना है
ʿadhābun
संज्ञा (Sangya)
شَدِيدٌۭ ۖ
कठोर
shadīdun
सर्वनाम (Sarvnaam)
وَٱلَّذِينَ
और जो लोग
wa-alladhīna
क्रिया (Kriya)
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
āmanū
क्रिया (Kriya)
وَعَمِلُوا۟
और कर्म किए
waʿamilū
संज्ञा (Sangya)
ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ
अच्छे
l-ṣāliḥāti
अव्यय (Avyay)
لَهُم
उनके लिए
lahum
संज्ञा (Sangya)
مَّغْفِرَةٌۭ
क्षमा
maghfiratun
संज्ञा (Sangya)
وَأَجْرٌۭ
और प्रतिदान है
wa-ajrun
संज्ञा (Sangya)
كَبِيرٌ
बड़ा
kabīrun
أَفَمَن زُيِّنَ لَهُۥ سُوٓءُ عَمَلِهِۦ فَرَءَاهُ حَسَنًۭا ۖ فَإِنَّ ٱللَّهَ يُضِلُّ مَن يَشَآءُ وَيَهْدِى مَن يَشَآءُ ۖ فَلَا تَذْهَبْ نَفْسُكَ عَلَيْهِمْ حَسَرَٰتٍ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَلِيمٌۢ بِمَا يَصْنَعُونَ
afaman zuyyina lahu sūu ʿamalihi faraāhu ḥasanan fa-inna l-laha yuḍillu man yashāu wayahdī man yashāu falā tadhhab nafsuka ʿalayhim ḥasarātin inna l-laha ʿalīmun bimā yaṣnaʿūna
तो क्या वह व्यक्ति जिसके लिए उसका बुरा कर्म सुहाना बना दिया गया हो, तो वह उसे अच्छा समझता हो (क्या वह उसके समान हो सकता है जो सीधे मार्ग पर हो)? निश्चय ही अल्लाह जिसे चाहता है, उसे भटका देता है और जिसे चाहता है, उसे मार्ग दिखाता है। तो उन पर अफ़सोस में तुम्हारी जान न जाए। निश्चय ही अल्लाह जानता है जो कुछ वे करते हैं।
35:8
अव्यय (Avyay)
أَفَمَن
तो क्या वह व्यक्ति
afaman
क्रिया (Kriya)
زُيِّنَ
सुहाना बना दिया गया
zuyyina
अव्यय (Avyay)
لَهُۥ
उसके लिए
lahu
संज्ञा (Sangya)
سُوٓءُ
बुरा
sūu
संज्ञा (Sangya)
عَمَلِهِۦ
उसका कर्म
ʿamalihi
क्रिया (Kriya)
فَرَءَاهُ
तो वह उसे समझता है
faraāhu
संज्ञा (Sangya)
حَسَنًۭا ۖ
अच्छा
ḥasanan
अव्यय (Avyay)
فَإِنَّ
तो निश्चय ही
fa-inna
संज्ञा (Sangya)
ٱللَّهَ
अल्लाह
l-laha
क्रिया (Kriya)
يُضِلُّ
भटका देता है
yuḍillu
सर्वनाम (Sarvnaam)
مَن
जिसे
man
क्रिया (Kriya)
يَشَآءُ
वह चाहता है
yashāu
क्रिया (Kriya)
وَيَهْدِى
और मार्ग दिखाता है
wayahdī
सर्वनाम (Sarvnaam)
مَن
जिसे
man
क्रिया (Kriya)
يَشَآءُ ۖ
वह चाहता है
yashāu
अव्यय (Avyay)
فَلَا
तो न
falā
क्रिया (Kriya)
تَذْهَبْ
जाए
tadhhab
संज्ञा (Sangya)
نَفْسُكَ
तुम्हारी जान
nafsuka
अव्यय (Avyay)
عَلَيْهِمْ
उन पर
ʿalayhim
संज्ञा (Sangya)
حَسَرَٰتٍ ۚ
अफ़सोस में
ḥasarātin
अव्यय (Avyay)
إِنَّ
निश्चय ही
inna
संज्ञा (Sangya)
ٱللَّهَ
अल्लाह
l-laha
संज्ञा (Sangya)
عَلِيمٌۢ
जानता है
ʿalīmun
अव्यय (Avyay)
بِمَا
जो कुछ
bimā
क्रिया (Kriya)
يَصْنَعُونَ
वे करते हैं
yaṣnaʿūna
وَٱللَّهُ ٱلَّذِىٓ أَرْسَلَ ٱلرِّيَـٰحَ فَتُثِيرُ سَحَابًۭا فَسُقْنَـٰهُ إِلَىٰ بَلَدٍۢ مَّيِّتٍۢ فَأَحْيَيْنَا بِهِ ٱلْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا ۚ كَذَٰلِكَ ٱلنُّشُورُ
wal-lahu alladhī arsala l-riyāḥa fatuthīru saḥāban fasuq'nāhu ilā baladin mayyitin fa-aḥyaynā bihi l-arḍa baʿda mawtihā kadhālika l-nushūru
और अल्लाह ही है जो हवाओं को भेजता है, फिर वे बादल उठाती हैं, फिर हम उसे किसी निर्जीव भू-भाग की ओर ले जाते हैं, फिर हम उसके द्वारा धरती को उसके निर्जीव हो जाने के पश्चात जीवन प्रदान करते हैं। इसी प्रकार पुनर्जीवन भी है।
35:9
संज्ञा (Sangya)
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
wal-lahu
सर्वनाम (Sarvnaam)
ٱلَّذِىٓ
ही है जो
alladhī
क्रिया (Kriya)
أَرْسَلَ
भेजता है
arsala
संज्ञा (Sangya)
ٱلرِّيَـٰحَ
हवाओं को
l-riyāḥa
क्रिया (Kriya)
فَتُثِيرُ
फिर वे उठाती हैं
fatuthīru
संज्ञा (Sangya)
سَحَابًۭا
बादल
saḥāban
क्रिया (Kriya)
فَسُقْنَـٰهُ
फिर हम उसे ले जाते हैं
fasuq'nāhu
अव्यय (Avyay)
إِلَىٰ
की ओर
ilā
संज्ञा (Sangya)
بَلَدٍۢ
भू-भाग
baladin
संज्ञा (Sangya)
مَّيِّتٍۢ
निर्जीव
mayyitin
क्रिया (Kriya)
فَأَحْيَيْنَا
फिर हम जीवन प्रदान करते हैं
fa-aḥyaynā
अव्यय (Avyay)
بِهِ
उसके द्वारा
bihi
संज्ञा (Sangya)
ٱلْأَرْضَ
धरती को
l-arḍa
संज्ञा (Sangya)
بَعْدَ
पश्चात
baʿda
संज्ञा (Sangya)
مَوْتِهَا ۚ
उसके निर्जीव हो जाने के
mawtihā
अव्यय (Avyay)
كَذَٰلِكَ
इसी प्रकार
kadhālika
संज्ञा (Sangya)
ٱلنُّشُورُ
पुनर्जीवन है
l-nushūru
مَن كَانَ يُرِيدُ ٱلْعِزَّةَ فَلِلَّهِ ٱلْعِزَّةُ جَمِيعًا ۚ إِلَيْهِ يَصْعَدُ ٱلْكَلِمُ ٱلطَّيِّبُ وَٱلْعَمَلُ ٱلصَّـٰلِحُ يَرْفَعُهُۥ ۚ وَٱلَّذِينَ يَمْكُرُونَ ٱلسَّيِّـَٔاتِ لَهُمْ عَذَابٌۭ شَدِيدٌۭ ۖ وَمَكْرُ أُو۟لَـٰٓئِكَ هُوَ يَبُورُ
man kāna yurīdu l-ʿizata falillahi l-ʿizatu jamīʿan ilayhi yaṣʿadu l-kalimu l-ṭayibu wal-ʿamalu l-ṣāliḥu yarfaʿuhu wa-alladhīna yamkurūna l-sayiāti lahum ʿadhābun shadīdun wamakru ulāika huwa yabūru
जो कोई प्रभुत्व चाहता है, तो (उसे जानना चाहिए कि) प्रभुत्व तो सारा का सारा अल्लाह ही के लिए है। उसी की ओर पवित्र वचन चढ़ते हैं, और अच्छा कर्म उसे ऊँचा उठाता है। और जो लोग बुरी चालें चलते हैं, उनके लिए कठोर यातना है, और उनकी चालबाज़ी ही नष्ट हो जाएगी।
35:10
सर्वनाम (Sarvnaam)
مَن
जो कोई
man
क्रिया (Kriya)
كَانَ
चाहता है
kāna
क्रिया (Kriya)
يُرِيدُ
चाहता है
yurīdu
संज्ञा (Sangya)
ٱلْعِزَّةَ
प्रभुत्व
l-ʿizata
संज्ञा (Sangya)
فَلِلَّهِ
तो अल्लाह के लिए है
falillahi
संज्ञा (Sangya)
ٱلْعِزَّةُ
प्रभुत्व
l-ʿizatu
संज्ञा (Sangya)
جَمِيعًا ۚ
सारा का सारा
jamīʿan
अव्यय (Avyay)
إِلَيْهِ
उसी की ओर
ilayhi
क्रिया (Kriya)
يَصْعَدُ
चढ़ते हैं
yaṣʿadu
संज्ञा (Sangya)
ٱلْكَلِمُ
वचन
l-kalimu
संज्ञा (Sangya)
ٱلطَّيِّبُ
पवित्र
l-ṭayibu
संज्ञा (Sangya)
وَٱلْعَمَلُ
और कर्म
wal-ʿamalu
संज्ञा (Sangya)
ٱلصَّـٰلِحُ
अच्छा
l-ṣāliḥu
क्रिया (Kriya)
يَرْفَعُهُۥ ۚ
उसे ऊँचा उठाता है
yarfaʿuhu
सर्वनाम (Sarvnaam)
وَٱلَّذِينَ
और जो लोग
wa-alladhīna
क्रिया (Kriya)
يَمْكُرُونَ
चालें चलते हैं
yamkurūna
संज्ञा (Sangya)
ٱلسَّيِّـَٔاتِ
बुरी
l-sayiāti
अव्यय (Avyay)
لَهُمْ
उनके लिए
lahum
संज्ञा (Sangya)
عَذَابٌۭ
यातना है
ʿadhābun
संज्ञा (Sangya)
شَدِيدٌۭ ۖ
कठोर
shadīdun
संज्ञा (Sangya)
وَمَكْرُ
और चालबाज़ी
wamakru
सर्वनाम (Sarvnaam)
أُو۟لَـٰٓئِكَ
उनकी
ulāika
सर्वनाम (Sarvnaam)
هُوَ
ही
huwa
क्रिया (Kriya)
يَبُورُ
नष्ट हो जाएगी
yabūru
وَٱللَّهُ خَلَقَكُم مِّن تُرَابٍۢ ثُمَّ مِن نُّطْفَةٍۢ ثُمَّ جَعَلَكُمْ أَزْوَٰجًۭا ۚ وَمَا تَحْمِلُ مِنْ أُنثَىٰ وَلَا تَضَعُ إِلَّا بِعِلْمِهِۦ ۚ وَمَا يُعَمَّرُ مِن مُّعَمَّرٍۢ وَلَا يُنقَصُ مِنْ عُمُرِهِۦٓ إِلَّا فِى كِتَـٰبٍ ۚ إِنَّ ذَٰلِكَ عَلَى ٱللَّهِ يَسِيرٌۭ
wal-lahu khalaqakum min turābin thumma min nuṭ'fatin thumma jaʿalakum azwājan wamā taḥmilu min unthā walā taḍaʿu illā biʿil'mihi wamā yuʿammaru min muʿammarin walā yunqaṣu min ʿumurihi illā fī kitābin inna dhālika ʿalā l-lahi yasīrun
और अल्लाह ने तुम्हें मिट्टी से पैदा किया, फिर वीर्य की एक बूँद से, फिर तुम्हें जोड़े बनाया। कोई स्त्री न तो गर्भवती होती है और न ही जन्म देती है, مگر उसके ज्ञान से। और न किसी को आयु दी जाती है, और न ही उसकी आयु में कोई कमी की जाती है, مگر यह सब एक किताब में (लिखा हुआ) है। निश्चय ही यह अल्लाह के लिए आसान है।
35:11
संज्ञा (Sangya)
وَٱللَّهُ
और अल्लाह ने
wal-lahu
क्रिया (Kriya)
خَلَقَكُم
तुम्हें पैदा किया
khalaqakum
अव्यय (Avyay)
مِّن
से
min
संज्ञा (Sangya)
تُرَابٍۢ
मिट्टी
turābin
अव्यय (Avyay)
ثُمَّ
फिर
thumma
अव्यय (Avyay)
مِن
से
min
संज्ञा (Sangya)
نُّطْفَةٍۢ
वीर्य की एक बूँद
nuṭ'fatin
अव्यय (Avyay)
ثُمَّ
फिर
thumma
क्रिया (Kriya)
جَعَلَكُمْ
तुम्हें बनाया
jaʿalakum
संज्ञा (Sangya)
أَزْوَٰجًۭا ۚ
जोड़े
azwājan
अव्यय (Avyay)
وَمَا
और नहीं
wamā
क्रिया (Kriya)
تَحْمِلُ
गर्भवती होती है
taḥmilu
अव्यय (Avyay)
مِنْ
कोई
min
संज्ञा (Sangya)
أُنثَىٰ
स्त्री
unthā
अव्यय (Avyay)
وَلَا
और न
walā
क्रिया (Kriya)
تَضَعُ
वह जन्म देती है
taḍaʿu
अव्यय (Avyay)
إِلَّا
मगर
illā
संज्ञा (Sangya)
بِعِلْمِهِۦ ۚ
उसके ज्ञान से
biʿil'mihi
अव्यय (Avyay)
وَمَا
और नहीं
wamā
क्रिया (Kriya)
يُعَمَّرُ
आयु दी जाती है
yuʿammaru
अव्यय (Avyay)
مِن
किसी को
min
संज्ञा (Sangya)
مُّعَمَّرٍۢ
आयु
muʿammarin
अव्यय (Avyay)
وَلَا
और न
walā
क्रिया (Kriya)
يُنقَصُ
कमी की जाती है
yunqaṣu
अव्यय (Avyay)
مِنْ
में
min
संज्ञा (Sangya)
عُمُرِهِۦٓ
उसकी आयु
ʿumurihi
अव्यय (Avyay)
إِلَّا
मगर
illā
अव्यय (Avyay)
فِى
में
संज्ञा (Sangya)
كِتَـٰبٍ ۚ
एक किताब
kitābin
अव्यय (Avyay)
إِنَّ
निश्चय ही
inna
सर्वनाम (Sarvnaam)
ذَٰلِكَ
यह
dhālika
अव्यय (Avyay)
عَلَى
पर
ʿalā
संज्ञा (Sangya)
ٱللَّهِ
अल्लाह के लिए
l-lahi
संज्ञा (Sangya)
يَسِيرٌۭ
आसान है
yasīrun
وَمَا يَسْتَوِى ٱلْبَحْرَانِ هَـٰذَا عَذْبٌۭ فُرَاتٌۭ سَآئِغٌۭ شَرَابُهُۥ وَهَـٰذَا مِلْحٌ أُجَاجٌۭ ۖ وَمِن كُلٍّۢ تَأْكُلُونَ لَحْمًۭا طَرِيًّۭا وَتَسْتَخْرِجُونَ حِلْيَةًۭ تَلْبَسُونَهَا ۖ وَتَرَى ٱلْفُلْكَ فِيهِ مَوَاخِرَ لِتَبْتَغُوا۟ مِن فَضْلِهِۦ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
wamā yastawī l-baḥrāni hādhā ʿadhbun furātun sāighun sharābuhu wahādhā mil'ḥun ujājun wamin kullin takulūna laḥman ṭariyyan watastakhrijūna ḥil'yatan talbasūnahā watarā l-ful'ka fīhi mawākhira litabtaghū min faḍlihi walaʿallakum tashkurūna
और दो समुद्र बराबर नहीं हैं। यह एक मीठा, स्वादिष्ट, पीने में सुखद है, और यह दूसरा खारा और कड़वा है। और प्रत्येक में से तुम ताज़ा मांस खाते हो और आभूषण निकालते हो जिन्हें तुम पहनते हो। और तुम उसमें जहाजों को चीरते हुए देखते हो ताकि तुम उसकी कृपा से तलाश करो; और शायद तुम आभारी होगे।
35:12
अव्यय (Avyay)
وَمَا
और नहीं
wamā
क्रिया (Kriya)
يَسْتَوِى
बराबर हैं
yastawī
संज्ञा (Sangya)
ٱلْبَحْرَانِ
दो समुद्र
l-baḥrāni
सर्वनाम (Sarvnaam)
هَـٰذَا
यह
hādhā
संज्ञा (Sangya)
عَذْبٌۭ
मीठा
ʿadhbun
संज्ञा (Sangya)
فُرَاتٌۭ
स्वादिष्ट
furātun
संज्ञा (Sangya)
سَآئِغٌۭ
सुखद
sāighun
संज्ञा (Sangya)
شَرَابُهُۥ
उसका पीना
sharābuhu
सर्वनाम (Sarvnaam)
وَهَـٰذَا
और यह
wahādhā
संज्ञा (Sangya)
مِلْحٌ
खारा
mil'ḥun
संज्ञा (Sangya)
أُجَاجٌۭ ۖ
कड़वा
ujājun
अव्यय (Avyay)
وَمِن
और में से
wamin
संज्ञा (Sangya)
كُلٍّۢ
प्रत्येक
kullin
क्रिया (Kriya)
تَأْكُلُونَ
तुम खाते हो
takulūna
संज्ञा (Sangya)
لَحْمًۭا
मांस
laḥman
संज्ञा (Sangya)
طَرِيًّۭا
ताज़ा
ṭariyyan
क्रिया (Kriya)
وَتَسْتَخْرِجُونَ
और तुम निकालते हो
watastakhrijūna
संज्ञा (Sangya)
حِلْيَةًۭ
आभूषण
ḥil'yatan
क्रिया (Kriya)
تَلْبَسُونَهَا ۖ
जिन्हें तुम पहनते हो
talbasūnahā
क्रिया (Kriya)
وَتَرَى
और तुम देखते हो
watarā
संज्ञा (Sangya)
ٱلْفُلْكَ
जहाजों को
l-ful'ka
अव्यय (Avyay)
فِيهِ
उसमें
fīhi
संज्ञा (Sangya)
مَوَاخِرَ
चीरते हुए
mawākhira
क्रिया (Kriya)
لِتَبْتَغُوا۟
ताकि तुम तलाश करो
litabtaghū
अव्यय (Avyay)
مِن
से
min
संज्ञा (Sangya)
فَضْلِهِۦ
उसकी कृपा
faḍlihi
अव्यय (Avyay)
وَلَعَلَّكُمْ
और शायद तुम
walaʿallakum
क्रिया (Kriya)
تَشْكُرُونَ
आभारी होगे
tashkurūna
يُولِجُ ٱلَّيْلَ فِى ٱلنَّهَارِ وَيُولِجُ ٱلنَّهَارَ فِى ٱلَّيْلِ وَسَخَّرَ ٱلشَّمْسَ وَٱلْقَمَرَ كُلٌّۭ يَجْرِى لِأَجَلٍۢ مُّسَمًّۭى ۚ ذَٰلِكُمُ ٱللَّهُ رَبُّكُمْ لَهُ ٱلْمُلْكُ ۚ وَٱلَّذِينَ تَدْعُونَ مِن دُونِهِۦ مَا يَمْلِكُونَ مِن قِطْمِيرٍ
yūliju al-layla fī l-nahāri wayūliju l-nahāra fī al-layli wasakhara l-shamsa wal-qamara kullun yajrī li-ajalin musamman dhālikumu l-lahu rabbukum lahu l-mul'ku wa-alladhīna tadʿūna min dūnihi mā yamlikūna min qiṭ'mīrin
वह रात को दिन में डालता है, और दिन को रात में डालता है और उसने सूर्य और चंद्रमा को वश में कर रखा है - प्रत्येक एक नियत अवधि के लिए [अपने मार्ग पर] चल रहा है। वही अल्लाह है, तुम्हारा रब; उसी का राज्य है। और जिन्हें तुम उसके सिवा पुकारते हो, वे खजूर की गुठली के झिल्ली [जितना] भी अधिकार नहीं रखते।
35:13
क्रिया (Kriya)
يُولِجُ
वह डालता है
yūliju
संज्ञा (Sangya)
ٱلَّيْلَ
रात को
al-layla
अव्यय (Avyay)
فِى
में
संज्ञा (Sangya)
ٱلنَّهَارِ
दिन
l-nahāri
क्रिया (Kriya)
وَيُولِجُ
और वह डालता है
wayūliju
संज्ञा (Sangya)
ٱلنَّهَارَ
दिन को
l-nahāra
अव्यय (Avyay)
فِى
में
संज्ञा (Sangya)
ٱلَّيْلِ
रात
al-layli
क्रिया (Kriya)
وَسَخَّرَ
और उसने वश में किया
wasakhara
संज्ञा (Sangya)
ٱلشَّمْسَ
सूर्य को
l-shamsa
संज्ञा (Sangya)
وَٱلْقَمَرَ
और चंद्रमा को
wal-qamara
संज्ञा (Sangya)
كُلٌّۭ
प्रत्येक
kullun
क्रिया (Kriya)
يَجْرِى
चल रहा है
yajrī
संज्ञा (Sangya)
لِأَجَلٍۢ
एक अवधि के लिए
li-ajalin
संज्ञा (Sangya)
مُّسَمًّۭى ۚ
नियत
musamman
सर्वनाम (Sarvnaam)
ذَٰلِكُمُ
वही
dhālikumu
संज्ञा (Sangya)
ٱللَّهُ
अल्लाह है
l-lahu
संज्ञा (Sangya)
رَبُّكُمْ
तुम्हारा रब
rabbukum
अव्यय (Avyay)
لَهُ
उसी का
lahu
संज्ञा (Sangya)
ٱلْمُلْكُ ۚ
राज्य है
l-mul'ku
सर्वनाम (Sarvnaam)
وَٱلَّذِينَ
और जिन्हें
wa-alladhīna
क्रिया (Kriya)
تَدْعُونَ
तुम पुकारते हो
tadʿūna
अव्यय (Avyay)
مِن
सिवा
min
संज्ञा (Sangya)
دُونِهِۦ
उसके
dūnihi
अव्यय (Avyay)
مَا
नहीं
क्रिया (Kriya)
يَمْلِكُونَ
वे अधिकार रखते
yamlikūna
अव्यय (Avyay)
مِن
का
min
संज्ञा (Sangya)
قِطْمِيرٍ
खजूर की गुठली की झिल्ली
qiṭ'mīrin
إِن تَدْعُوهُمْ لَا يَسْمَعُوا۟ دُعَآءَكُمْ وَلَوْ سَمِعُوا۟ مَا ٱسْتَجَابُوا۟ لَكُمْ ۖ وَيَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ يَكْفُرُونَ بِشِرْكِكُمْ ۚ وَلَا يُنَبِّئُكَ مِثْلُ خَبِيرٍۢ
in tadʿūhum lā yasmaʿū duʿāakum walaw samiʿū mā is'tajābū lakum wayawma l-qiyāmati yakfurūna bishir'kikum walā yunabbi-uka mith'lu khabīrin
यदि तुम उन्हें पुकारो, तो वे तुम्हारी पुकार नहीं सुनते; और यदि वे सुन भी लें, तो वे तुम्हें उत्तर नहीं देंगे। और पुनरुत्थान के दिन वे तुम्हारे साहचर्य को अस्वीकार कर देंगे। और कोई भी तुम्हें [एक] जानकार की तरह सूचित नहीं कर सकता।
35:14
अव्यय (Avyay)
إِن
यदि
in
क्रिया (Kriya)
تَدْعُوهُمْ
तुम उन्हें पुकारो
tadʿūhum
अव्यय (Avyay)
لَا
नहीं
क्रिया (Kriya)
يَسْمَعُوا۟
वे सुनते
yasmaʿū
संज्ञा (Sangya)
دُعَآءَكُمْ
तुम्हारी पुकार
duʿāakum
अव्यय (Avyay)
وَلَوْ
और यदि
walaw
क्रिया (Kriya)
سَمِعُوا۟
वे सुन भी लें
samiʿū
अव्यय (Avyay)
مَا
नहीं
क्रिया (Kriya)
ٱسْتَجَابُوا۟
वे उत्तर देंगे
is'tajābū
अव्यय (Avyay)
لَكُمْ ۖ
तुम्हें
lakum
संज्ञा (Sangya)
وَيَوْمَ
और दिन
wayawma
संज्ञा (Sangya)
ٱلْقِيَـٰمَةِ
पुनरुत्थान के
l-qiyāmati
क्रिया (Kriya)
يَكْفُرُونَ
वे अस्वीकार करेंगे
yakfurūna
संज्ञा (Sangya)
بِشِرْكِكُمْ ۚ
तुम्हारे साहचर्य को
bishir'kikum
अव्यय (Avyay)
وَلَا
और कोई नहीं
walā
क्रिया (Kriya)
يُنَبِّئُكَ
तुम्हें सूचित कर सकता
yunabbi-uka
संज्ञा (Sangya)
مِثْلُ
की तरह
mith'lu
संज्ञा (Sangya)
خَبِيرٍۢ
जानकार
khabīrin
۞ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ أَنتُمُ ٱلْفُقَرَآءُ إِلَى ٱللَّهِ ۖ وَٱللَّهُ هُوَ ٱلْغَنِىُّ ٱلْحَمِيدُ
yāayyuhā l-nāsu antumu l-fuqarāu ilā l-lahi wal-lahu huwa l-ghaniyu l-ḥamīdu
ऐ मानवजाति, तुम अल्लाह के मोहताज हो, जबकि अल्लाह आवश्यकता-मुक्त, प्रशंसनीय है।
35:15
अव्यय (Avyay)
۞ يَـٰٓأَيُّهَا
yāayyuhā
संज्ञा (Sangya)
ٱلنَّاسُ
मानवजाति
l-nāsu
सर्वनाम (Sarvnaam)
أَنتُمُ
तुम
antumu
संज्ञा (Sangya)
ٱلْفُقَرَآءُ
मोहताज हो
l-fuqarāu
अव्यय (Avyay)
إِلَى
के
ilā
संज्ञा (Sangya)
ٱللَّهِ ۖ
अल्लाह
l-lahi
संज्ञा (Sangya)
وَٱللَّهُ
जबकि अल्लाह
wal-lahu
सर्वनाम (Sarvnaam)
هُوَ
वह
huwa
संज्ञा (Sangya)
ٱلْغَنِىُّ
आवश्यकता-मुक्त है
l-ghaniyu
संज्ञा (Sangya)
ٱلْحَمِيدُ
प्रशंसनीय
l-ḥamīdu
إِن يَشَأْ يُذْهِبْكُمْ وَيَأْتِ بِخَلْقٍۢ جَدِيدٍۢ
in yasha yudh'hib'kum wayati bikhalqin jadīdin
यदि वह चाहे, तो तुम्हें मिटा सकता है और एक नई सृष्टि ला सकता है।
35:16
अव्यय (Avyay)
إِن
यदि
in
क्रिया (Kriya)
يَشَأْ
वह चाहे
yasha
क्रिया (Kriya)
يُذْهِبْكُمْ
तुम्हें मिटा सकता है
yudh'hib'kum
क्रिया (Kriya)
وَيَأْتِ
और ला सकता है
wayati
संज्ञा (Sangya)
بِخَلْقٍۢ
एक सृष्टि
bikhalqin
संज्ञा (Sangya)
جَدِيدٍۢ
नई
jadīdin
وَمَا ذَٰلِكَ عَلَى ٱللَّهِ بِعَزِيزٍۢ
wamā dhālika ʿalā l-lahi biʿazīzin
और यह अल्लाह के लिए कोई कठिन नहीं है।
35:17
अव्यय (Avyay)
وَمَا
और नहीं
wamā
सर्वनाम (Sarvnaam)
ذَٰلِكَ
यह
dhālika
अव्यय (Avyay)
عَلَى
पर
ʿalā
संज्ञा (Sangya)
ٱللَّهِ
अल्लाह के लिए
l-lahi
संज्ञा (Sangya)
بِعَزِيزٍۢ
कठिन
biʿazīzin
وَلَا تَزِرُ وَازِرَةٌۭ وِزْرَ أُخْرَىٰ ۚ وَإِن تَدْعُ مُثْقَلَةٌ إِلَىٰ حِمْلِهَا لَا يُحْمَلْ مِنْهُ شَىْءٌۭ وَلَوْ كَانَ ذَا قُرْبَىٰٓ ۗ إِنَّمَا تُنذِرُ ٱلَّذِينَ يَخْشَوْنَ رَبَّهُم بِٱلْغَيْبِ وَأَقَامُوا۟ ٱلصَّلَوٰةَ ۚ وَمَن تَزَكَّىٰ فَإِنَّمَا يَتَزَكَّىٰ لِنَفْسِهِۦ ۚ وَإِلَى ٱللَّهِ ٱلْمَصِيرُ
walā taziru wāziratun wiz'ra ukh'rā wa-in tadʿu muth'qalatun ilā ḥim'lihā lā yuḥ'mal min'hu shayon walaw kāna dhā qur'bā innamā tundhiru alladhīna yakhshawna rabbahum bil-ghaybi wa-aqāmū l-ṣalata waman tazakkā fa-innamā yatazakkā linafsihi wa-ilā l-lahi l-maṣīru
और कोई बोझ उठाने वाला किसी दूसरे का बोझ नहीं उठाएगा। और यदि कोई भारी बोझ वाला [किसी दूसरे को] अपना बोझ [उठाने] के लिए बुलाए, तो उसमें से कुछ भी नहीं उठाया जाएगा, भले ही वह निकट संबंधी ही क्यों न हो। तुम केवल उन्हीं को सचेत कर सकते हो जो अनदेखे अपने रब से डरते हैं और नमाज़ क़ायम करते हैं। और जो कोई स्वयं को शुद्ध करता है, वह केवल अपनी आत्मा के [लाभ के] लिए ही शुद्ध करता है। और अल्लाह ही की ओर [अंतिम] गंतव्य है।
35:18
अव्यय (Avyay)
وَلَا
और नहीं
walā
क्रिया (Kriya)
تَزِرُ
उठाएगा
taziru
संज्ञा (Sangya)
وَازِرَةٌۭ
कोई बोझ उठाने वाला
wāziratun
संज्ञा (Sangya)
وِزْرَ
बोझ
wiz'ra
संज्ञा (Sangya)
أُخْرَىٰ ۚ
किसी दूसरे का
ukh'rā
अव्यय (Avyay)
وَإِن
और यदि
wa-in
क्रिया (Kriya)
تَدْعُ
बुलाए
tadʿu
संज्ञा (Sangya)
مُثْقَلَةٌ
कोई भारी बोझ वाला
muth'qalatun
अव्यय (Avyay)
إِلَىٰ
की ओर
ilā
संज्ञा (Sangya)
حِمْلِهَا
अपने बोझ
ḥim'lihā
अव्यय (Avyay)
لَا
नहीं
क्रिया (Kriya)
يُحْمَلْ
उठाया जाएगा
yuḥ'mal
अव्यय (Avyay)
مِنْهُ
उसमें से
min'hu
संज्ञा (Sangya)
شَىْءٌۭ
कुछ भी
shayon
अव्यय (Avyay)
وَلَوْ
भले ही
walaw
क्रिया (Kriya)
كَانَ
वह हो
kāna
संज्ञा (Sangya)
ذَا
निकट
dhā
संज्ञा (Sangya)
قُرْبَىٰٓ ۗ
संबंधी
qur'bā
अव्यय (Avyay)
إِنَّمَا
केवल
innamā
क्रिया (Kriya)
تُنذِرُ
तुम सचेत कर सकते हो
tundhiru
सर्वनाम (Sarvnaam)
ٱلَّذِينَ
उन लोगों को
alladhīna
क्रिया (Kriya)
يَخْشَوْنَ
जो डरते हैं
yakhshawna
संज्ञा (Sangya)
رَبَّهُم
अपने रब से
rabbahum
संज्ञा (Sangya)
بِٱلْغَيْبِ
अनदेखे
bil-ghaybi
क्रिया (Kriya)
وَأَقَامُوا۟
और स्थापित करते हैं
wa-aqāmū
संज्ञा (Sangya)
ٱلصَّلَوٰةَ ۚ
नमाज़
l-ṣalata
अव्यय (Avyay)
وَمَن
और जो कोई
waman
क्रिया (Kriya)
تَزَكَّىٰ
शुद्ध होता है
tazakkā
अव्यय (Avyay)
فَإِنَّمَا
तो केवल
fa-innamā
क्रिया (Kriya)
يَتَزَكَّىٰ
वह शुद्ध होता है
yatazakkā
संज्ञा (Sangya)
لِنَفْسِهِۦ ۚ
अपनी आत्मा के लिए
linafsihi
अव्यय (Avyay)
وَإِلَى
और की ओर
wa-ilā
संज्ञा (Sangya)
ٱللَّهِ
अल्लाह ही
l-lahi
संज्ञा (Sangya)
ٱلْمَصِيرُ
गंतव्य है
l-maṣīru
وَمَا يَسْتَوِى ٱلْأَعْمَىٰ وَٱلْبَصِيرُ
wamā yastawī l-aʿmā wal-baṣīru
अंधा और देखने वाला बराबर नहीं हैं,
35:19
अव्यय (Avyay)
وَمَا
और नहीं
wamā
क्रिया (Kriya)
يَسْتَوِى
बराबर हैं
yastawī
संज्ञा (Sangya)
ٱلْأَعْمَىٰ
अंधा
l-aʿmā
संज्ञा (Sangya)
وَٱلْبَصِيرُ
और देखने वाला
wal-baṣīru
وَلَا ٱلظُّلُمَـٰتُ وَلَا ٱلنُّورُ
walā l-ẓulumātu walā l-nūru
और न अंधकार और न प्रकाश,
35:20
अव्यय (Avyay)
وَلَا
और न
walā
संज्ञा (Sangya)
ٱلظُّلُمَـٰتُ
अंधकार
l-ẓulumātu
अव्यय (Avyay)
وَلَا
और न
walā
संज्ञा (Sangya)
ٱلنُّورُ
प्रकाश
l-nūru
وَلَا ٱلظِّلُّ وَلَا ٱلْحَرُورُ
walā l-ẓilu walā l-ḥarūru
और न छाया और न गर्मी,
35:21
अव्यय (Avyay)
وَلَا
और न
walā
संज्ञा (Sangya)
ٱلظِّلُّ
छाया
l-ẓilu
अव्यय (Avyay)
وَلَا
और न
walā
संज्ञा (Sangya)
ٱلْحَرُورُ
गर्मी
l-ḥarūru
وَمَا يَسْتَوِى ٱلْأَحْيَآءُ وَلَا ٱلْأَمْوَٰتُ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ يُسْمِعُ مَن يَشَآءُ ۖ وَمَآ أَنتَ بِمُسْمِعٍۢ مَّن فِى ٱلْقُبُورِ
wamā yastawī l-aḥyāu walā l-amwātu inna l-laha yus'miʿu man yashāu wamā anta bimus'miʿin man fī l-qubūri
और जीवित और मृत बराबर नहीं हैं। निश्चय ही अल्लाह जिसे चाहता है उसे सुनाता है, लेकिन तुम उन लोगों को नहीं सुना सकते जो कब्रों में हैं।
35:22
अव्यय (Avyay)
وَمَا
और नहीं
wamā
क्रिया (Kriya)
يَسْتَوِى
बराबर हैं
yastawī
संज्ञा (Sangya)
ٱلْأَحْيَآءُ
जीवित
l-aḥyāu
अव्यय (Avyay)
وَلَا
और न
walā
संज्ञा (Sangya)
ٱلْأَمْوَٰتُ ۚ
मृत
l-amwātu
अव्यय (Avyay)
إِنَّ
निश्चय ही
inna
संज्ञा (Sangya)
ٱللَّهَ
अल्लाह
l-laha
क्रिया (Kriya)
يُسْمِعُ
सुनाता है
yus'miʿu
सर्वनाम (Sarvnaam)
مَن
जिसे
man
क्रिया (Kriya)
يَشَآءُ ۖ
वह चाहता है
yashāu
अव्यय (Avyay)
وَمَآ
और नहीं
wamā
सर्वनाम (Sarvnaam)
أَنتَ
तुम
anta
संज्ञा (Sangya)
بِمُسْمِعٍۢ
सुना सकते
bimus'miʿin
सर्वनाम (Sarvnaam)
مَّن
उन्हें जो
man
अव्यय (Avyay)
فِى
में हैं
संज्ञा (Sangya)
ٱلْقُبُورِ
कब्रों
l-qubūri
إِنْ أَنتَ إِلَّا نَذِيرٌ
in anta illā nadhīrun
तुम, [ऐ मुहम्मद], एक सचेतक के सिवा कुछ नहीं हो।
35:23
अव्यय (Avyay)
إِنْ
नहीं हो
in
सर्वनाम (Sarvnaam)
أَنتَ
तुम
anta
अव्यय (Avyay)
إِلَّا
सिवाय
illā
संज्ञा (Sangya)
نَذِيرٌ
एक सचेतक के
nadhīrun
إِنَّآ أَرْسَلْنَـٰكَ بِٱلْحَقِّ بَشِيرًۭا وَنَذِيرًۭا ۚ وَإِن مِّنْ أُمَّةٍ إِلَّا خَلَا فِيهَا نَذِيرٌۭ
innā arsalnāka bil-ḥaqi bashīran wanadhīran wa-in min ummatin illā khalā fīhā nadhīrun
निश्चय ही, हमने तुम्हें सत्य के साथ शुभ समाचार देने वाला और सचेतक बनाकर भेजा है। और कोई भी राष्ट्र ऐसा नहीं हुआ जिसमें कोई सचेतक न गुज़रा हो।
35:24
अव्यय (Avyay)
إِنَّآ
निश्चय ही, हमने
innā
क्रिया (Kriya)
أَرْسَلْنَـٰكَ
तुम्हें भेजा है
arsalnāka
संज्ञा (Sangya)
بِٱلْحَقِّ
सत्य के साथ
bil-ḥaqi
संज्ञा (Sangya)
بَشِيرًۭا
शुभ समाचार देने वाला
bashīran
संज्ञा (Sangya)
وَنَذِيرًۭا ۚ
और सचेतक
wanadhīran
अव्यय (Avyay)
وَإِن
और नहीं
wa-in
अव्यय (Avyay)
مِّنْ
कोई
min
संज्ञा (Sangya)
أُمَّةٍ
राष्ट्र
ummatin
अव्यय (Avyay)
إِلَّا
मगर
illā
क्रिया (Kriya)
خَلَا
गुज़रा हो
khalā
अव्यय (Avyay)
فِيهَا
उसमें
fīhā
संज्ञा (Sangya)
نَذِيرٌۭ
कोई सचेतक
nadhīrun
وَإِن يُكَذِّبُوكَ فَقَدْ كَذَّبَ ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ جَآءَتْهُمْ رُسُلُهُم بِٱلْبَيِّنَـٰتِ وَبِٱلزُّبُرِ وَبِٱلْكِتَـٰبِ ٱلْمُنِيرِ
wa-in yukadhibūka faqad kadhaba alladhīna min qablihim jāathum rusuluhum bil-bayināti wabil-zuburi wabil-kitābi l-munīri
और अगर वे तुम्हें झुठलाते हैं - तो उनसे पहले के लोगों ने भी झुठलाया था। उनके रसूल उनके पास स्पष्ट प्रमाणों और धर्मग्रंथों और प्रकाशमान किताब के साथ आए थे।
35:25
अव्यय (Avyay)
وَإِن
और अगर
wa-in
क्रिया (Kriya)
يُكَذِّبُوكَ
वे तुम्हें झुठलाते हैं
yukadhibūka
अव्यय (Avyay)
فَقَدْ
तो निश्चय ही
faqad
क्रिया (Kriya)
كَذَّبَ
झुठलाया था
kadhaba
सर्वनाम (Sarvnaam)
ٱلَّذِينَ
उन लोगों ने
alladhīna
अव्यय (Avyay)
مِن
से
min
संज्ञा (Sangya)
قَبْلِهِمْ
उनसे पहले
qablihim
क्रिया (Kriya)
جَآءَتْهُمْ
उनके पास आए
jāathum
संज्ञा (Sangya)
رُسُلُهُم
उनके रसूल
rusuluhum
संज्ञा (Sangya)
بِٱلْبَيِّنَـٰتِ
स्पष्ट प्रमाणों के साथ
bil-bayināti
संज्ञा (Sangya)
وَبِٱلزُّبُرِ
और धर्मग्रंथों के साथ
wabil-zuburi
संज्ञा (Sangya)
وَبِٱلْكِتَـٰبِ
और किताब के साथ
wabil-kitābi
संज्ञा (Sangya)
ٱلْمُنِيرِ
प्रकाशमान
l-munīri
ثُمَّ أَخَذْتُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ ۖ فَكَيْفَ كَانَ نَكِيرِ
thumma akhadhtu alladhīna kafarū fakayfa kāna nakīri
फिर मैंने उन लोगों को पकड़ लिया जिन्होंने अविश्वास किया, और मेरा तिरस्कार कैसा [भयानक] था।
35:26
अव्यय (Avyay)
ثُمَّ
फिर
thumma
क्रिया (Kriya)
أَخَذْتُ
मैंने पकड़ लिया
akhadhtu
सर्वनाम (Sarvnaam)
ٱلَّذِينَ
उन लोगों को
alladhīna
क्रिया (Kriya)
كَفَرُوا۟ ۖ
जिन्होंने अविश्वास किया
kafarū
अव्यय (Avyay)
فَكَيْفَ
और कैसा
fakayfa
क्रिया (Kriya)
كَانَ
था
kāna
संज्ञा (Sangya)
نَكِيرِ
मेरा तिरस्कार
nakīri
أَلَمْ تَرَ أَنَّ ٱللَّهَ أَنزَلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءًۭ فَأَخْرَجْنَا بِهِۦ ثَمَرَٰتٍۢ مُّخْتَلِفًا أَلْوَٰنُهَا ۚ وَمِنَ ٱلْجِبَالِ جُدَدٌۢ بِيضٌۭ وَحُمْرٌۭ مُّخْتَلِفٌ أَلْوَٰنُهَا وَغَرَابِيبُ سُودٌۭ
alam tara anna l-laha anzala mina l-samāi māan fa-akhrajnā bihi thamarātin mukh'talifan alwānuhā wamina l-jibāli judadun bīḍun waḥum'run mukh'talifun alwānuhā wagharābību sūdun
क्या तुम नहीं देखते कि अल्लाह आकाश से वर्षा करता है, और हम उससे विभिन्न रंगों के फल उत्पन्न करते हैं? और पहाड़ों में सफेद और लाल रंग के विभिन्न रंगों के और [कुछ] गहरे काले रंग के रास्ते हैं।
35:27
अव्यय (Avyay)
أَلَمْ
क्या नहीं
alam
क्रिया (Kriya)
تَرَ
तुम देखते
tara
अव्यय (Avyay)
أَنَّ
कि
anna
संज्ञा (Sangya)
ٱللَّهَ
अल्लाह
l-laha
क्रिया (Kriya)
أَنزَلَ
भेजता है
anzala
अव्यय (Avyay)
مِنَ
से
mina
संज्ञा (Sangya)
ٱلسَّمَآءِ
आकाश
l-samāi
संज्ञा (Sangya)
مَآءًۭ
पानी
māan
क्रिया (Kriya)
فَأَخْرَجْنَا
फिर हम उत्पन्न करते हैं
fa-akhrajnā
अव्यय (Avyay)
بِهِۦ
उससे
bihi
संज्ञा (Sangya)
ثَمَرَٰتٍۢ
फल
thamarātin
संज्ञा (Sangya)
مُّخْتَلِفًا
विभिन्न
mukh'talifan
संज्ञा (Sangya)
أَلْوَٰنُهَا ۚ
उनके रंग
alwānuhā
अव्यय (Avyay)
وَمِنَ
और में
wamina
संज्ञा (Sangya)
ٱلْجِبَالِ
पहाड़ों
l-jibāli
संज्ञा (Sangya)
جُدَدٌۢ
रास्ते हैं
judadun
संज्ञा (Sangya)
بِيضٌۭ
सफेद
bīḍun
संज्ञा (Sangya)
وَحُمْرٌۭ
और लाल
waḥum'run
संज्ञा (Sangya)
مُّخْتَلِفٌ
विभिन्न
mukh'talifun
संज्ञा (Sangya)
أَلْوَٰنُهَا
उनके रंग
alwānuhā
संज्ञा (Sangya)
وَغَرَابِيبُ
और गहरे
wagharābību
संज्ञा (Sangya)
سُودٌۭ
काले
sūdun
وَمِنَ ٱلنَّاسِ وَٱلدَّوَآبِّ وَٱلْأَنْعَـٰمِ مُخْتَلِفٌ أَلْوَٰنُهُۥ كَذَٰلِكَ ۗ إِنَّمَا يَخْشَى ٱللَّهَ مِنْ عِبَادِهِ ٱلْعُلَمَـٰٓؤُا۟ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ عَزِيزٌ غَفُورٌ
wamina l-nāsi wal-dawābi wal-anʿāmi mukh'talifun alwānuhu kadhālika innamā yakhshā l-laha min ʿibādihi l-ʿulamāu inna l-laha ʿazīzun ghafūrun
और मनुष्यों और चलने वाले प्राणियों और चरने वाले पशुओं में भी इसी प्रकार विभिन्न रंग हैं। अल्लाह से उसके दासों में से केवल वही डरते हैं जो ज्ञानी हैं। निश्चय ही अल्लाह प्रभुत्वशाली, क्षमाशील है।
35:28
अव्यय (Avyay)
وَمِنَ
और में
wamina
संज्ञा (Sangya)
ٱلنَّاسِ
मनुष्यों
l-nāsi
संज्ञा (Sangya)
وَٱلدَّوَآبِّ
और चलने वाले प्राणियों
wal-dawābi
संज्ञा (Sangya)
وَٱلْأَنْعَـٰمِ
और पशुओं में
wal-anʿāmi
संज्ञा (Sangya)
مُخْتَلِفٌ
विभिन्न हैं
mukh'talifun
संज्ञा (Sangya)
أَلْوَٰنُهُۥ
उनके रंग
alwānuhu
अव्यय (Avyay)
كَذَٰلِكَ ۗ
इसी प्रकार
kadhālika
अव्यय (Avyay)
إِنَّمَا
केवल
innamā
क्रिया (Kriya)
يَخْشَى
डरते हैं
yakhshā
संज्ञा (Sangya)
ٱللَّهَ
अल्लाह से
l-laha
अव्यय (Avyay)
مِنْ
में से
min
संज्ञा (Sangya)
عِبَادِهِ
उसके दासों
ʿibādihi
संज्ञा (Sangya)
ٱلْعُلَمَـٰٓؤُا۟ ۗ
ज्ञानी
l-ʿulamāu
अव्यय (Avyay)
إِنَّ
निश्चय ही
inna
संज्ञा (Sangya)
ٱللَّهَ
अल्लाह
l-laha
संज्ञा (Sangya)
عَزِيزٌ
प्रभुत्वशाली है
ʿazīzun
संज्ञा (Sangya)
غَفُورٌ
क्षमाशील
ghafūrun
إِنَّ ٱلَّذِينَ يَتْلُونَ كِتَـٰبَ ٱللَّهِ وَأَقَامُوا۟ ٱلصَّلَوٰةَ وَأَنفَقُوا۟ مِمَّا رَزَقْنَـٰهُمْ سِرًّۭا وَعَلَانِيَةًۭ يَرْجُونَ تِجَـٰرَةًۭ لَّن تَبُورَ
inna alladhīna yatlūna kitāba l-lahi wa-aqāmū l-ṣalata wa-anfaqū mimmā razaqnāhum sirran waʿalāniyatan yarjūna tijāratan lan tabūra
निश्चय ही, जो लोग अल्लाह की किताब का पाठ करते हैं और नमाज़ क़ायम करते हैं और जो कुछ हमने उन्हें प्रदान किया है उसमें से गुप्त और प्रकट रूप से [उसके मार्ग में] ख़र्च करते हैं, [वे] एक ऐसे सौदे की उम्मीद [कर सकते हैं] जो कभी नष्ट नहीं होगा -
35:29
अव्यय (Avyay)
إِنَّ
निश्चय ही
inna
सर्वनाम (Sarvnaam)
ٱلَّذِينَ
जो लोग
alladhīna
क्रिया (Kriya)
يَتْلُونَ
पाठ करते हैं
yatlūna
संज्ञा (Sangya)
كِتَـٰبَ
किताब का
kitāba
संज्ञा (Sangya)
ٱللَّهِ
अल्लाह की
l-lahi
क्रिया (Kriya)
وَأَقَامُوا۟
और स्थापित करते हैं
wa-aqāmū
संज्ञा (Sangya)
ٱلصَّلَوٰةَ
नमाज़
l-ṣalata
क्रिया (Kriya)
وَأَنفَقُوا۟
और ख़र्च करते हैं
wa-anfaqū
अव्यय (Avyay)
مِمَّا
उसमें से जो
mimmā
क्रिया (Kriya)
رَزَقْنَـٰهُمْ
हमने उन्हें प्रदान किया
razaqnāhum
संज्ञा (Sangya)
سِرًّۭا
गुप्त रूप से
sirran
संज्ञा (Sangya)
وَعَلَانِيَةًۭ
और प्रकट रूप से
waʿalāniyatan
क्रिया (Kriya)
يَرْجُونَ
उम्मीद करते हैं
yarjūna
संज्ञा (Sangya)
تِجَـٰرَةًۭ
एक सौदे की
tijāratan
अव्यय (Avyay)
لَّن
कभी नहीं
lan
क्रिया (Kriya)
تَبُورَ
नष्ट होगा
tabūra
لِيُوَفِّيَهُمْ أُجُورَهُمْ وَيَزِيدَهُم مِّن فَضْلِهِۦٓ ۚ إِنَّهُۥ غَفُورٌۭ شَكُورٌۭ
liyuwaffiyahum ujūrahum wayazīdahum min faḍlihi innahu ghafūrun shakūrun
ताकि वह उन्हें उनके प्रतिफल पूरे-पूरे दे और अपनी कृपा से उन्हें और अधिक दे। निश्चय ही वह क्षमाशील और गुणग्राहक है।
35:30
क्रिया (Kriya)
لِيُوَفِّيَهُمْ
ताकि वह उन्हें पूरे-पूरे दे
liyuwaffiyahum
संज्ञा (Sangya)
أُجُورَهُمْ
उनके प्रतिफल
ujūrahum
क्रिया (Kriya)
وَيَزِيدَهُم
और उन्हें और अधिक दे
wayazīdahum
अव्यय (Avyay)
مِّن
से
min
संज्ञा (Sangya)
فَضْلِهِۦٓ ۚ
अपनी कृपा
faḍlihi
अव्यय (Avyay)
إِنَّهُۥ
निश्चय ही वह
innahu
संज्ञा (Sangya)
غَفُورٌۭ
क्षमाशील है
ghafūrun
संज्ञा (Sangya)
شَكُورٌۭ
गुणग्राहक
shakūrun
وَٱلَّذِىٓ أَوْحَيْنَآ إِلَيْكَ مِنَ ٱلْكِتَـٰبِ هُوَ ٱلْحَقُّ مُصَدِّقًۭا لِّمَا بَيْنَ يَدَيْهِ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ بِعِبَادِهِۦ لَخَبِيرٌۢ بَصِيرٌۭ
wa-alladhī awḥaynā ilayka mina l-kitābi huwa l-ḥaqu muṣaddiqan limā bayna yadayhi inna l-laha biʿibādihi lakhabīrun baṣīrun
और जो कुछ हमने तुम पर किताब में से प्रकाशित किया है, वही सत्य है, जो उससे पहले की पुष्टि करता है। निश्चय ही अल्लाह अपने बन्दों से अवगत और देखने वाला है।
35:31
सर्वनाम (Sarvnaam)
وَٱلَّذِىٓ
और जो कुछ
wa-alladhī
क्रिया (Kriya)
أَوْحَيْنَآ
हमने प्रकाशित किया
awḥaynā
अव्यय (Avyay)
إِلَيْكَ
तुम पर
ilayka
अव्यय (Avyay)
مِنَ
में से
mina
संज्ञा (Sangya)
ٱلْكِتَـٰبِ
किताब
l-kitābi
सर्वनाम (Sarvnaam)
هُوَ
वही
huwa
संज्ञा (Sangya)
ٱلْحَقُّ
सत्य है
l-ḥaqu
संज्ञा (Sangya)
مُصَدِّقًۭا
पुष्टि करता है
muṣaddiqan
अव्यय (Avyay)
لِّمَا
उसकी जो
limā
संज्ञा (Sangya)
بَيْنَ
पहले था
bayna
संज्ञा (Sangya)
يَدَيْهِ ۗ
उससे
yadayhi
अव्यय (Avyay)
إِنَّ
निश्चय ही
inna
संज्ञा (Sangya)
ٱللَّهَ
अल्लाह
l-laha
संज्ञा (Sangya)
بِعِبَادِهِۦ
अपने बन्दों से
biʿibādihi
संज्ञा (Sangya)
لَخَبِيرٌۢ
अवगत है
lakhabīrun
संज्ञा (Sangya)
بَصِيرٌۭ
देखने वाला
baṣīrun
ثُمَّ أَوْرَثْنَا ٱلْكِتَـٰبَ ٱلَّذِينَ ٱصْطَفَيْنَا مِنْ عِبَادِنَا ۖ فَمِنْهُمْ ظَالِمٌۭ لِّنَفْسِهِۦ وَمِنْهُم مُّقْتَصِدٌۭ وَمِنْهُمْ سَابِقٌۢ بِٱلْخَيْرَٰتِ بِإِذْنِ ٱللَّهِ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ ٱلْفَضْلُ ٱلْكَبِيرُ
thumma awrathnā l-kitāba alladhīna iṣ'ṭafaynā min ʿibādinā famin'hum ẓālimun linafsihi wamin'hum muq'taṣidun wamin'hum sābiqun bil-khayrāti bi-idh'ni l-lahi dhālika huwa l-faḍlu l-kabīru
फिर हमने किताब का वारिस उन्हें बनाया जिन्हें हमने अपने बन्दों में से चुना; और उनमें से कोई है जो अपने आप पर ज़ुल्म करता है, और उनमें से कोई है जो मध्यम है, और उनमें से कोई है जो अल्लाह की अनुमति से अच्छे कामों में सबसे आगे है। यही [विरासत] बड़ी कृपा है।
35:32
अव्यय (Avyay)
ثُمَّ
फिर
thumma
क्रिया (Kriya)
أَوْرَثْنَا
हमने वारिस बनाया
awrathnā
संज्ञा (Sangya)
ٱلْكِتَـٰبَ
किताब का
l-kitāba
सर्वनाम (Sarvnaam)
ٱلَّذِينَ
उन्हें जिन्हें
alladhīna
क्रिया (Kriya)
ٱصْطَفَيْنَا
हमने चुना
iṣ'ṭafaynā
अव्यय (Avyay)
مِنْ
में से
min
संज्ञा (Sangya)
عِبَادِنَا ۖ
अपने बन्दों
ʿibādinā
अव्यय (Avyay)
فَمِنْهُمْ
और उनमें से
famin'hum
संज्ञा (Sangya)
ظَالِمٌۭ
ज़ुल्म करने वाला
ẓālimun
संज्ञा (Sangya)
لِّنَفْسِهِۦ
अपने आप पर
linafsihi
अव्यय (Avyay)
وَمِنْهُم
और उनमें से
wamin'hum
संज्ञा (Sangya)
مُّقْتَصِدٌۭ
मध्यम है
muq'taṣidun
अव्यय (Avyay)
وَمِنْهُمْ
और उनमें से
wamin'hum
संज्ञा (Sangya)
سَابِقٌۢ
सबसे आगे है
sābiqun
संज्ञा (Sangya)
بِٱلْخَيْرَٰتِ
अच्छे कामों में
bil-khayrāti
संज्ञा (Sangya)
بِإِذْنِ
की अनुमति से
bi-idh'ni
संज्ञा (Sangya)
ٱللَّهِ ۚ
अल्लाह
l-lahi
सर्वनाम (Sarvnaam)
ذَٰلِكَ
यही
dhālika
सर्वनाम (Sarvnaam)
هُوَ
है
huwa
संज्ञा (Sangya)
ٱلْفَضْلُ
कृपा
l-faḍlu
संज्ञा (Sangya)
ٱلْكَبِيرُ
बड़ी
l-kabīru
جَنَّـٰتُ عَدْنٍۢ يَدْخُلُونَهَا يُحَلَّوْنَ فِيهَا مِنْ أَسَاوِرَ مِن ذَهَبٍۢ وَلُؤْلُؤًۭا ۖ وَلِبَاسُهُمْ فِيهَا حَرِيرٌۭ
jannātu ʿadnin yadkhulūnahā yuḥallawna fīhā min asāwira min dhahabin walu'lu-an walibāsuhum fīhā ḥarīrun
सदाबहार निवास के बाग; वे उनमें प्रवेश करेंगे। उन्हें वहां सोने और मोती के कंगन पहनाए जाएंगे, और वहां उनके वस्त्र रेशम के होंगे।
35:33
संज्ञा (Sangya)
جَنَّـٰتُ
बाग
jannātu
संज्ञा (Sangya)
عَدْنٍۢ
सदाबहार निवास के
ʿadnin
क्रिया (Kriya)
يَدْخُلُونَهَا
वे उनमें प्रवेश करेंगे
yadkhulūnahā
क्रिया (Kriya)
يُحَلَّوْنَ
उन्हें पहनाए जाएंगे
yuḥallawna
अव्यय (Avyay)
فِيهَا
वहां
fīhā
अव्यय (Avyay)
مِنْ
से
min
संज्ञा (Sangya)
أَسَاوِرَ
कंगन
asāwira
अव्यय (Avyay)
مِن
के
min
संज्ञा (Sangya)
ذَهَبٍۢ
सोने
dhahabin
संज्ञा (Sangya)
وَلُؤْلُؤًۭا ۖ
और मोती
walu'lu-an
संज्ञा (Sangya)
وَلِبَاسُهُمْ
और उनके वस्त्र
walibāsuhum
अव्यय (Avyay)
فِيهَا
वहां
fīhā
संज्ञा (Sangya)
حَرِيرٌۭ
रेशम के होंगे
ḥarīrun
وَقَالُوا۟ ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ ٱلَّذِىٓ أَذْهَبَ عَنَّا ٱلْحَزَنَ ۖ إِنَّ رَبَّنَا لَغَفُورٌۭ شَكُورٌ
waqālū l-ḥamdu lillahi alladhī adhhaba ʿannā l-ḥazana inna rabbanā laghafūrun shakūrun
और वे कहेंगे, 'अल्लाह की प्रशंसा हो, जिसने हमसे [सारा] दुःख दूर कर दिया। निश्चय ही हमारा रब क्षमा करने वाला और गुणग्राहक है -'
35:34
क्रिया (Kriya)
وَقَالُوا۟
और वे कहेंगे
waqālū
संज्ञा (Sangya)
ٱلْحَمْدُ
प्रशंसा हो
l-ḥamdu
संज्ञा (Sangya)
لِلَّهِ
अल्लाह की
lillahi
सर्वनाम (Sarvnaam)
ٱلَّذِىٓ
जिसने
alladhī
क्रिया (Kriya)
أَذْهَبَ
दूर कर दिया
adhhaba
अव्यय (Avyay)
عَنَّا
हमसे
ʿannā
संज्ञा (Sangya)
ٱلْحَزَنَ ۖ
दुःख
l-ḥazana
अव्यय (Avyay)
إِنَّ
निश्चय ही
inna
संज्ञा (Sangya)
رَبَّنَا
हमारा रब
rabbanā
संज्ञा (Sangya)
لَغَفُورٌۭ
क्षमा करने वाला
laghafūrun
संज्ञा (Sangya)
شَكُورٌ
गुणग्राहक है
shakūrun
ٱلَّذِىٓ أَحَلَّنَا دَارَ ٱلْمُقَامَةِ مِن فَضْلِهِۦ لَا يَمَسُّنَا فِيهَا نَصَبٌۭ وَلَا يَمَسُّنَا فِيهَا لُغُوبٌۭ
alladhī aḥallanā dāra l-muqāmati min faḍlihi lā yamassunā fīhā naṣabun walā yamassunā fīhā lughūbun
'वह जिसने अपनी कृपा से हमें अनन्त काल के घर में बसाया है। उसमें हमें न कोई थकान छूती है, और न उसमें हमें [मन की] थकावट छूती है।'
35:35
सर्वनाम (Sarvnaam)
ٱلَّذِىٓ
वह जिसने
alladhī
क्रिया (Kriya)
أَحَلَّنَا
हमें बसाया
aḥallanā
संज्ञा (Sangya)
دَارَ
घर में
dāra
संज्ञा (Sangya)
ٱلْمُقَامَةِ
अनन्त काल के
l-muqāmati
अव्यय (Avyay)
مِن
से
min
संज्ञा (Sangya)
فَضْلِهِۦ
अपनी कृपा
faḍlihi
अव्यय (Avyay)
لَا
नहीं
क्रिया (Kriya)
يَمَسُّنَا
हमें छूती
yamassunā
अव्यय (Avyay)
فِيهَا
उसमें
fīhā
संज्ञा (Sangya)
نَصَبٌۭ
कोई थकान
naṣabun
अव्यय (Avyay)
وَلَا
और न
walā
क्रिया (Kriya)
يَمَسُّنَا
हमें छूती
yamassunā
अव्यय (Avyay)
فِيهَا
उसमें
fīhā
संज्ञा (Sangya)
لُغُوبٌۭ
थकावट
lughūbun
وَٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لَهُمْ نَارُ جَهَنَّمَ لَا يُقْضَىٰ عَلَيْهِمْ فَيَمُوتُوا۟ وَلَا يُخَفَّفُ عَنْهُم مِّنْ عَذَابِهَا ۚ كَذَٰلِكَ نَجْزِى كُلَّ كَفُورٍۢ
wa-alladhīna kafarū lahum nāru jahannama lā yuq'ḍā ʿalayhim fayamūtū walā yukhaffafu ʿanhum min ʿadhābihā kadhālika najzī kulla kafūrin
और जिन लोगों ने अविश्वास किया, उनके लिए नरक की आग होगी। [मृत्यु] उनके लिए तय नहीं की गई है ताकि वे मर जाएं, और न ही उनके लिए उसकी यातना हल्की की जाएगी। इस प्रकार हम प्रत्येक कृतघ्न को प्रतिफल देते हैं।
35:36
सर्वनाम (Sarvnaam)
وَٱلَّذِينَ
और जिन लोगों ने
wa-alladhīna
क्रिया (Kriya)
كَفَرُوا۟
अविश्वास किया
kafarū
अव्यय (Avyay)
لَهُمْ
उनके लिए
lahum
संज्ञा (Sangya)
نَارُ
आग होगी
nāru
संज्ञा (Sangya)
جَهَنَّمَ
नरक की
jahannama
अव्यय (Avyay)
لَا
नहीं
क्रिया (Kriya)
يُقْضَىٰ
तय की गई है
yuq'ḍā
अव्यय (Avyay)
عَلَيْهِمْ
उनके लिए
ʿalayhim
क्रिया (Kriya)
فَيَمُوتُوا۟
ताकि वे मर जाएं
fayamūtū
अव्यय (Avyay)
وَلَا
और न
walā
क्रिया (Kriya)
يُخَفَّفُ
हल्की की जाएगी
yukhaffafu
अव्यय (Avyay)
عَنْهُم
उनके लिए
ʿanhum
अव्यय (Avyay)
مِّنْ
से
min
संज्ञा (Sangya)
عَذَابِهَا ۚ
उसकी यातना
ʿadhābihā
अव्यय (Avyay)
كَذَٰلِكَ
इस प्रकार
kadhālika
क्रिया (Kriya)
نَجْزِى
हम प्रतिफल देते हैं
najzī
संज्ञा (Sangya)
كُلَّ
प्रत्येक
kulla
संज्ञा (Sangya)
كَفُورٍۢ
कृतघ्न को
kafūrin
وَهُمْ يَصْطَرِخُونَ فِيهَا رَبَّنَآ أَخْرِجْنَا نَعْمَلْ صَـٰلِحًا غَيْرَ ٱلَّذِى كُنَّا نَعْمَلُ ۚ أَوَلَمْ نُعَمِّرْكُم مَّا يَتَذَكَّرُ فِيهِ مَن تَذَكَّرَ وَجَآءَكُمُ ٱلنَّذِيرُ ۖ فَذُوقُوا۟ فَمَا لِلظَّـٰلِمِينَ مِن نَّصِيرٍ
wahum yaṣṭarikhūna fīhā rabbanā akhrij'nā naʿmal ṣāliḥan ghayra alladhī kunnā naʿmalu awalam nuʿammir'kum mā yatadhakkaru fīhi man tadhakkara wajāakumu l-nadhīru fadhūqū famā lilẓẓālimīna min naṣīrin
और वे उसमें चिल्लाएँगे, "हमारे रब, हमें निकाल दे; हम वह अच्छा काम करेंगे - जो हम करते थे उसके अलावा!" लेकिन क्या हमने तुम्हें इतनी लंबी आयु नहीं दी कि जो कोई याद करना चाहता, वह उसमें याद कर लेता, और तुम्हारे पास सचेतक आ गया था? तो [सजा का] स्वाद चखो, क्योंकि ज़ालिमों का कोई सहायक नहीं है।
35:37
सर्वनाम (Sarvnaam)
وَهُمْ
और वे
wahum
क्रिया (Kriya)
يَصْطَرِخُونَ
चिल्लाएँगे
yaṣṭarikhūna
अव्यय (Avyay)
فِيهَا
उसमें
fīhā
संज्ञा (Sangya)
رَبَّنَآ
हमारे रब
rabbanā
क्रिया (Kriya)
أَخْرِجْنَا
हमें निकाल दे
akhrij'nā
क्रिया (Kriya)
نَعْمَلْ
हम करेंगे
naʿmal
संज्ञा (Sangya)
صَـٰلِحًا
अच्छा काम
ṣāliḥan
संज्ञा (Sangya)
غَيْرَ
अलावा
ghayra
सर्वनाम (Sarvnaam)
ٱلَّذِى
उसके जो
alladhī
क्रिया (Kriya)
كُنَّا
हम करते थे
kunnā
क्रिया (Kriya)
نَعْمَلُ ۚ
करते थे
naʿmalu
अव्यय (Avyay)
أَوَلَمْ
क्या हमने नहीं
awalam
क्रिया (Kriya)
نُعَمِّرْكُم
तुम्हें आयु दी
nuʿammir'kum
सर्वनाम (Sarvnaam)
مَّا
कि
क्रिया (Kriya)
يَتَذَكَّرُ
याद करता
yatadhakkaru
अव्यय (Avyay)
فِيهِ
उसमें
fīhi
सर्वनाम (Sarvnaam)
مَن
जो कोई
man
क्रिया (Kriya)
تَذَكَّرَ
याद करना चाहता
tadhakkara
क्रिया (Kriya)
وَجَآءَكُمُ
और तुम्हारे पास आया
wajāakumu
संज्ञा (Sangya)
ٱلنَّذِيرُ ۖ
सचेतक
l-nadhīru
क्रिया (Kriya)
فَذُوقُوا۟
तो चखो
fadhūqū
अव्यय (Avyay)
فَمَا
तो नहीं है
famā
संज्ञा (Sangya)
لِلظَّـٰلِمِينَ
ज़ालिमों का
lilẓẓālimīna
अव्यय (Avyay)
مِن
कोई
min
संज्ञा (Sangya)
نَّصِيرٍ
सहायक
naṣīrin
إِنَّ ٱللَّهَ عَـٰلِمُ غَيْبِ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۚ إِنَّهُۥ عَلِيمٌۢ بِذَاتِ ٱلصُّدُورِ
inna l-laha ʿālimu ghaybi l-samāwāti wal-arḍi innahu ʿalīmun bidhāti l-ṣudūri
निश्चय ही, अल्लाह आकाशों और पृथ्वी के अनदेखे का जानने वाला है। निश्चय ही, वह सीनों के भीतर जो कुछ है, उसका जानने वाला है।
35:38
अव्यय (Avyay)
إِنَّ
निश्चय ही
inna
संज्ञा (Sangya)
ٱللَّهَ
अल्लाह
l-laha
संज्ञा (Sangya)
عَـٰلِمُ
जानने वाला
ʿālimu
संज्ञा (Sangya)
غَيْبِ
अनदेखे का
ghaybi
संज्ञा (Sangya)
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आकाशों
l-samāwāti
संज्ञा (Sangya)
وَٱلْأَرْضِ ۚ
और पृथ्वी के
wal-arḍi
अव्यय (Avyay)
إِنَّهُۥ
निश्चय ही, वह
innahu
संज्ञा (Sangya)
عَلِيمٌۢ
जानने वाला है
ʿalīmun
संज्ञा (Sangya)
بِذَاتِ
जो कुछ
bidhāti
संज्ञा (Sangya)
ٱلصُّدُورِ
सीनों के भीतर है
l-ṣudūri
هُوَ ٱلَّذِى جَعَلَكُمْ خَلَـٰٓئِفَ فِى ٱلْأَرْضِ ۚ فَمَن كَفَرَ فَعَلَيْهِ كُفْرُهُۥ ۖ وَلَا يَزِيدُ ٱلْكَـٰفِرِينَ كُفْرُهُمْ عِندَ رَبِّهِمْ إِلَّا مَقْتًۭا ۖ وَلَا يَزِيدُ ٱلْكَـٰفِرِينَ كُفْرُهُمْ إِلَّا خَسَارًۭا
huwa alladhī jaʿalakum khalāifa fī l-arḍi faman kafara faʿalayhi kuf'ruhu walā yazīdu l-kāfirīna kuf'ruhum ʿinda rabbihim illā maqtan walā yazīdu l-kāfirīna kuf'ruhum illā khasāran
वही है जिसने तुम्हें धरती पर उत्तराधिकारी बनाया है। और जो कोई अविश्वास करता है - उसी पर उसके अविश्वास का [परिणाम] होगा। और अविश्वासियों का अविश्वास उनके रब की दृष्टि में घृणा के सिवा कुछ नहीं बढ़ाता; और अविश्वासियों का अविश्वास उन्हें हानि के सिवा कुछ नहीं बढ़ाता।
35:39
सर्वनाम (Sarvnaam)
هُوَ
वही है
huwa
सर्वनाम (Sarvnaam)
ٱلَّذِى
जिसने
alladhī
क्रिया (Kriya)
جَعَلَكُمْ
तुम्हें बनाया
jaʿalakum
संज्ञा (Sangya)
خَلَـٰٓئِفَ
उत्तराधिकारी
khalāifa
अव्यय (Avyay)
فِى
में
संज्ञा (Sangya)
ٱلْأَرْضِ ۚ
धरती
l-arḍi
अव्यय (Avyay)
فَمَن
और जो कोई
faman
क्रिया (Kriya)
كَفَرَ
अविश्वास करता है
kafara
अव्यय (Avyay)
فَعَلَيْهِ
तो उसी पर
faʿalayhi
संज्ञा (Sangya)
كُفْرُهُۥ ۖ
उसका अविश्वास है
kuf'ruhu
अव्यय (Avyay)
وَلَا
और नहीं
walā
क्रिया (Kriya)
يَزِيدُ
बढ़ाता
yazīdu
संज्ञा (Sangya)
ٱلْكَـٰفِرِينَ
अविश्वासियों को
l-kāfirīna
संज्ञा (Sangya)
كُفْرُهُمْ
उनका अविश्वास
kuf'ruhum
संज्ञा (Sangya)
عِندَ
निकट
ʿinda
संज्ञा (Sangya)
رَبِّهِمْ
उनके रब के
rabbihim
अव्यय (Avyay)
إِلَّا
सिवाय
illā
संज्ञा (Sangya)
مَقْتًۭا ۖ
घृणा के
maqtan
अव्यय (Avyay)
وَلَا
और नहीं
walā
क्रिया (Kriya)
يَزِيدُ
बढ़ाता
yazīdu
संज्ञा (Sangya)
ٱلْكَـٰفِرِينَ
अविश्वासियों को
l-kāfirīna
संज्ञा (Sangya)
كُفْرُهُمْ
उनका अविश्वास
kuf'ruhum
अव्यय (Avyay)
إِلَّا
सिवाय
illā
संज्ञा (Sangya)
خَسَارًۭا
हानि के
khasāran
قُلْ أَرَءَيْتُمْ شُرَكَآءَكُمُ ٱلَّذِينَ تَدْعُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ أَرُونِى مَاذَا خَلَقُوا۟ مِنَ ٱلْأَرْضِ أَمْ لَهُمْ شِرْكٌۭ فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ أَمْ ءَاتَيْنَـٰهُمْ كِتَـٰبًۭا فَهُمْ عَلَىٰ بَيِّنَتٍۢ مِّنْهُ ۚ بَلْ إِن يَعِدُ ٱلظَّـٰلِمُونَ بَعْضُهُم بَعْضًا إِلَّا غُرُورًا
qul ara-aytum shurakāakumu alladhīna tadʿūna min dūni l-lahi arūnī mādhā khalaqū mina l-arḍi am lahum shir'kun fī l-samāwāti am ātaynāhum kitāban fahum ʿalā bayyinatin min'hu bal in yaʿidu l-ẓālimūna baʿḍuhum baʿḍan illā ghurūran
कहो, "क्या तुमने अपने 'साझीदारों' पर विचार किया है जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पुकारते हो? मुझे दिखाओ कि उन्होंने धरती का क्या बनाया है; या क्या उनकी [सृष्टि में] आकाशों में कोई साझेदारी थी? या क्या हमने उन्हें कोई किताब दी है जिससे वे उसके प्रमाण पर [खड़े] हैं?" [नहीं], बल्कि, ज़ालिम एक-दूसरे से धोखे के सिवा कोई वादा नहीं करते।
35:40
क्रिया (Kriya)
قُلْ
कहो
qul
क्रिया (Kriya)
أَرَءَيْتُمْ
क्या तुमने देखा
ara-aytum
संज्ञा (Sangya)
شُرَكَآءَكُمُ
अपने साझीदारों को
shurakāakumu
सर्वनाम (Sarvnaam)
ٱلَّذِينَ
जिन्हें
alladhīna
क्रिया (Kriya)
تَدْعُونَ
तुम पुकारते हो
tadʿūna
अव्यय (Avyay)
مِن
सिवा
min
संज्ञा (Sangya)
دُونِ
सिवा
dūni
संज्ञा (Sangya)
ٱللَّهِ
अल्लाह के
l-lahi
क्रिया (Kriya)
أَرُونِى
मुझे दिखाओ
arūnī
सर्वनाम (Sarvnaam)
مَاذَا
क्या
mādhā
क्रिया (Kriya)
خَلَقُوا۟
उन्होंने बनाया है
khalaqū
अव्यय (Avyay)
مِنَ
से
mina
संज्ञा (Sangya)
ٱلْأَرْضِ
धरती
l-arḍi
अव्यय (Avyay)
أَمْ
या
am
अव्यय (Avyay)
لَهُمْ
उनकी
lahum
संज्ञा (Sangya)
شِرْكٌۭ
कोई साझेदारी है
shir'kun
अव्यय (Avyay)
فِى
में
संज्ञा (Sangya)
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आकाशों में
l-samāwāti
अव्यय (Avyay)
أَمْ
या
am
क्रिया (Kriya)
ءَاتَيْنَـٰهُمْ
हमने उन्हें दी है
ātaynāhum
संज्ञा (Sangya)
كِتَـٰبًۭا
कोई किताब
kitāban
अव्यय (Avyay)
فَهُمْ
तो वे
fahum
अव्यय (Avyay)
عَلَىٰ
पर हैं
ʿalā
संज्ञा (Sangya)
بَيِّنَتٍۢ
एक प्रमाण
bayyinatin
अव्यय (Avyay)
مِّنْهُ ۚ
उससे
min'hu
अव्यय (Avyay)
بَلْ
बल्कि
bal
अव्यय (Avyay)
إِن
नहीं
in
क्रिया (Kriya)
يَعِدُ
वादा करते
yaʿidu
संज्ञा (Sangya)
ٱلظَّـٰلِمُونَ
ज़ालिम
l-ẓālimūna
संज्ञा (Sangya)
بَعْضُهُم
एक-दूसरे से
baʿḍuhum
संज्ञा (Sangya)
بَعْضًا
एक-दूसरे से
baʿḍan
अव्यय (Avyay)
إِلَّا
सिवा
illā
संज्ञा (Sangya)
غُرُورًا
धोखे के
ghurūran
۞ إِنَّ ٱللَّهَ يُمْسِكُ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ أَن تَزُولَا ۚ وَلَئِن زَالَتَآ إِنْ أَمْسَكَهُمَا مِنْ أَحَدٍۢ مِّنۢ بَعْدِهِۦٓ ۚ إِنَّهُۥ كَانَ حَلِيمًا غَفُورًۭا
inna l-laha yum'siku l-samāwāti wal-arḍa an tazūlā wala-in zālatā in amsakahumā min aḥadin min baʿdihi innahu kāna ḥalīman ghafūran
निश्चय ही, अल्लाह आकाशों और पृथ्वी को थामे हुए है, ताकि वे हट न जाएँ। और यदि वे हट जाएँ, तो उसके बाद कोई भी उन्हें [अपनी जगह पर] नहीं थाम सकता। निश्चय ही, वह सदा सहनशील और क्षमाशील है।
35:41
अव्यय (Avyay)
۞ إِنَّ
निश्चय ही
inna
संज्ञा (Sangya)
ٱللَّهَ
अल्लाह
l-laha
क्रिया (Kriya)
يُمْسِكُ
थामे हुए है
yum'siku
संज्ञा (Sangya)
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आकाशों को
l-samāwāti
संज्ञा (Sangya)
وَٱلْأَرْضَ
और पृथ्वी को
wal-arḍa
अव्यय (Avyay)
أَن
कि
an
क्रिया (Kriya)
تَزُولَا ۚ
वे हट जाएँ
tazūlā
अव्यय (Avyay)
وَلَئِن
और यदि
wala-in
क्रिया (Kriya)
زَالَتَآ
वे हट जाएँ
zālatā
अव्यय (Avyay)
إِنْ
नहीं
in
क्रिया (Kriya)
أَمْسَكَهُمَا
उन्हें थाम सकता
amsakahumā
अव्यय (Avyay)
مِنْ
कोई
min
संज्ञा (Sangya)
أَحَدٍۢ
एक
aḥadin
अव्यय (Avyay)
مِّنۢ
उसके बाद
min
संज्ञा (Sangya)
بَعْدِهِۦٓ ۚ
उसके बाद
baʿdihi
अव्यय (Avyay)
إِنَّهُۥ
निश्चय ही, वह
innahu
क्रिया (Kriya)
كَانَ
सदा है
kāna
संज्ञा (Sangya)
حَلِيمًا
सहनशील
ḥalīman
संज्ञा (Sangya)
غَفُورًۭا
क्षमाशील
ghafūran
وَأَقْسَمُوا۟ بِٱللَّهِ جَهْدَ أَيْمَـٰنِهِمْ لَئِن جَآءَهُمْ نَذِيرٌۭ لَّيَكُونُنَّ أَهْدَىٰ مِنْ إِحْدَى ٱلْأُمَمِ ۖ فَلَمَّا جَآءَهُمْ نَذِيرٌۭ مَّا زَادَهُمْ إِلَّا نُفُورًا
wa-aqsamū bil-lahi jahda aymānihim la-in jāahum nadhīrun layakūnunna ahdā min iḥ'dā l-umami falammā jāahum nadhīrun mā zādahum illā nufūran
और उन्होंने अल्लाह की सबसे मज़बूत क़समें खाईं कि अगर उनके पास कोई सचेतक आया, तो वे राष्ट्रों में से [किसी] एक से भी अधिक मार्गदर्शित होंगे। लेकिन जब उनके पास एक सचेतक आया, तो इसने उन्हें केवल घृणा में ही बढ़ाया।
35:42
क्रिया (Kriya)
وَأَقْسَمُوا۟
और उन्होंने क़सम खाई
wa-aqsamū
संज्ञा (Sangya)
بِٱللَّهِ
अल्लाह की
bil-lahi
संज्ञा (Sangya)
جَهْدَ
सबसे मज़बूत
jahda
संज्ञा (Sangya)
أَيْمَـٰنِهِمْ
अपनी क़समों की
aymānihim
अव्यय (Avyay)
لَئِن
कि अगर
la-in
क्रिया (Kriya)
جَآءَهُمْ
उनके पास आया
jāahum
संज्ञा (Sangya)
نَذِيرٌۭ
कोई सचेतक
nadhīrun
क्रिया (Kriya)
لَّيَكُونُنَّ
तो वे ज़रूर होंगे
layakūnunna
संज्ञा (Sangya)
أَهْدَىٰ
अधिक मार्गदर्शित
ahdā
अव्यय (Avyay)
مِنْ
से
min
संज्ञा (Sangya)
إِحْدَى
किसी एक
iḥ'dā
संज्ञा (Sangya)
ٱلْأُمَمِ ۖ
राष्ट्रों में से
l-umami
अव्यय (Avyay)
فَلَمَّا
लेकिन जब
falammā
क्रिया (Kriya)
جَآءَهُمْ
उनके पास आया
jāahum
संज्ञा (Sangya)
نَذِيرٌۭ
एक सचेतक
nadhīrun
अव्यय (Avyay)
مَّا
नहीं
क्रिया (Kriya)
زَادَهُمْ
उन्हें बढ़ाया
zādahum
अव्यय (Avyay)
إِلَّا
सिवाय
illā
संज्ञा (Sangya)
نُفُورًا
घृणा में
nufūran
ٱسْتِكْبَارًۭا فِى ٱلْأَرْضِ وَمَكْرَ ٱلسَّيِّئِ ۚ وَلَا يَحِيقُ ٱلْمَكْرُ ٱلسَّيِّئُ إِلَّا بِأَهْلِهِۦ ۚ فَهَلْ يَنظُرُونَ إِلَّا سُنَّتَ ٱلْأَوَّلِينَ ۚ فَلَن تَجِدَ لِسُنَّتِ ٱللَّهِ تَبْدِيلًۭا ۖ وَلَن تَجِدَ لِسُنَّتِ ٱللَّهِ تَحْوِيلًا
is'tik'bāran fī l-arḍi wamakra l-sayi-i walā yaḥīqu l-makru l-sayi-u illā bi-ahlihi fahal yanẓurūna illā sunnata l-awalīna falan tajida lisunnati l-lahi tabdīlan walan tajida lisunnati l-lahi taḥwīlan
[भूमि में] अहंकार और बुराई की साज़िश के कारण; लेकिन बुरी साज़िश केवल अपने ही लोगों को घेरती है। तो क्या वे पूर्व के लोगों के तरीके के सिवा किसी और का इंतज़ार करते हैं? लेकिन तुम अल्लाह के तरीके में कभी कोई बदलाव नहीं पाओगे, और तुम अल्लाह के तरीके में कभी कोई फेरबदल नहीं पाओगे।
35:43
संज्ञा (Sangya)
ٱسْتِكْبَارًۭا
अहंकार
is'tik'bāran
अव्यय (Avyay)
فِى
में
संज्ञा (Sangya)
ٱلْأَرْضِ
भूमि
l-arḍi
संज्ञा (Sangya)
وَمَكْرَ
और साज़िश
wamakra
संज्ञा (Sangya)
ٱلسَّيِّئِ ۚ
बुराई की
l-sayi-i
अव्यय (Avyay)
وَلَا
और नहीं
walā
क्रिया (Kriya)
يَحِيقُ
घेरती
yaḥīqu
संज्ञा (Sangya)
ٱلْمَكْرُ
साज़िश
l-makru
संज्ञा (Sangya)
ٱلسَّيِّئُ
बुरी
l-sayi-u
अव्यय (Avyay)
إِلَّا
सिवाय
illā
संज्ञा (Sangya)
بِأَهْلِهِۦ ۚ
उसके अपने लोगों के
bi-ahlihi
अव्यय (Avyay)
فَهَلْ
तो क्या
fahal
क्रिया (Kriya)
يَنظُرُونَ
वे इंतज़ार करते हैं
yanẓurūna
अव्यय (Avyay)
إِلَّا
सिवाय
illā
संज्ञा (Sangya)
سُنَّتَ
तरीके के
sunnata
संज्ञा (Sangya)
ٱلْأَوَّلِينَ ۚ
पूर्वजों के
l-awalīna
अव्यय (Avyay)
فَلَن
तो तुम कभी नहीं
falan
क्रिया (Kriya)
تَجِدَ
पाओगे
tajida
संज्ञा (Sangya)
لِسُنَّتِ
तरीके में
lisunnati
संज्ञा (Sangya)
ٱللَّهِ
अल्लाह के
l-lahi
संज्ञा (Sangya)
تَبْدِيلًۭا ۖ
कोई बदलाव
tabdīlan
अव्यय (Avyay)
وَلَن
और तुम कभी नहीं
walan
क्रिया (Kriya)
تَجِدَ
पाओगे
tajida
संज्ञा (Sangya)
لِسُنَّتِ
तरीके में
lisunnati
संज्ञा (Sangya)
ٱللَّهِ
अल्लाह के
l-lahi
संज्ञा (Sangya)
تَحْوِيلًا
कोई फेरबदल
taḥwīlan
أَوَلَمْ يَسِيرُوا۟ فِى ٱلْأَرْضِ فَيَنظُرُوا۟ كَيْفَ كَانَ عَـٰقِبَةُ ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ وَكَانُوٓا۟ أَشَدَّ مِنْهُمْ قُوَّةًۭ ۚ وَمَا كَانَ ٱللَّهُ لِيُعْجِزَهُۥ مِن شَىْءٍۢ فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَلَا فِى ٱلْأَرْضِ ۚ إِنَّهُۥ كَانَ عَلِيمًۭا قَدِيرًۭا
awalam yasīrū fī l-arḍi fayanẓurū kayfa kāna ʿāqibatu alladhīna min qablihim wakānū ashadda min'hum quwwatan wamā kāna l-lahu liyuʿ'jizahu min shayin fī l-samāwāti walā fī l-arḍi innahu kāna ʿalīman qadīran
क्या वे धरती पर चले नहीं और देखा नहीं कि उनसे पहले के लोगों का अंत कैसा हुआ? और वे उनसे शक्ति में अधिक थे। लेकिन अल्लाह को आकाशों या धरती में किसी भी चीज़ से विफल नहीं किया जा सकता। निश्चय ही, वह सदा जानने वाला और सामर्थ्यवान है।
35:44
अव्यय (Avyay)
أَوَلَمْ
क्या वे नहीं
awalam
क्रिया (Kriya)
يَسِيرُوا۟
चले
yasīrū
अव्यय (Avyay)
فِى
में
संज्ञा (Sangya)
ٱلْأَرْضِ
धरती
l-arḍi
क्रिया (Kriya)
فَيَنظُرُوا۟
और देखा
fayanẓurū
अव्यय (Avyay)
كَيْفَ
कैसा
kayfa
क्रिया (Kriya)
كَانَ
हुआ
kāna
संज्ञा (Sangya)
عَـٰقِبَةُ
अंत
ʿāqibatu
सर्वनाम (Sarvnaam)
ٱلَّذِينَ
उन लोगों का
alladhīna
अव्यय (Avyay)
مِن
से
min
संज्ञा (Sangya)
قَبْلِهِمْ
उनसे पहले
qablihim
क्रिया (Kriya)
وَكَانُوٓا۟
और वे थे
wakānū
संज्ञा (Sangya)
أَشَدَّ
अधिक
ashadda
अव्यय (Avyay)
مِنْهُمْ
उनसे
min'hum
संज्ञा (Sangya)
قُوَّةًۭ ۚ
शक्ति में
quwwatan
अव्यय (Avyay)
وَمَا
और नहीं
wamā
क्रिया (Kriya)
كَانَ
है
kāna
संज्ञा (Sangya)
ٱللَّهُ
अल्लाह
l-lahu
क्रिया (Kriya)
لِيُعْجِزَهُۥ
कि उसे विफल कर सके
liyuʿ'jizahu
अव्यय (Avyay)
مِن
कोई
min
संज्ञा (Sangya)
شَىْءٍۢ
चीज़
shayin
अव्यय (Avyay)
فِى
में
संज्ञा (Sangya)
ٱلسَّمَـٰوَٰتِ
आकाशों
l-samāwāti
अव्यय (Avyay)
وَلَا
और न
walā
अव्यय (Avyay)
فِى
में
संज्ञा (Sangya)
ٱلْأَرْضِ ۚ
धरती
l-arḍi
अव्यय (Avyay)
إِنَّهُۥ
निश्चय ही, वह
innahu
क्रिया (Kriya)
كَانَ
सदा है
kāna
संज्ञा (Sangya)
عَلِيمًۭا
जानने वाला
ʿalīman
संज्ञा (Sangya)
قَدِيرًۭا
सामर्थ्यवान
qadīran
وَلَوْ يُؤَاخِذُ ٱللَّهُ ٱلنَّاسَ بِمَا كَسَبُوا۟ مَا تَرَكَ عَلَىٰ ظَهْرِهَا مِن دَآبَّةٍۢ وَلَـٰكِن يُؤَخِّرُهُمْ إِلَىٰٓ أَجَلٍۢ مُّسَمًّۭى ۖ فَإِذَا جَآءَ أَجَلُهُمْ فَإِنَّ ٱللَّهَ كَانَ بِعِبَادِهِۦ بَصِيرًۢا
walaw yuākhidhu l-lahu l-nāsa bimā kasabū mā taraka ʿalā ẓahrihā min dābbatin walākin yu-akhiruhum ilā ajalin musamman fa-idhā jāa ajaluhum fa-inna l-laha kāna biʿibādihi baṣīran
और अगर अल्लाह लोगों को उनके किए हुए कामों के लिए दोषी ठहराता, तो वह धरती पर किसी भी प्राणी को नहीं छोड़ता। लेकिन वह उन्हें एक नियत अवधि के लिए टाल देता है। और जब उनकी अवधि आ जाएगी, तो निश्चय ही अल्लाह अपने बन्दों को सदा देखने वाला है।
35:45
अव्यय (Avyay)
وَلَوْ
और अगर
walaw
क्रिया (Kriya)
يُؤَاخِذُ
दोषी ठहराता
yuākhidhu
संज्ञा (Sangya)
ٱللَّهُ
अल्लाह
l-lahu
संज्ञा (Sangya)
ٱلنَّاسَ
लोगों को
l-nāsa
अव्यय (Avyay)
بِمَا
उसके लिए जो
bimā
क्रिया (Kriya)
كَسَبُوا۟
उन्होंने कमाया
kasabū
अव्यय (Avyay)
مَا
नहीं
क्रिया (Kriya)
تَرَكَ
वह छोड़ता
taraka
अव्यय (Avyay)
عَلَىٰ
पर
ʿalā
संज्ञा (Sangya)
ظَهْرِهَا
उसकी पीठ
ẓahrihā
अव्यय (Avyay)
مِن
कोई
min
संज्ञा (Sangya)
دَآبَّةٍۢ
प्राणी
dābbatin
अव्यय (Avyay)
وَلَـٰكِن
लेकिन
walākin
क्रिया (Kriya)
يُؤَخِّرُهُمْ
वह उन्हें टाल देता है
yu-akhiruhum
अव्यय (Avyay)
إِلَىٰٓ
तक
ilā
संज्ञा (Sangya)
أَجَلٍۢ
एक अवधि
ajalin
संज्ञा (Sangya)
مُّسَمًّۭى ۖ
नियत
musamman
अव्यय (Avyay)
فَإِذَا
और जब
fa-idhā
क्रिया (Kriya)
جَآءَ
आ जाएगी
jāa
संज्ञा (Sangya)
أَجَلُهُمْ
उनकी अवधि
ajaluhum
अव्यय (Avyay)
فَإِنَّ
तो निश्चय ही
fa-inna
संज्ञा (Sangya)
ٱللَّهَ
अल्लाह
l-laha
क्रिया (Kriya)
كَانَ
सदा है
kāna
संज्ञा (Sangya)
بِعِبَادِهِۦ
अपने बन्दों को
biʿibādihi
संज्ञा (Sangya)
بَصِيرًۢا
देखने वाला
baṣīran

समापन प्रार्थना

या अल्लाह (हे ईश्वर), हम अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं कि आपने हमें सूरह फ़ातिर शब्द-दर-शब्द विश्लेषण पूरा करने में सक्षम बनाया है।

हे आकाश और पृथ्वी के रचयिता, हमें उन लोगों में शामिल कर जो तेरी असीम शक्ति और रहमत को पहचानते हैं। हमारे गुनाहों को माफ़ कर दे और हमें उस मार्ग पर चला जिस पर तेरा इनाम है।

इस अध्ययन को केवल जानकारी तक सीमित न रहने दें; सूरह फ़ातिर के सार को हमारे भीतर समाहित करने में मदद करें। इसे हमारे दिलों के लिए एक शिफा (उपचार) और हमारे दैनिक कार्यों का मार्गदर्शन करने वाली रोशनी (नूर) बनाएं। आमीन।

सूरह फ़ातिर का शब्द-दर-शब्द विश्लेषण कैसे काम करता है

मानक अनुवादों के विपरीत जो आपको एक वाक्य का सामान्य अर्थ देते हैं, यह पृष्ठ एक अद्वितीय “पूर्ण संदर्भ” पद्धति का उपयोग करता है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए डेटा को दो अलग-अलग परतों में प्रदर्शित करते हैं ताकि आप सूरह फ़ातिर के प्रवाह को कभी न खोएं:

  • शीर्ष पंक्ति (संदर्भ): सूरह के समग्र संदेश और आख्यान को समझने के लिए पूर्ण हिंदी अनुवाद के साथ पूरी अरबी आयत पढ़ें।
  • निचली पंक्ति (विश्लेषण): अनुक्रम में हर एक शब्द का सटीक अर्थ और वर्तनी देखने के लिए शब्द-दर-शब्द विवरण में गोता लगाएँ।

सूरह फ़ातिर के लिए रंगकोडित व्याकरण गाइड को समझना

जब आप पढ़ते हैं तो सहज रूप से क़ुरआनी अरबी व्याकरण (नह्व और सर्फ़) सीखें। यह संसाधन जटिल पाठ्यपुस्तक नियमों को तत्काल दृश्य संकेतों से बदल देता है। सूरह फ़ातिर के प्रत्येक शब्द को तत्काल रंग-कोडिंग की विशेषता वाले एक संवादात्मक “व्याकरण कार्ड” के रूप में प्रस्तुत किया गया है:

  • संज्ञा (इस्म): नीले रंग में चिह्नित (नाम, स्थान, वस्तुएं)।
  • क्रिया (फ़ेल): लाल रंग में चिह्नित (कार्य, काल)।
  • अव्यय (हर्फ़): हरे रंग में चिह्नित (पूर्वसर्ग, जोड़ने वाले शब्द)।

यह दृश्य सहायता आपको आयतों के भीतर वाक्य संरचनाओं और भाषण के कुछ हिस्सों को तुरंत पहचानने में मदद करती है, जिससे तेजी से याद रखने और समझने में सहायता मिलती है।

सूरह फ़ातिर का लिप्यंतरण और उच्चारण

तिलावत शुरू करने के लिए आपको अरबी लिपि पढ़ने में पारंगत होने की आवश्यकता नहीं है। प्रत्येक शब्द कार्ड पर शामिल तजवीद-अनुकूल लिप्यंतरण के साथ अपने उच्चारण को पूर्ण करें। यह ध्वन्यात्मक मार्गदर्शिका आपको सूरह फ़ातिर में चुनौतीपूर्ण शब्दों का सही उच्चारण करने में मदद करती है, जिससे ध्वनि सीधे अर्थ से जुड़ जाती है।

क़ुरआनी सांख्यिकी: सूरह फ़ातिर के माध्यम से शब्दावली का निर्माण

कई छात्र क़ुरआन की विशालता से अभिभूत महसूस करते हैं, लेकिन संख्याएँ साबित करती हैं कि यह प्राप्त करने योग्य है। क़ुरआन लगभग 77,797 कुल शब्दों से बना है, फिर भी शब्दावली अत्यधिक दोहराई जाने वाली है।

  • कुल अद्वितीय शब्द: लगभग 14,870।
  • वास्तविक मूल शब्द: केवल ~2,000 शब्द।

सूरह फ़ातिर को शब्द-दर-शब्द पढ़कर, आप इस अध्याय में पाए जाने वाले आवश्यक शब्दों को सीख रहे हैं। चूंकि ये शब्द पूरे क़ुरआन में अक्सर दोहराए जाते हैं, इसलिए इन आयतों में शब्दावली में महारत हासिल करना सीधे तौर पर संपूर्ण पवित्र पुस्तक को समझने में योगदान देता है।

सूरह फ़ातिर के साथ अपनी नमाज़ को बेहतर बनाएं

पांच दैनिक नमाज़ों के दौरान, एक मुस्लिम औसतन 200-250 अरबी शब्द पढ़ता और दोहराता है। यदि इन शब्दों को नहीं समझा जाता है, तो मन अक्सर भटकता है। सूरह फ़ातिर को शब्द-दर-शब्द पढ़ने से आपको वास्तविक समय में इस शब्दावली को पहचानने में मदद मिलती है। जब आप प्रार्थना के लिए खड़े होते हैं और इन आयतों का पाठ करते हैं, तो आप अंततः समझ जाएंगे कि आप अपने निर्माता से क्या कह रहे हैं, जिससे यह प्राप्त होगा:

  1. खुशू (एकाग्रता): नमाज़ के दौरान एक एकाग्रचित्त मन।
  2. गुणवत्ता: इबादत की उच्च आध्यात्मिक गुणवत्ता।
  3. जुड़ाव: तिलावत के लिए एक तत्काल, भावनात्मक जुड़ाव।

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